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कहते हैं मोदी भीड़ जाओ!

उन्होने तो दस साल के बच्चों को भी डट कर तैयार कर लिया हैं…
ओर हमारे तो 25 साल के मुछतंडे भी अभी आमीर-शाहरूख की दीवानगी से उभर नहीं पा रहे….

…. कहते हैं मोदी भीड़ जाओ⁉

उन्होने तो अपनी स्कूलों व मस्जिदों तक में हथियार भर लिये…
और हमारे जवानों से हम पैलेट गन भी छिनने से चुके नहीं….

…. कहते हैं मोदी भीड़ जाओ⁉

उन्होने विरोधी को मिटाने के लिए पूरे बलूचिस्तान को गुलाम कर लिया…
और हम हैं कि पाकिस्तान परस्तों से अब तक सरकार को वार्ता के रास्ते तलाशने को लगाते रहे….

…. कहते हैं मोदी भीड़ जाओ⁉

उन्होने तो भारत से नरमी रखने वाली अपनी खुद की सरकारों को पलट दिया…
और हम दशकों से पाक परस्तों को सरकारे सौंपते रहे…

….. कहते हैं मोदी भीड़ जाओ⁉

वाकई में पाकिस्तान कम से कम इस सुरत में तो भारत से कहीं बेहतर हैं कि उसने हिंदुस्तान कि तरह गद्दार नहीं पाल रखे….

…. कहते हैं मोदी भीड़ जाओ⁉

हुवा युद्ध तो भुखे रहकर हथियार उठाने होंगे….

एक तरफ पाक तो दूसरी ओर चीन को सबक सिखाने होंगे….

बाहर के दुश्मन तो अब भी दुर ठहरे….

सारे बुद्धिजीवी, राजनेता, पत्रकार जो दुश्मनों को शय दे, उनके संसार गिराने होंगे….

सीमापार संग्राम कि लालसा बाद में पालना पहले तो घर के ही भीतर से गद्दार मिटाने होंगे….

गर इसके लिए हो सको तैयार
तो करना फिर पुकार…

======>>> मोदी अब भीड़ जाओ 🔥

सत्य कि राह

सुनने की आदत डालो क्योंकि 
ताने मारने वालों की कमी नहीं हैं।

मुस्कराने की आदत डालो क्योंकि
रुलाने वालों की कमी नहीं हैं।

ऊपर उठने की आदत डालो क्योंकि
टांग खींचने वालों की कमी नहीं है।

प्रोत्साहित करने की आदत डालो क्योंकि
हतोत्साहित करने वालों की कमी नहीं है!!

छोटी छोटी बातें दिल में रखने से
बड़े बड़े रिश्ते कमजोर हो जाते हैं

और बड़ी-बड़ी बातो को भुला देने से
दुश्मन भी अपने हो जाते हैं

जिवन वही जो दूसरों का जिवन बदल डालें
स्वप्न में जीने वालों में सत्य सहने का साहस डालें

कभी पीठ पीछे आपकी बात चले
तो घबराना मत …
बात तो “उन्हीं की होती है”
जिनमें कोई तो ” बात ” होती हैं…

क्युँ की सच्चा व्यक्ति ना तो नास्तिक होता है
ना ही आस्तिक होता हैं।
सच्चा व्यक्ति हर समय केवल वास्तविक होता है…..

“निंदा” उसी की होती हैं जो”जिंदा” हैँ
मरने के बाद तो सिर्फ “तारीफ” होती हैं…

——- ध्यान रखना – – – – – – –

सत्य भी केवल तब तक सत्य रह सकता हैं
जब तक उसका साथ देने वाले जिंदा हैं…

मौत से भी पहले वे मर जाते हैं जिनमें
सत्य का साथ देने का सामर्थ्य खत्म हो जाता हैं…

।। वंदेमातरम् ।।

(संकलित व संपादित कविता)

Breaking India Conspiracy

######## पुरा पढे और समझे #######
### भारत को तोडने का विदेशी षडयंत्र ###

मई 2014 नरेंद्र मोदी pm बन गए

रिपोर्ट आई की इस बार मोदी को एक तरफ़ा वोट मिला

1) नोजवानों से ,
खासकर कॉलेज छात्रों से

2) कमजोर तबकों से,
खासकर दलितों से

3) हिन्दू समाज से,
खासकर मध्यम वर्ग से

4) गुजराती लोगों से,
खासकर पटेलों से

5) मुस्लिम समाज से,
खासकर गरीब मुस्लिम से

6) महिलाओं से,
खासकर धर्मप्रेमी महिलाओं से

7) व्यापारी वर्ग से,
ख़ासकर छोटे मझोले वर्ग से

8) देश के थिंकटैंक से,
खासकर बुद्धिजीवी वर्ग से

ऐसे कई कई वर्गों ने अपनी पुश्तैनी राजनीतिक निष्ठां को दरकिनार कर मोदी को वोट दिया। कश्मीर से कन्याकुमारी तक यही देखने में आया। हर राजनीतिक दल ने इसे पुरे भारतवर्ष में महसूस किया।

इसका जो तोड़ विदेशी षडयंत्र कारीयों ने निकाला उसका नतीजा आज हमारे सामने है।

सबसे पहले हर उस वर्ग को चिन्हित किया गया जिसने मोदी को एक तरफ़ा वोट दिया। फिर उस वर्ग की  “दुखती नस” को पकडा गया और खेल शुरू हुआ…..

बेहद सटीक और बारीकी से चुन चुन कर इन वर्गों को नीशाना बनाया जाने लगा। किरदार लिखे गए और हर वर्ग को एक टार्गेटेड किरदार दिया गया। उसकी टाईमिंग तय की गई जिसका रिमोट विदेशी ताकतो ने अपने हाथों में रखा हैं…

प्रमुख विपक्षी दल (जो दिखावे के लिये भीन्न हैं किंतु आचरण से एक हैं) व भांड मीडिया जो आज तक विदेशी हाथों के रखेल बनकर भारत को लुटने और बर्बाद करने में अपनी भुमीका नीभाते आ रहे अब सब एक साथ मोदी सरकार को घैरने को उतारू हो चुके थे।

मकसद इन सबका एक था…
हर वर्ग को तोडना,
हर वर्ग को जहर से भरना,
हर वर्ग को छिन्न भिन्न करकें रखना ,
ताकि फिर वो भविष्य में,
कभी एक होकर वोट ना दे….भारतीय समाज का आपसी मतभेद ही इनकी अबतक की सबसे बडी ताकत रही हैं ।

अब आप खुद इस बड़े से खेल को समझिये,
इनकी परफेक्ट टाइमिंग को समझिये,
इनके “वेल-प्लेसड” किरदारों को देखिये,
षडयंत्रकारी स्क्रिप्ट को पढ़िए और समझीये कि विदेशी शातीरों ने किस कदर भारतीय समाज पर PHD कि हैं और वे किस तरह वे भारत को भारतीयों के हाथों ही बर्बाद करने के लिये एक से बढकर एक पाँसे फेकते जा रहे और भारत का आम आदमी समझ ही नहीं पा रहा की आखिर देश में चल क्या रहा।

यदी आप विपक्षी नेताऔ कि बयान बाजी व मिडीया द्वारा मोदी सरकार के खिलाफ उठाये जा रहे प्रत्येक मुद्दो पर सटीक नजर रखेंगे तो इनके हर बयान व हो रही घटनाऔ की एक परफेक्ट टाइमिंग स्पष्ट रूप से रखी दिखेगी।

1) देश में जीतीवाद बढाने के लिये
अचानक जाट आरक्षण आंदोलन के उग्र किरदार

2) वामपंथीयों के लिए
JNU वाला उमर खालिद किरदार

3) दलित वर्ग के लिए
रोहित वेमुला वाला किरदार

5) नोजवान वर्ग के लिये
फ़िल्मी खान वाला किरदार

6) गुजरती पटेलों के लिए
हार्दिक पटेल वाला किरदार

7) मुस्लिम वर्ग के लिए
अख़लाक़ वाला किरदार

8) महिला वर्ग के लिए
शनि शिंगापुनकर वाली किरदार

9) व्यापारी वर्ग के लिए
GST वाला किरदार

10) बुद्धिजीवी वर्ग के लिए
एवार्ड वापसी वाले असहिष्णुता वाले किरदार

इन सारे मुद्दो में पर घौर करीये, हैरान हो जाऔगे…इन प्रत्येक किरदारो के तार या तो किसी गैर-सरकारी NGO से या फिर राजनीतीज्ञों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुडे हुवे हैं| मुद्दा बनवाने के लिये ये कितनो के ही कत्ल करवा सकते हैं और किसी भी मौत का तमाशा खडा कर सकते हैं| इन मुद्दो में नया कुछ भी नहीं हैं, मुद्दे वही हैं जिसे उठवा कर अंग्रेजो ने पहले भारत को गुलाम बनाया और आज भी विदेशी ताकते पर्दे के पीछे से कमान संभाले हुवे हैं| बदलाव सिर्फ इतना हैं की घटनाक्रमों को ज्वलंत बनाने के लिये तरो-ताजा किरदार इस्तेमाल किये गये।

इन षडयंत्रकारीयों की स्क्रीप्ट यहीं खत्म नहीं हुई हैं, भविष्य में और भी किरदार सामने लाये जायेंगे, अपनी परफेक्ट स्क्रिप्ट और टाइमिंग के साथ। आपको , हमको , हिंदुस्तान को तोड़ने की साजिश के साथ।

एसा नहीं हैं कि मोदी सरकार इससे अनजान हैं। उन्हे इसका अंदाजा सरकार बनाने के पुर्व ही था जिसके चलते ही मोदी ने सरकार बनाते ही गैर-सरकारी संघठनो के विदेशी चंदो पर रोक लगा दी थी जिसमे Green Pease India व अमेरिका की CIA द्वारा संचालीत FORD Foundation अहम थी। इस वजह से भी विदेशी षडयंत्रकारी पुरी तरह खिसयाए हुवे हैं।

जिन्हे इस लेख पर विश्वास नहीं और “विदेशी षडयंत्रकारीयों” कि बाते मात्र काल्पनीक या मन गढत सी लगती हो उनकी शंका समाधान हेतु उन्हे दो अन्य श्रोत बताना चाहुँगा जस पर वे Google गुरू से पहोंच सकते हैं…
१) प्रसिद्ध व राष्ट्रवादी लेखक – राजीव मलहोत्रा जी – की किताब Breaking-India-Forces को पढ सकते हैं
२) गुगल गुरू पर सर्च किजीये – America CIA Role in breaking India

|||| सजग रहिएगा, सतर्क रहियेगा ||||

हम “अनेक” थे
हम “अनेक” हैं
हम “अनेक” ही रहेंगे
“अनेकता में एकता” यही हमारी विशेषता हैं और यही हमारी ताकत भी हैं और भारत के उज्वल भविष्य एक मात्र मार्ग भी यही हैं।

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(संकलीत व संपादीत लेख)

दादरी v/s मालदा

#### दादरी v/s मालदा #####

एक तरफ “दादरी”, एक तरफ “मालदा”
एक में सिर्फ सेकडो थे तो एक में जमा हुवे थे लाखों
एक भडकाया गया था, एक “खुद-ब-खुद” भडक गया

एक में जो हत्या हुई थी वह था निर्दोष
एक में पीडीतो का ही नीकाला गया दोष

एक में मानवता हो गई थी शर्मशार
एक में धार्मीक भावना बनी आधार

एक में “हिंदुऔ” ने मचाया था कोहराम
एक में “असमाजीक” तत्वो का आया नाम

एक में हिंसक हुवे थे तुरंत बंदी
एक में अब तक खोज रहे हुडदंगी

एक पर मिडीया में ब्रेकिंग पर ब्रेकिंग न्युज
एक पर सारे मिडीया एक साथ फ्युज

एक पर सारे सेक्युलर नेताऔ को खुली मीली थी छुट
एक पर गलती से भी कोई जो पहोंचे…तो मौके कि “लुट”

एक पर देश का सेक्युलरीज्म लग गया था फटना
एक पर यह रह गई बनकर मात्र एक “स्थानीय” घटना

एक पर असहिष्णुता बना दी गई थी राष्ट्रीय आपदा
एक कि खबर अब भी तरस रही बनने को मुद्दा

एक पर पुरी गैंग ने अवार्ड वापसी को बनाया था हथीयार
एक के लिये आवाज उठाने को कोई नहीं हो रहा तयार

एक पर क्या शाहरूख! क्या आमीर!
सबके दिख गये थे “आँसु”
एक पर ये अपनी कला दिखाकर
छिपाते फिर रहे हैं “मुँह”!

एक से अल्पसंख्यक पड गये थे खतरे में
एक पर भला क्यों कोई पडे इस सदमें में

एक में लुटा दिये थे प्रसाशन नें रूपये मात्र ३४ लाख
एक पर अब भी जख्मी तलाश रहे न्याय की साख

कोई यह ना मान बैठे कि जो हुवा वह नसीब था
फर्क तो दोनो में होना बडा ही वाजीब था

एक तरफ देशभर में संगठीत सेक्युलर वोटबँक का सवाल था
और दुसरी तरफ….
आपस में ही लडने वाला,
धर्म को खिलौना समझने वाला,
राजनीती को गंदगी मानने वाला,
खुदगर्ज, नींद में डुबे रहने वालो का हाल था!!!

— दोनो घटना से व्यथीत —
— भविष्य के लिये चिंतीत —
— फिर भी तत्पर, सतर्क और कार्यरत —
— एक हिंदु राष्ट्रवादी —

|| वंदेमातरम् ||

सौगंध मुझे इस मिट्टी की

नरेंद्र मोदी जी की कविता
 
 
narendra-modi-kavita

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सौगंध मुझे इस मिट्टी की, मैं देश नहीं मिटने दूंगा।
मैं देश नहीं रुकने दूंगा, मैं देश नहीं झुकने दूंगा।।

मेरी धरती मुझसे पूछ रही कब मेरा कर्ज चुकाओगे।
मेरा अंबर पूछ रहा कब अपना फर्ज निभाओगे।।

मेरा वचन है भारत मां को तेरा शीश नहीं झुकने दूंगा।
सौगंध मुझे इस मिट्टी की मैं देश नहीं मिटने दूंगा।।

वे लूट रहे हैं सपनों को मैं चैन से कैसे सो जाऊं।
वे बेच रहे हैं भारत को खामोश मैं कैसे हो जाऊं।।

हां मैंने कसम उठाई है मैं देश नहीं बिकने नहीं दूंगा।
सौगंध मुझे इस मिट्टी की मैं देश नहीं मिटने दूंगा।।

वो जितने अंधेरे लाएंगे मैं उतने उजाले लाऊंगा।
वो जितनी रात बढ़ाएंगे मैं उतने सूरज उगाऊंगा।।

इस छल-फरेब की आंधी में मैं दीप नहीं बुझने दूंगा।
सौगंध मुझे इस मिट्टी की मैं देश नहीं मिटने दूंगा।।

वे चाहते हैं जागे न कोई बस रात का कारोबार चले।
वे नशा बांटते जाएं और देश यूं ही बीमार चले।।

पर जाग रहा है देश मेरा हर भारतवासी जीतेगा।
सौगंध मुझे इस मिट्टी की मैं देश नहीं मिटने दूंगा।।

मांओं बहनों की अस्मत पर गिद्ध नजर लगाए बैठे हैं।
मैं अपने देश की धरती पर अब दर्दी नहीं उगने दूंगा।।

सौगंध मुझे इस मिट्टी की मैं देश नहीं मिटने दूंगा।
अब घड़ी फैसले की आई हमने है कसम अब खाई।।

हमें फिर से दोहराना है और खुद को याद दिलाना है।
न भटकेंगे न अटकेंगे कुछ भी हो हम देश नहीं मिटने देंगे।।

सौगंध मुझे इस मिट्टी की मैं देश नहीं मिटने दूंगा।
मैं देश नहीं रुकने दूंगा, मैं देश नहीं झुकने दूंगा।।

 

— श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी —

क्या लखनऊ, क्या वाराणसी (कवीता)

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क्या लखनऊ, क्या वाराणसी
जब साथ खडा हर भारतवासी
हर आँखो में अब अरमान जगा हैं
रही ना दुसरी कोई आस बाकी

सौ-सौ कजरी-राहुल हाथ मिलाले
नमो सुनामी को रोक नहीं पायेंगे
जीत के आयेंगे दम पर अपने
देश के कोने-कोने में नमो छा जायेंगे

बीजेपी के नाम पर खडा कर दो जीसे भी
अब किसी को क्या फरक पड जायेगा
क्युँ की बटन कमल का दबाते वक्त भी
हमें तो चेहरा सिर्फ नमो का नजर आयेगा

— संजय त्रिवेदी

अब ये नशा ना छुट पायेगा ( कवीता )

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अब ये नशा ना छुट पायेगा ( कवीता )

नशा अगर सिगरेट का होता
तो गर्लफ्रेंड के लिये छोड देता…

नशा अगर शराब का होता
तो फेमिली के लिये छोड देता…

नशा अगर चरस-गांजे का होता
तो जीने की तमन्ना के लिये छोड देता….

नशा लगा भी तो लगा देशभक्ति का
ना छुटते बनता, ना छोडा जायेगा…

दुश्मनों का जनाजा तो उठना ही हैं एक रोज
मैं ना रहा तो मेरे बाद भी ये “नशा” क्रांति कि मशाल जलायेगा !!!

— संजय त्रिवेदी की रचना

जह हिंद, जय माँ भारती !!!