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जाली नोटों के आंकड़े! 

​क्या आप नकली नोट लेकर बँक में जमा कराने कि सोच भी सकते हो!!!

लेकिन हमारा बिकाऊ मिडीया तो ऐसी ही उम्मीद लोगों में फैला कर झूठ का माहौल बनाने में लगा हुवा हैं। एक खबर लगभग हर चैनल पर बार-बार सुनाई अथवा पढ़ने में आ रही कि नौटबंदी पर सरकार के जाली-नोट का दावा झूठा सिद्ध हो रहा जिसकी वजह यह बता रहे कि RBI गवर्नर उर्जित पटेल यह आंकड़ा नहीं बता सके कि कितनी जाली नोट नौटबंदी के दौरान बँक में जमा कि गई! 

अब इस खबर से मिडिया व एयर कंडीशन में बैठकर मक्कारी भरी पत्रकारिता का झंडा गाढने वाले दलालों का दिमाग भी समझे… 

पहली बात, ये लोग उर्जित पटेल से यह जानना चाहते हैं कि कितनी जाली नोट बँक में जमा हुई! क्या ये यह नहीं जानते कि बँको में जाली नोट पहचाने कि मशीन लगी होती हैं अर्थात जो बनावट से ही नकली हैं वह छट कर अलग निकल जाए। अब जो नोट इस तरह से छट कर अलग निकल गई हो वह तो वैसे भी बँक में जमा नहीं होती… फिर इसका आंकडा भला उर्जित पटेल कैसे दे सकते हैं! 

दुसरी बात, जिसके पास भारी मात्रा में एसी नकली नोट होगी वह क्या एसी हिम्मत कर सकता हैं कि उसे ले जा कर बँक में जमा करने की कोशिश भी करे! 

तीसरी बात, जिस तरह कि भारी नकली नोट के स्वाहा होने का दावा सरकार कर रही हैं जिसे पाकिस्तान कि ISI ने छापा व जिसका इस्तेमाल आतंकवाद फैलाने में किया जा रहा था, यह उस तरह कि नकली नोट हैं जो पिछली सरकारों कि मूर्खता या युँ कहे गद्दारी के चलते बिल्कुल असली कि तरह छापा गया था… यानी की बँको कि मशिने भी जिन्हें नहीं छाँट सकती थी। एसी स्थिति में भी सवाल वही… कि जाली नोटों का आंकड़ा निकलेगा कैसे? लेकिन यहाँ यह जरूर तय हैं कि जो नोट पाकिस्तान व आतंकवादी संगठनों के हाथों में धरी रह गई वह तो वहीं स्वाहा हो गई और वो भी बगैर किसी आंकड़े के! जाहिर हैं यह आंकड़ा भी भारी ही होगा। और जो कुछ उनके दलालों द्वारा यदी बँको में जमा भी कर दी गई होगी, तो चिंता की बात इसलिए नहीं क्यूँ की वह बेहद मामूली रकम होगी जो पकड़ी ना जा स। फिर भी यदी रकम बड़ी हुई तो जाली नोटों का आंकड़ा सरकार को मिले ना मिले, जमा करने वालो का आंकड़ा जरूर सरकार के पास पहुंच चुका हैं जिसकी कार्यवाही देखने को मिली ही रही हैं। 

अरे भाई, यहाँ तो बडी “मेहनत” से कमाया काला धन भी लोग बँक में जमा कराने से डर रहे तो जाली-नोट बँक तक पहुंचा कर मिडिया वालों के लिए आंकड़े कहाँ से जमा हो! जरा सोचिए तो!!!!

तो फिर इन पत्रकारों कि जाली नोटों वाली इस खबर का क्या तुक….. भाई, यह और कुछ नहीं…. खिसियाई बिल्ली खंभा नौचे! सुना हैं न!!! 

जयहिंद 

भारत ने दिखाया अपना ५६ इंच का सीना

भारत ने पहली बार सिमा पार घुस कर आतंकीयों से लिया सेना के जवानो के कत्ल का बदला 👊👊👊

भारत के इतीहास में पहली बार नरेंद्र मोदी कि सरकार ने अपने ५६ इंच का सिना बताते हुवे १२ पुलीस जवानो के आतंकी हत्यारो को सबक सिखाने के लिये मयन्मार देश कि सिमा घुस कर छुपे हुवे आतंकीयों का खात्मा किया|

इस औपरेशन को बडे ही सुनीयोजीत तरीके से अंजाम दिया गया| जो आतंकी भारत में आतंक मचाने के बाद समीप के मयन्मार देश कि सिमा मे छुप कर जश्न मनाने मे लगे थे उन्हे अंदाजा भी ना होगा की भारतीय सेना कभी सिमा पार आकर भी उन्हे भुन सकती हैं, लेकिन इसबार उनका आंकलन देश के बदले हुवे नेतृत्व को पहचानने मे फेल हो गया और प्रधानमंत्री के आदेश के बाद सेना ने यह साहस कर दिखाया जिसमें करीब पचास आतंकीयों का खात्मा कर मौकाए वारदात पर तुरंत फैसला कर दिया गया|

इस अभुतपुर्व कदम से भारत ने विश्व व खासकर शत्रुऔ को संदेश दिया हैं की भारत अपनी सुरक्षा के लिये किसी भी हद तक जा सकता हैं….यह भारत के स्वाभीमान के लिये बेहद महत्वपुर्ण था जीसे बनाने कि हिम्मत अबतक के किसी भी पुर्व प्रधानमंत्रीयों में नहीं हुई|

यह सिर्फ भारत नहीं बल्की पुरे विश्व के इतीहास कि एक बेहद महत्वपुर्ण घटना हैं क्युँ की सिमा पार घुसकर कार्यवाही करने वाले एसे कुछ ही देश हैं जिनकी सुची में अब भारत भी शामील हो चुका हैं| इसके बावजुद कोई भांड मिडीया चेनल भारत के इस एतीहासीक साहस की प्रशंसा में नही उतरा क्यों की अगर वो एसा करे तो देश का बच्चा-बच्चा मोदी-भक्त हो जायेगा…वे इस खबर को दबाने के लिये कजरीवाल के फर्जी मंत्री कि खबर को बडा बताने में जुटे हुवे हैं….यब खबर केवल जी-न्युज ने पुरे विस्तार से प्रसारीत की (धन्य हैं जी न्युज)

यह वाकई भारत के अच्छे दिन हैं लेकिन आलु-कांदे-दाल-पेट्रोल के भाव पर आधारीत सरकार को आंकलन करने वाले मुर्खो को अच्छे दिन नहीं दिखेंगे

अब यह पुरी तरह चरीतार्थ हो गया हैं की सिर्फ सेना का मजबुत होना काफी नहीं जब तक की उसका नेतृत्व किसी मर्द के हाथ मे ना हो…

जय हिंद, जय भारत
|| वंदेमातरम् ||