गणेशोत्सव विशेष

गणेशोत्सव विशेष

यदि आप गणेशजी की प्रतिमा घर में स्थापित करने कि सोच रहे हैं तो…

== प्लास्टर पेरिस कि मूर्ति बैठाने के पाप से बचे क्योंकि यह… 

     – –  धर्मानुसार नहीं

    – –  पर्यावरण विरोधी हैं साथ ही 

    – –  विसर्जन पश्चात अन गले टुकड़े आस्था को अपमानित करते हैं। 

== प्लास्टर पेरिस कि बड़ी मूर्ति कि अपेक्षा जल में त्वरित गलने वाली मिट्टी कि छोटी मूर्तियों को बैठाए जो की पुर्ण रूप से धार्मिक हैं। 

== बडी बड़ी व महंगी बिजली संचालित लाईटे व उपकरणों का इस्तेमाल ना करे व *चाईना छाप* तो बिलकुल ही ना वापरे, यह सजावट केवल आपके मन को भले ही आनंदित करेगी किंतु इनका धर्म से कुछ भी लेनादेना नहीं हैं और पर्यावरण व राष्ट्र विरोधी (चाईना हित में अथवा अनावश्यक बिजली खर्च) भी होगा। 

== उत्सव में उपयोगी प्रत्येक वस्तु कि खरीदारी बड़े बड़े शापिंग मालों से न कर सड़क पर बैठे व दुकान दारो से करे… एसा कर आप अपने उस्तव से कुई अन्य साधारण परिवार में भी उस्तव भर सकते हैं। 

== सजावट में कपड़े व सात्विक वस्तुओं का अधिकाधिक प्रयोग करे जैसे फुल, फल लकड़ी, आम पत्ते, केला पत्ता, नारियल… इत्यादि। 

इस तरह मनाया गया उत्सव आपको व आपके परिवार में सात्विक प्रथा को बल देगा जो वास्तविक फल प्राप्ति का एकमात्र मार्ग हैं। आडंबर रहित उत्सव ही हमारी संस्कृति कि पहचान हैं। 

जय श्री गणेश, जयतु जयतु हिंदुराष्ट्रम् 

हम मुर्ख क्यों बन जाते हैं! 

विदेशी कंपनियों ने भारतीयों को कैसे – कैसे मुर्ख बनाया… इसकी  *कोलगेट* सबसे बड़ी मिसाल हैं! 
जब इस कंपनी ने केमिकल से बना अपना पहला उत्पाद *कोलगेट टुथ पावडर* को बजार में लाया था तब चुले कि राख से मंजन करने वालों को एक पहलवान के विज्ञापन से समझाया था… खुरदरे प्रदार्थो से दांत खराब हो जाते हैं इसलिए डेंटिस्ट का सुझाया कोलगेट पावडर! (करोड़ों कमाए) 
फिर कुछ दिनो के बाद लोगों के साधारण टुथ ब्रश को हटवा कर खुद का खुरदरा *कोलगेट जिगजेग* लोगों को थमा दिया ताकि दाँतों के कौने कोने कि सफाई हो सके!! यह भी डेंटिस्ट का सुझाया था!!! (करोड़ों कमाए) 
पहले कई प्रांतों में ग्रामीण लोग नमक से ही मंजन कर लिया करते थे तब इसी कोलगेट कंपनी ने अपने उत्पाद के प्रचार हेतू अपने एक विज्ञापन के जरिये नमक को दांतों के लिए हानिकारक बताया था… और आज वही कंपनी विज्ञान बता-बता कर लोगों से पूछ रही –  क्या आपके टूथपेस्ट में नमक हैं!!!  तब भी नमक को हानिकारक बताने के लिए इनके पास डेंटिस्ट था और आज भी लाभदायक बताने को डेंटिस्ट हैं!!! (करोडों की कमाई जारी है) 
यह तो सभी जानते हैं कि यह विदेशी कंपनी अमेरिका की हैं लेकिन यह कितने लोग जानते होंगे कि जिस धड़ल्ले से यह कंपनी भारत में धंधा जमाये बैठी हैं उस धड़ल्ले से वह अमेरिका में बिक्री नहीं कर पाती… इसका सिधा कारण यह है कि कोलगेट एक विषैला उत्पाद है जिसकी अधिक मात्रा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।  अमेरिका में इन्हें अपने उत्पादों पर नियमानुसार चेतावनी के रूप में लिखना होता हैं कि – कृपया बच्चों की पहुँच से दुर रखे! 
लेकिन यहाँ भारत में अपने विषैले उत्पाद के विज्ञापनों में मुख्य रूप से बच्चों को पसंद आने वाले स्वाद को आकर्षण बनाया जिससे मुख्य रूप से लक्ष्य बच्चे – बच्चे के दिमाग पर अपने उत्पाद को छाप देना था! जरा सोचों!… जिस उत्पाद के लिए अमेरिका में “बच्चों से दुर रखने” जैसी चेतावनी जरूरी हो वही उत्पाद भारत में बच्चों को लुभाने में लगा हैं!!! 
बच्चों पर कितना दुष्परिणाम हो सकता था! विश्वास किजिये… एसा बहुत बडे पैमाने पर हुवा भी लेकिन कमाई भी अरबों-खरबों कि थी… बच्चों पर हुवे सैकड़ों दुष्परिणामों की आवाजों का गला घौट दिया गया। लेकिन जब किस्सो कि संख्या हद से भी बाहर जाने लगी तो मजबूर कंपनी को एक विज्ञापन उतार पड़ा जिसमें बच्चों को समझाते हुए संदेश दिया गया कि –  “कोलगेट का असर हैं ज्यादा, इसलिए टूथपेस्ट लगा हो आधा”!!! हम भारतीय तो वैसे भी विदेशी कंपनियों की चकाचौंध में अंधे रहते हैं तो इन सब सत्य को कहाँ देख पाते! सो करोड़ों की इनकी कमाई चलती रही। 
लेकिन आज जैसे – जैसे कंपनी की हकीकत लोगों तक पहुंच रही कंपनी की बिक्री लगातार गिरावट पर हैं। आजकल कंपनी और एक विज्ञापन चला रही जिसमें कई माँ रूप में बैठी मॉडल के कहलवा रहे कि “कोलगेट पर सालो से भरोसा हैं तो मैं भला मेरे बच्चों को और कोई टूथपेस्ट कैसे दे सकती हूँ… मेरे बच्चों के लिए सिर्फ कोलगेट”!!!! अब तो इस विदेशी कंपनी ने भी केमिकल छोड़ कर देशी नाम का विदेशी मंजन *वेदशक्ति* लांच किया हैं और अब भी एसे कई मुर्ख हैं जो इसे खरीदने को उतारू होंगे!!! 
ध्यान रहे कोलगेट कि बिक्री गिरी जरूर हैं लेकिन अब भी इनका धंधा करोड़ों में हैं। जानते हैं आज भी कंपनी करोड़ों क्युँ कमा रही….? *क्युँ की आज भी गाँव के भोले-भाले से लेकर शहर के पढ़े-लिखों तक नें कभी भी मंजन या टूथपेस्ट कहना नहीं सिखा… सिखा तो मात्र कोलगेट कहना।* 
संभवतः अब इस प्रश्न के उत्तर से भी आप सरोकार हो गये होंगे कि कोलगेट डेंटिस्टो कि पहली पसंद क्यों रही… भाई इसकी बदौलत ही तो आज डेंटिस्टों के यहाँ केमिकल से कमजोर हो पडे दाँतों वाल मरीजों कि भरमार हो रही। 
यह तो मात्र एक विदेशी उत्पाद की कहानी थी एसी ही कहानी विदेशी कोल्ड ड्रिंक जो कि वास्तव में टोयलेट क्लिनर होता हैं, जैसे अनेकों उत्पाद भारतीयों को धीमे विष की तरह परोसे जा रहे और हम अपनी मेहनत की कमाई इन पर लूटवा रहे। 
*जागो और जगाओ,*

*देश नहीं तो कम से कम अपनी सेहत तो बचाओ!*
(कृपया अपने तक ना सिमित रखे… हर भारतीय तक पहुँचाने का कष्ट करें) 

हम तो भक्त ठहरे! 

*हम भक्त तो अवश्य ही हैं….*
कुछ लोग हमे मोदी भक्त कहा करते थे… हमे भी कहलाने मे गर्व ही महसूस होता था क्योंकि कोई हमे क्या कहे यह हमारी समस्या कभी रही ही नहीं। 
लेकिन ये क्या? कुछ दिन से हमने मोदी भक्ति छोड योगी भक्ति कि शुरूवात कर दी! आश्चर्यजनक हैं ना! कुछ लोग तो अब भी चक्कर खा रहे कि अब इन्हें मोदी भक्त कहे या योगी भक्त!!!
भाई, कन्फ्यूजन में मत रहो… जिस तरह मोदी भक्त का ठप्पा हमने गर्व से सिर माथे लिया वैसे ही योगी भक्त का ठप्पा भी सिर माथे लेने में उससे भी अधिक गर्व ही होगा। आप अपने शाही परिवार के शहजादो व दामादो का झंडा गाड़ते रहो फिर वे चाहे खुद को दमदार साबित करने के लिए मोदी व योगी पर कितने ही तंज अकारण कसते रहे। जिस तरह आप उसमें खुश…. हम अपनी भक्ति में खुश। 
दरअसल समस्या हमारी भक्ति में हैं ही नहीं क्यों कि हम तो हिंदुत्व नाम के रेगिस्तान में भटके उस यात्री कि तरह हैं जो जल के एक कुंड मात्र मिल जाने से उसे प्रभु के प्रसाद जैसा सम्मान देने लगते हैं। आखिर ये कुंड ही तो हैं जिनके सहारे हम और अधिक यात्रा (युद्ध) कर सकने कि हमारी क्षमता में वृद्धि कर सकते हैं। इसलिए हम तो भक्ति करेंगे ही और यह हमारा अंतिम निर्णय हैं। और हाँ, हम किसी एसे कुंड कि पूजा तो कतई कर नहीं सकते जो रेगिस्तान में दुर से कुंड नजर आये किंतु उसमें जल तो छोड़ो किचड से भी नदारद हो! इसलिए जिसे भी हमसे अपनी भक्ति करवानी हो वह स्वयं को उपस्थित कुंडो से भी विशाल करे। 
हालांकि, अब तो संघर्ष और भी जटिल हैं… क्यूँ की पहले तो प्रतिस्पर्धा मात्र मोदी से थी, अब तो सामने योगी नजर आ रहे! और यह तो विश्वव्यापी हो चुका हैं कि हिंदुत्व नाम के रेगिस्तान में एक कुंड बन कर जल संचय करना कितना तपस्वी हो चुका हैं। 
*… किंतु महाकाल के*
जय महाराष्ट्र 

​अब भोगी नहीं बल्कि योगी शासन करेंगे 

​अब भोगी नहीं बल्कि योगी शासन करेंगे 
नरेंद्र मोदी द्वारा योगी अदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाये जाने का सिधा संकेत…. 
🚩 भांड मिडिया कितना भी विधवा विलाप करले… मोदी को तिल जितना भी फर्क नहीं पड़ता 
🚩 विकास एजेंडा के चलते मोदी की हिंदुत्व के लिये निष्ठा अप्रभावित 
🚩 सेक्युलर किडो को कब-कहाँ-कितनी पेस्टीसाईड देने हैं यह मोदी अच्छी तरह जानते हैं… ये किडे आज भले ही तुरंत खत्म नहीं किये जा रहे, लेकिन इनकी जड़ों को खोदना शुरू हो चुका हैं 
🚩 उत्तर प्रदेश के विकास सहित सांस्कृतिक रक्षा हेतु मोदी बेहद गंभीर व पूर्ण रूप से परिपक्व 
🚩 यह उत्तर प्रदेश में राम मंदिर सहित राम-राज्य स्थापित करने कि और एक एतिहासिक कदम
🚩 भविष्य में मोदी के और अधिक तेज धारी व खतरनाक रणनीति का आगाज 
जय जय श्री राम 🚩🚩🚩

नारी तु नारायणी 

​मैं एक स्त्री हुँ… 👩‍👧‍👦
जब जन्मी तब पिताजी का नाम मिला…

 यह पिताजी का गर्व था
माता-पिता ने मुझे पहनावे व 

चाल-चलन के संस्कार सिखाये

और जिन्हें अपना कर मेैने अपने परिवार 

के स्वाभिमान का मस्तक सदैव उचा रखा

 यह मेरी जिम्मेदारी थी
विवाह पश्चात पति का नाम मिला

नया घर व परिवार में सम्मान मिला

 यह मेरा हक था
पुत्र – सुपुत्री को मैंने अपने संस्कारों में ढाला

उन्हे हमारे इतिहास व अध्यात्म से जोड़ा 

जिससे समाज व देश के ‘कल’ को 

मेरे परिवार से भावी पीढ़ी मिले

 यह मेरी चुनौती थी
नारी कि समझ पर ही जन-जीवन 

व संपूर्ण सृष्टि का मंगल टिका हुआ हैं…

यह ज्ञान मात्र हमारी संस्कृति कि ही देन हैं। 
मैं एक भारतीय नारी हुँ इसलिए मैं अपनी जिम्मेदारी समझती हूँ…. और मुझे अपनी इस समझ पर गर्व हैं। 
सिर्फ महिला दिवस कहने में कोई दम नहीं 

आओ मनाए… भारतीय महिला दिवस
🚩 सभी बहनों को हार्दिक शुभकामनाएँ 🚩

…. और पढे़…. 

*भारतीय महिलाएं प्राचीन काल से ही हैं आर्थिक क्षमता संपन्न*
वामपंथी विचार धारा वाले इतिहासकारों व समाजिक बुद्धिजीवियों ने हमें हमारी पाठ्यपुस्तकों में पढ़ने को मजबूर किया कि हमारी भारतीय संस्कृति में महिलाएं केवल घरेलू कार्यभार ही संभालती आई हैं व घर कि आमदनी में उनका योगदान केवल शुन्य ही हुवा करता था!!!
क्या यह सत्य हैं? 
अब देखिए… यह कितना विरोधाभास ज्ञान हैं। यह तो सभी जानते हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश रहा हैं अर्थात अधिक तर पूर्वकालिन परिवार कृषि व गोपालन पर ही आधारित होते थे। और इन दोनो ही कार्यों में किसान कभी अकेला नहीं होता हैं बल्कि पुरा परिवार उसका हाथ बटाता हैं। फिर भले ही वह किसान कि माता हो, बहन हो, पत्नी हो अथवा पुत्री हो…. सभी अपनी क्षमता के अनुरूप योगदान करते हैं। कृषि व गोपालन दोनो ही परिवार को आर्थिक सबलता प्रदान करते हैं फिर किस आधार पर ये बुद्धिजीवी भारतीय प्राचीन परंपरा में महिलाओं को केवल घरेलू कार्यभार संभालने तक का ठप्पा लगाकर प्रस्तुत करते आये हैं? 
आज भी कई पढ़े-लिखों कि सोच में इन वामपंथियों द्वारा प्रस्तुत किया गया नजरिया ही जमा हुवा हैं जिससे वे हमेशा भारतीय परंपरा को कोसते नजर आते हैं।  

#KnowYourEnamy #KnowOurVedicCulture #KnowYourHistory

सत्यार्थ प्रकाश 

​सत्यार्थ प्रकाश के लेखक व युग पुरूष महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती पर उन्हें शत् शत् नमन् (१२ फरवरी)🙏

सत्यार्थ प्रकाश – एक एसी पुस्तक जिसमें सनातन धर्म के यथार्थ को उतारा हैं साथ ही इस्लाम व बाइबल के कई असत्य से पहलुओं पर एक जमीनी आंकलन किया गया हैं। वे लोग जो सभी धर्म के एक समान मानते हैं एसे लोगों को अपना भ्रम दूर करने के लिये इस पुस्तक को एक बार अवश्य पढ़नी चाहिए क्यों कि भ्रम पला ज्ञान व बीता जिवन कभी सार्थक सिद्ध नहीं हो सकता। 

इस पुस्तक में व्यक्त विचारों व प्रश्नों का तोड़ निकालने में बड़े-बड़े महारथी विफल रहे हैं और अन्य धर्म के महारथियों ने अपने भ्रमित धर्म को त्याग कर सनातन धर्म कि महिमा को स्वीकारा हैं जिससे इस पुस्तक के अतुल्य ज्ञान का परिचय प्राप्त होता हैं। 

गुगल प्ले – पर यह हिंदी पुस्तक बिना किसी शुल्क के उपलब्ध हैं जिसे हर कोई अपने एंड्रॉयड फोन पर डाउनलोड कर पढ़ सकता हैं। 

सत्यार्थ प्रकाश –  केवल सत्य कि और कदम

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​क्यों नहीं बन पाया अब तक अयोध्या में श्री राम मंदिर
सवाल तो बहुत मजबूत हैं लेकिन जवाब भी जान ले…. 
अगर आप देश के किसी भी कोने में 

किसी भी दस मुस्लिम से यह प्रश्न करोगे कि 

अयोध्या में क्या बनाया जाये… 
दस के दसों एक आवाज में कहेंगे… सिर्फ बाबरी मस्जिद
लेकिन यही प्रश्न आप दस हिंदु से पूछ के देख लो… 

पुरे देश में घुमने कि जरूरत भी नहीं, उत्तर प्रदेश के ही दस हिंदु से पूछ लेना… मुश्किल से 1 या 2 हिंदु मिलेगा जो यह कहने की हिम्मत करेगा कि वहाँ सिर्फ श्री राम का मंदिर बनना चाहिए… शेष मुर्ख या तो कहेंगे कि अस्पताल या स्कूल बना दिया जाए या फिर मंदिर-मस्जिद दोनो साथ में बनाने को सही ठहरा देगा!!! 
निष्कर्ष यह.. कि इस देश का हिंदु इतना भटक चुका हैं कि ना ही उसे धर्म का ज्ञान हैं और ना ही अयोध्या के इतिहास का ज्ञान… लेकिन मुस्लिम समुदाय पुरी तरह एक राय से संगठीत हैं… भाई, दर शुक्रवार एसे ही थोडे अपना धंधा-पानी छोड के भागे चलते हैं!!! 
मंदिर ना बनने का बडा दोष उनका भी हैं जो अपनी जाती, अपने समुदाय, भाई-भतीजावाद के चलते मंदिर तो छोडो, अपने राज्य व अपने घर कि महिलाओं कि रक्षा को भी ताक पर रख कर आरक्षण कि भीख में वोट नेताओं के पीछे चल पड़ते हैं…. सोच कर देख लो,  सिर्फ राममंदिर के नाम पर ही नेता चुन लेते तो वाकई प्रदेश सहित पुरे भारत का उद्धार हो जाता! 
जय श्री राम