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सत्यार्थ प्रकाश 

​सत्यार्थ प्रकाश के लेखक व युग पुरूष महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती पर उन्हें शत् शत् नमन् (१२ फरवरी)🙏

सत्यार्थ प्रकाश – एक एसी पुस्तक जिसमें सनातन धर्म के यथार्थ को उतारा हैं साथ ही इस्लाम व बाइबल के कई असत्य से पहलुओं पर एक जमीनी आंकलन किया गया हैं। वे लोग जो सभी धर्म के एक समान मानते हैं एसे लोगों को अपना भ्रम दूर करने के लिये इस पुस्तक को एक बार अवश्य पढ़नी चाहिए क्यों कि भ्रम पला ज्ञान व बीता जिवन कभी सार्थक सिद्ध नहीं हो सकता। 

इस पुस्तक में व्यक्त विचारों व प्रश्नों का तोड़ निकालने में बड़े-बड़े महारथी विफल रहे हैं और अन्य धर्म के महारथियों ने अपने भ्रमित धर्म को त्याग कर सनातन धर्म कि महिमा को स्वीकारा हैं जिससे इस पुस्तक के अतुल्य ज्ञान का परिचय प्राप्त होता हैं। 

गुगल प्ले – पर यह हिंदी पुस्तक बिना किसी शुल्क के उपलब्ध हैं जिसे हर कोई अपने एंड्रॉयड फोन पर डाउनलोड कर पढ़ सकता हैं। 

सत्यार्थ प्रकाश –  केवल सत्य कि और कदम

https://play.google.com/store/apps/details?id=com.satyarthprakash.book.AOTYLDNIBZVAUWQPY&hl=hi&referrer=utm_source%3Dgoogle%26utm_medium%3Dorganic%26utm_term%3D%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A5+%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B6+play+store&pcampaignid=APPU_1_EaWgWMOoFISBvgSsh5GwCw

श्रीमद्भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता के विषय में लोगों के
कुछ अजीब व असत्य विचार…

१) बुढ़ापे में पढ़ेंने योग्य, अभी समय नहीं

द्भगवद्गीता में जो ज्ञान हैं वह दर्शाता हैं कि मनुष्य अपने मानवीय जीवन को किस तरह सफल कर सृष्टि कल्याण कर सकता हैं। अर्थात यह वह ज्ञान हुवा जिसे मनुष्यों को अपने जिवन कि शुरूवात (बालपन अथवा जल्द-से-जल्द) में ही अर्जीत कर लेना चाहिए। ऐसे में यदि कोई यह विचार लेकर बैठा हैं कि वह बुढ़ापे में गीता पढ़ेगा तो यह कैसी मूर्खता होगी क्योंकि कि तबतक उसका जीवन तो गुजर चुका होगा। फिर तो मात्र पछतावा मिलेगा कि जिवन किस तरह से जीना था और संपूर्ण जीवन किस तरह से व्यर्थ व्यतीत कर दिया।

२) पढ़ने वाला परिवार छोड़कर साधु बन जाता हैं
३) साधु-संतों के पढ़ने योग्य

भले ही गीता का ज्ञान बेहद कम लोगों को होगा किंतु यह तथ्य से हर कोई परिचित होगा कि भगवद्गीता अर्जुन व श्रीकृष्ण के मध्य हुवे संवाद का सार हैं। वह भी ऐसा संवाद जो कुरूक्षेत्र कि रणभूमि में तब हुवा था जब एक और अधर्मी कौरव कि सेना व दुसरी और धर्मपरायण पांडवों कि सेना आमने सामने खडी थी। उस समय अर्जुन ने विरोधी कौरवों कि सेना में अपने परिवार जनों को देख कर शस्त्र डाल दिये थे। अर्जुन का मत था कि परिवार जनों कि हत्या कर सिंहासन जितने से अच्छा होगा कि में सब-कुछ त्याग कर तपस्वी होना स्वीकार कर लूँ। अर्थात अर्जुन युद्ध का मार्ग छोड़ तपस्वी बनना चाहते थे लेकिन श्रीकृष्ण के भगवद ज्ञान ने अर्जुन को युद्ध हेतु तैयार किया। इनसे यह सिद्ध होता हैं कि भगवद्गीता मात्र साधु-संत के लिए नहीं प्रत्येक मानव जीवन के लिये हैं व गीता अध्यन से कोई परिवार छोड़ सन्यासी बनने कि दिशा में चल पड़े यह जरूरी नहीं। भगवत गीता में सांख्य योग व कर्म योग, दोनो ही तरीकों से जीवन सफल करने का मार्ग विस्तार से बताया गया हैं जिसमें कर्म करते हुवे परमात्मा को पाना अधिक श्रेष्ठ बताया हैं अर्थात सारे संसारीक कर्तव्यों का निर्वाह करते हुए भी स्वयं को संपूर्ण मुक्त रखना।

४) पुराने युग कि बाते, आज जमाना बदल गया
५) केवल भारतीयों के लिए ही उपयोगी हैं

जैसा कि श्रीमद्भगवद्गीता में ज्ञान मनुष्य जिवन को श्रेष्ठ बनाने व सृष्टि कल्याण पर केंद्रित हैं अत: इसका किसी काल या क्षेत्र से कोई नाता नहीं। ५००० साल पहले जो मानव जिवन था वहीं मानवीय जीवन आज भी हैं। संपूर्ण विश्व में मानवीय जीवन जन्म, बालपन, जवानी व बुढ़ापे के चक्र पर ही आधारित हैं। जब भी, जहाँ भी मनुष्य जीवन व सृष्टि कल्याण का विषय होगा वहाँ भगवद्गीता का ज्ञान ही एक मात्र उपयोगी सिद्ध होगा।

६) मनगढ़ंत! काल्पनिक!
७) एक साधारण सी किताब

महाभारत व रामायण पर पूर्ण विश्व भर के जितने भी शोधकर्ताऔ ने अपने तरह-तरह के शोध में जो निष्कर्ष दिया हैं उसमे सभी पाया कि…

इन ग्रंथों में जितने भी स्थानों के नाम व उनकी स्थिति की दिशा का वर्णन किया हैं आज भी जस के तस उपलब्ध हैं

जहाँ रामसेतु व उसके तैरते पत्थर आज भी उपस्थीत हैं वहीं समुद्र में डूबी लंका, द्वारका नगरी व यमुना नदी भी जीता जागता प्रमाण हैं

महाभारत में हुवे युद्ध के कुरूक्षेत्र कि धरती व युद्ध में इस्तेमाल किये गये शस्त्र व उनके प्रभाव भी सिद्ध हो चुके हैं

ऐसे कई आधारभूत तथ्यों के आधार पर शोधकर्ताऔं ने स्वीकार किया हैं कि किसी भी सूरत में ना तो यह काल्पनिक हो सकते हैं और ना ही इन्हे झुठलाया जा सकता हैं।

महत्वपूर्ण बात यह भी हैं कि गीता के उपदेश आज भी पूर्णतया मनुष्य जीवन को प्रेरणा देने कि क्षमता रखते हैं और यही कारण हैं कि ना केवल भारत में, विदेशों में भी स्वेच्छा से इसे मानने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही व जिन्होंने अपने जीवन को सात्विकता के मार्ग पर लाकर परिवर्तन का अनुभव किया।

श्रीमद्भगवद्गीता के अध्यन के मानवीय लाभ ###

१) सर्वश्रेष्ठ पुस्तक जो किसी भी मनुष्य में आत्मविश्वास भरदे
२) मनुष्य जीवन को तीन सबसे बडे भय – बदनामी, असफलता व मृत्यु कि चिंता से मुक्त करने में सक्षम
३) सात्विक जीवन का ज्ञान व संसारीक माया से परे आनंदमय जीवन के रहस्य का सरलता से वर्णन
४) धर्म का संपूर्ण ज्ञान

यह मनुष्य जिवन व्यर्थ ना चला जाय
रहे सुनिश्चित ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ अपनाये

हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे

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सुनिये संपूर्ण श्रीमद्भागवद्गीता अब हिंदी में
डाउनलोड करे मात्र एक MP3…. http://bit.ly/2bFlW03

मोदी सरकार के दो साल! कहां हैं अच्छे दिन!

मोदी सरकार के दो साल पूरे होते ही हर मिडिया द्वारा एक मात्र यही प्रश्न उछाला जा रहा हैं कि कहाँ हैं अच्छे दिन जिसका मोदी सरकार ने वादा किया था।

खास बात यह है कि इस सवाल का जवाब लेकर बडे-से-बडे मिडिया तंत्र के उच्चकोटी के जाने-माने पत्रकारों कि फोज गाँव-गाँव, सड़कों पर यहाँ तक की गली-मोहल्ले में उतर चुकी हैं।

चाहे फिर वह मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु जैसे नामी शहर हो या फिर छोटा सा गांव या कस्बा। कुछ पत्रकारों का विशेष ध्यान मोदी के विधानसभा क्षेत्र वाराणसी व गोद लिये गांव जयापुर कि तरफ भी हैं।

इस तरह वे आम लोगों से पूछते नजर आ रहे कि क्या मोदी सरकार के आने के बाद आप को अच्छे दिन नजर आये या नहीं! विषयों को उभारते हुए वे अपनी जिस पत्रकारिता का सुपर-से-उपर वाली विशेषता को प्रकट करने में पसीना बहा रहे यह भी नजरअंदाज कर रहे कि आम आदमी द्वारा उठाया गया मसला ग्राम पंचायत का हैं, नगर सेवक का हैं,  राज्य सरकार का हैं या वाकई मोदी सरकार का!!!

सवाल यह हैं कि वे पत्रकार जो कि अन्यथा प्रत्येक समाजिक घटना का विश्लेषण अपने एयर कंडीशन स्टूडियो में बैठकर स्वयं ही कर लिया करते हैं वे मोदी सरकार के कामकाज पर आंकडों पर आधारीत स्वयं का विश्लेषण करने से क्यूँ भाग रहे हैं! क्यूँ नहीं वे पिछली सरकारों से मौजूदा सरकार कि तुलना कर स्थिति स्पष्ट कर देते हैं! शायद इसलिए कि आंकडे दबाये नहीं जा सकते, सच वह बताना नहीं चाहते और खुले आम झुठ बोलने के उनके दिन रहे नहीं!

आज इन भांड पत्रकारों के हर झुठ पर सोशियल मिडिया में जमकर इनको जमकर लताड़ झेलनी पड़ रही जिसके डर से कइ पत्रकार Twitter या Facebook से लंगोट तक छोडकर भागते नजर आ रहे और जो भागे नहीं हैं उनको हर दिन मिल रही सुजन का दर्द तो बयां करने लायक भी नहीं…यह तो उनकी वाल पर पड़ रही कमेंट रूपी लात-घुँसो से ही पता चल जायेगा!

तो सीधा रास्ता यही बचता हैं कि सड़क पर उतर जाए व गली-मोहल्ले के आम जन को ही आगे कर दे। उस आम जन को जिसे अपनी दो वक्त की रोटी कमाने से ही फुरसत नहीं तो सरकार कि सुध कहाँ से लेंगे और जिसके पास समस्याओं का भंडार हैं। आप सिर्फ मौका दो वो एक की जगह पच्चीस गिना देगा… फिर भले ही समस्या के लिये जिम्मेदार कोई भी हो जब विषय मोदी-सरकार का चल रहा हो तो ठिकरा भी उनके ही सिर होना हैं।

इस खेल में कंधा तो बन गया आम आदमी का, बंदूक बन गया मिडियाइ कैमरा और गोली चला रहे हमारे होनहार पत्रकार(अपनी सुजन को बचाते हुवे) … निशाना तो १४ वर्षो से एक ही हैं… नरेंद्र मोदी! साला बेहद मोटी चमड़ी का हैं! असर ही नहीं होता!!!!!

खेर मुद्दा तो यह हैं कि अच्छे दिन आये या नहीं!

भाइ, आम जन के पास तो समस्याओं का भंडार हैं इसलिये उनके अच्छे दिन का आंकलन वे स्वयं ही करले। वैसे भी आलु-कांदे-दाल-पेट्रोल पर रोने वालों के अच्छे दिन शायद ही कभी आये (स्वार्थी जीवन!)। लेकिन यदी देश के अच्छे दिन कि बात करें तो इसका आकलन इतना स्पष्ट हैं की यह सवाल अपने आप में ही बेमानी हो गया हैं। सिर्फ बेमानी नहीं! बल्कि पूछने वालों कि मक्कारी, मूर्खता व मोदी विरोधी मानसिकता को भी बया करने लग गया हैं।

सब कुछ तो लेख में लिखा नहीं जा सकता पर मोटे-मोटे तौर पर जो लिख रहा हूँ व एक देशभक्त भारतीय के लिये अच्छे दिन का अहसास कराने को काफी हैं….

— भारतीय सैनिकों के हथियार व बुलेट प्रूफ जेकटों कि वर्षों कि कमी कि आपुर्ती जिसके कारण पिछले कई सालों से अकारण कितने ही जवान शहीद हुए
— भारतीय सैनिकों को पाक कि और से आन वाली एक गोली के बदले अनगीनत गोली चलानी कि खुली छुठ
— POK पर घुसपैठ पर पूर्णतया नियंत्रण जिसके चलते मोदी काल में सर्वाधिक घुसपैठीये मारे गये व पाकिस्तान को पंजाब सीमा का रुख करना पडा
— कश्मीर में हर हफ्ते तीन से चार आतंकीयो का चुन-चुन कर खात्मा निरंतर जारी
— बलूचिस्तान व POK में पाक विरोधी गतिविधियों को बल सहित विश्वस्तरीय पाकिस्तान पर चौतरफा दबाव
— भारतीय जल-थल-वायु सेना कि शक्ती में जबरदस्त इजाफा
— भारतीय सेना कि अत्यावश्यक आपुर्ती के लिए हथियारों कि खरीदी और उसमे भी बिचौलियों कि छुट्टी
— भारत निर्मित हथियारों कि ना केवल शुरूआत बल्कि तेजस जैसा लडाकू विमान व शक्ती जैसा LCH हेलिकॉप्टर सेना में शामिल
— भारत-चीन सीमा पर पूरी तरह नाकाबंदी व चीनी सेना कि घुसपैठ का पुरजोर विरोध
— कूटनीतिक रणनीति से चीन का घेराव शुरू जिसमें जापान व अमेरीका खुलकर भारतीय खेमे में
— बांग्लादेश से सीमा विवाद का खात्मा व भारत-बांग्लादेश सीमा पुरी तरह सील मतलब बांग्लादेशियों कि घुसपैठ पर लगाम
— म्यांमार में घुसकर भारत विरोधी आतंकीयों का पुरा सफाया (आजाद भारत के इतिहास में पहली बार)
— भारत के पड़ोसि देशों से दोस्ती व उनके सहायतार्थ तत्परता कि नइ पहल जैसे काठमांडू भुकंप में तुरंत मदद
— कश्मीर पंडितों के पुनर्वास के लिए कारगर प्रयास व कश्मीर को विकास की राह पर ढकेलना जिसमें रेल सुविधा सहित व्यापारी निवेश पर जोर
— विदेशी पूंजी पर भारत के विकास में बाधा व धर्मांतरण जैसे धंधों को रचने वाले सभी गैरसरकारी संगठनों पर पूरी तरह से लगाम कईयों के लाइसेंस रद्द
— UPA काल में फर्जी केस में बंद अनेक देश भक्त पुलीस अधीकारी,  अफसरों व आम जन कि रिहाई

#### एक सच्चा देशभक्त तो मात्र इतने पर ही कह उठेगा की महाराणा प्रताप की तरह घास की रोटी मंजूर लेकिन मोदी के खिलाफ एक शब्द नहीं #####

लेकिन अभी उपलब्धी और भी हैं….

— मात्र दो वर्षों में लगभग 8000 गांवों में आजादी पश्चात पहली बार पहुंची बिजली व आज मई कि भिषण गर्मी के बावजूद 3994 मेगावाट  बिजली सरप्लस होते हुवे सिर्फ 2रु 22 पैसे प्रति यूनिट की दर से व्यापारियों के लिए उपलब्ध हैं।

— ग्रामीण स्वच्छता में 9.48 % सुधार हुआ है जिसमें स्वच्छता मिशन के तहत 1.82 लाख शौचालय बन चुके है । देश के 13 जिले , 161 block , 22513 ग्राम पंचायतें और 53973 गाँव Open Defecation यानि खुले में शौच से मुक्त हो चुके हैं।

— अंतरिक्ष विज्ञान में भारत के नये आयाम! 2015 तक मात्र 50 करोड़ कि आय करने वाले Isro की आय 9 गुना बढ़कर 400 करोड़ के पार! कई देशों का अपने सेटेलाइट भेजने के लिए भारत कि तरफ रूख

— सूखे के हालात से निपटने के लिए पहली बार चलाई गई Water Train, बूंद-बूंद तरसते लोगों के लिये करोड़ों लिटर पानी कि व्यवस्था साथ ही जगह-जगह बारीश के पानी संचय करने के लिए सैकड़ों नये तालाब व कुआ कि खुदाई का काम कई चरणों में पुरा

— प्रधान मंत्री जनधन योजना के तहत 22 करोड़ बँक खाते खूले व सरकारी लाभ जैसे पेंशन/LPG SUBSIDIES सीधे उनके खाते में, करोड़ों रूपये के दुरुपयोग व लुट पर सीधे रोक

— प्रधान मंत्री के कहने मात्र से एक करोड़ से ज्यादा सक्षम ग्राहकों ने स्वेच्छा से LPG SUBSIDIES का त्याग कर देश के करोड़ों रुपये बचाये जिससे उज्जवल योजना के तहत पांच करोड़ गरीबों के घर मूफ्त LPG कनेक्शन का लक्ष्य

— जिस गंगा नदी के सफाई अभीयान में 10 हजार करोड़ के खर्च के बावजूद पिछली सरकारे अंशमात्र सुधार ना ला सकि मात्र एक हजार करोड़ के खर्च से गंगा जल के प्रदूषण में कमी… एक बहोत बडी उपलब्धी

— नदियों से नदियों को जोड़ने के मेगा प्रोजेक्ट पर तेजी से कार्य जिससे बाढ़ व सूखे जैसी स्थितियों पर पूर्ण नियंत्रण व किसानों के लिए जल समस्या का समाधान

— विश्व स्तर पर भारत कि गरिमा को एक नइ पहचान व प्रवासी भारतीयों को एकझुट कर उनको भारत से जोडने कि अभुतपूर्व पहल

— विदेश में बस चुके भारतीयों के लिए देश में आने-जाने का मार्ग आसान,  Visa on arrival जैसी सुविधाएं

— किसी भी देश कि आपदा कि स्थिति में भारतीयों कि सुरक्षा पर त्वरित जोर व घरवापसी के तुरंत इंतेजाम कि व्यवस्था कि गई

— 2000 करोड़ के काले धन कि वापसी व कडक कानून के जरिये कालेधन देश के बाहर जाने पर रोक

— कोलब्लाँक व 2G स्पेक्ट्रम आवंटन के आनलाइन आवंटन से कई लाख करोड़ का मुनाफा जिसे कांग्रेस ने कोडीयो के दाम दे कर खुद की जेबे भर ली थी

— भारतीय ट्यूरीज्म में 266% बढ़ोत्तरी, लगभग 80 हजार विदेशी भारत यात्रा के लिए पहुंचे

— FDI निवेश में आजाद भारत ने पहली बार चीन को पछाड़ते हुवे निवेशकों की पहली पसंद का स्थान हासिल किया

— सालों से करोड़ों का नुकसान उठा रहे एयर-इंडीया व भारतीय रेल कि आय में पहली बार मुनाफे के संकेत

— UN में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अमेरीका, रूस सहित कई देशों का समर्थन हासिल किया

— भारत कि पहल पर पुरे विश्व के लिए 21 जुन बना अंतराष्ट्रीय योग दिवस

— किसानों के लिए सोईल कार्ड, यूरिया कि उपलब्धता बढ़ाते हुए उनकी आय को दोगुना करने का लक्ष्य

— मजदूर वर्ग के लिए 100 से भी कम किमत पर जीवन बीमा व पेंशन योजना

— सुकन्या योजना के तहत लगभग एक करोड़ कन्याओं का भविष्य सुरक्षित

— 11 हजार फर्जी राशन कार्डों को डिलीट कर करोड़ों की बचत

— GDP 4% से बढ़कर 7% तक पहुंची जिसे कांग्रेस ने 8% से घिरा कर 4% कर दिया था

— मंहगाई पर लगाम, कोई भले ही ना कहे कि कम हुई लेकिन बढ़ोत्तरी भी नहीं हुई

अभी मात्र दो वर्ष हुवे हैं लेकिन फिर भी उपलब्धीयाों की भरमार, सभी बया करना मुश्किल! कोई नामी पत्रकार तो इसे गिनाने से रहा…. स्वयं ही एक देशभक्त पत्रकार बनकर हो सके तो इसे उस आम आदमी तक पहुंचाने कि कोशिश करे जो अनजाने हो कर अब भी अच्छे-दिन के इंतजार में बैठा हैं।

देश का आम आदमी भोला व अनजान जरूर होगा किंतु वह जब इतना भी जान लेगा तो वह विश्वास से अपनी समस्याओं से लड़ने को खडा हो जायेगा। उस विश्वास के साथ जिसे पिछली कई सरकारों ने अपने पैरों तले रौंदकर आम जनता में केवल निजी स्वार्थ जगाने कि कोशिश कि जिससे यह देश बिखर कर टुकड़े-टुकड़े में बट जाय।

।। जयहिंद।।

इसे जान कर हर भारतीय को गर्व होगा

कारगिल युद्ध में एक दौर एसा भी था जब भारतीय सेनाओं को पहाडों पर जमावड़ा डाली पाकिस्तानी सेनाओं कि स्थिति का अंदाजा नहीं लग रहा था… इसके लिये सेटेलाइट नजर कि जरूरत थी जो कि उस वक्त अमेरिका के पास थी।

भारत ने अमेरिका से मदद मांगी लेकिन अमेरिका ने साफ तौर से मना कर दिया। यह भारतीयों के लिये एक अपमान  जैसा था। लेकिन फिर भी भारतीय सेना ने अपने शोर्य से विजय प्राप्त की।

तब से ISRO ने यह बिडा उठाया था कि भारत स्वतः खुद कि GPS प्रणाली विकसित करेगा और यह शुभ कार्य १७ वर्षों के बाद सातवें सेटेलाइट लांच के बाद पुरा हो गया। इसके साथ ही भारत विश्व के उन देशों में शामील हो गया हैं जिनके पास उनकी अपनी GPS प्रणाली हैं जो कि वास्तविक समय में युद्ध व आपदा कि स्थिति में सेटेलाइट नजर रख सके। पहले यह मात्र चार देशों के पास थी लेकिन भारत ने पांचवा नाम अपना दर्ज करवा लिया हैं। भारत ने अपनी इस प्रणाली को ‘नाविक’ नाम दिया है।

।। वंदेमातरम्।।

County having Satellite navigation systems

BDS (China)
DORIS (France)
GLONASS (USSR/Russia)
GPS (USA)
NAVIC (India)

Breaking India Conspiracy

######## पुरा पढे और समझे #######
### भारत को तोडने का विदेशी षडयंत्र ###

मई 2014 नरेंद्र मोदी pm बन गए

रिपोर्ट आई की इस बार मोदी को एक तरफ़ा वोट मिला

1) नोजवानों से ,
खासकर कॉलेज छात्रों से

2) कमजोर तबकों से,
खासकर दलितों से

3) हिन्दू समाज से,
खासकर मध्यम वर्ग से

4) गुजराती लोगों से,
खासकर पटेलों से

5) मुस्लिम समाज से,
खासकर गरीब मुस्लिम से

6) महिलाओं से,
खासकर धर्मप्रेमी महिलाओं से

7) व्यापारी वर्ग से,
ख़ासकर छोटे मझोले वर्ग से

8) देश के थिंकटैंक से,
खासकर बुद्धिजीवी वर्ग से

ऐसे कई कई वर्गों ने अपनी पुश्तैनी राजनीतिक निष्ठां को दरकिनार कर मोदी को वोट दिया। कश्मीर से कन्याकुमारी तक यही देखने में आया। हर राजनीतिक दल ने इसे पुरे भारतवर्ष में महसूस किया।

इसका जो तोड़ विदेशी षडयंत्र कारीयों ने निकाला उसका नतीजा आज हमारे सामने है।

सबसे पहले हर उस वर्ग को चिन्हित किया गया जिसने मोदी को एक तरफ़ा वोट दिया। फिर उस वर्ग की  “दुखती नस” को पकडा गया और खेल शुरू हुआ…..

बेहद सटीक और बारीकी से चुन चुन कर इन वर्गों को नीशाना बनाया जाने लगा। किरदार लिखे गए और हर वर्ग को एक टार्गेटेड किरदार दिया गया। उसकी टाईमिंग तय की गई जिसका रिमोट विदेशी ताकतो ने अपने हाथों में रखा हैं…

प्रमुख विपक्षी दल (जो दिखावे के लिये भीन्न हैं किंतु आचरण से एक हैं) व भांड मीडिया जो आज तक विदेशी हाथों के रखेल बनकर भारत को लुटने और बर्बाद करने में अपनी भुमीका नीभाते आ रहे अब सब एक साथ मोदी सरकार को घैरने को उतारू हो चुके थे।

मकसद इन सबका एक था…
हर वर्ग को तोडना,
हर वर्ग को जहर से भरना,
हर वर्ग को छिन्न भिन्न करकें रखना ,
ताकि फिर वो भविष्य में,
कभी एक होकर वोट ना दे….भारतीय समाज का आपसी मतभेद ही इनकी अबतक की सबसे बडी ताकत रही हैं ।

अब आप खुद इस बड़े से खेल को समझिये,
इनकी परफेक्ट टाइमिंग को समझिये,
इनके “वेल-प्लेसड” किरदारों को देखिये,
षडयंत्रकारी स्क्रिप्ट को पढ़िए और समझीये कि विदेशी शातीरों ने किस कदर भारतीय समाज पर PHD कि हैं और वे किस तरह वे भारत को भारतीयों के हाथों ही बर्बाद करने के लिये एक से बढकर एक पाँसे फेकते जा रहे और भारत का आम आदमी समझ ही नहीं पा रहा की आखिर देश में चल क्या रहा।

यदी आप विपक्षी नेताऔ कि बयान बाजी व मिडीया द्वारा मोदी सरकार के खिलाफ उठाये जा रहे प्रत्येक मुद्दो पर सटीक नजर रखेंगे तो इनके हर बयान व हो रही घटनाऔ की एक परफेक्ट टाइमिंग स्पष्ट रूप से रखी दिखेगी।

1) देश में जीतीवाद बढाने के लिये
अचानक जाट आरक्षण आंदोलन के उग्र किरदार

2) वामपंथीयों के लिए
JNU वाला उमर खालिद किरदार

3) दलित वर्ग के लिए
रोहित वेमुला वाला किरदार

5) नोजवान वर्ग के लिये
फ़िल्मी खान वाला किरदार

6) गुजरती पटेलों के लिए
हार्दिक पटेल वाला किरदार

7) मुस्लिम वर्ग के लिए
अख़लाक़ वाला किरदार

8) महिला वर्ग के लिए
शनि शिंगापुनकर वाली किरदार

9) व्यापारी वर्ग के लिए
GST वाला किरदार

10) बुद्धिजीवी वर्ग के लिए
एवार्ड वापसी वाले असहिष्णुता वाले किरदार

इन सारे मुद्दो में पर घौर करीये, हैरान हो जाऔगे…इन प्रत्येक किरदारो के तार या तो किसी गैर-सरकारी NGO से या फिर राजनीतीज्ञों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुडे हुवे हैं| मुद्दा बनवाने के लिये ये कितनो के ही कत्ल करवा सकते हैं और किसी भी मौत का तमाशा खडा कर सकते हैं| इन मुद्दो में नया कुछ भी नहीं हैं, मुद्दे वही हैं जिसे उठवा कर अंग्रेजो ने पहले भारत को गुलाम बनाया और आज भी विदेशी ताकते पर्दे के पीछे से कमान संभाले हुवे हैं| बदलाव सिर्फ इतना हैं की घटनाक्रमों को ज्वलंत बनाने के लिये तरो-ताजा किरदार इस्तेमाल किये गये।

इन षडयंत्रकारीयों की स्क्रीप्ट यहीं खत्म नहीं हुई हैं, भविष्य में और भी किरदार सामने लाये जायेंगे, अपनी परफेक्ट स्क्रिप्ट और टाइमिंग के साथ। आपको , हमको , हिंदुस्तान को तोड़ने की साजिश के साथ।

एसा नहीं हैं कि मोदी सरकार इससे अनजान हैं। उन्हे इसका अंदाजा सरकार बनाने के पुर्व ही था जिसके चलते ही मोदी ने सरकार बनाते ही गैर-सरकारी संघठनो के विदेशी चंदो पर रोक लगा दी थी जिसमे Green Pease India व अमेरिका की CIA द्वारा संचालीत FORD Foundation अहम थी। इस वजह से भी विदेशी षडयंत्रकारी पुरी तरह खिसयाए हुवे हैं।

जिन्हे इस लेख पर विश्वास नहीं और “विदेशी षडयंत्रकारीयों” कि बाते मात्र काल्पनीक या मन गढत सी लगती हो उनकी शंका समाधान हेतु उन्हे दो अन्य श्रोत बताना चाहुँगा जस पर वे Google गुरू से पहोंच सकते हैं…
१) प्रसिद्ध व राष्ट्रवादी लेखक – राजीव मलहोत्रा जी – की किताब Breaking-India-Forces को पढ सकते हैं
२) गुगल गुरू पर सर्च किजीये – America CIA Role in breaking India

|||| सजग रहिएगा, सतर्क रहियेगा ||||

हम “अनेक” थे
हम “अनेक” हैं
हम “अनेक” ही रहेंगे
“अनेकता में एकता” यही हमारी विशेषता हैं और यही हमारी ताकत भी हैं और भारत के उज्वल भविष्य एक मात्र मार्ग भी यही हैं।

हर ग्रुप में फॉरवर्ड कर राष्ट्र सेवा मे जरूर योगदान करें

(संकलीत व संपादीत लेख)

स्मार्ट फोन रखते हो तो स्मार्ट भी बनो

### क्या आप भी स्मार्ट फोन रखते हैं ###

मुंबई लोकल के फर्स्ट-क्लास में फिल्मे शेयर करते वक्त एक ने दुसरे से कहा – यार तेरा (फोरेन ब्रांड) स्मार्ट फोन बहोत स्लो (धीमा) हो गया हैं अब बदली करले…

दुसरे ने हल्की सी मुस्कान देते हुवे बताया – अरे स्लो भले ही हैं लेकिन आज भी यजफुल हैं, दो साल हो गये, १६ हजार में खरीदा था…पुरा पैसा वसुल किया … कम से कम मेने ६० से ७० फिल्मे देखी होगी इस पर … एक से एक धाँसु! और वो भी सब-के-सब इस लोकल में ही… एक बार थियेटर जाता तो कम से कम २५० रू लगना ही था और ३/४ घंटे बीगडते वो अलग…लेकिन इस पर तो एक दम फ्रि! साथ ही साथ गेम-म्युजीक कि तो सदाबहार!

उसकी बातो से आम तौर से सही मानी जा सकती हैं लेकिन मेरी सोच को थोडा धक्का लगा| शायद इसलिये कि मेरे लिये स्मार्ट-फोन के मायने कुछ अलग ही थे| इस तर्ज पर मेने भी अपने स्मार्ट फोन कि समीक्षा कर ली|

मेरा स्मार्ट फोन (स्वदेशी ब्रांड) वह तो इतना किमती नहीं, मात्र लगभग ६ हजार…और लिये हुवे भी करीब-करीब दो साल… अब आकलन यह लगाना था कि उपयोग कैसा हुवा| उन महाशय का सिधा हिसाब था कि २५० थियेटर कि टिकट और ६०-से-७० फिल्मे, समय कि बचत, गेम्स-म्युजीक जैसे अतिरिक्त लाभ| लेकिन मेरा हिसाब इतना सरल नहीं हो सकता था क्यों कि ना तो मेने इस पर कभी फिल्मे देखी नहीं और ना ही गेम-या-म्युजीक|

तो आखिर मेने स्मार्ट-फोन का इस्तेमाल किया कैसे?

सवाल सही हैं और मेरी नजर में इसका जवाब भी बेहद किमती हैं| अब सोचीये…जब इस प्रश्न के जवाब को ही मेने किमती बता दिया तो जो इस्तेमाल किया होगा उसकी किमत कितनी होगी?

नहीं…नहीं…मेने इससे कोई व्यापार नहीं किया और ना ही किसी औन लाईन इनकम जैसी स्कीम से जुडा….बल्की मेने तो अपने स्मार्ट फोन से जी-जान लगा रखी हैं खुद को जागृत कर दुसरो को जागृत करने की|

हाँ… जागृत| मेने अपने स्मार्ट-फोन से मात्र सोशियल – मिडीया के लिये उपयोग किया| सोशियल मिडीया जिसमे Facbook, Twitter, Whatsup व Hike जैसे एप्लीकेशन, जिसने मुझे कई जाने अनजाने लोगों से जोडा…जो कि अपने ही समाजीक वर्ग का हिस्सा हैं|

लेकिन इससे फायदा क्या हुवा ?

बेहद क्रांतीकारी!  मैं उनसे जुड सका जौ मेरी ही तरह समाज में रहते हुवे भारतीय सभ्यता, संस्कृती, सुरक्षा व अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दो के लिये ना केवल चिंतीत हैं बल्की अपने-अपने तरिके से मातृभुमी कि सेवा में लगे हुवे हैं|

मेने उनके विचारो को जाना, मेने अपने विचार रखे, कई लोगों ने मुझे कुछ समजाया और कईयों को मेने कुछ सिखाया| इस तरह सोशियल मिडीया से जुडे लोगों के स्वत: के भीतर अनेको तरह के वीचारों का मंथन सा  चल पडा| आज इस मंथन से देश के हालात, समाज व देश के विरूद्ध चल रही साजीशे व अनगीनत प्रतीष्ठीत बहरूपीये जिनको मेने कई बार जाने-अनजाने में अपने सिर आँखो पर बैठा लिया था उनसे जुडी कई गुत्थीयो को सुलझाने में बडा सहयोग मिला|

साथ-ही-साथ उन महान विभुतीयों से भी अवगत हो सका जिन्होने राष्ट्र के लिये अपना सर्वस त्याग दिया व आज भी देश कि दशा बदलने में निरंतर लगे हुवे हैं|

क्या कहा?
अखबार ? न्युज चेनल ?
इनसे भी तो यह सब पता चल सकता था !!!

अच्छा-अच्छा…समझा…..मिडीया कि बात कर रहे हो…ठिक याद दिलाया| पहले मेने भी यही भ्रम पाल रखा था कि मिडीया विश्व पर नजर रखने की हमारी आँखे हैं| मिडीया वाले हमें तरह-तरह कि जानकारी दे कर अवगत कराते हैं| लेकिन जबसे सोशियल मिडीया का दामन पकडा हैं मेने….मुझे इस खबरी-मिडीया के नाम से नफरत सी हो चुकी हैं| क्युँ की जीस मिडीया को हम विश्व पर नजर रखने कि आँखे समझते हैं वह तो दरअसल विश्व कि हकिकत से अनजान रहने के लिये नींद कि मिठी डोस देने वाला वो नमक हराम निकला जिसे हमने अपने ही घरों में अपनी मेहनत की कमाई खर्च कर बेहद आदर से पाल रखा हैं|

सोशिय-मिडीया ने मेरी ही तरह के लोगों के एसे-एसे ‘खतरनाक’ भ्रमो को तोडा जिन्हे यदी हम पालते रहे तो ना केवल हम तीसरी गुलामी कि चौखट पर होंगे बल्की हमारे भारत देश के ही कई छोटे-छोटे तुकडे हो जायेंगे और उसके बाद भी समस्या दुर नहीं होगी और खत्म होने तक एक दुसरे से लडते रह जायेंगे|

हो सकता हैं कई लोग शायद मेरी बातों पर विश्वास ना कर पाये…उनसे यही नीवेदन रहेगा कि भाई पहले तनीक पाकिस्तान व बंगलादेश को ही देख लो…अलग हमसे ही हुवे और आज हमसे ही दुश्मनी पाल रहे….और फिर, आज देश का नजारा भी देख लो…

कश्मीर मांगे आजादी…
बंगाल मागें आजादी….
केरला मांगे आजादी और
मनीपुर भी मांगे आजादी …
भारत कि बर्बादी तक….

कुछ सुनाई दिया!!! ना अब यह ना कहना कि ये मिडीया ने ही बताया…यह तो जब सोशियल मिडीया ने आवाज उठाई तब जाकर उन्हे बताना पडा| दुसरी बात… यह नारे पहली बार नहीं लगे हैं…. ये तो सालों से लग रहे हैं….लेकिन खबरी-मिडीया ने तो इसे सालो-साल दबाये रखा था| सोचीये आज जो विपक्ष में रहते हुवे भी इनका समर्थन करने उतर आये हैं, उनके सत्ता में रहते किस-किस तरह से इन्हे आसरा दिया होगा….लेकिन खबरी मीडीया…चुप्प!!!! कम शब्दो में कहें तो खबरी-मिडीया आस्तीन के साँपो को छुपाने, झुठ फैलाने व लोगों का ध्यान भटकाने का जरीया हैं|

स्मार्ट फोन में समाये सोशियल मिडीया ने भारत कि गौरवशाली संस्कृती, सभ्यता, वास्तवीक इतिहास व वर्तमान कि गंभीर समस्या के प्रती ना केवल मुझे जागृत किया बल्की मेरे जैसे लाखों लोगों कि आँखे खोली|

अब एसे ही लाखों लोगों कि फौज दिनरात जुटी हुई हैं देश के करोडों को जागृत करने में और सबका लक्ष्य यही हैं कि जनता को जागृत कर इस देश के रक्षक स्वरूप उभरना….और इसका जरीया होगा यही स्मार्ट फोन हैं|

यकीन मनों, चंद मुट्ठी भर सेना १२५ करोड कि आबादी वाले देश कि सुरक्षा कि जिम्मेदार अकेले कंधो पर उठाना संभव नहीं हो पायेगा…और यदी हम रक्षक बन कर देश कि सेवा में खडे हो जाये तो गद्दारों का हमारी तरफ आँख भी उठाना असंभव हो जायेगा| और खासकर यह तब ज्यादा जरूरी हो जाता हैं जब सिमा पर खडे दुश्मनों से ज्यादा गद्दार देश के भीतर और वो भी आप और हमारे बीच ही पल रहे हो|

कुछ बुद्धीजीवी इस तरह के विचारों से अपनी-अपनी दिलचस्पी का नाम दे कर कन्नी काट सकते हैं….वे वास्तव में “अती बुद्धीमान” हैं|

माना कि मेरा स्मार्ट फोन धीमा जरूर हो लेकिन आज भी वो शब्दो के एसे परमाणु धमाके किये जा रहा हैं जिनके आगे गद्दारी-कि-बिमारी अब बोनी नजर आने लगी हैं|

हाँ….तो … मेरा आँकलन चल रहा था कि मेरे स्मार्ट फोन के उपयोग से मैने अब तक कितना पैसा वसुल किया….मेरे खयाल से अब यह आँकलन बेईमानी हैं…

उस देश के लिये कि गई अपनी देशभक्ती कि किमत मैं क्या लगाउँगा जिसके लिये करोडों ने अपना जिवन न्यौछावर कर हँसते-हँसते फाँसी पर जुल उठे, चलती तोप के आगे सिना लगा कर खडे हो गये, आग के कुँए में कुद कर जौहर रच दिया|

वे धन्य थे …
मैं तो कुछ नहीं….
सच कहता हुँ….कुछ भी नहीं….

अंत में कुछ बाते:
१) यदी आपने अभी तक अपने स्मार्ट-फोन से सोशियल मिडीया नहीं वापरा या मात्र स्वयं के नीजी दोस्तो तक ही सिमीत रखा हैं…
२) यदी आप अपने सोशियल मिडीया में अब तक एक भी देशभक्तों के ग्रूप से नहीं जुडे हैं…
३) यदी आपने अब तक अपने सोशियल मिडीया से देशहित की खबरों को दुसरों तक नहीं पहोचाया हैं…

तो माफ करना… बेहद दु:ख से कह रहा हुँ…
आपका फोन भले ही “स्मार्ट” हो…
आपको “स्मार्ट” बनने में अभी और वक्त लगना हैं !!!

|| वंदेमातरम् ||

हिंदुकुश : काला इतिहास

### हिंदुकुश ####

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आज तीव्र गती के भुकंप के झटके लगे, अफगानीस्तान का “हिंदुकुश” इलाका बना भुकंप का केंद्र : आज (८ जनवरी १६) की खबर
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क्या आपने सुना था कभी यह नाम???

हिंदुकुश : गुगल पर इस इलाके के बारे में छानबीन कजीयेगा, चौक पडेंगे…

अफगान जो आज पुरी तरह मुस्लीम बहुल इलाका बनाया जा चुका हैं उसके बावजुद वहाँ एसे नाम का इलाका सुनने में जरूर अचरज होता हैं, लेकिन इसका इतिहास जानकर दु:ख भी होगा|

जहाँ इस्लामीक कट्टरपंथीयो के जुल्मो ने अन्य धर्मीयों के नामो निशान मिटवा दिये वहीं इस इलाके का नाम आज तक हिंदुऔ से कैसे जुडा रह गया! विचार उठना स्वाभावीक हैं|

अफगान पर मुगल हमले के पुर्व वहाँ भी हिंदु ही रहा करते थे| जब मुगलों ने अपनी दरींदगी का तांडव शुरू किया तब उन्होने इस इलाके को चुना जहाँ वे उन हिंदुऔ को बंदी बनाकर इकट्ठा करते थे जो अपने हिंदु धर्म के सच्चे परायणी होते थे व इस्लाम स्वीकार करने से मना कर देते थे| अफगान का हिंदुकुश इलाका पुरी तरह पहाडीयों व खाडीयों से भरा हुवा हैं| एसे इलाके तक हिंदुऔ को लाने के लिये भी घुडसवार मुगल सेनीक भेड-बकीरीयों कि भाँती इन्हे घेरते हुवे व कोडे बरसाते हुवे लाते थे|

समय-समय पर एसे हिंदुऔ को इकट्ठा कर हिंदुकुश लाया जाता था ताँकी वे इन्हे इस्लाम को नकारने कि सजा दे सके| इसके लिये उन्हे कतार में खडा कर बारी-बारी से आगे लाते| पहले उनकी जनेउ उतार एक और फेकी जाती और फिर पुछा जाता – क्या तुम्हे इस्लाम कबुल हैं? यदी “हाँ” में जवाब मिला तो दुसरी कतार में अन्यथा वहीं सबके सामने उससे गर्दन झुकवा कर जल्लाद द्वारा कटवा दी जाती| इन तरीको से वे मौजुद लौगों में इस तरह का खौफ भरते थे की वे डर कर इस्लाम कबुल करले| कई लोग इस खौफनाक मंजर को देख कर इस्लाम कबुल कर लेते थे| लेकिन इन सब के बावजुद एसे-एसे धर्मात्मा भी होते थे जो अपनी मुंडी कटवाना आसानी से स्वीकार लेते लेकिन धर्म नहीं छोडते थे| इस सामुहीक हत्याकांड से कई बार यहाँ एक और जनेऊ का व दुसरी और कटे सिरो का पहाड तक बन जाया करता था|

हिंदुकुश इलाके के बारे में आप जब नेट पर खोजेंगे तो अन्य जो जानकारीया मिलेगी उनमे एक जानकारी यह भी होगी की हिंदुकुश नाम का मतलब क्या हैं…मुगल कालीन इतीहास के अनुसार इसका मतलब हैं – “हिदुऔ को मारो”|

इस इलाके का नाम अब तक नहीं बदला गया शायद यही कारण होगा कि कट्टरपंथी आज भी इसे हिंदुऔ पर अपनी बादशाही कि नीशानी का गढ मानते होंगे और संभवत: “हिंदुकुश” कि दहशत से ही उस दौरान अफगानीस्तान व बलुचीस्तान जैसे देश पुर्ण रूप से इस्लामीक बनाये जा सके|

हर हिंदु से प्राथना हैं कि जब भी यह नाम आपके समक्ष आये या याद भी आये तो यहाँ बलीदान हुवे अपने हिंदु भाईयों कि आत्मशांती के लिये प्रार्थना अवश्य किजीयेगा साथ ही गर्व किजीयेगा अपने पुरखो पर कि एसी दरींदगी भरे काल के बावजुद अपने धर्म को ना छोडा व आज भी हम एक हिंदु हैं|

वाकई …….  || गर्व से कहो हम हिंदु हैं ||