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जाली नोटों के आंकड़े! 

​क्या आप नकली नोट लेकर बँक में जमा कराने कि सोच भी सकते हो!!!

लेकिन हमारा बिकाऊ मिडीया तो ऐसी ही उम्मीद लोगों में फैला कर झूठ का माहौल बनाने में लगा हुवा हैं। एक खबर लगभग हर चैनल पर बार-बार सुनाई अथवा पढ़ने में आ रही कि नौटबंदी पर सरकार के जाली-नोट का दावा झूठा सिद्ध हो रहा जिसकी वजह यह बता रहे कि RBI गवर्नर उर्जित पटेल यह आंकड़ा नहीं बता सके कि कितनी जाली नोट नौटबंदी के दौरान बँक में जमा कि गई! 

अब इस खबर से मिडिया व एयर कंडीशन में बैठकर मक्कारी भरी पत्रकारिता का झंडा गाढने वाले दलालों का दिमाग भी समझे… 

पहली बात, ये लोग उर्जित पटेल से यह जानना चाहते हैं कि कितनी जाली नोट बँक में जमा हुई! क्या ये यह नहीं जानते कि बँको में जाली नोट पहचाने कि मशीन लगी होती हैं अर्थात जो बनावट से ही नकली हैं वह छट कर अलग निकल जाए। अब जो नोट इस तरह से छट कर अलग निकल गई हो वह तो वैसे भी बँक में जमा नहीं होती… फिर इसका आंकडा भला उर्जित पटेल कैसे दे सकते हैं! 

दुसरी बात, जिसके पास भारी मात्रा में एसी नकली नोट होगी वह क्या एसी हिम्मत कर सकता हैं कि उसे ले जा कर बँक में जमा करने की कोशिश भी करे! 

तीसरी बात, जिस तरह कि भारी नकली नोट के स्वाहा होने का दावा सरकार कर रही हैं जिसे पाकिस्तान कि ISI ने छापा व जिसका इस्तेमाल आतंकवाद फैलाने में किया जा रहा था, यह उस तरह कि नकली नोट हैं जो पिछली सरकारों कि मूर्खता या युँ कहे गद्दारी के चलते बिल्कुल असली कि तरह छापा गया था… यानी की बँको कि मशिने भी जिन्हें नहीं छाँट सकती थी। एसी स्थिति में भी सवाल वही… कि जाली नोटों का आंकड़ा निकलेगा कैसे? लेकिन यहाँ यह जरूर तय हैं कि जो नोट पाकिस्तान व आतंकवादी संगठनों के हाथों में धरी रह गई वह तो वहीं स्वाहा हो गई और वो भी बगैर किसी आंकड़े के! जाहिर हैं यह आंकड़ा भी भारी ही होगा। और जो कुछ उनके दलालों द्वारा यदी बँको में जमा भी कर दी गई होगी, तो चिंता की बात इसलिए नहीं क्यूँ की वह बेहद मामूली रकम होगी जो पकड़ी ना जा स। फिर भी यदी रकम बड़ी हुई तो जाली नोटों का आंकड़ा सरकार को मिले ना मिले, जमा करने वालो का आंकड़ा जरूर सरकार के पास पहुंच चुका हैं जिसकी कार्यवाही देखने को मिली ही रही हैं। 

अरे भाई, यहाँ तो बडी “मेहनत” से कमाया काला धन भी लोग बँक में जमा कराने से डर रहे तो जाली-नोट बँक तक पहुंचा कर मिडिया वालों के लिए आंकड़े कहाँ से जमा हो! जरा सोचिए तो!!!!

तो फिर इन पत्रकारों कि जाली नोटों वाली इस खबर का क्या तुक….. भाई, यह और कुछ नहीं…. खिसियाई बिल्ली खंभा नौचे! सुना हैं न!!! 

जयहिंद 

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भारत के लिए युद्ध अवश्य ही विकल्प हैं किंतु….

कुछ लोग युद्ध कि ललकार लिये नजर आ रहे उनके लिए कुछ शब्द, धार्मिक पहलु सहित।

सर्वप्रथम, बेहद गर्व होता हैं युद्ध के लिए ललकारने वाले योद्धाओं कि भावनाओं को पढ़ कर कि आज भी इस तरह का हौंसला रखने वाले विर सपूत हमारे बीच हैं…. धन्य हैं यह धरती। ये लोग अवश्य ही आश्वत करते हैं कि मात्रभुमी के लिए बलिदान होनेवाले सपूतों कि कमी नहीं।

रही बात युद्ध कि तो वह निश्चित हैं… अटल हैं…. इसमे कोई संदेह नहीं…. इस विषय में भारत से भी ज्यादा विश्वास पकिस्तान पर हम रख सकते हैं।

सेना पर हमले जैसी घटना भारत कि अंदरूनी कमजोरी को प्रमाणित करती हैं। यदी कोई सरकार पर यह मुद्दा उठाकर विरोध करे की – कैसे आतंकी घुस आये अथवा क्यों हमारी सुरक्षा प्रणाली विफल हुइ तो यह अत्यधिक सटीक विरोध होगा।

लेकिन जैसा कि धर्म कहता हैं व महाभारत में श्री कृष्ण ने बताया हैं कि युद्ध विकल्प अवश्य हैं किंतु इस  विकल्प का स्थान सारे विकल्पों में केवल आखरी होना चाहिए….. वह कदापि क्रम में आखरी स्थान से बदल नहीं सकता।क्योंकि युद्ध का निर्णय ना ही विरोधी के और ना ही स्वयं कि क्षमता के आकलन पर होना चाहिए, एसा करना क्षत्रियों कि प्रकृति नहीं, युद्ध का निर्णय मात्र धर्म, स्वाभिमान व मात्रभुमी कि रक्षाहेतु होना चाहिए। और वह भी तब, जब सारे विकल्प समाप्त हो। एसा इसलिये क्यों कि युद्ध का निर्णय हर तरह से अमानवीय, प्रकृति विरोधी व हिंसात्मक पवृत्ती का होता हैं।

भारतीय जवानों पर हमले अवश्य ही आहत करते हैं और यह स्थिति भारतीय इतिहास कि ना ही पहली घटना हैं और ना ही आखरी हो सकती हैं…विकल्प रहते हुवे युद्ध चुनना ना ही पिछली सरकार के धर्मपरायणी होता और ना ही वर्तमान सरकार के लिए। ये अलग विषय हैं कि पिछली सरकार कायरता के वशीभूत युद्ध का निर्णय नहीं ले सकती थी किन्तु आज कि सरकार के साथ वह स्थिति नहीं हैं।

अब तक भारत एसी घटनाओ पर जिस तरह कि प्रतिक्रिया देता रहा हैं आज भारत ने इतिहास को बदल कर अपने तेवर ना केवल सर्वाधिक सख्त कर लिए हैं… बल्कि अंतराष्ट्रीय कुटनीती में भी नया आयाम हांसिल किया हैं जिसमें प्रमुख देशों का समर्थन हासिल हैं। एसी स्थिति में भारत के पास अनेको कुटनीतीक विकल्पों का भंडार हैं फिर युद्ध क्यो? युद्ध कर भारत पाकिस्तान पर विजय अवश्य हासिल कर लेगा इसमे कोई संदेह नहीं… यह बेहद आसान भी हैं… लेकिन अन्य विकल्पों के रहते हुवे एसा करना ना ही धार्मीक होगा और ना ही सर्वश्रेष्ठ! साथ ही विश्व को भी अवसर मिलेगा लांछन लगाने का कि भारत ने अपनी ताकत का घमंड दिखा दिया चुँकी अब तक तो विश्व पाकिस्तान को आतंकवादी देश भी नहीं मानता। अत: भारत के लिए सर्वप्रथम अन्य सारे विकल्पों को अपनाते हुए पहले पकिस्तान कि शराफत भरे वस्त्र उतारना बेहद जरूरी हैं। यदि इसमे सफलता मिली तो कदापि युद्ध कि आवश्यकता ही ना पडे़ और यदी युद्ध का सामना भी हो तो कोई भारत के सम्मान पर किसी तरह का लांछन ना लग सके।

जिन्हें धर्म का ज्ञान हैं… सिर्फ वे ही तटस्थ हैं….. शेष तो मात्र विचलित, अस्थीर व भयभीत हैं 🚩

कहते हैं मोदी भीड़ जाओ!

उन्होने तो दस साल के बच्चों को भी डट कर तैयार कर लिया हैं…
ओर हमारे तो 25 साल के मुछतंडे भी अभी आमीर-शाहरूख की दीवानगी से उभर नहीं पा रहे….

…. कहते हैं मोदी भीड़ जाओ⁉

उन्होने तो अपनी स्कूलों व मस्जिदों तक में हथियार भर लिये…
और हमारे जवानों से हम पैलेट गन भी छिनने से चुके नहीं….

…. कहते हैं मोदी भीड़ जाओ⁉

उन्होने विरोधी को मिटाने के लिए पूरे बलूचिस्तान को गुलाम कर लिया…
और हम हैं कि पाकिस्तान परस्तों से अब तक सरकार को वार्ता के रास्ते तलाशने को लगाते रहे….

…. कहते हैं मोदी भीड़ जाओ⁉

उन्होने तो भारत से नरमी रखने वाली अपनी खुद की सरकारों को पलट दिया…
और हम दशकों से पाक परस्तों को सरकारे सौंपते रहे…

….. कहते हैं मोदी भीड़ जाओ⁉

वाकई में पाकिस्तान कम से कम इस सुरत में तो भारत से कहीं बेहतर हैं कि उसने हिंदुस्तान कि तरह गद्दार नहीं पाल रखे….

…. कहते हैं मोदी भीड़ जाओ⁉

हुवा युद्ध तो भुखे रहकर हथियार उठाने होंगे….

एक तरफ पाक तो दूसरी ओर चीन को सबक सिखाने होंगे….

बाहर के दुश्मन तो अब भी दुर ठहरे….

सारे बुद्धिजीवी, राजनेता, पत्रकार जो दुश्मनों को शय दे, उनके संसार गिराने होंगे….

सीमापार संग्राम कि लालसा बाद में पालना पहले तो घर के ही भीतर से गद्दार मिटाने होंगे….

गर इसके लिए हो सको तैयार
तो करना फिर पुकार…

======>>> मोदी अब भीड़ जाओ 🔥

#JaiHindKashmir Thank You Zee News

#JaiHindKashmir
#AsliKashmir
#AdharmInKashmir

कश्मीर पर आजाद रिपोर्टींग के तहत जब @ZeeNewsHindi पर @sudhirchaudhary ने अपने @DNA में हकीकत बयां कर देने वाली कश्मीरी देशभक्तों कि दास्तां चलायी….

कश्मीर का भारत विरोधी चेहरा बनाने वाले कट्टरपंथियों और दिखाने वाले आतंकप्रेमी पत्रकारों के पैरों तले जमीन खिसकने लगी…

खसकती कैसे नहीं…. भारत विरोधी एजेंडे के तहत कश्मीर पर करोडो रूपये बर्बाद करने के बाद भी आखिर जी न्यूज ने देशभक्त कश्मीरियों को टीवी पर दिखा कर इनकी दिनरात लगा कर बिछाई गयी आतंक कि चादर पल में उडने जो लग गई…

नतीजतन,  जीन कश्मीर के जिन हिस्सों से रिपोर्टींग कि गई थी वहाँ के लोगों को धमकाने का जिम्मा कट्टरपंथियों ने संभाला….

और जी-न्यूज कि रिपोर्ट को बनावटी साबित करने का जिम्मा मिडीया के आतंकप्रेमी दलाल पत्रकारों ने संभाला…

जहाँ कट्टरपंथियों ने देशभक्त कश्मीरियों को व उनके बच्चो को जान से मारने कि धमकी दे डाली….

वहीं डिजाइनर पत्रकारों ने लेख लिखकर यह जाहिर करने की कोशिश  शूरु कर दी कि जी न्यूज कि इस रिपोर्ट के खिलाफ गांव के लोग जी न्यूज के खिलाफ उतर रहे और कह रहे कि यह खबर झूठी हैं…

मतलब चंद भाडे के टट्टू काले झंडे दिखाए या पत्थरों से सेना पर हमला करे वो सच…. और जो कश्मीरी भारत माता की जय के नारे लगा कर सामने आये वे बनावटी….

इन देशभक्त कश्मीरियों पर मात्र कुछ घंटो पर इस कदर दबाव डाला गया कि उन्हे जी न्यूज चैनल को फोन कर रिपोर्टींग बंद करने को कहना पडा… करते क्यूं नहीं आखिर बाल-बच्चों कि जान पर जो आ पडी….

आज जी न्यूज को भी इन कश्मीरियों कि परवाह करते हुए अपनी रिपोर्टींग में इनके चेहरे छुपाने पड़े… लेकिन सवाल देश का था इसलिये रिपोर्टींग जारी रही….

इस आजाद रिपोर्टींग से जो मुद्दे कि बात उभरकर आई वह यह हैं कि कश्मीरी आवाम पर किस कदर विदेशी पैसों पर पलने वाले कट्टरपंथियों अपना कब्जा कर लिया हैं….

ऐसे दंगो व आतंक से इन कट्टरपंथियों का धंधा तो दिनरात फलफूल रहा हैं लेकिन आम कश्मीरी दो वक्त कि रोटी के लिये भी कर्फ्यू से बंद कमरे तरस रहा हैं।

प्रश्न यहीं हैं कि हम भारतीय क्या कर सकते हैं…..

— हमें देशभक्त कश्मीरियों कि आवाज को ताकत देने के लिये इस सच्चाई को जन-जन तक पहुंचाना  होगा…
— हर वो आतंकप्रेमी पत्रकार जो भारत विरोधी एजेंडे को बढावा देने के लिए छटपटाता दिखता हैं,  उसका बहिष्कार करना होगा
— हमारी इन दोनो पहलों से जहाँ देशभक्त कश्मीरियों को हिम्मत मिलेगी वही कट्टरपंथियों के हौसले टुटेंगे
— भारतीय सेना को पुरी छुट व समर्थन मिलता रहे इसके लिए भी राष्ट्रव्यापी अभीयान निरंतर चलना चाहिए

जयहिंद, जय भारत

।। वंदेमातरम्।।

हैदराबाद में ISIS समर्थक

घटना हुई नहीं तो छोटी ही लगेगी…
पर जानिये जरूर… क्यूँ की कभी भी घट सकती हैं!

हैदराबाद में शांतीप्रीय ISIS के 11 समर्थक गिरफ्तार किए गए थे जिनमें से 5 को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इनके पास से कइ तरह के हथियार व बम सामग्री भी बरामद कि गई थी।

इन शांतिदुतों की साजिश कइ “हिंदुत्व रक्षकों” कि हत्या कर एसा भयानक दंगा छेडने कि कोशिश थी कि पुरा भारत दहल उठे। इनकी हत्या कि सूची में हैदराबाद के राजा भय्या भी शामिल थे जिन्होंने वहाँ के ही औवेसी के जिहादी कारनामों को कइ बार खुली चुनौती दी व खुद कि सेना बना कर गौ-रक्षा के लिए कइ दफा खुँखार कसाईयों से भिड गये। हिंदुत्व के लिये इतने कडे संघर्ष के बाद भी बेहद कम ही लोग होंगे जो इस मात्रभूमि के रक्षक को जानते होंगे। इनसे ज्यादा ख्याति तो हमारे बिकाऊ मिडिया वालों ने गद्दार औवेसी को दिलाई हैं…! हाँ, अगर शांतिदुत कामयाब हो जाते तो शायद कहीं एकआद बार राजा भय्या का भी नाम ले ही लेते! आज यही औवेसी इन पकडे गये आतंकीयों को कानूनी सहायता मुहैया कराने का एलान कर रहा हैं।

शाँतीदुतों के निशाने पर हैदराबाद का अतीप्रचीन भाग्यलक्ष्मी मंदिर भी था जिसपर मांस के टुकड़े फेक कर व मंदिर को बम से उडाने की साजिश थी जिससे दंगा भड़क उठे। यह वही मंदिर हैं जिसे बंद करवाने कि कई कोशिशें वहाँ के स्थानीय शांतीप्रीय धार्मीकों द्वारा पहले ही कि जा चुकी हैं और इसके लिए उनकी दलील थी कि मंदिर कि घंटी कि आवाजे उनकी धार्मीक मान्यता के खिलाफ हैं व इससे उनका धर्म भ्रष्ट होता हैं।

अब तक एसी कई साजिशों को नाकाम करने वाली भारतीय सुरक्षा एजेंसीयों की यह एक और बडी कामयाबी।

लेकिन एसी ना जाने और कितनी साजिशे अभी देश के विभिन्न भागों में पल रही होगी… इन शांतीप्रीयों के “स्लीपर” सेल तो तैनात हैं ही….

आप भी सतर्कता बरते, संयमित रहे और जागृत अवश्य रहे…

ना भी जागृत हुवे तो कोई बात नहीं, शांतिप्रीय दूत तो अपने जिहाद पर मुस्तैदी से लगे ही हुवे हैं… आखिर शांति जो फैलानी हैं!

जय हिंद।

#PMSpeaksToArnab

#PMSpeaksToArnab

भारत के प्रधानमंत्री पद रहते हुए किसी ने निजी समाचार चेनल को साक्षात्कार दिया एसा पहली बार हुआ…  नरेंद्र मोदी के साक्षात्कार पर एक सारांश…

# गरीबी #

जनधन योजना, जिवन बीमा जैसी अनेको योजनाओं से गरीबों को जोड़ा गया जिससे उनका जिवन स्तर बेहतर होगा व देश की मुख्य धारा में गरीब भी जुड कर देश के विकास में भागीदार बन सकेगा।

स्वच्छ भारत व घर-घर शौचालय का सबसे पहला लाभ यदी किसी को मिलना हैं तो वह गरीब हैं जिससे उनका स्वास्थ्य बना रहेगा व बिमारी से कम जुझना पडेगा।

अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक सरकार की योजनाओं के लाभ पहुंचाने को सरकार प्रतिबद्ध हैं।

# रोजगार #

भारतीय रेल, सड़क व इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रसार से ना केवल विकास का उद्देश्य सुलझ रहा बल्कि लाखों लोगों को रोजगार भी मिल रहा।

नियमों में बदलाव कर शापींग माल सहित कई दुकानों को २४ घंटे सेवा देने कि छुट दि जा रही हैं जिससे नये रोजगार के अवसर बनेंगे।

स्टेंड अप इंडीया व स्टार्ट अप इंडीया के जरिए भी युवाओं को मौका मिला हैं जिससे वे स्वयं का भविष्य खुद निर्माण भी कर सकेंगे साथ ही साथ औरों को रोजगार भी देंगे।

प्रत्येक बैंकों कि शाखाओं को निर्देश दिया गया हैं कि वे एक महिला व एक आदिवासी को व्यापार के लिये कर्ज दे यह भी रोजगार बढ़ाने कि दिशा में एक बड़ी पहल हैं।

100% FDI भी रोजगार बढ़ाने में मददगार साबित होगी। विश्व स्तर पर भारत के बदले स्वरूप ने विदेशी निवेशकों के लिये भारत आज प्रथम श्रेणी में हैं।

# महंगाई #

२०१४ के पहले जिस रफ्तार से महंगाई बढ़ती जा रही थी,  हमने उस पर लगाम लगाइ हैं।

दो साल के सुखे के कारण कृषी उत्पाद घटा हैं जिससे दाम नहीं घटे।

पिछले कुछ सालों से किसानों का रूख गन्ने के उत्पादन कि तरफ बढ़ने से दाल के उत्पादन में भारी कमी आई जिससे दाल कि किमत बढी़।

किसानों को दाल उत्पादन पर अच्छी किमत व बोनस जैसे प्रतिबद्धता दे कर हम जोर दे रहे हैं जिससे दाल का उत्पादन बढ़े व उम्मीद हैं कि आने वाले दिनों में किमत घटेगी।

# किसान #

सरकार ने किसानों कि वर्षा पर निर्भरता को हटाने के लिए अभुतपूर्व प्रयास किये हैं जिसका असर आनेवाले दिनों में दिखेगा।

यूरिया कि नीम कोटिंग से कृषि के लिये सब्सडाईज्ड यूरिया अब मात्र किसानों के उपयोग हेतु सुनिश्चित हो चुका। इससे यूरिया से जुड़ी किसानों कि मुश्किलें भी आसान हुई व जमीन को भी नीम के गुणों का लाभ मिल रहा।

आजादी के बाद पहली बार अब किसान अपनी फसलों का बीमा करवा सकेगा जिसमें मात्र खेत जोतने तक के नुकसान से लेकर कटी फसल के खराब होने तक के नुकसान में किसान का हित सुरक्षित रहेगा।

खेती के सोईल कार्ड से किसानों को उनकी जमीन के विषय में जानकारी दी जा रही जिससे उन्हे किस तरह की फसल उनके लिए लाभदायक हैं वे जान सकते हैं।

पहले किसान अपनी अनाजों को मंडी तक ले जाता था और उसे मजबूरी में मंडी के दाम पर बेचना पड़ जाता था लेकिन अब इ-मंडी के जरिये किसान को मात्र मोबाइल के जरिए पता चल सकेगा कि किस मंडी में कितना भाव हैं।

किसानों के प्रति हमारी सरकार पुरी तरह से जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

# आतंकवाद व पडोसी देश #

पडोसियों से मित्रता भारत की कुटनीती का पहला उद्देश्य।  पाकिस्तान में चुनी हुई सरकार से वार्ता जरूरी किंतु सिमा पर सेना को हर तरह कि छुट। पकिस्तान में वार्ता कि लक्ष्मण रेखा निर्धारित करने जैसा कोई मजबूत संघीय स्तर नहीं। वार्ता के मेज पर अधिकारी अपना काम करेंगे व सिमा पर हमारे जवान अपना काम करेंगे।

सेना के अथक प्रयासों से यह संभव हुवा हैं कि आज आतंकवादीयों कि प्रत्येक कोशिशें रस्ते में ही नाकाम हो रही।  सेना पर आतंकी हमले उनकी यही बौखलाहट हैं।
सेना के बलिदान पर हमें गर्व हैं जिनकी ताकत पर हमारी सिमाये पूर्णतया सुरक्षित हैं।

चीन स्वयं एक राष्ट्र हैं जरूरी नहीं कि हमारे विचार पुरी तरह से मेल खाये किंतु हमारे लिये यह महत्वपूर्ण हैं कि हम जब भी उनसे व्यवहार करे राष्ट्रहित सर्वोपरि हो। आज हम चीन से आँख मिलाकर राष्ट्रहित के मुद्दे रखते हैं जिसका असर कई क्षेत्रों में हमें मिल रहा हैं।

# अंतराष्ट्रीय #

30 साल के बाद 125 करोड़ लोगों ने जो पूर्ण बहुमत की सरकार को चुना हैं जिसने पुरी दुनिया के नजरिये को भारत के प्रति बदल कर रख दिया। अंतराष्ट्रीय नेताओं से मिलने का कोई अनुभव न होते हुए भी हमारे कार्यकाल में अंतराष्ट्रीय समूहों से भारत को स्वीकृति मिल रही। कोई सोच नहीं सकता था कि #MTCR में कभी भारत भी शामील हो पायेगा लेकिन आज यह वास्तविकता हैं।

हमारे लिये अरब भी उतना ही अहम हैं जितना कि इरान, हम अमेरिका को भी उसी नजर से देखते हैं जैसे कि रूस को। हम ना केवल बडे देश बल्कि छोटे-छोटे देश से हमारे रिश्तों को भी महत्वपूर्ण मानते हैं।

# मोदी सरकार कि अब तक की सबसे बडी उपलब्द्धी #

पिछली सरकार के दस सालों के कार्यकाल में महंगाई, भ्रष्टाचार व अंतराष्ट्रीय मोर्चे पर भारत कि असफलता ने जिस तरह देश कि जनता को एक निराशा भरे महौल में ढकेल दिया था हमारी सरकार लोगों को एसे निराशा भरे माहौल से उभारने में सफल हुई यह हमारी सबसे बड़ी उपलब्धी हैं। आज लोग सरकार के प्रति ना केवल आस्वस्त हैं बल्कि बढ़-चढ़ कर अपना योगदान भी दे रहे जैसा कि स्वच्छ-भारत के लिये बुजुर्ग शिक्षक का हर माह अपना एक तिहाई पेंशन भेट कर देना, एसी अनोखी घटनाये भारत के उज्जवल भविष्य के शुभ संकेत हैं।

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यह हमारे “घटीया” मिडिया तंत्र का ही सबसे स्टिक उदाहरण हैं कि एक घंटे पच्चीस मिनट के इस साक्षात्कार में बिकाऊ मिडिया को अत्यधीक महत्वपूर्ण मुद्दा मात्र यही मिला कि नरेंद्र मोदी ने सुब्रमण्यम स्वामी को फटकार लगायी जैसा कि लगभग प्रत्येक चैनलों कि ब्रेकिंग न्यूज के साथ ही साथ प्राइम टाईम बहस का मुद्दा भी बना और तो और अगली सुबह समाचार पत्रों के पहले पेज कि टॉप हेडिंग में भी नजर आया।

बस! यही हैं हमारी #प्रेस्यावृत्ती (#Presstitute) का स्तर।

।। जय हिंद ।। वंदेमातरम् ।।

बिकाऊ पत्रकारिता – प्यास पर करोड़ों का बिल!

” लातूर में जल पहुंचाने के लिये दो कोरोड का बील”
    मोदी विरोधी बिकाऊ पत्रकारिता का उदाहरण

पिछले दशक से ज्यादा सूखे की मार झेल रहे लातूर में पहली बार किसी सरकार ने अपनी संवेदनशीलता को दिखाते हुवे करोडो लिटर पानी ट्रेन के जरिए पंहुचाकर विषम परिस्थितियों में सरकार द्वारा अदा की जाने वाली भुमीका को एक नये सिरे से स्थापित किया।

जहाँ पिछली सरकारों ने एसी स्थिति का राष्ट्र विरोधी लाभ लेते हुए गोहत्या व धर्मपरिवर्तन जैसे अनगिनत साजिशों को रचा वहीं मोदी सरकार के इस अभुतपूर्व उपलब्द्धीयों कि जितनी सराहना की जाये वह कम होगी।

लेकिन मोदी विरोधी विदेशी मशीनरीयों के हाथों कि दलाल मिडिया-जगत को सरकार कि यह पहल हजम नहीं हो पा रही। वे जनता के मन में बढ रहे मोदी नाम के विश्वास से छटपटा रहे और इस विश्वास को धुमील करने कि ही कोशिश में ‘प्यास पर करोडो के बील’ जैसी खबर आज लगभग देश के हर प्रमुख अखबारों में छपी मिल रही।

एक सामान्य व्यवहारिक तौर पर मुद्दा में गंभीरता शुन्य के बराबर हैं। यदि करोड़ों का बिल बना तो भी यह रेल प्रशाशन के वित्तीय विभाग का एक निर्धारित कार्य हैं। क्यूंकि यदि रेल विभाग से गाड़ी चली हैं तो उसके खर्च को दर्ज करना एक स्वाभाविक प्रक्रिया हैं। यदि बिल रेल विभाग द्वारा महाराष्ट्र सरकार को भेजा भी गया तो भी यह एक औपचारिकता हैं। इस बिल का भुगतान या समायोजन केंद्र सरकार या राज्य सरकार का विषय हैं। किसी भी रूप इसे लातूर के लोगो से तो वसूला नहीं जाना हैं लेकिन फिर भी इस तरह की ख़बरों को उठा कर लोगों की संवेदनाओ को भड़काने का प्रयास किया जा रहा। यह तो सौभाग्य हैं की दोनों, राज्य व् केंद्र, सरकारें भाजपा की हैं अन्यथा यह भी आरोप लगते देर न लगती की मोदी ने राज्य की कांग्रेसी सरकार को बिल थमाया दिया!

मोदी सरकार कि यह वास्तव में एक बडी पहल थी क्यूँ की भुतकाल कि सरकारों ने भले ही एसी स्थितियों को निर्दयता से नजर अंदाज किया हो किंतु अब भविष्य की सरकार एसा नहीं कर सकेगी।

यह पहली बार नहीं की जब बिकाऊ मिडिया ने मोदी सरकार के अथक व अभूतपूर्व प्रयासों पर अपनी वेश्यावृत्ति से भी औछीं पत्रकारिता का परिचय दिया हैं।  पूर्व में जब जन. वि. के. सिंह द्वारा सैकड़ों भारतीयों को युद्ध कि जमीन से सुरक्षित वापस लाने जैसा बेहद सराहनीय कार्य को अंजाम दिया था तब भी बजाय कि उनकी तारीफ करे, उनके #Presstitute वाले बयान का बखेडा खडा कर उन्हे घेरने कि कोशिश कि गई थी।

आज जनता कि जागरूकता ही पत्रकार रूपी मक्कार भेडीयों का एक मात्र करारा जवाब हो सकती हैं इसलीए सजग रहे,  सतर्क रहे।

।। वंदेमातरम्।।