Category Archives: Narendra Modi

​अब भोगी नहीं बल्कि योगी शासन करेंगे 

​अब भोगी नहीं बल्कि योगी शासन करेंगे 
नरेंद्र मोदी द्वारा योगी अदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाये जाने का सिधा संकेत…. 
🚩 भांड मिडिया कितना भी विधवा विलाप करले… मोदी को तिल जितना भी फर्क नहीं पड़ता 
🚩 विकास एजेंडा के चलते मोदी की हिंदुत्व के लिये निष्ठा अप्रभावित 
🚩 सेक्युलर किडो को कब-कहाँ-कितनी पेस्टीसाईड देने हैं यह मोदी अच्छी तरह जानते हैं… ये किडे आज भले ही तुरंत खत्म नहीं किये जा रहे, लेकिन इनकी जड़ों को खोदना शुरू हो चुका हैं 
🚩 उत्तर प्रदेश के विकास सहित सांस्कृतिक रक्षा हेतु मोदी बेहद गंभीर व पूर्ण रूप से परिपक्व 
🚩 यह उत्तर प्रदेश में राम मंदिर सहित राम-राज्य स्थापित करने कि और एक एतिहासिक कदम
🚩 भविष्य में मोदी के और अधिक तेज धारी व खतरनाक रणनीति का आगाज 
जय जय श्री राम 🚩🚩🚩

मोदी सरकार के दो साल! कहां हैं अच्छे दिन!

मोदी सरकार के दो साल पूरे होते ही हर मिडिया द्वारा एक मात्र यही प्रश्न उछाला जा रहा हैं कि कहाँ हैं अच्छे दिन जिसका मोदी सरकार ने वादा किया था।

खास बात यह है कि इस सवाल का जवाब लेकर बडे-से-बडे मिडिया तंत्र के उच्चकोटी के जाने-माने पत्रकारों कि फोज गाँव-गाँव, सड़कों पर यहाँ तक की गली-मोहल्ले में उतर चुकी हैं।

चाहे फिर वह मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु जैसे नामी शहर हो या फिर छोटा सा गांव या कस्बा। कुछ पत्रकारों का विशेष ध्यान मोदी के विधानसभा क्षेत्र वाराणसी व गोद लिये गांव जयापुर कि तरफ भी हैं।

इस तरह वे आम लोगों से पूछते नजर आ रहे कि क्या मोदी सरकार के आने के बाद आप को अच्छे दिन नजर आये या नहीं! विषयों को उभारते हुए वे अपनी जिस पत्रकारिता का सुपर-से-उपर वाली विशेषता को प्रकट करने में पसीना बहा रहे यह भी नजरअंदाज कर रहे कि आम आदमी द्वारा उठाया गया मसला ग्राम पंचायत का हैं, नगर सेवक का हैं,  राज्य सरकार का हैं या वाकई मोदी सरकार का!!!

सवाल यह हैं कि वे पत्रकार जो कि अन्यथा प्रत्येक समाजिक घटना का विश्लेषण अपने एयर कंडीशन स्टूडियो में बैठकर स्वयं ही कर लिया करते हैं वे मोदी सरकार के कामकाज पर आंकडों पर आधारीत स्वयं का विश्लेषण करने से क्यूँ भाग रहे हैं! क्यूँ नहीं वे पिछली सरकारों से मौजूदा सरकार कि तुलना कर स्थिति स्पष्ट कर देते हैं! शायद इसलिए कि आंकडे दबाये नहीं जा सकते, सच वह बताना नहीं चाहते और खुले आम झुठ बोलने के उनके दिन रहे नहीं!

आज इन भांड पत्रकारों के हर झुठ पर सोशियल मिडिया में जमकर इनको जमकर लताड़ झेलनी पड़ रही जिसके डर से कइ पत्रकार Twitter या Facebook से लंगोट तक छोडकर भागते नजर आ रहे और जो भागे नहीं हैं उनको हर दिन मिल रही सुजन का दर्द तो बयां करने लायक भी नहीं…यह तो उनकी वाल पर पड़ रही कमेंट रूपी लात-घुँसो से ही पता चल जायेगा!

तो सीधा रास्ता यही बचता हैं कि सड़क पर उतर जाए व गली-मोहल्ले के आम जन को ही आगे कर दे। उस आम जन को जिसे अपनी दो वक्त की रोटी कमाने से ही फुरसत नहीं तो सरकार कि सुध कहाँ से लेंगे और जिसके पास समस्याओं का भंडार हैं। आप सिर्फ मौका दो वो एक की जगह पच्चीस गिना देगा… फिर भले ही समस्या के लिये जिम्मेदार कोई भी हो जब विषय मोदी-सरकार का चल रहा हो तो ठिकरा भी उनके ही सिर होना हैं।

इस खेल में कंधा तो बन गया आम आदमी का, बंदूक बन गया मिडियाइ कैमरा और गोली चला रहे हमारे होनहार पत्रकार(अपनी सुजन को बचाते हुवे) … निशाना तो १४ वर्षो से एक ही हैं… नरेंद्र मोदी! साला बेहद मोटी चमड़ी का हैं! असर ही नहीं होता!!!!!

खेर मुद्दा तो यह हैं कि अच्छे दिन आये या नहीं!

भाइ, आम जन के पास तो समस्याओं का भंडार हैं इसलिये उनके अच्छे दिन का आंकलन वे स्वयं ही करले। वैसे भी आलु-कांदे-दाल-पेट्रोल पर रोने वालों के अच्छे दिन शायद ही कभी आये (स्वार्थी जीवन!)। लेकिन यदी देश के अच्छे दिन कि बात करें तो इसका आकलन इतना स्पष्ट हैं की यह सवाल अपने आप में ही बेमानी हो गया हैं। सिर्फ बेमानी नहीं! बल्कि पूछने वालों कि मक्कारी, मूर्खता व मोदी विरोधी मानसिकता को भी बया करने लग गया हैं।

सब कुछ तो लेख में लिखा नहीं जा सकता पर मोटे-मोटे तौर पर जो लिख रहा हूँ व एक देशभक्त भारतीय के लिये अच्छे दिन का अहसास कराने को काफी हैं….

— भारतीय सैनिकों के हथियार व बुलेट प्रूफ जेकटों कि वर्षों कि कमी कि आपुर्ती जिसके कारण पिछले कई सालों से अकारण कितने ही जवान शहीद हुए
— भारतीय सैनिकों को पाक कि और से आन वाली एक गोली के बदले अनगीनत गोली चलानी कि खुली छुठ
— POK पर घुसपैठ पर पूर्णतया नियंत्रण जिसके चलते मोदी काल में सर्वाधिक घुसपैठीये मारे गये व पाकिस्तान को पंजाब सीमा का रुख करना पडा
— कश्मीर में हर हफ्ते तीन से चार आतंकीयो का चुन-चुन कर खात्मा निरंतर जारी
— बलूचिस्तान व POK में पाक विरोधी गतिविधियों को बल सहित विश्वस्तरीय पाकिस्तान पर चौतरफा दबाव
— भारतीय जल-थल-वायु सेना कि शक्ती में जबरदस्त इजाफा
— भारतीय सेना कि अत्यावश्यक आपुर्ती के लिए हथियारों कि खरीदी और उसमे भी बिचौलियों कि छुट्टी
— भारत निर्मित हथियारों कि ना केवल शुरूआत बल्कि तेजस जैसा लडाकू विमान व शक्ती जैसा LCH हेलिकॉप्टर सेना में शामिल
— भारत-चीन सीमा पर पूरी तरह नाकाबंदी व चीनी सेना कि घुसपैठ का पुरजोर विरोध
— कूटनीतिक रणनीति से चीन का घेराव शुरू जिसमें जापान व अमेरीका खुलकर भारतीय खेमे में
— बांग्लादेश से सीमा विवाद का खात्मा व भारत-बांग्लादेश सीमा पुरी तरह सील मतलब बांग्लादेशियों कि घुसपैठ पर लगाम
— म्यांमार में घुसकर भारत विरोधी आतंकीयों का पुरा सफाया (आजाद भारत के इतिहास में पहली बार)
— भारत के पड़ोसि देशों से दोस्ती व उनके सहायतार्थ तत्परता कि नइ पहल जैसे काठमांडू भुकंप में तुरंत मदद
— कश्मीर पंडितों के पुनर्वास के लिए कारगर प्रयास व कश्मीर को विकास की राह पर ढकेलना जिसमें रेल सुविधा सहित व्यापारी निवेश पर जोर
— विदेशी पूंजी पर भारत के विकास में बाधा व धर्मांतरण जैसे धंधों को रचने वाले सभी गैरसरकारी संगठनों पर पूरी तरह से लगाम कईयों के लाइसेंस रद्द
— UPA काल में फर्जी केस में बंद अनेक देश भक्त पुलीस अधीकारी,  अफसरों व आम जन कि रिहाई

#### एक सच्चा देशभक्त तो मात्र इतने पर ही कह उठेगा की महाराणा प्रताप की तरह घास की रोटी मंजूर लेकिन मोदी के खिलाफ एक शब्द नहीं #####

लेकिन अभी उपलब्धी और भी हैं….

— मात्र दो वर्षों में लगभग 8000 गांवों में आजादी पश्चात पहली बार पहुंची बिजली व आज मई कि भिषण गर्मी के बावजूद 3994 मेगावाट  बिजली सरप्लस होते हुवे सिर्फ 2रु 22 पैसे प्रति यूनिट की दर से व्यापारियों के लिए उपलब्ध हैं।

— ग्रामीण स्वच्छता में 9.48 % सुधार हुआ है जिसमें स्वच्छता मिशन के तहत 1.82 लाख शौचालय बन चुके है । देश के 13 जिले , 161 block , 22513 ग्राम पंचायतें और 53973 गाँव Open Defecation यानि खुले में शौच से मुक्त हो चुके हैं।

— अंतरिक्ष विज्ञान में भारत के नये आयाम! 2015 तक मात्र 50 करोड़ कि आय करने वाले Isro की आय 9 गुना बढ़कर 400 करोड़ के पार! कई देशों का अपने सेटेलाइट भेजने के लिए भारत कि तरफ रूख

— सूखे के हालात से निपटने के लिए पहली बार चलाई गई Water Train, बूंद-बूंद तरसते लोगों के लिये करोड़ों लिटर पानी कि व्यवस्था साथ ही जगह-जगह बारीश के पानी संचय करने के लिए सैकड़ों नये तालाब व कुआ कि खुदाई का काम कई चरणों में पुरा

— प्रधान मंत्री जनधन योजना के तहत 22 करोड़ बँक खाते खूले व सरकारी लाभ जैसे पेंशन/LPG SUBSIDIES सीधे उनके खाते में, करोड़ों रूपये के दुरुपयोग व लुट पर सीधे रोक

— प्रधान मंत्री के कहने मात्र से एक करोड़ से ज्यादा सक्षम ग्राहकों ने स्वेच्छा से LPG SUBSIDIES का त्याग कर देश के करोड़ों रुपये बचाये जिससे उज्जवल योजना के तहत पांच करोड़ गरीबों के घर मूफ्त LPG कनेक्शन का लक्ष्य

— जिस गंगा नदी के सफाई अभीयान में 10 हजार करोड़ के खर्च के बावजूद पिछली सरकारे अंशमात्र सुधार ना ला सकि मात्र एक हजार करोड़ के खर्च से गंगा जल के प्रदूषण में कमी… एक बहोत बडी उपलब्धी

— नदियों से नदियों को जोड़ने के मेगा प्रोजेक्ट पर तेजी से कार्य जिससे बाढ़ व सूखे जैसी स्थितियों पर पूर्ण नियंत्रण व किसानों के लिए जल समस्या का समाधान

— विश्व स्तर पर भारत कि गरिमा को एक नइ पहचान व प्रवासी भारतीयों को एकझुट कर उनको भारत से जोडने कि अभुतपूर्व पहल

— विदेश में बस चुके भारतीयों के लिए देश में आने-जाने का मार्ग आसान,  Visa on arrival जैसी सुविधाएं

— किसी भी देश कि आपदा कि स्थिति में भारतीयों कि सुरक्षा पर त्वरित जोर व घरवापसी के तुरंत इंतेजाम कि व्यवस्था कि गई

— 2000 करोड़ के काले धन कि वापसी व कडक कानून के जरिये कालेधन देश के बाहर जाने पर रोक

— कोलब्लाँक व 2G स्पेक्ट्रम आवंटन के आनलाइन आवंटन से कई लाख करोड़ का मुनाफा जिसे कांग्रेस ने कोडीयो के दाम दे कर खुद की जेबे भर ली थी

— भारतीय ट्यूरीज्म में 266% बढ़ोत्तरी, लगभग 80 हजार विदेशी भारत यात्रा के लिए पहुंचे

— FDI निवेश में आजाद भारत ने पहली बार चीन को पछाड़ते हुवे निवेशकों की पहली पसंद का स्थान हासिल किया

— सालों से करोड़ों का नुकसान उठा रहे एयर-इंडीया व भारतीय रेल कि आय में पहली बार मुनाफे के संकेत

— UN में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अमेरीका, रूस सहित कई देशों का समर्थन हासिल किया

— भारत कि पहल पर पुरे विश्व के लिए 21 जुन बना अंतराष्ट्रीय योग दिवस

— किसानों के लिए सोईल कार्ड, यूरिया कि उपलब्धता बढ़ाते हुए उनकी आय को दोगुना करने का लक्ष्य

— मजदूर वर्ग के लिए 100 से भी कम किमत पर जीवन बीमा व पेंशन योजना

— सुकन्या योजना के तहत लगभग एक करोड़ कन्याओं का भविष्य सुरक्षित

— 11 हजार फर्जी राशन कार्डों को डिलीट कर करोड़ों की बचत

— GDP 4% से बढ़कर 7% तक पहुंची जिसे कांग्रेस ने 8% से घिरा कर 4% कर दिया था

— मंहगाई पर लगाम, कोई भले ही ना कहे कि कम हुई लेकिन बढ़ोत्तरी भी नहीं हुई

अभी मात्र दो वर्ष हुवे हैं लेकिन फिर भी उपलब्धीयाों की भरमार, सभी बया करना मुश्किल! कोई नामी पत्रकार तो इसे गिनाने से रहा…. स्वयं ही एक देशभक्त पत्रकार बनकर हो सके तो इसे उस आम आदमी तक पहुंचाने कि कोशिश करे जो अनजाने हो कर अब भी अच्छे-दिन के इंतजार में बैठा हैं।

देश का आम आदमी भोला व अनजान जरूर होगा किंतु वह जब इतना भी जान लेगा तो वह विश्वास से अपनी समस्याओं से लड़ने को खडा हो जायेगा। उस विश्वास के साथ जिसे पिछली कई सरकारों ने अपने पैरों तले रौंदकर आम जनता में केवल निजी स्वार्थ जगाने कि कोशिश कि जिससे यह देश बिखर कर टुकड़े-टुकड़े में बट जाय।

।। जयहिंद।।

मोदी का लाहोर लंच

मोदी का लाहोर लंच

लगभग सभी आतंकवादीयों के हिट लिस्ट में अव्वल होने के बावजुद आतंकी गढ पाकिस्तान के लाहोर में मोदी का चंद घंटे गुजारना जाहीर हैं कि यह कोई मजाक नहीं था|

लाहोर रूकने वाले मोदी के फैंसले होने से लेकर उनके दिल्ली पँहुचने तक, भारतीय सुरक्षा एजेंसीयों के तो रोंघटे ही खडे हो गये होंगे|

लेकिन मोदी कि इस जोखिम भरी कुटनीती ने विश्व स्तर पर अपने पडोसी देशो के प्रती भारत के सकारात्मक विचारधारों को इस प्रबलता से उभार दिया हैं कि अब इसे कोई भी देश नकार नहीं सकेगा|

जहाँ देशी-विदेशी विशेषज्ञ इस कदम को पुर्णतया देश हित में बता रहे वहीं मोदी विरोधी कई तरह के कुतर्कों से लोगों में भ्रम फैलाने में जुट चुके हैं…..कोई इसे सुनीयोजीत बता रहा, कोई इसे व्यापारीक बता रहा तो एसे महारथी भी हैं जो इसे दिशाहिन व बचकाना साबीत करने कि कोशिश में लगे हुवे हैं!!!

एक तरह से मोदी का यह लाहोर दौरा अब तक के पुर्व सभी भारतीय प्रधान मंत्री के पाकिस्तानी दौरों में सबसे बेहतर हैं| वह इसलिये क्युँ कि अन्य सभी दौरों में पाकिस्तान के साथ जो भी समझौते या वार्ता हुई वह पाकिस्तान कि मक्कार रणनीती के चलते कभी धरातल पर नहीं उतर सकी| फिर महिनो पहले पाकिस्तानी दौरा निर्धारीत कर उसकी रणनीती पर सरकारी समय व्यर्थ कर क्या लाभ मिलना था!

एसे निर्धारीत दौरों से विदेशो से पोषित मिडीया तंत्र को लोगों के बीच फिजुल कि आँस बाधने का मौका मिलता हैं जैसा कि वे हमेशा भारत-पाक वार्ता के पहले करते आ रहे हैं लेकिन इस दफा वे कर ना सके| शायद यहीं कारण हैं कि इन मोदी विरोधीयों को मोदी कि यह अचानक कि गई पाकिस्तानी यात्रा हजम नहीं हो पा रही!

क्यो? आखिर इन रायता गैंग को रायता फैलाने का मौका जो ना मिल सका!!!

> ना ही पाकिस्तान के साथ कोई व्यापारीक निवेश हो सकता थे
> ना ही पाकिस्तान से कोई तकनीकी विशेषज्ञता हाँसील करनी थी
> ना ही पाकिस्तान में कोई लाभकारी प्रयोजना हैं जिसका नीरक्षण किया जा सकता था
> ना ही वहाँ कोई भारतीय मुल का अब बचा हैं जिन्हे मोदी संबोधीत कर सके
> और ना ही पाकिस्तान से किये कोई समझोतों का कोई महत्व होता हैं…

एसी परिस्थीतीयों के चलते सिर्फ यदी नाम मात्र ही पाकिस्तान यात्रा करना करना रहता हैं तो इस लिहाज से मोदी के चंद घंटे लाभकारी ही थे| पाकिस्तान से काम कि उम्मीद तो नहीं कि जा सकती थी और केवल नाम के लिये ही हमारे प्रधानमंत्री को पडोसी मुल्क पाकिस्तान जाना रहता हैं बगैर हो-हल्ला के इससे बेहतर यात्रा हो ही नहीं सकती थी|

देश में मोदी विरोधी चाहे जो तर्क दे कर इस घटना पर विरोध जता ले, लेकिन विश्व सत्तर पर भारत के प्रती अन्यदेशो का व्यवहारीक दृष्टीकोण मजबुत हुवा हैं|

मोदी और मिडीया

आजाद भारत में मिडीया ने देश कि राजनीती को कई रूपो में प्रभावीत करता आया हैं| जब से नीजी चेनलों का चलन देश में चल पडा लोगों पर मिडीया कि पकड और भी प्रभावी बनती गई| मिडीया ने अपनी मजबुती का कई रूपों ने नजायज फायदा उठाता आया हैं| मिडीया का दब-दबा इस कदर बढ चुका था कि रातों-रात किसी भी गली-कुचे आवारा को राष्ट्रीय दर्जे का नेता बना देता और यही कारण भी हैं कि आज देश कि राजनीती में कई एसे नामी चहरे दिखते हैं जीनकी जमीनी पकड शुन्य हैं, जिनके पास देश व समाज के प्रती कोई विचार तक नहीं लेकिन उनकी गीनती कद्दावर नेता में हो चुकी हैं| भारतीय राजनीती पर आज आम लोगों का जीतना ही विकृत नजरीया हैं उसका एक मात्र जिम्मेदार यदी किसे ठहराया जा सकता हैं तो वह देश के बिकाऊ मिडीया तंत्र ही हैं|

नरेंद्र मोदी पहले देश के एसे नेता हैं जिन्होने मिडीया तंत्र की इस कदर कि दादागीरी को ना केवल चुनोती दी बल्की पुरी तरह धराशायी किया| मोदी ने अपने विषय पर अनाब-शनाब टिप्पणी करने वाले कई नामी पत्रकारों को आज इस कदर बोना कर दिया हैं कि अब वे छटपटाये नहीं थक रहे किंतु उनकी एक नहीं चल पा रही| मोदी और मिडीया कि जंग दशको पुराना हैं साथ विषय का अध्यन हर देशभक्त को आज के राजनेतीक परिवेश से जागृत व सतर्क करता हैं|

२००२ के गुजरात दंगो से आज तक मिडीया के खिलाफ कई बडे व घिनोने प्रोपेजंडे चलाये व जिनकी कोशीशे रही कि मोदी कि विजय का रथ आगे ना बढ सके|

जहाँ मिडीई दलाल पत्रकारों के पास चेनलों के स्टुडीयों में बैठ कर मात्र जहर उगल कर उन्हे बदनाम करने का बेहद सटीक व सरल माध्यम था वहीं मोदी को पुरी तरह से जमीनी कार्य को अंजाम देकर जनता कि पकड को बनाये रखना था

मिडीया द्वारा ‘मोदी’ नाम पर कितने ही तरह के किचड उछाले गये लेकिन मोदी ने मिडीया को पुरी तरह नजर अंदाज किया व उनसे परहेज किया क्युँ कि उन्होने भाँप लिया था कि मिडीया हर रूप में उनके खिलाफ जहर उगलना चाहता हैं|

मिडीया के पास जनता तक पहोचने का सिधा, मजबुत व विदेशी पुँजी से पोषित पुरी ताकत थी तो मोदी के पास एक मात्र उसकी कर्मठता लेकिन वह काफी नहीं थी क्युँ की जनता तक कार्य व सच्चाई पँहुचानी जरूरी थी

इसके लिये मोदी ने अपने साथीयों सहीत हर गाँव व हर गली तक पहुँचने में कोई कसर ना छोडी जहाँ ना केवल जनता कि समस्याये सुलजाई गई बल्की उनकी जरूरतो कि आपुर्ती कर विकास कि नई गाथा लिखी जो पुरी तरह जमीनी हकिकत थी|

मोदी ने मिडीया का तोड सोशियल मिडीया से निकाला और संभवत: एक मुख्यमंत्री पद के वे पहले नेता थे जिन्होने सोशियल मिडीया का जम कर उपयोग कर जनता तक अपनी बात व सच्चाई पहुँचाई साथा ही इस माध्यम से उन्होने जनतो को भी उनकि बात रखने का सिधा मौका दिया

सोशियल मिडीया के जरीये मोदी की विकास गाथा गुजरात कि सिमा तोड कर ना केवल भारत बल्की विदेशों तक पहुँचने लगी और यहीं से मोदी स्वरूप का अंतराष्ट्रय संस्करण प्रारंभ हुवा

वह सच्चाई जीसे मिडीया ने पुरी तरह दबाना चाहा देखते ही देखते हर जागरूक भारतीयों के सामने खुली किताब बन गई थी जिसने जीतना जाना वो उतना ही नत मस्तक हुवा व औरो तक पहुँचाने कि मुहीम मे जुडता चला गया| जुडता क्यों नहीं आखिर देश को बचाना था|

एसी परिस्थीतीया, जिनमे सारे विरोधी एकजुट, सारे मिडीया मोदी के खिलाफ यहाँ तक की खुद बीजेपी के बडे नेताऔ की भी बेरूखी, से गुजरकर भी मोदी ने चार दफा गुजरात का चुनाव पुरे बहुमत से जीता वास्तव में यह सत्य व असत्य के मध्य वह अघोषित महायुद्ध था जिसमें असत्य निरंतर धराषायी होता चला गया

जाहीर हैं मिडीया तो मोदी को समजना ही नहीं चाहता था लेकिन मोदी ने बिकाऊ मिडीया कि नस पकडली थी, सोशियल मिडीया पर दनका बैठा लिया था अब जो बीकाऊ मिडीया कभी मोदी को अपने अनुसार चलाना चाहता था अब मोदी ने मिडीया को अपनी नीती के अनुसार नचाना शुरू कर दिया

लोकसभा चुनाव मोदी की मिडीयाई समझ का सबसे बेहतर व अभुतपुर्व उदाहरण हैं जहाँ कई तरह के दौर नजर आये –
— जहाँ अन्य विरोधी दलों पर जनता का विश्वास पुरा उठ चुका था वहीं मिडीया ने पहले कि तरह ही लाख कोशिश कि की रातों रात कई बहरूपीयों को राष्ट्रीय दर्जे का नेता बनाकर मोदी के खिलाफ खडा कर दे किंतु तब तक सोशियल मिडीया पर मोदी को समर्थन करने वाले करोडो हाथ उठ चुके थे जिन के आगे मिडीया कि एक ना चली
— मोदी ने एसे-एसे शब्दो व अदाऔ के पाँसे फेके जीसे बीकाऊ मिडीया लपक कर चाहता तो उनके खिलाफ इस्तेमाल करना किंतु वे मोदी प्रचार का ही जरीया बनते चले गये (जैसे कुत्ते का पील्ला, हिंदु राष्ट्रवादी, मोदीफिकेशन, चुनाव के दोरान कमल के साथ सेल्फी)
— प्रचार अभीयान के अंतीम चरणो तक कई नामी पत्रकारों के लाख चाहने पर किसी भी प्रकार के इंटरव्यु से पुर्ण परहेज| ना कोई कमेंट जो भी कहा या तो मंच जनता के बीच अथवा सोशियल मिडीया के जरीये
— प्रचार अभीयान के बिलकुल अंत में सारे नामी पत्रकारों से रूबरू और वो भी पुर्ण तीखे अंदाज में जीसमे पत्रकार चाहकर भी मोदी पर हावी नहीं हो सके उलट मोदी पत्रकार के स्टुडीयों मे ही पत्रकार को मुँह पर लताडा

इस तरह मोदी ने ‘विरोधी और मिडीया के फेके हर पत्थर को अपनी सीढी बनाई’ और लोकसभा में अभुतपुर्व जीत हाँसील कि|

वह पत्रकार जो मिडीया के जरीये प्रत्येक क्षेत्र में स्वयं के षडयंत्रकारी विचारों को देश पर थोपने का एजेडा चला रहे थे मोदी के वार से पुरी तरह निष्क्रीय नजर आने लगे, लोगों ने भी एसे पत्रकारों को सोशियल मिडीया के जरीये जबरदस्त धुलाई करना शुरू कर दिया हैं|

मोदी कि इस एतिहासीक जीत ने यह साबीत कर दिया हैं कि दिनरात बनावटी मुद्दो पर मिडीया का फडफडाना जनता के मन पर अब पुरी तरह बेअसर हो चुका हैं और अब राजनीती विषय से मिडीया कोई भी खिलवाड करने कि क्षमता पुरी तरह गवा चुकी है|

एक क्षेत्रीय नेत्रीत्व से राष्ट्रीय नेत्रीत्व का सफर मोदी के लिये एक तपस्या कि तरह रहा जीसमे मोदी कि कार्यशैली कुछ एसी रही हैं कि उन्होने अपने विरोधीयो के खिलाफ कभी आवेश मे प्रतीक्रीया नहीं की लेकिन महोल एसा ढाला की उनकी जडे खुद-ब-खुद हिलती चली गई

मोदी के विषय में कई तरह के प्रश्नो में एक प्रश्न यह जरूर उठता हैं कि मोदी अब इन भ्रष्ट पत्रकारों पर कार्यवाही क्यों नहीं करते!

कुछ बाते जो घौर करने लायक हैं…
— इन प्रश्नो से यह तर्क देना कि मोदी को मिडीया कि समज नहीं या पत्रकारो के चलन से वे वाकीफ नहीं तो यह मानने योग्य ही नहीं
— मोदी ने अपने विरोधीयों पर पुर्ण नीयंत्रण बनाये रखा हैं लेकिन वे किसी भी रूप में उन पर त्वरीत कार्यवाही करेंगे यह उनकी कार्यशैली में नहीं
— फिर भी कई मिडीया कंपनीयों कि जाँच सीबीआई को सौपी जा चुकी हैं व कई चेनलों पर गृहमंत्रालय ने Security-Clearance कि तलवार अभी से लटक चुका हैं और यह पुर्णतया उनके राष्ट्र विरोधी चाल-चलन के कारण हैं
— आज मोदी सरकार मिडीया आधारीत तो बिल्कुल ही नहीं और अब सोशियल मिडीया के चलते मिडीया पहले कि तरह मोदी या देश के लिये खतरा नहीं बन सकती हैं अर्थात मिडीया नाम कि दहशत खत्म हो चुकी हैं|

उम्मीद यही हैं कि अब इन पर कोई सीधी व त्वरीत कार्यवाही ना हो कर वो रास्ते ही बंद किये जायेंगे जहाँ से राष्ट्रविरोधी पत्रकारीता पोषित होती हैं और NGO पर कसता सिकंजा इसकी एक शुरूवात भी मानी जा सकती हैं| शेष तो भविष्य के गर्भ मे छुपा हैं इंतजार ही करना होगा|

जय हिंद!

ॐ, योग और मोदी सरकार

कई कट्टर हिंदुऔ को मोदी सरकार द्वारा योग को धर्म से अलग करना रास नहीं आ रहा जब की वे यह भुल रहे कि मोदी ही पहले प्रधान मंत्री हैं जिन्होने भगवद्गीता वा माँ गंगा का प्रचार पहले दिन से पुरे विश्व में किया|

यह नहीं कहता की मोदी पर भरोसा कर बठ जाये लेकिन कुछ बाते तो हमे समजनी ही चाहीये…

१) सरकार की गंभीरता भारतीयता के प्रचार पर होनी चाहीये जैसा कि मोदी सरकार पुरी तरह से कर रही हैं, पहले दिन से| जितना ज्यादा भारतीयता का प्रचार होगा सनतन धर्म स्वयं ही उभरकर आयेगा|
२) धर्म का प्रचार सरकार का काम नहीं, वह हमारी जिम्मेदारी हैं| धर्म के लिये सरकार से अपेक्षा तब कि जा सकती हैं जब हिंदुराष्ट्र का दर्जा संविधान में दर्ज हो जाये जिसमे अभी वक्त हैं फिलहाल सेक्युलर का चौंगा ही पहन कर कार्यरत होना पडेगा| यह हमे सोचना हैं कि हम किस तरह खुद से या संधठन से जुड कर धर्म को मजबुती से स्थापीत करने में भुमीका नीभा सकते हैं|
३) मोदी सरकार से सनातन धर्म को मिलते फायदे भले किसी को ना भी नजर आये लेकिन कम से कम इस बात का संतोष तो मिलता ही हैं की वह धर्मविरोधी नहीं|
४) आज भले ही योग धर्म निरपेक्ष रूप में प्रचारीत किया जा रहा हैं लेकिन योग को सनातन धर्म की जडो से कोई काट नहीं सकता| जब भी कोई यदी योग कि गहराई तक पहुँचना चाहेगा उसे सनातन धर्म कि शरण में आना ही होगा| इसतरह से कम-से-कम मोदी सरकार ने लोगों के सनातन धर्म तक पहुँचने का मार्ग तो खोला हैं  जैसा की आज तक किसी पुर्व प्र.म. ने हिम्मत ही नही की थी
५) एक विश्वास जो मोदी से मिलता हैं कि देश एक सुरक्षीत हाथो में हैं व देश की अखंडता को कोई खतरा नहीं शेष तो हम कट्टर हिंदुऔ के हाथो में ही हैं की हम लौगों को किस तरह औरों में कट्टरता भरसके
६) मोदी सरकार के सामने सबसे बडी चुनोती इसी बात की हैं कि किस तरह से वह सेक्युलर के बुरखे में हिंदुत्व के लिये काम कर सके अन्यथा विदेशी देशो की डिप्लोमेसी को मोदी को बदनाम करने मे जरा भी वक्त नहीं लगना| वैसे भी वे इसी ताक में बैठे हैं|

समझो तो राष्ट्र प्रहरी
ना समझो तो मोदी भक्त

|| जय श्री राम ||

“हारने” की चतुराई !!!

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हारने की चतराई

अब तक मोदी ने सिर्फ जीतने की कला दिखाई थी…
इस बार मोदी ने “हारनेे” की चतुराई भी निचोडी!!!
पाँच साल के लिये चुजा सोने के पिंजरे में बंद!!!
क्युँ की भागने की गुँजाईश ही नहीं छोडी!!!

खुश तो आपीये आज बेहद होंगे,
कहेंगे हमने History रच डाली
होश संभालना इनके बस में ही नहीं
इन सब Fool औ का एक ही माली

वादे एसे जो पुरे करने की भी औकात नहीं…
साथी भी मनचले, मुँह खोल दे तो हो जाये किरकरी
पहले मात्र २४ ने दिल्ली को बनाया था रंगमंच
अब पुरे के पुरे ६७ नमुने ! संभाल लियो “कजरी” !!!

पहले सिर्फ ४९ दिन का ट्रेलर नजर आया था
अब पुरे पाँच साल का “इंटरटेंटमेट….इंटरटेंटमेट… इंटरटेंटमेट”
मिडीया वालों के लिये हर रोज Breaking मसाला
इन बेकदरों से मोदी ने अब जा कर खुद को संभाला

दिल्ली अब महफीलो से हमेशा सजी रहेगी
किसी और की क्या जरूरत “कजरी” ही मुजरा करेगी
कभी वाह-वाह भी बटोर लेगी तो पचा ना पायेगी
ज्यादा इतरायेगी तो टमाटर-चपाटे भी खा जायेगी

दिल्ली का युवा खुलकर मन बहलाता रहेगा
फैसला भी उसका ही, दोष किसके सर करेगा
उम्मीदे ही इनलोगो ने आँखों मे एसी पाली
सालों से लुटती गद्दी,
खाक सेवा होगी, जब जेब ही हो चुकी थी खाली

विकास के लिये मानसीकता भी, विकास की जरूरी
मुफ्तखोरी जो पाले, अक्ल भी करती उनसे दुरी
पाठ नैतीकता का, अंग्रेजो की शिक्षा कैसे पढायेगी
देख तमाशा “अनेतिकता” का, शायद अक्ल इन्हे आयेगी

मंच सजवाकर विदुषको का,
मोदी ने मजेदार राह बना ली
परोसकर इनकी मुर्ख लिलाऔ को
अघौषित प्रतीयोगीता नाम अपने कर डाली

Center ने जो किये थे अब तक अभुतपुर्व प्रदर्शन,
किसी पत्रकार ने अबतक ना थी जिनपर रोशनी डाली
अब जब करना पडेगा Evolution हुडदंगो से
खुद-ब-खुद चीख उठेगी, कर्मठता की हरीयाली

धन्य तेरा “त्याग”, धन्य तेरा ब्रम्हग्यान
धन्य तेरी राष्ट्रभक्ति, तु योद्धा बडा ही निराला
देश को खिलोना समझने वालो को
खेल-खेल में ही तुने, खिलोना जो बना डाला
खेल-खेल में ही तुने, खिलोना जो बना डाला

—  संजय त्रिवेदी

” मोदी विरोध ” पर कुछ विचार

” मोदी विरोध ” पर कुछ विचार

जो लोकसभा चुनाव से पहले मोदी का विरोध किया करते थे और आज भी करते हैं –

— वो देश के सबसे बडे गद्दार हैं क्योंकी उन्हे ना तो  पहले बीगडते देश के हालात की कोई चींता थी और ना ही आज देश की सुधरते हालात पर खुश, ये सिर्फ बीजेपी-आरएसएस के नाम का जहर पालने वाले लोग हैं
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