Category Archives: Poltics

वसुंधरा मुक्त राजस्थान (कविता) 

​समय रहते चेत उठो ओ बिजेपी के ठेकेदारों 

ना समझना के जनता तो बस यूँही रूठ जाती हैं

#उपचुनाव से सुन लो पुकार बस यही आती हैं 

वसुंधरा राजे गद्दी पर, “जरा” नहीं सुहाती हैं… 
कैसे मेडम नें बेरोजगारी का तांडव मचा रखा हैं

क्यों हिंदु रक्षा में उनकी सारी नितिया हुई पस्त

सत्ता के मद में हुवे सेकडो महारथी ध्वस्त 

गर अब ना जागे तो फिर आगे, मजा चखोगे “मस्त” 
सिर्फ “मोदी” नाम से हर बार ना संभल पाओगे 

“केंद्र” कि सफलता को क्या “राज्य” में गिनवाओगे! 

“मुख्यमंत्री” का दम अब बना मात्र खोखला हैं… 

बुझाता दिया फडक रहा, कैसे उजियारा फैलाओगे! 
कम शब्दों में समझो इतना, 

सोच समझ कर फैसला करना

वक्त गया अब बहुरूपियों का

बोलवचन अब बना हैं सपना
बलिदानी राजस्थान को

स्वीकार ना होगा कोई मद-सत्ता “भोगी” 

कण-कण मिट्टी जिसकी “हल्दी” 

मांग रहा फिर तुमसे एक कर्मठ “योगी”

~ संजय त्रिवेदी, हल्दीघाटी 

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हम तो भक्त ठहरे! 

*हम भक्त तो अवश्य ही हैं….*
कुछ लोग हमे मोदी भक्त कहा करते थे… हमे भी कहलाने मे गर्व ही महसूस होता था क्योंकि कोई हमे क्या कहे यह हमारी समस्या कभी रही ही नहीं। 
लेकिन ये क्या? कुछ दिन से हमने मोदी भक्ति छोड योगी भक्ति कि शुरूवात कर दी! आश्चर्यजनक हैं ना! कुछ लोग तो अब भी चक्कर खा रहे कि अब इन्हें मोदी भक्त कहे या योगी भक्त!!!
भाई, कन्फ्यूजन में मत रहो… जिस तरह मोदी भक्त का ठप्पा हमने गर्व से सिर माथे लिया वैसे ही योगी भक्त का ठप्पा भी सिर माथे लेने में उससे भी अधिक गर्व ही होगा। आप अपने शाही परिवार के शहजादो व दामादो का झंडा गाड़ते रहो फिर वे चाहे खुद को दमदार साबित करने के लिए मोदी व योगी पर कितने ही तंज अकारण कसते रहे। जिस तरह आप उसमें खुश…. हम अपनी भक्ति में खुश। 
दरअसल समस्या हमारी भक्ति में हैं ही नहीं क्यों कि हम तो हिंदुत्व नाम के रेगिस्तान में भटके उस यात्री कि तरह हैं जो जल के एक कुंड मात्र मिल जाने से उसे प्रभु के प्रसाद जैसा सम्मान देने लगते हैं। आखिर ये कुंड ही तो हैं जिनके सहारे हम और अधिक यात्रा (युद्ध) कर सकने कि हमारी क्षमता में वृद्धि कर सकते हैं। इसलिए हम तो भक्ति करेंगे ही और यह हमारा अंतिम निर्णय हैं। और हाँ, हम किसी एसे कुंड कि पूजा तो कतई कर नहीं सकते जो रेगिस्तान में दुर से कुंड नजर आये किंतु उसमें जल तो छोड़ो किचड से भी नदारद हो! इसलिए जिसे भी हमसे अपनी भक्ति करवानी हो वह स्वयं को उपस्थित कुंडो से भी विशाल करे। 
हालांकि, अब तो संघर्ष और भी जटिल हैं… क्यूँ की पहले तो प्रतिस्पर्धा मात्र मोदी से थी, अब तो सामने योगी नजर आ रहे! और यह तो विश्वव्यापी हो चुका हैं कि हिंदुत्व नाम के रेगिस्तान में एक कुंड बन कर जल संचय करना कितना तपस्वी हो चुका हैं। 
*… किंतु महाकाल के*
जय महाराष्ट्र 

​अब भोगी नहीं बल्कि योगी शासन करेंगे 

​अब भोगी नहीं बल्कि योगी शासन करेंगे 
नरेंद्र मोदी द्वारा योगी अदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाये जाने का सिधा संकेत…. 
🚩 भांड मिडिया कितना भी विधवा विलाप करले… मोदी को तिल जितना भी फर्क नहीं पड़ता 
🚩 विकास एजेंडा के चलते मोदी की हिंदुत्व के लिये निष्ठा अप्रभावित 
🚩 सेक्युलर किडो को कब-कहाँ-कितनी पेस्टीसाईड देने हैं यह मोदी अच्छी तरह जानते हैं… ये किडे आज भले ही तुरंत खत्म नहीं किये जा रहे, लेकिन इनकी जड़ों को खोदना शुरू हो चुका हैं 
🚩 उत्तर प्रदेश के विकास सहित सांस्कृतिक रक्षा हेतु मोदी बेहद गंभीर व पूर्ण रूप से परिपक्व 
🚩 यह उत्तर प्रदेश में राम मंदिर सहित राम-राज्य स्थापित करने कि और एक एतिहासिक कदम
🚩 भविष्य में मोदी के और अधिक तेज धारी व खतरनाक रणनीति का आगाज 
जय जय श्री राम 🚩🚩🚩

जाली नोटों के आंकड़े! 

​क्या आप नकली नोट लेकर बँक में जमा कराने कि सोच भी सकते हो!!!

लेकिन हमारा बिकाऊ मिडीया तो ऐसी ही उम्मीद लोगों में फैला कर झूठ का माहौल बनाने में लगा हुवा हैं। एक खबर लगभग हर चैनल पर बार-बार सुनाई अथवा पढ़ने में आ रही कि नौटबंदी पर सरकार के जाली-नोट का दावा झूठा सिद्ध हो रहा जिसकी वजह यह बता रहे कि RBI गवर्नर उर्जित पटेल यह आंकड़ा नहीं बता सके कि कितनी जाली नोट नौटबंदी के दौरान बँक में जमा कि गई! 

अब इस खबर से मिडिया व एयर कंडीशन में बैठकर मक्कारी भरी पत्रकारिता का झंडा गाढने वाले दलालों का दिमाग भी समझे… 

पहली बात, ये लोग उर्जित पटेल से यह जानना चाहते हैं कि कितनी जाली नोट बँक में जमा हुई! क्या ये यह नहीं जानते कि बँको में जाली नोट पहचाने कि मशीन लगी होती हैं अर्थात जो बनावट से ही नकली हैं वह छट कर अलग निकल जाए। अब जो नोट इस तरह से छट कर अलग निकल गई हो वह तो वैसे भी बँक में जमा नहीं होती… फिर इसका आंकडा भला उर्जित पटेल कैसे दे सकते हैं! 

दुसरी बात, जिसके पास भारी मात्रा में एसी नकली नोट होगी वह क्या एसी हिम्मत कर सकता हैं कि उसे ले जा कर बँक में जमा करने की कोशिश भी करे! 

तीसरी बात, जिस तरह कि भारी नकली नोट के स्वाहा होने का दावा सरकार कर रही हैं जिसे पाकिस्तान कि ISI ने छापा व जिसका इस्तेमाल आतंकवाद फैलाने में किया जा रहा था, यह उस तरह कि नकली नोट हैं जो पिछली सरकारों कि मूर्खता या युँ कहे गद्दारी के चलते बिल्कुल असली कि तरह छापा गया था… यानी की बँको कि मशिने भी जिन्हें नहीं छाँट सकती थी। एसी स्थिति में भी सवाल वही… कि जाली नोटों का आंकड़ा निकलेगा कैसे? लेकिन यहाँ यह जरूर तय हैं कि जो नोट पाकिस्तान व आतंकवादी संगठनों के हाथों में धरी रह गई वह तो वहीं स्वाहा हो गई और वो भी बगैर किसी आंकड़े के! जाहिर हैं यह आंकड़ा भी भारी ही होगा। और जो कुछ उनके दलालों द्वारा यदी बँको में जमा भी कर दी गई होगी, तो चिंता की बात इसलिए नहीं क्यूँ की वह बेहद मामूली रकम होगी जो पकड़ी ना जा स। फिर भी यदी रकम बड़ी हुई तो जाली नोटों का आंकड़ा सरकार को मिले ना मिले, जमा करने वालो का आंकड़ा जरूर सरकार के पास पहुंच चुका हैं जिसकी कार्यवाही देखने को मिली ही रही हैं। 

अरे भाई, यहाँ तो बडी “मेहनत” से कमाया काला धन भी लोग बँक में जमा कराने से डर रहे तो जाली-नोट बँक तक पहुंचा कर मिडिया वालों के लिए आंकड़े कहाँ से जमा हो! जरा सोचिए तो!!!!

तो फिर इन पत्रकारों कि जाली नोटों वाली इस खबर का क्या तुक….. भाई, यह और कुछ नहीं…. खिसियाई बिल्ली खंभा नौचे! सुना हैं न!!! 

जयहिंद 

सर्जिकल स्ट्राइक और देश के गद्दार

​सर्जिकल स्ट्राइक भले ही पाकिस्तान में हुई हो लेकिन उसका बड़ा असर भारत में नजर आ रहा…. 

बॉलिवुड, राजनितिक व पत्रकार जगत में देश के सारे छिपे हुए फर्जी महारथियों नें अपने पाक-परस्त दामन से शराफत का चोला उतार लिया हैं… अब तक ये बहुरूपियों कि भाँती दुश्मन पाक से यारी निभाये जा रहे थे….और देश के युवा इन्हें अपना आदर्श समझ बैठे थे !!!! इन्हें पहचाने…  इन्हें भूलीये मत… सिमा पर सेना युद्ध बाद में लड़ेगी…! आंतरिक युद्ध तो अभी ही प्रारंभ हो चुका… इन गद्दार पाक-परस्तों के साथ!!! … और यह आंतरिक युद्ध जनता को लड़ना हैं, हम सब को मिल कर लड़ना हैं!!! 

आज वक्त हैं जब आम जनता को समझना होगा की… 

> हमारे वास्तविक “हीरो” कोन हैं?

… फ़िल्मी पर्दो पर या सिमा पर!

> हमारे वास्तविक “नेता” कोन हैं?

… सेकुलरिज्म पूजने वाले या भारत माता को पूजने वाले!

> हमें वास्तव में सतर्क कोन रख सकता हैं?

… वामपंथी विचार लिए विदेशी पूंजी पर पलने वाले पत्रकार या देशी मिटटी से जुड़े पत्रकार!

जंग जितने के लिए हमे जानना जरुरी… हमारी जागरूकता ही इस जंग में हमारा सबसे बडा हथियार हैं!

आज जो इस सच्चाई को जान चूका हैं वही…मूर्खता ना करने वाला ज्ञानी हैं…निर्लज्जता त्यागने वाला स्वाभिमानी… और वही ऐसे युद्ध के वास्तविक योद्धा कि महत्वपूर्ण निशानी हैं। 

।। जय हिंद। जय भारत।। 

भारत के लिए युद्ध अवश्य ही विकल्प हैं किंतु….

कुछ लोग युद्ध कि ललकार लिये नजर आ रहे उनके लिए कुछ शब्द, धार्मिक पहलु सहित।

सर्वप्रथम, बेहद गर्व होता हैं युद्ध के लिए ललकारने वाले योद्धाओं कि भावनाओं को पढ़ कर कि आज भी इस तरह का हौंसला रखने वाले विर सपूत हमारे बीच हैं…. धन्य हैं यह धरती। ये लोग अवश्य ही आश्वत करते हैं कि मात्रभुमी के लिए बलिदान होनेवाले सपूतों कि कमी नहीं।

रही बात युद्ध कि तो वह निश्चित हैं… अटल हैं…. इसमे कोई संदेह नहीं…. इस विषय में भारत से भी ज्यादा विश्वास पकिस्तान पर हम रख सकते हैं।

सेना पर हमले जैसी घटना भारत कि अंदरूनी कमजोरी को प्रमाणित करती हैं। यदी कोई सरकार पर यह मुद्दा उठाकर विरोध करे की – कैसे आतंकी घुस आये अथवा क्यों हमारी सुरक्षा प्रणाली विफल हुइ तो यह अत्यधिक सटीक विरोध होगा।

लेकिन जैसा कि धर्म कहता हैं व महाभारत में श्री कृष्ण ने बताया हैं कि युद्ध विकल्प अवश्य हैं किंतु इस  विकल्प का स्थान सारे विकल्पों में केवल आखरी होना चाहिए….. वह कदापि क्रम में आखरी स्थान से बदल नहीं सकता।क्योंकि युद्ध का निर्णय ना ही विरोधी के और ना ही स्वयं कि क्षमता के आकलन पर होना चाहिए, एसा करना क्षत्रियों कि प्रकृति नहीं, युद्ध का निर्णय मात्र धर्म, स्वाभिमान व मात्रभुमी कि रक्षाहेतु होना चाहिए। और वह भी तब, जब सारे विकल्प समाप्त हो। एसा इसलिये क्यों कि युद्ध का निर्णय हर तरह से अमानवीय, प्रकृति विरोधी व हिंसात्मक पवृत्ती का होता हैं।

भारतीय जवानों पर हमले अवश्य ही आहत करते हैं और यह स्थिति भारतीय इतिहास कि ना ही पहली घटना हैं और ना ही आखरी हो सकती हैं…विकल्प रहते हुवे युद्ध चुनना ना ही पिछली सरकार के धर्मपरायणी होता और ना ही वर्तमान सरकार के लिए। ये अलग विषय हैं कि पिछली सरकार कायरता के वशीभूत युद्ध का निर्णय नहीं ले सकती थी किन्तु आज कि सरकार के साथ वह स्थिति नहीं हैं।

अब तक भारत एसी घटनाओ पर जिस तरह कि प्रतिक्रिया देता रहा हैं आज भारत ने इतिहास को बदल कर अपने तेवर ना केवल सर्वाधिक सख्त कर लिए हैं… बल्कि अंतराष्ट्रीय कुटनीती में भी नया आयाम हांसिल किया हैं जिसमें प्रमुख देशों का समर्थन हासिल हैं। एसी स्थिति में भारत के पास अनेको कुटनीतीक विकल्पों का भंडार हैं फिर युद्ध क्यो? युद्ध कर भारत पाकिस्तान पर विजय अवश्य हासिल कर लेगा इसमे कोई संदेह नहीं… यह बेहद आसान भी हैं… लेकिन अन्य विकल्पों के रहते हुवे एसा करना ना ही धार्मीक होगा और ना ही सर्वश्रेष्ठ! साथ ही विश्व को भी अवसर मिलेगा लांछन लगाने का कि भारत ने अपनी ताकत का घमंड दिखा दिया चुँकी अब तक तो विश्व पाकिस्तान को आतंकवादी देश भी नहीं मानता। अत: भारत के लिए सर्वप्रथम अन्य सारे विकल्पों को अपनाते हुए पहले पकिस्तान कि शराफत भरे वस्त्र उतारना बेहद जरूरी हैं। यदि इसमे सफलता मिली तो कदापि युद्ध कि आवश्यकता ही ना पडे़ और यदी युद्ध का सामना भी हो तो कोई भारत के सम्मान पर किसी तरह का लांछन ना लग सके।

जिन्हें धर्म का ज्ञान हैं… सिर्फ वे ही तटस्थ हैं….. शेष तो मात्र विचलित, अस्थीर व भयभीत हैं 🚩

प्रेश्यावृत्ती में लिप्त पत्रकारों के बुरे दिन

प्रेश्यावृत्ती में लिप्त पत्रकारों के बुरे दिन

आज जब हर तरफ़ बिकाऊ पत्रकारों का महाजाल नजर आता हैं वहीं सुरेश चव्हाण व सूधिर चौधरी जैसे पत्रकारों को पत्रकारिता बेहद अदभुत उदाहरण बनकर उभर रही हैं।

सुदर्शन न्यूज के सुरेश चव्हाण व जी न्यूज के सूधिर चौधरी ने बेधड़क व बेहिचक देशहित कि पत्रकारिता से सारे बिकाऊ पत्रकारों के होश उडा कर रख दीए हैं। देश के हर अति-संवेदन शील मसलों पर भारत विरोधी एजेंडा परोसने वाले दलाल पत्रकार बरखा दत्त, रविश कुमार, राजदीप सरदेसाई, करण थापर, पुन्यप्रसुन्न वाजपेयी, राहुल कवल व दीपक चौरसिया जैसे तमाम पत्रकार जगत के दिग्गज मानेजाने वालों कि मिलावटी पत्रकारिता कि धज्जिया उडाकर रखदि हैं।

बिकाऊ पत्रकारों ने जिस तरह निष्पक्ष व सेक्युलर निती को मुखौटा बना कर भ्रष्टाचारियों, कट्टरपंथियों व गद्दारों को जो सुरक्षा कवच दे रखा था वह तो धरासाहि हुवा ही हैं साथ ही नौबत यहाँ तक पहुंच गई हैं कि अब इन पत्रकारों को स्वयं के लिये सुरक्षा कवच खौजने कि नौबत आ पड़ी हैं। इन गद्दारों को सुज ही नहीं पा रहा कि हर पल उजागर होता अपना काला चेहरा ये किसकी चोली में छुपाये।

एक तरफ जहाँ इन बिकाऊ पत्रकारों व इनसे जुड़े AajTak, NDTV, ABP NEWS, IndiaToday, TimesOfIndia, IndianExpress, TheHindu जैसे नामी चैनल व अखबार अपनी विश्वसनीयता खोते जा रहे वहीं सोशियल मिडिया पर हर रोज जनता द्वारा इनको बुरी तरह लताड़ा जा रहा। इसी तरह सुदर्शन न्यूज, जी न्यूज, DNA, दैनिक भास्कर व प्रातःकाल जैसे तमाम देशभक्ति कि पत्रकारिता करने वाले माध्यम जनता कि आवाज बनकर उभरने लगे हैं।

देश में ही रहकर देशभक्त पत्रकारों कि राह कितनी कठीन हो सकती हैं यह सुदर्शन न्यूज व जी न्यूज चैनल को मिल रही धमकि से पता चल रहा। दिन के लगभग सैकडों काल पकिस्तान, दुबई, सीरीया जैसे देशों से इन चैनलों को मिल रहे जिसमें चैनल व पत्रकारों को उडाने कि धमकिया मिल रही। भारतीय सुरक्षा एजेंसीयों ने भी ऐसे हमलों कि आशंकाऔ कि पुष्टि कि हैं लेकिन फिर भी इनके हौंसले अडिग रूप से बुलंद हैं।

देशभक्त पत्रकारिता से बौखलाए विरोधियों ने सुरेश चव्हाण व सूधिर चौधरी जैसे पत्रकारों को नरेंद्र मोदी का पट्ठा व MOUTH PIECE जैसे कई नाम देने कि कोशिश कि लेकिन सोशियल मिडिया पर मोर्चा संभाली जागृत देशभक्तों के आगे विरोधियों को मूँह कि खानी पड़ रही। जनता ने बहुरूपियों व देशभक्तों को पहचानना सीख लिया हैं।  वे जानते हैं कि जो सत्य बताये वह सत्यवादी कहलाता हैं ना कि किसीका निजी पट्ठा या MOUTH PIECE।

वास्तव में भारतीय राजनैतिक व समाजिक परिवेश में हो रहा यह बदलाव बेहद अदभुत व अभुतपूर्व हैं। हालांकि बदलाव कि यह प्रक्रिया अभी शुरूआती जरूर हैं किंतु मात्र आरंभ ने ही भारत के टुकड़े करने वाले दुश्मन देशों व ताकतों के सपनों को चकना चूर करना शुरू कर दिया है। भारत विरोधी एजेंडा के जरिये अपना भविष्य बनाने वाले भाडे के टट्टूऔ के लिए अब अलार्म बज चुका हैं कि वे प्रेश्यावृत्ती के धंधे से बाज आये अन्यथा उनका भविष्य तो दुर वर्तमान भी संभलना मुश्किल हो जायेगा। यह भारत के मजबूत भविष्य कि शुरूवात हैं… यही वास्तविक #अच्छेदिन भी हैं।

हम आम जन देशभक्त पत्रकारों को समर्थन दे कर व #Presstitute पत्रकारिता को नकार कर देशहित में स्वयं कि भुमिका भी सुनिश्चित कर सकते हैं और हमें ऐसा करना ही होगा।

।। जयहिंद।। वंदेमातरम्।।