मोदी सरकार के दो साल! कहां हैं अच्छे दिन!

मोदी सरकार के दो साल पूरे होते ही हर मिडिया द्वारा एक मात्र यही प्रश्न उछाला जा रहा हैं कि कहाँ हैं अच्छे दिन जिसका मोदी सरकार ने वादा किया था।

खास बात यह है कि इस सवाल का जवाब लेकर बडे-से-बडे मिडिया तंत्र के उच्चकोटी के जाने-माने पत्रकारों कि फोज गाँव-गाँव, सड़कों पर यहाँ तक की गली-मोहल्ले में उतर चुकी हैं।

चाहे फिर वह मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु जैसे नामी शहर हो या फिर छोटा सा गांव या कस्बा। कुछ पत्रकारों का विशेष ध्यान मोदी के विधानसभा क्षेत्र वाराणसी व गोद लिये गांव जयापुर कि तरफ भी हैं।

इस तरह वे आम लोगों से पूछते नजर आ रहे कि क्या मोदी सरकार के आने के बाद आप को अच्छे दिन नजर आये या नहीं! विषयों को उभारते हुए वे अपनी जिस पत्रकारिता का सुपर-से-उपर वाली विशेषता को प्रकट करने में पसीना बहा रहे यह भी नजरअंदाज कर रहे कि आम आदमी द्वारा उठाया गया मसला ग्राम पंचायत का हैं, नगर सेवक का हैं,  राज्य सरकार का हैं या वाकई मोदी सरकार का!!!

सवाल यह हैं कि वे पत्रकार जो कि अन्यथा प्रत्येक समाजिक घटना का विश्लेषण अपने एयर कंडीशन स्टूडियो में बैठकर स्वयं ही कर लिया करते हैं वे मोदी सरकार के कामकाज पर आंकडों पर आधारीत स्वयं का विश्लेषण करने से क्यूँ भाग रहे हैं! क्यूँ नहीं वे पिछली सरकारों से मौजूदा सरकार कि तुलना कर स्थिति स्पष्ट कर देते हैं! शायद इसलिए कि आंकडे दबाये नहीं जा सकते, सच वह बताना नहीं चाहते और खुले आम झुठ बोलने के उनके दिन रहे नहीं!

आज इन भांड पत्रकारों के हर झुठ पर सोशियल मिडिया में जमकर इनको जमकर लताड़ झेलनी पड़ रही जिसके डर से कइ पत्रकार Twitter या Facebook से लंगोट तक छोडकर भागते नजर आ रहे और जो भागे नहीं हैं उनको हर दिन मिल रही सुजन का दर्द तो बयां करने लायक भी नहीं…यह तो उनकी वाल पर पड़ रही कमेंट रूपी लात-घुँसो से ही पता चल जायेगा!

तो सीधा रास्ता यही बचता हैं कि सड़क पर उतर जाए व गली-मोहल्ले के आम जन को ही आगे कर दे। उस आम जन को जिसे अपनी दो वक्त की रोटी कमाने से ही फुरसत नहीं तो सरकार कि सुध कहाँ से लेंगे और जिसके पास समस्याओं का भंडार हैं। आप सिर्फ मौका दो वो एक की जगह पच्चीस गिना देगा… फिर भले ही समस्या के लिये जिम्मेदार कोई भी हो जब विषय मोदी-सरकार का चल रहा हो तो ठिकरा भी उनके ही सिर होना हैं।

इस खेल में कंधा तो बन गया आम आदमी का, बंदूक बन गया मिडियाइ कैमरा और गोली चला रहे हमारे होनहार पत्रकार(अपनी सुजन को बचाते हुवे) … निशाना तो १४ वर्षो से एक ही हैं… नरेंद्र मोदी! साला बेहद मोटी चमड़ी का हैं! असर ही नहीं होता!!!!!

खेर मुद्दा तो यह हैं कि अच्छे दिन आये या नहीं!

भाइ, आम जन के पास तो समस्याओं का भंडार हैं इसलिये उनके अच्छे दिन का आंकलन वे स्वयं ही करले। वैसे भी आलु-कांदे-दाल-पेट्रोल पर रोने वालों के अच्छे दिन शायद ही कभी आये (स्वार्थी जीवन!)। लेकिन यदी देश के अच्छे दिन कि बात करें तो इसका आकलन इतना स्पष्ट हैं की यह सवाल अपने आप में ही बेमानी हो गया हैं। सिर्फ बेमानी नहीं! बल्कि पूछने वालों कि मक्कारी, मूर्खता व मोदी विरोधी मानसिकता को भी बया करने लग गया हैं।

सब कुछ तो लेख में लिखा नहीं जा सकता पर मोटे-मोटे तौर पर जो लिख रहा हूँ व एक देशभक्त भारतीय के लिये अच्छे दिन का अहसास कराने को काफी हैं….

— भारतीय सैनिकों के हथियार व बुलेट प्रूफ जेकटों कि वर्षों कि कमी कि आपुर्ती जिसके कारण पिछले कई सालों से अकारण कितने ही जवान शहीद हुए
— भारतीय सैनिकों को पाक कि और से आन वाली एक गोली के बदले अनगीनत गोली चलानी कि खुली छुठ
— POK पर घुसपैठ पर पूर्णतया नियंत्रण जिसके चलते मोदी काल में सर्वाधिक घुसपैठीये मारे गये व पाकिस्तान को पंजाब सीमा का रुख करना पडा
— कश्मीर में हर हफ्ते तीन से चार आतंकीयो का चुन-चुन कर खात्मा निरंतर जारी
— बलूचिस्तान व POK में पाक विरोधी गतिविधियों को बल सहित विश्वस्तरीय पाकिस्तान पर चौतरफा दबाव
— भारतीय जल-थल-वायु सेना कि शक्ती में जबरदस्त इजाफा
— भारतीय सेना कि अत्यावश्यक आपुर्ती के लिए हथियारों कि खरीदी और उसमे भी बिचौलियों कि छुट्टी
— भारत निर्मित हथियारों कि ना केवल शुरूआत बल्कि तेजस जैसा लडाकू विमान व शक्ती जैसा LCH हेलिकॉप्टर सेना में शामिल
— भारत-चीन सीमा पर पूरी तरह नाकाबंदी व चीनी सेना कि घुसपैठ का पुरजोर विरोध
— कूटनीतिक रणनीति से चीन का घेराव शुरू जिसमें जापान व अमेरीका खुलकर भारतीय खेमे में
— बांग्लादेश से सीमा विवाद का खात्मा व भारत-बांग्लादेश सीमा पुरी तरह सील मतलब बांग्लादेशियों कि घुसपैठ पर लगाम
— म्यांमार में घुसकर भारत विरोधी आतंकीयों का पुरा सफाया (आजाद भारत के इतिहास में पहली बार)
— भारत के पड़ोसि देशों से दोस्ती व उनके सहायतार्थ तत्परता कि नइ पहल जैसे काठमांडू भुकंप में तुरंत मदद
— कश्मीर पंडितों के पुनर्वास के लिए कारगर प्रयास व कश्मीर को विकास की राह पर ढकेलना जिसमें रेल सुविधा सहित व्यापारी निवेश पर जोर
— विदेशी पूंजी पर भारत के विकास में बाधा व धर्मांतरण जैसे धंधों को रचने वाले सभी गैरसरकारी संगठनों पर पूरी तरह से लगाम कईयों के लाइसेंस रद्द
— UPA काल में फर्जी केस में बंद अनेक देश भक्त पुलीस अधीकारी,  अफसरों व आम जन कि रिहाई

#### एक सच्चा देशभक्त तो मात्र इतने पर ही कह उठेगा की महाराणा प्रताप की तरह घास की रोटी मंजूर लेकिन मोदी के खिलाफ एक शब्द नहीं #####

लेकिन अभी उपलब्धी और भी हैं….

— मात्र दो वर्षों में लगभग 8000 गांवों में आजादी पश्चात पहली बार पहुंची बिजली व आज मई कि भिषण गर्मी के बावजूद 3994 मेगावाट  बिजली सरप्लस होते हुवे सिर्फ 2रु 22 पैसे प्रति यूनिट की दर से व्यापारियों के लिए उपलब्ध हैं।

— ग्रामीण स्वच्छता में 9.48 % सुधार हुआ है जिसमें स्वच्छता मिशन के तहत 1.82 लाख शौचालय बन चुके है । देश के 13 जिले , 161 block , 22513 ग्राम पंचायतें और 53973 गाँव Open Defecation यानि खुले में शौच से मुक्त हो चुके हैं।

— अंतरिक्ष विज्ञान में भारत के नये आयाम! 2015 तक मात्र 50 करोड़ कि आय करने वाले Isro की आय 9 गुना बढ़कर 400 करोड़ के पार! कई देशों का अपने सेटेलाइट भेजने के लिए भारत कि तरफ रूख

— सूखे के हालात से निपटने के लिए पहली बार चलाई गई Water Train, बूंद-बूंद तरसते लोगों के लिये करोड़ों लिटर पानी कि व्यवस्था साथ ही जगह-जगह बारीश के पानी संचय करने के लिए सैकड़ों नये तालाब व कुआ कि खुदाई का काम कई चरणों में पुरा

— प्रधान मंत्री जनधन योजना के तहत 22 करोड़ बँक खाते खूले व सरकारी लाभ जैसे पेंशन/LPG SUBSIDIES सीधे उनके खाते में, करोड़ों रूपये के दुरुपयोग व लुट पर सीधे रोक

— प्रधान मंत्री के कहने मात्र से एक करोड़ से ज्यादा सक्षम ग्राहकों ने स्वेच्छा से LPG SUBSIDIES का त्याग कर देश के करोड़ों रुपये बचाये जिससे उज्जवल योजना के तहत पांच करोड़ गरीबों के घर मूफ्त LPG कनेक्शन का लक्ष्य

— जिस गंगा नदी के सफाई अभीयान में 10 हजार करोड़ के खर्च के बावजूद पिछली सरकारे अंशमात्र सुधार ना ला सकि मात्र एक हजार करोड़ के खर्च से गंगा जल के प्रदूषण में कमी… एक बहोत बडी उपलब्धी

— नदियों से नदियों को जोड़ने के मेगा प्रोजेक्ट पर तेजी से कार्य जिससे बाढ़ व सूखे जैसी स्थितियों पर पूर्ण नियंत्रण व किसानों के लिए जल समस्या का समाधान

— विश्व स्तर पर भारत कि गरिमा को एक नइ पहचान व प्रवासी भारतीयों को एकझुट कर उनको भारत से जोडने कि अभुतपूर्व पहल

— विदेश में बस चुके भारतीयों के लिए देश में आने-जाने का मार्ग आसान,  Visa on arrival जैसी सुविधाएं

— किसी भी देश कि आपदा कि स्थिति में भारतीयों कि सुरक्षा पर त्वरित जोर व घरवापसी के तुरंत इंतेजाम कि व्यवस्था कि गई

— 2000 करोड़ के काले धन कि वापसी व कडक कानून के जरिये कालेधन देश के बाहर जाने पर रोक

— कोलब्लाँक व 2G स्पेक्ट्रम आवंटन के आनलाइन आवंटन से कई लाख करोड़ का मुनाफा जिसे कांग्रेस ने कोडीयो के दाम दे कर खुद की जेबे भर ली थी

— भारतीय ट्यूरीज्म में 266% बढ़ोत्तरी, लगभग 80 हजार विदेशी भारत यात्रा के लिए पहुंचे

— FDI निवेश में आजाद भारत ने पहली बार चीन को पछाड़ते हुवे निवेशकों की पहली पसंद का स्थान हासिल किया

— सालों से करोड़ों का नुकसान उठा रहे एयर-इंडीया व भारतीय रेल कि आय में पहली बार मुनाफे के संकेत

— UN में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अमेरीका, रूस सहित कई देशों का समर्थन हासिल किया

— भारत कि पहल पर पुरे विश्व के लिए 21 जुन बना अंतराष्ट्रीय योग दिवस

— किसानों के लिए सोईल कार्ड, यूरिया कि उपलब्धता बढ़ाते हुए उनकी आय को दोगुना करने का लक्ष्य

— मजदूर वर्ग के लिए 100 से भी कम किमत पर जीवन बीमा व पेंशन योजना

— सुकन्या योजना के तहत लगभग एक करोड़ कन्याओं का भविष्य सुरक्षित

— 11 हजार फर्जी राशन कार्डों को डिलीट कर करोड़ों की बचत

— GDP 4% से बढ़कर 7% तक पहुंची जिसे कांग्रेस ने 8% से घिरा कर 4% कर दिया था

— मंहगाई पर लगाम, कोई भले ही ना कहे कि कम हुई लेकिन बढ़ोत्तरी भी नहीं हुई

अभी मात्र दो वर्ष हुवे हैं लेकिन फिर भी उपलब्धीयाों की भरमार, सभी बया करना मुश्किल! कोई नामी पत्रकार तो इसे गिनाने से रहा…. स्वयं ही एक देशभक्त पत्रकार बनकर हो सके तो इसे उस आम आदमी तक पहुंचाने कि कोशिश करे जो अनजाने हो कर अब भी अच्छे-दिन के इंतजार में बैठा हैं।

देश का आम आदमी भोला व अनजान जरूर होगा किंतु वह जब इतना भी जान लेगा तो वह विश्वास से अपनी समस्याओं से लड़ने को खडा हो जायेगा। उस विश्वास के साथ जिसे पिछली कई सरकारों ने अपने पैरों तले रौंदकर आम जनता में केवल निजी स्वार्थ जगाने कि कोशिश कि जिससे यह देश बिखर कर टुकड़े-टुकड़े में बट जाय।

।। जयहिंद।।

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