Category Archives: Arvind Kejriwal

“हारने” की चतुराई !!!

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हारने की चतराई

अब तक मोदी ने सिर्फ जीतने की कला दिखाई थी…
इस बार मोदी ने “हारनेे” की चतुराई भी निचोडी!!!
पाँच साल के लिये चुजा सोने के पिंजरे में बंद!!!
क्युँ की भागने की गुँजाईश ही नहीं छोडी!!!

खुश तो आपीये आज बेहद होंगे,
कहेंगे हमने History रच डाली
होश संभालना इनके बस में ही नहीं
इन सब Fool औ का एक ही माली

वादे एसे जो पुरे करने की भी औकात नहीं…
साथी भी मनचले, मुँह खोल दे तो हो जाये किरकरी
पहले मात्र २४ ने दिल्ली को बनाया था रंगमंच
अब पुरे के पुरे ६७ नमुने ! संभाल लियो “कजरी” !!!

पहले सिर्फ ४९ दिन का ट्रेलर नजर आया था
अब पुरे पाँच साल का “इंटरटेंटमेट….इंटरटेंटमेट… इंटरटेंटमेट”
मिडीया वालों के लिये हर रोज Breaking मसाला
इन बेकदरों से मोदी ने अब जा कर खुद को संभाला

दिल्ली अब महफीलो से हमेशा सजी रहेगी
किसी और की क्या जरूरत “कजरी” ही मुजरा करेगी
कभी वाह-वाह भी बटोर लेगी तो पचा ना पायेगी
ज्यादा इतरायेगी तो टमाटर-चपाटे भी खा जायेगी

दिल्ली का युवा खुलकर मन बहलाता रहेगा
फैसला भी उसका ही, दोष किसके सर करेगा
उम्मीदे ही इनलोगो ने आँखों मे एसी पाली
सालों से लुटती गद्दी,
खाक सेवा होगी, जब जेब ही हो चुकी थी खाली

विकास के लिये मानसीकता भी, विकास की जरूरी
मुफ्तखोरी जो पाले, अक्ल भी करती उनसे दुरी
पाठ नैतीकता का, अंग्रेजो की शिक्षा कैसे पढायेगी
देख तमाशा “अनेतिकता” का, शायद अक्ल इन्हे आयेगी

मंच सजवाकर विदुषको का,
मोदी ने मजेदार राह बना ली
परोसकर इनकी मुर्ख लिलाऔ को
अघौषित प्रतीयोगीता नाम अपने कर डाली

Center ने जो किये थे अब तक अभुतपुर्व प्रदर्शन,
किसी पत्रकार ने अबतक ना थी जिनपर रोशनी डाली
अब जब करना पडेगा Evolution हुडदंगो से
खुद-ब-खुद चीख उठेगी, कर्मठता की हरीयाली

धन्य तेरा “त्याग”, धन्य तेरा ब्रम्हग्यान
धन्य तेरी राष्ट्रभक्ति, तु योद्धा बडा ही निराला
देश को खिलोना समझने वालो को
खेल-खेल में ही तुने, खिलोना जो बना डाला
खेल-खेल में ही तुने, खिलोना जो बना डाला

—  संजय त्रिवेदी

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मरती हुई कांग्रेस में जान फूंकी हैं केजरीवाल ने !!!

मरती हुई कांग्रेस में जान फूंकी हैं केजरीवाल ने

मरती हुई कांग्रेस में जान फूंकी हैं केजरीवाल ने

अब तक ये तो सभी जान चुके हैं कि #AAP कोई नैतिकता पालने वाला राजनेतिक दल नहीं बल्कि विदेशी ताकतो कि रखेल कांग्रेस का ही दूसरा चेहरा हैं। 2104 के लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस को इस दूसरे चेहरे का कितना फायदा हो पायेगा ये कहना अभी मुश्किल भले ही हैं लेकिन इसने आज भी कांग्रेस बदतर हो रही हालत को सम्भाला हैं।

#कांग्रेस पर केजरीवाल के एहसान का अनुमान सिर्फ इस बात के आंकलन से ही आप लगा सकते हैं कि यदि इस चुनाव में #आप का जन्म ना हुवा होता तो अकेले कांग्रेसी सोशियल मीडियां पर दिन-रात कितनी ही गालिया खा रहे होते , लेकिन केजरीवाल ने अपनी उपस्थिति से कांग्रेस कि सारी गालियों को अपने सर आँखों पर ले लिया।

आज हर वो शख्स जो कांग्रेस को दिन-रात, भर-भर  के कौसा करता था , अब सबसे पहले #केजरीवाल और #आप के लोगों पर अपना गुस्सा निकलता हैं। अपनी नीचता और सड़क पर कि गई औंछी नौटंकी से लोगों के मन में कांग्रेस के खिलाफ भरे हुवे उबाल केजरीवाल ने अपनी और मुड़ा लिया हैं।

#आप आने के पहले कांग्रेस एक मात्र लोगों का निशाना बनी हुई थी और सबसे निचले दर्जे का दल बनी हुई थी। लेकिन अब आप किसी से भी पूंछेंगे तो वो कांग्रेस को तो #आप से भला ही बतायेगा।

यह नुस्का बिलकुल वैसा ही हैं कि एक कोरे कागज पर खिंची गई लकीर को बैगैर छेड़े अगर छोटा साबित करना हो तो उसके बगल में उससे भी बड़ी लकीर खीच दी जाए। अब पूछिए किससे भी कौनसी लकीर छोटी हैं… जवाब मिलेगा पहली वाली!!! ठीक वैसे ही एक हद से गिरी हुई कांग्रेस को अच्छा बनाने के लिए उससे भी अधिक गिरी हुई और औंछि हरकते करने वाला दल पैदा कर दो , तो सबकी नजर में पहले वाली कांग्रेस कि स्थिति अच्छी हो जाती हैं और-तो-और बैगेर कोई भला काम किये…. हैं ना कमाल !!!

नरेंद्र मोदी को केजरीवाल रोक पाएंगे इसके तो कोई असार नजर नहीं आते , लेकिन कोंग्रेसियों के लिए केजरीवाल ने बड़ा ही उद्धार का काम किया हैं , यकीं मानो !!!

सारांश : इस देश से “कांग्रेस” का अंत बेहद जरुरी हैं।

जागो और जगाओ , देश बचाओ !!!
अभी तो करोडो को जगाना हैं !!!

अरविन्द केजरीवाल के ४८ रंग

#LiarKejriwal : The Big CHAMELEON

#LiarKejriwal : The Big CHAMELEON

48 दिन की सरकार के 48 ड्रामें !!!

१) ना हम समर्थन देंगे, ना लेंगे
२) बीजेपी तो जोड तोड मे माहीर हैं फिर क्यँ सरकार नही बना रही
३) मेरे बच्चे की कसम, हम किसी से समर्थन नहीं लेंगे
४) काँग्रेस जैसी पार्टी हमे बीना शर्त समर्थन क्युँ दे रही
५) हमे बीजेपी काँग्रेस की मंशा ठिक नहीं लग रही
६) बीजेपी-कांग्रेस हमारी शर्ते मानले तो हम सरकार बनाने पर सोचेंगे
७) हम जनता से राय लेंगे की हम सरकार बनाये या नहीं
८) हम १०० से ज्यादा सभायें करेंगे और हर सभा की विडीयो रेकोर्डींग कर मशवरा लेंगे की हम सरकार बनाये की नहीं
९) दिल्ली की जनता ने हमे आदेश दिया हैं की सरकार बनायी जाये
१०) हम दुसरी पार्टी के इमानदार लोगों से अपील करते हैं की वे हमारे साथ आये
११) बीजेपी अपनी जीम्मेदारी से भाग रही हैं इसलीये हम सरकार बना रहे

चुनाव से पहले >
१२) शिला दिक्षीत के भ्ष्टाचार के खिलाफ मेरे पास ३०० पेज रिपोर्ट मौजुद हैं
१३) हम सरकारी बंगला-गाडी नहीं लेंगे
चुनाव के बाद >
१४) हर्षवर्धन जी के पास शीला के खिलाफ कोई सबुत हो तो हमे दे हम कार्यवाही करेंगे
१५) राज्यपाल को बडे बंगले के लिये खत भी लिख दिया
१६) मेने मेरे दोस्तो और रेश्तेदारों के सुझाव से बडा बंगला लेने का फैसला बदल दिया
१७) शपथ ग्रहण के लिये हम आम आदमी की तरह मेट्रो में जायेंगे (महीला कोच में आम-आदमी)
१८)शपथ ग्रहण समारोह रामलीला मैदान में करेंगे ( तीन गुना अधीक खर्चा)
१९) हम जनता दरबार के जरीये उनकी समस्या सुनेंगे (भगदड में जान बचाकर भागना पडा)
२०) अब हम जनता दरबार नहीं लगायेंगे

२१) सोमनाथ भारती का साथ ना देने वाले पुसीस अफसर को सस्पेंड कराने के लिये हम धरना करेंगे
२२) पुलीस अफसरों को छुट्टी पर भेजदिया गया हैं इसके लिये हम अनशन खत्म करते हैं और ये दिल्ली वासीयों की जीत हैं
२३) हमे खत लिखकर विदेशी सरकार ने हमारे कार्य की प्रशंसा की हैं (खत झुठा नीकला, तो बोलती बंद)
२४) २६ जनवरी पर वीआईपी कल्चर खत्म होना चाहीये (लेकीन खुद वीआईपी क्लास में सुरक्षा कर्मीयो के साथ पँहुच गये)
२५) अन्ना ने हमे आशिर्वाद दिया हैं, अन्ना हमारे साथ हैं (लेकीन अन्ना ने हकाल दिया)
२६) अन्ना को बीजेपी वालों ने भडकाया हैं
२७) हमने बीजली के दाम कर दिये हैं ( लेकीन बीजली ही गुल हो गई)
२८) हमने पानी के दाम भी कम कर दिये ( लेकीन तय सिमा से एक युनीट भी उपर, तो पुरे बील चुकाऔ)
२९) प्रशांत भुषण की कश्मीर राय नीजी हैं ( तो क्या अगर वे पार्टी के संस्थापक नेता हैं)
३०) १९८४ के दंगों पर SIT बननी चाहीये
३१) गुजरात दंगो मे मोदी का हाथ (तो क्या हुवा SIT ने क्लीन चीट दी)
३२) मोदी ने हमारे विधायकों को खरादने की कोशीश की
३३) मिडीया वालो ने बेनी को लेकर झुठा प्रचार किया हैं
३४) बेनी हमसे नाराज नहीं ( थोडे ही दिन बाद बेनी कजरीवाल के खिलाफ धरने पर)
३५) बेनी को बीजेपी वालों ने भडकाया हैं
३६) प्रेस काँफ्रेंस में बोल बैनी बोल रहे थे लेकीन स्क्रीप्ट बीजेपी की थी
३७) बेनी को मंत्री पद नहीं मीला इसलीये नाराज हो रहे
३८) हम शीला पर कार्यवाही करेंगे ( लेकीन cwg घौटालों की FIR में शीला का नाम तक नहीं)
३९) हमे सरकारी लोकपाल मंजुर नहीं ( जिसे उनके गुरू अन्ना ने मंजुर कर लीया)
४०) लोकपाल पर अन्ना झुक गये हैं, बहकावे मे आ गये हैं
४१) हम दिल्ली के लिये और भी मजबुत लोकपाल बनायेंगे ( लेकीन दिल्ली अधीकार क्षेत्र में ही नहीं, केंद्र के हाथ)
४२) हम लोकपाल दिल्ली राज्यसभा में रखेंगे ( बगैर गवर्नर की मंजुरी के  अंसवेधानीक तरीके से)
४३) दिल्ली का गवर्नर नसीब जंग काँग्रेसी एजेंट हैं
४४) बीजेपी-काँग्रेस की मिली भगत के कारण लोकपाल पास ना हो सका
४५) मेरे लोकपाल का वीरोध हुवा इसलीये में इस्तीफा देता हुँ
४६) मुकेश अंबानी सरकार चला रहे हैं ( इस्तीफे के ठिक पहले जो बील पास करवाया उससे अंबानी ग्रुप को ही फायदा मीला)
४७) मोदी को वोट देना मतलब मुकेश अंबानी को जीताना
४८) हम लोकसभा का चुनाव लडेंगे ( दिल्ली नहीं संभली तो क्या हुवा)

जागो और जगाऔ, देश बचाऔ !
अभी तो करोडों को जगाना हैं !!!!

बेचारा कजरीवाल : मरता क्या ना करता

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पहले #कजरीवाल ने सोचा #बीजेपी सरकार बनायेगी तो #आप विपक्ष के नाते टांग खिचेंगे…

फिर बीजेपी हट गई और #कैंग्रेस ने बगैर शर्त समर्थन दे दिया तो लार टपक पडी और अपने बच्चों की कसम तोडते हुवे सरकार बना ली और बडा बॉगला तक मांग बैठे…

सोशियल मिडीया कि जब लाते पडी तो और जम कर नाक काटी गई तो बंगला भी छोडना पडा..

फिर चुनाव के पहले किये गये फेकु वादों ने भी गला फँसा दिया, नजर बचाने और मुँह छिपाने के लिये मफलर का इस्तेमाल करना पडा…

बीजली सस्ती की तो – बीजली गुल ही हो गई !
पानी सस्ता किया तो – लीमीट के उपर दो गुना दाम !!!

जिस शिला के खिलाफ ३०० पेज की रिपोर्ट हवा में लहराते रहे उसीके खिलाफ सबुत मांग बैठे…

भ्रष्टों की लिस्ट नीकाली, लेकीन वाड्रा / सोनीया को भुल गये..

१९८४ के दंगो पर SIT की अर्जी तो लगा दी और गुजरात दंगो पर SIT से मोदी को मिली क्लीन चीट भुल गये…

उसपर कानुन मंत्री सोमनाथ ने कानुन का एसा मजाक बनाया की साँसे लेना तक मुश्कील हो गया…

यहाँ तक की जिस मंत्री को बचाने के लिये धरना तक कर लिया वहीं पोर्न वेबसाईट का व्यापारी नीकला !!!

और-तो-और कहीं किसी मंत्री को उन्हीके इलाके में जनता ने तमाचे जडे तो कहीं कोई मंत्री बलात्कारी बन कर उभर रहा…

एक लोते गुरू #अन्ना ने भी एसा हकाला की उल्टे पैर दौड लगानी पड गई…

ना ही वादे पुरे करने की क्षमता थी और ना ही खुद के मंत्रीयों पर काबू… चारों तरफ इज्जत का फालुदा !!!

उपर से अमेरीकी आँकाऔ का प्रेसर… भाई मोदी को रोकने के लिये जो भेजा था !!!

फिर लगाया नया मंसुबा – लोकपाल !

एसा लोकपाल जो संवेधानीक ही नहीं… कोई सर्वदलीय बैठक भी नहीं की… कैसे कोई समर्थन करता ?

लेकीन समर्थन चाहीये किसको था !!! मौका यही था भागने का…

लंगोटी छोडना तो बहाना था,
भाग के जान जो बचाना था !!!

तो अब! फिर वहीं, धरने के लिये नई जगह की तलाश…

वो क्या हैं की नौटंकी अभी बाकी हैं !!!

जागो और जगाऔ, देश बचाऔ!!!
अभी तो करोडों को जगाना हैं!!!

सावधान: मिडीया से देश को बडा धोखा

यह इस देश कि बहुत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है!

जब 20 जनवरी को सिर्फ दो सौ लोगों के साथ अरविन्द केजरीवाल का #AAPDrama चल रहा था जिसके अंत में दिल्लीवासियों को कोई परिणाम तक न मिल सका और जिसके फल स्वरुप देश के लिए एक नकारात्मक माहोल बना…

उसी समय में ही महाराष्ट्, रायपुर डिस्ट्रिक्ट के अलीबाग में लाखो लोगों ने मिलकर वहा निर्माणाधिन एशिया के सबसे बडे कत्लखाने के विरोध में वास्तविक आंदोलन छेड़ा …

सोचिये, एक लाख से अधिक रैली में एकत्र हुए।

और ये भी क्या कम था की लोगों की उमडी जनशक्ती के बलबुते पर वहाँ के जीला कलेक्टर को इस कत्लखाने पर निर्माण रोकने का आदेश जारी करना पडा!

लेकिन किसी भी राष्ट्रीय मीडिया (#paidmedia #fakemedia #corruptmedia) ने इस हजार गुना अधीक महत्वपुर्ण घटना को प्रसारीत करने का कष्ठ नहीं उठाया !!!

सारांश फिर वही:

सरकारी दुर्शासन से ज्यादा देश के सभी राष्ट्र विरोधी मीडिया ने देश को गर्क में ढकेला हैं।

# दलाल मिडीया पर विश्वास करना बंद करे #

जय हिंद! जय भारत!!!!

—– In English —-

This is very unfortunate situations of the country!

While #AAPDrama going on in Delhi on this 20th with just Two Hundred people that too ended up with zero (-ve) results ….

At the same time the real battle was on held at Alibaug, Raigar District to protest against the planned Asia’s largest slaughter house.

Just think, over a lakhs of people gathered in rally and what less! they also succeeded in getting cancellation notice from Jhila collector.

But non of the national media (#paidmedia #fakemedia #corruptmedia)  were interested in covering this thousand time valuable event but to a third class “Nautanki” on Delhi street!!!

Again the same moral:
All anti-National-Media of the country has affected more adversely to the nationa then the bad governance.

# Stop Believing Paid-Media #

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क्या हैं अमेरिका समर्थित “आप” पार्टी कि हकीकत ?

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली ‘राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी)’ की एक प्रमुख सदस्य अरुणा राय के साथ मिलकर अरविंद केजरीवाल ने सरकारी नौकरी में रहते हुए एनजीओ की कार्यप्रणाली समझी और फिर ‘परिवर्तन’ नामक एक एनजीओ से जुड़ गये। इस दोरान वे सरकारी पद से लम्बी छुट्टी पर रहते हुवे भी वे सरकार और एनजीओ कि तरफ से तवख्वाह लेते रहे।

वर्ष 2006 में ‘परिवर्तन’ में काम करने के दौरान ही उन्हें अमेरिकी ‘फोर्ड फाउंडेशन’ व ‘रॉकफेलर ब्रदर्स फंड’ ने ‘उभरते नेतृत्व’ के लिए ‘रेमॉन मेग्सेसाय’ पुरस्कार दिया, जबकि उस वक्त तक अरविंद ने ऐसा कोई काम नहीं किया था।

इसके बाद अरविंद अपने पुराने सहयोगी मनीष सिसोदिया के एनजीओ ‘कबीर’ से जुड़ गए, जिसका गठन इन दोनों ने मिलकर वर्ष 2005 में किया था।

‘फोर्ड फाउंडेशन’ के एक अधिकारी स्टीवन सॉलनिक के मुताबिक ‘‘कबीर को फोर्ड फाउंडेशन की ओर से वर्ष 2005 में 1 लाख 72 हजार डॉलर एवं वर्ष 2008 में 1 लाख 97 हजार अमेरिकी डॉलर का फंड दिया गया।’’ यही नहीं, ‘कबीर’ को ‘डच दूतावास’ से भी मोटी रकम फंड के रूप में मिली।

अंग्रेजी अखबार ‘पॉयनियर’ में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक डच यानी नीदरलैंड दूतावास अपनी ही एक एनजीओ ‘हिवोस’ के जरिए नरेंद्र मोदी की गुजरात सरकार को अस्थिर करने में लगे विभिन्‍न भारतीय एनजीओ को अप्रैल 2008 से 2012 के बीच लगभग 13 लाख यूरो, मतलब करीब सवा नौ करोड़ रुपए की फंडिंग कर चुकी है।  इसमें एक अरविंद केजरीवाल का एनजीओ भी शामिल है।

एशियाई देशों की मीडिया को फंडिंग करने के लिए अमेरिका व यूरोपीय देशों ने ‘पनोस’ नामक संस्था का गठन कर रखा है। माना जा रहा है कि अरविंद केजरीवाल के मीडिया उभार के पीछे इसी ‘पनोस’ के जरिए ‘फोर्ड फाउंडेशन’ की फंडिंग काम कर रही है।

आरोप है कि विदेशी पुरस्कार और फंडिंग हासिल करने के बाद अमेरिकी हित में अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया ने इस देश को अस्थिर करने के लिए ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ का नारा देते हुए वर्ष 2011 में ‘जनलोकपाल आंदोलन’ की रूप रेखा खिंची।

इसके लिए सबसे पहले बाबा रामदेव का उपयोग किया गया, लेकिन रामदेव इन सभी की मंशाओं को थोड़ा-थोड़ा समझते हुवे इनको मना कर दिया। जिसके बाद महाराष्ट्र के सीधे-साधे, लेकिन भ्रष्‍टाचार के विरुद्ध कई मुहीम में सफलता हासिल करने वाले अन्ना हजारे को अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली से उत्तर भारत में ‘लॉंच’ कर दिया।

अन्ना हजारे को अरिवंद केजरीवाल की मंशा समझने में काफी वक्त लगा, लेकिन तब तक जनलोकपाल आंदोलन के बहाने अरविंद ‘कांग्रेस पार्टी व विदेशी फंडेड मीडिया’ के जरिए देश में प्रमुख चेहरा बन चुके थे।

एक  सुचना के मुताबिक अमेरिका की एक अन्य संस्था ‘आवाज’ की ओर से भी अरविंद केजरीवाल को जनलोकपाल आंदोलन के लिए फंड उपलब्ध कराया गया था और इसी ‘आवाज’ ने दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए भी अरविंद केजरीवाल की ‘आम आदमी पार्टी’ को फंड उपलब्ध कराया। अमेरिका के हित में हर देश की पॉलिसी को प्रभावित करने के लिए अमेरिकी संस्था जिस ‘फंडिंग का खेल’ खेल खेलती आई हैं, भारत में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और ‘आम आदमी पार्टी’ उसी की देन हैं।

‘फोर्ड फाउंडेशन’ ने अरविंद व मनीष सिसोदिया के एनजीओ को 3 लाख 69 हजार डॉलर तो शीला दीक्षित के पुत्र संदीप दीक्षित के एनजीओ को 6 लाख 50 हजार डॉलर का फंड उपलब्ध कराया है।

सुप्रीम कोर्ट के वकील एम.एल.शर्मा ने अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया के एनजीओ व उनकी ‘आम आदमी पार्टी’ में चुनावी चंदे के रूप में आए विदेशी फंडिंग की पूरी जांच के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल कर रखी है। अदालत ने इसकी जांच का निर्देश दे रखा है, लेकिन केंद्रीय गृहमंत्रालय इसकी जांच कराने के प्रति उदासीनता बरत रही है। बाबा रामदेव के खिलाफ एक ही दिन में 80 से अधिक मुकदमे दर्ज करने वाली कांग्रेस सरकार की उदासीनता दर्शाती है कि अरविंद केजरीवाल को वह अपने राजनैतिक फायदे के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

दरअसल विदेश में अमेरिका, सउदी अरब व पाकिस्तान और भारत में कांग्रेस व क्षेत्रीय पाटियों की पूरी कोशिश नरेंद्र मोदी के बढ़ते प्रभाव को रोकने की है। मोदी न अमेरिका के हित में हैं, न सउदी अरब व पाकिस्तान के हित में और न ही कांग्रेस पार्टी व धर्मनिरेपक्षता का ढोंग करने वाली क्षेत्रीय पार्टियों के हित में।  मोदी के आते ही अमेरिका की एशिया केंद्रित पूरी विदेश, आर्थिक व रक्षा नीति तो प्रभावित होगी ही, देश के अंदर लूट मचाने में दशकों से जुटी हुई पार्टियों व नेताओं के लिए भी जेल यात्रा का माहौल बन जाएगा। इसलिए उसी भ्रष्‍टाचार को रोकने के नाम पर जनता का भावनात्मक दोहन करते हुए ईमानदारी की स्वनिर्मित धरातल पर ‘आम आदमी पार्टी’ का निर्माण कराया गया है।

‘आम आदमी पार्टी’ व  उसके नेता अरविंद केजरीवाल की पूरी मंशा को इस पार्टी के संस्थापक सदस्य व प्रशांत भूषण के पिता शांति भूषण ने ‘मेल टुडे’ अखबार में लिखे अपने एक लेख में जाहिर भी कर दिया था, लेकिन बाद में माना जाता हैं कि प्रशांत-अरविंद के दबाव के कारण उन्होंने अपने ही लेख से पल्ला झाड़ लिया और ‘मेल टुडे’ अखबार के खिलाफ मुकदमा कर दिया। ( संक्षिप्त लेख, आभार : http://jayhind.co.in/reality-of-arvind-kejriwal/ )

“आप” नेताओ के कुछ और तथ्य :
★ शांति भुसन का आतंकवादी शौकत हुसैन गुरु जिसने 2001 में संसद पर आतंकी हमले किये थे उसको बचाने का भरसक प्रयत्न किया।
★ प्रशांत भूषन ने हिन्दुओं को आतंकी खुले आम आतंकी कहा जबकि अफजल गुरु की फांसी पर दुःख जताया और जनमत के आधार पर ये कश्मीर को भारत से अलग करने के भी पक्षधर हैं।
★ केजरीवाल पर कई घोटाले का के तथ्य छुपाने का आरोप भी लगा हैं जिनमे कोयला घोटालों में नविन जिंदल पर चुप्पी हैं।
★ अरविन्द केजरीवाल के इनकम टैक्स विभाग में कार्यरत रहते हुवे उनका और उनकी पत्नी का सालों तक कोई ट्रान्सफर नहीं हुवा क्यूँकि इसके लिए इनकम टैक्स विभाग को सोनिया गाँधी ने चिट्ठी लिख रखी थी।
★ योगेन्द्र यादव पहले राहुल गांधी के लिए भाषण लिखा करते थे और इनका IAC आंदोलन में भी कभी कोई योगदान नहीं रहा हैं।
★ चुनाव के पहले शीला दिक्सित को भस्टाचार कि प्रतिमूर्ति बताने वाले अब केजरीवाल अब उनपर कार्यवाही से पहले उनके खिलाफ विपक्षी दल से सबुत मांग रहे हैं।
★ कजरीवाल ने एक बयान में ये भी कहा था की बटला एनकाऊंटर फर्जी था लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी वास्तविकता को माना।
★ मुजफ्फर नगर दंगो में भी इन लोगों ने निराधार मोदी और RSS को जिम्मेदार ठहराने कि कोशिशे की।

जागो और जगाऔ, देश बचाऔ !!!

जय हिंद!

अरविंद के कुछ मस्त-मौले बयान !!!

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“आदिवासी” इलाका दिल्ली के मोमबत्ती धारयों कि मेहरबानी से अरवींद कजरीवाल के हौसले अब सातवे आसमान पर नजर आ रहें।

भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू कि गई इनकी ये लडाई अब बीजेपी के खिलाफ मुड चुकी हैँ।

आईये, खुदको इमानदारी का एक मात्र ठेकेदार बतानेवाले अरवींद के अबतक के कुछ बयानों पर नजर डालते हैँ।

अन्ना आंदोलन कि सरूवात में:
” राजनीति एक गटर हैं हम इसे बाहर रहकर ही साफ करेंगे “

खुद के “आमरण” अनशन के दौरान:
” हमारी पुरी लडाई लोकपाल के लिये हैं, हम कभी राजनीतिक दल नहीं बनायेंगे “

मात्र 10 दिन की नौटंकी के बाद ही:
” हम राजनैतिक पार्टी बनाकर लडेंगे “

अन्ना जब नाराज होकर अलग हुवे:
” अगर अन्ना कहें तो हम राजनीतिक पार्टी नहीं बनायेंगे “

जब अन्ना ने साफ मना कर दिया:
” अब हम इस लडाई में आगे निकल चुके हैं अब पीछे नहीं हटेंगे “

अन्ना ने यहाँ तक कह दिया कि अरवींद सत्ता के लालची हैं और मेरे नाम का इस्तेमाल ना करे:
” अन्ना हमारे गुरू हैं, वो नाराज हैं,  हम उन्हे मनालेंगे “

आज जब अन्ना ने “आप” के लोगों को रालेगाव से हकाल दिया:
” अन्ना को बीजेपी के लोगो ने घेर रखा हैं। इसलिए अन्ना ऐसे बयान दे रहे “

चुनाव से पहले:
” काँग्रेस – बीजेपी दोनो भ्रष्ट हैं “

चुनाव के बाद:
” ना हम समर्थन देंगे और ना ही समर्थन लेंगे,  हम विपक्ष में बैठेंगे “

फिर कुछ ही समय बाद:
” हम दुसरे दलों के इमानदार नेताओं को बगावत कर हमसे जुडे “

जब बीजेपी ने सरकार बनाने से मना कर दिया:
” बीजेपी अपनी जिम्मेदारी से भागी हैं। इसलिये अब हम सरकार बनायेंगे “

काँग्रेस के समर्थन देने के बयान के बाद:
” हम समर्थन मांगने नहीं गये “

गिरगिट के बाद “कजरीवाल” नाम का और एक ही मानवर ऐसा पैदा हुवा जो इतने रंग बदलता हैं। सभी आम इंसानों से अपील हैं कि इनसे संभलकर रहें।

जय हिंद, जय भारत !!!