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आज के मुर्ख हिंदु! 

किसी युग में होता था विद्वान बडा हिंदु …

… आज तो बडा ही मुर्ख नजर आ रहा!!!



हाल के वर्षों में मैने भारतीयों में एक अजीब सी बात देखी है कि हम पाना सब चाहते है लेकिन उसके लिये कुछ देना नही चाहते है। 
यह बात हम जानते है लेकिन फिर भी इससे मुहँ चुराय रहते है। ऐसा नही है कि यह आज की बात है, यह पहले से कुछ भारतीय नस्लों में सम्मिलित था। 
आज मुफ्त या सब्सिडी या आरक्षण जैसी विकृतियों का एकाधिकार या इसकी चाह हमको अपने आप से हीन बना रही है। 
यदि सत्यनिष्ठा से इसको समझा जाए तो सारी गलती हम भारतीयों की भी नही है क्योंकि स्वतन्त्रता मिलने के बाद से ही हम बिना अपना कर्तव्य निभाए…. अधिकार मिलने को अपना अधिकार मान बैठे है।



पिछले 7 दशकों से यह पृवत्ति इतना विकराल रूप ले चुकी है कि भारतीयों का ही एक बड़ा वर्ग, राष्ट्र चेतना के स्पंदन से ही विमुख हो गया है। यह वर्ग स्वाभिमान वाली भाषा तो दुर, स्वाभिमान शब्द से पुरी तरह अज्ञान हो चुका हैं। ध्यान देने वाली बात यह भी हैं कि एसी प्रवृत्ति से ग्रस्त लोगों की संख्या शिक्षित वर्ग में भरमार हैं।



लेकिन यह भारतीयों में हुआ क्यों? 
इन लोगो में राष्ट्र के अस्तित्व के प्रति संवेदनशीलता का आभाव क्यों है?’
मुझे लगता है कि यह ऐसा इसलिये हुआ है क्योंकि हम पीढ़ी दर पीढ़ी, गुलामीयत को इस कदर ओढ़े रहे है कि हमने अपने अस्तित्व को बनाये रखने के स्वार्थ में अपने धर्म, समाज और राष्ट्र के ही अस्तित्व को नेपथ्य में धकेल दिया है। आज हमारे लिये, यह तीनों… धर्म, समाज और राष्ट्र हमारे लिए मात्र सुविधा के तत्व है, जिस को हम अपनी स्वेच्छा से, अपने लिये अलिंगनकृत कर लेते है या उसे तज देते है। इसी ने ही ‘सिर्फ मेरा’ को स्वीकार्य कराया है और यही स्वार्थीता अब हमारी धमनियों में बहते रक्त में आ गयी है।
हम तो रोजाना की ज़िंदगी मे इतना भृष्ट हो गये है कि हम अपनी कमजोरियों को छुपाने हेतु धर्म, समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की उपेक्षा को अपनी जीवन पद्यति बना डाला है। हमको जब बहुत राष्ट्र प्रेम उमड़ता है तो सिर्फ जयचंद और मीर जाफर का नाम लेकर, उनको अपवाद मानते हुये, हकीकत को छुपा जाते है। 
अपने ही मात्रभुमी की लाज को तार-तार करने वालो धुर्त भारतीयों से इतिहास भरा पडा हैं… 
#गोलकुंडा के किले को भी 1687 में इसी तरह विजित किया गया था। सिपहसलारों को खरीद लिया गया था और उन्होंने, पिछला गुप्त दरवाजा, आक्रमणकारियों के लिए खोले दिया था।
#सतारा का परली का किला, 1700 में जो की मराठा सरकार का केंद्रबिंदु था, उस पर औरंगजेब ने पैसा देकर कब्जा किया था।
#औरंगजेब ने 1701 में, मराठा सेना के सेनापति त्रिम्बक को पैसे से ही खरीदा था और उसने  वर्धनगढ़, नांदगीर , वंदन और चन्दन  किले पर बिना लड़े, मुगलो को कब्जा कराया था।
#खेलना में अमबेर के सवाई राजपूत, मुगलो से लड़े थे। वे उनको हरा रहे थे लेकिन उनके सेनापति परुशराम ने, मुगलो से पैसा लेकर, वो किला मुगलो को जितवा दिया था।
#अवध की गवर्नरशिप के वादे पर, 1720 में, गिरधर बहादुर ने इलाहाबद के दरवाजे, मुगलो के लिए खोल दिए थे और उन्होंने, उस पर कब्जा कर लिया था।
#राजा श्रीनगर ने, दारा शिकोह के लड़के, सुलेमान को, पैसा लेकर, औरंगजेब के हवाले कर दिया था।
यह एक कटु सत्य है कि भारतीयों के एक बड़े वर्ग की धमनियों में अपने इन्ही पुरखों का रक्त अभी भी दौड़ रहा है।



ये नेहरू/गांधी परिवार, उनके कांग्रेसी गुलाम, ये आयातीत विचारधारा के पोषक वामपंथी, ये पश्चिम से आये आक्रांताओं से अपना डीएनए मिलवाते लोग, ये फोर्ड फाउंडेशन, मध्यपूर्व व वैटिकन के पैसे से उपजे लोग, ये कट्टर उलेमाओं के साथ हमबिस्तर होते राजनैतिज्ञ और नये आर्थिक परिवेश में न ढलने वाले लोग, यह यही लोग है।
आप कहेंगे कि होंगे एसे “कुछ” लोग! … ना… ना… इस “कुछ” के चक्कर में ना रहना… इनकी जनसंख्या तेजी से बढ़ रही। आप अपने आसपास थोड़ा भी ढूंढो तो तुरंत नजर आ जायेंगे। 
कैसे पहचानोगे??? 



अब देखिये, आजादी के बाद भी ७० सालो से तील-तील अपने हक व स्वाभिमान को तरसे भारत को आज जब एक मजबूत शतप्रतिशत देशी व सुसंस्कृत प्रधानमंत्री मिला हैं तो भी उन पर व्यंग कसने, ताने मारने व विरोध करने वाले प्रत्येक गली, मुहल्ले, गांव शहर तथा वाट्सअप ग्रूप पर भरे पड़े हैं… चिंदी-से-चिंदी मुद्दे को भी आग बना कर अपनी राष्ट्रीयता का आंचल स्वयं नोचते मिल जाते हैं। 
कोई यह तर्क दे सकता हैं कि ये तो हँसी-मजाक हैं! क्षमा करे… मुगल भी हँसी-मजाक में ही पहले रैंकी कर गये थे और हाँ! गौरे भी हँसी-मजाक में ही व्यापार कर गय थे। इतिहास से हमने कोई सिख तो लेनी नहीं! 

राष्ट्र ना जाने कब तक ऐसी हँसी-मजाक में गुलाम बनता रहेगा और ना फिर ना जाने कितने शिवाजी – महाराणाओ को बलिदान होना पड़ेगा। 
इन मंदबुद्धियों सहित एक राष्ट्र के तौर पर हम को यह स्वीकार करना ही पड़ेगा कि हम अपने अपने अनुपात में स्वेच्छा से हुये बेईमान, बेशर्म, गद्दार और गुलाम भारतीय हैं। 



समय रहते अपना छिछोरापन छोड सको तो छोड़ लो भाई अन्यथा इस लेख को भी हँसी-मजाक समझकर भुल सकते हो। 
|| वंदेमातरम् ||



(कुछ संकलित व कुछ स्वरचित) 

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​अब भोगी नहीं बल्कि योगी शासन करेंगे 

​अब भोगी नहीं बल्कि योगी शासन करेंगे 
नरेंद्र मोदी द्वारा योगी अदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाये जाने का सिधा संकेत…. 
🚩 भांड मिडिया कितना भी विधवा विलाप करले… मोदी को तिल जितना भी फर्क नहीं पड़ता 
🚩 विकास एजेंडा के चलते मोदी की हिंदुत्व के लिये निष्ठा अप्रभावित 
🚩 सेक्युलर किडो को कब-कहाँ-कितनी पेस्टीसाईड देने हैं यह मोदी अच्छी तरह जानते हैं… ये किडे आज भले ही तुरंत खत्म नहीं किये जा रहे, लेकिन इनकी जड़ों को खोदना शुरू हो चुका हैं 
🚩 उत्तर प्रदेश के विकास सहित सांस्कृतिक रक्षा हेतु मोदी बेहद गंभीर व पूर्ण रूप से परिपक्व 
🚩 यह उत्तर प्रदेश में राम मंदिर सहित राम-राज्य स्थापित करने कि और एक एतिहासिक कदम
🚩 भविष्य में मोदी के और अधिक तेज धारी व खतरनाक रणनीति का आगाज 
जय जय श्री राम 🚩🚩🚩

प्रेश्यावृत्ती में लिप्त पत्रकारों के बुरे दिन

प्रेश्यावृत्ती में लिप्त पत्रकारों के बुरे दिन

आज जब हर तरफ़ बिकाऊ पत्रकारों का महाजाल नजर आता हैं वहीं सुरेश चव्हाण व सूधिर चौधरी जैसे पत्रकारों को पत्रकारिता बेहद अदभुत उदाहरण बनकर उभर रही हैं।

सुदर्शन न्यूज के सुरेश चव्हाण व जी न्यूज के सूधिर चौधरी ने बेधड़क व बेहिचक देशहित कि पत्रकारिता से सारे बिकाऊ पत्रकारों के होश उडा कर रख दीए हैं। देश के हर अति-संवेदन शील मसलों पर भारत विरोधी एजेंडा परोसने वाले दलाल पत्रकार बरखा दत्त, रविश कुमार, राजदीप सरदेसाई, करण थापर, पुन्यप्रसुन्न वाजपेयी, राहुल कवल व दीपक चौरसिया जैसे तमाम पत्रकार जगत के दिग्गज मानेजाने वालों कि मिलावटी पत्रकारिता कि धज्जिया उडाकर रखदि हैं।

बिकाऊ पत्रकारों ने जिस तरह निष्पक्ष व सेक्युलर निती को मुखौटा बना कर भ्रष्टाचारियों, कट्टरपंथियों व गद्दारों को जो सुरक्षा कवच दे रखा था वह तो धरासाहि हुवा ही हैं साथ ही नौबत यहाँ तक पहुंच गई हैं कि अब इन पत्रकारों को स्वयं के लिये सुरक्षा कवच खौजने कि नौबत आ पड़ी हैं। इन गद्दारों को सुज ही नहीं पा रहा कि हर पल उजागर होता अपना काला चेहरा ये किसकी चोली में छुपाये।

एक तरफ जहाँ इन बिकाऊ पत्रकारों व इनसे जुड़े AajTak, NDTV, ABP NEWS, IndiaToday, TimesOfIndia, IndianExpress, TheHindu जैसे नामी चैनल व अखबार अपनी विश्वसनीयता खोते जा रहे वहीं सोशियल मिडिया पर हर रोज जनता द्वारा इनको बुरी तरह लताड़ा जा रहा। इसी तरह सुदर्शन न्यूज, जी न्यूज, DNA, दैनिक भास्कर व प्रातःकाल जैसे तमाम देशभक्ति कि पत्रकारिता करने वाले माध्यम जनता कि आवाज बनकर उभरने लगे हैं।

देश में ही रहकर देशभक्त पत्रकारों कि राह कितनी कठीन हो सकती हैं यह सुदर्शन न्यूज व जी न्यूज चैनल को मिल रही धमकि से पता चल रहा। दिन के लगभग सैकडों काल पकिस्तान, दुबई, सीरीया जैसे देशों से इन चैनलों को मिल रहे जिसमें चैनल व पत्रकारों को उडाने कि धमकिया मिल रही। भारतीय सुरक्षा एजेंसीयों ने भी ऐसे हमलों कि आशंकाऔ कि पुष्टि कि हैं लेकिन फिर भी इनके हौंसले अडिग रूप से बुलंद हैं।

देशभक्त पत्रकारिता से बौखलाए विरोधियों ने सुरेश चव्हाण व सूधिर चौधरी जैसे पत्रकारों को नरेंद्र मोदी का पट्ठा व MOUTH PIECE जैसे कई नाम देने कि कोशिश कि लेकिन सोशियल मिडिया पर मोर्चा संभाली जागृत देशभक्तों के आगे विरोधियों को मूँह कि खानी पड़ रही। जनता ने बहुरूपियों व देशभक्तों को पहचानना सीख लिया हैं।  वे जानते हैं कि जो सत्य बताये वह सत्यवादी कहलाता हैं ना कि किसीका निजी पट्ठा या MOUTH PIECE।

वास्तव में भारतीय राजनैतिक व समाजिक परिवेश में हो रहा यह बदलाव बेहद अदभुत व अभुतपूर्व हैं। हालांकि बदलाव कि यह प्रक्रिया अभी शुरूआती जरूर हैं किंतु मात्र आरंभ ने ही भारत के टुकड़े करने वाले दुश्मन देशों व ताकतों के सपनों को चकना चूर करना शुरू कर दिया है। भारत विरोधी एजेंडा के जरिये अपना भविष्य बनाने वाले भाडे के टट्टूऔ के लिए अब अलार्म बज चुका हैं कि वे प्रेश्यावृत्ती के धंधे से बाज आये अन्यथा उनका भविष्य तो दुर वर्तमान भी संभलना मुश्किल हो जायेगा। यह भारत के मजबूत भविष्य कि शुरूवात हैं… यही वास्तविक #अच्छेदिन भी हैं।

हम आम जन देशभक्त पत्रकारों को समर्थन दे कर व #Presstitute पत्रकारिता को नकार कर देशहित में स्वयं कि भुमिका भी सुनिश्चित कर सकते हैं और हमें ऐसा करना ही होगा।

।। जयहिंद।। वंदेमातरम्।।

हैं कोई जवाब!!!

हैं कोई जवाब!!!

इतिहास के कुछ प्रश्न जिन्हें जितना समझोगे….
आपके लिये सत्य उतना छलक उठेगा…

वह कौन प्रधानमंत्री था जिसने आधा काश्मीर पाकिस्तान को जाने दिया और बाकी आधे को धारा 370 की बीमारी लगाकर विवादित बना दिया?

वह कौन प्रधानमंत्री था जो भारत कि जीत रही लडाई के मध्य उठकर UN में चला गया और कहा कि काश्मीर का फैसला UN की मध्यस्थता और जनमत संग्रह से होगा?

वह कौन प्रधान्मंत्री था जिसने सुरक्षा परिषद् की स्थायी सदस्यता त्याग दी और उसके लिए चीन का समर्थन किया?

वो कौन सा प्रधानमंत्री था जिसने परमाणु परीक्षण पर अमेरीका से मिल रहे समर्थन को ठुकरा कर चीन को #NSG में बैठा दिया और आज वही चीन आज भारत के प्रवेश पर आपत्ति जता रहा?

वह कौन प्रधानमंत्री था जिसने चीन से पंचशील जैसा मूर्खतापूर्ण समझौता किया और फिर आधा अरुणाचल गँवा दिया?

वह कौन प्रधानमंत्री था जिसने मैदान में बांग्लादेश की लड़ाई जीतकर भी मेज पर कश्मीर गँवा दिया?

वह कौन प्रधानमंत्री था जिसने श्रीलंका में हथियार भेज कर LTTE को खड़ा किया और गृह युद्ध कराकर श्रीलंका को अपना दुश्मन बनाया?

वह कौन प्रधानमंत्री था जिसने फिर श्रीलंका में अपने हज़ारों सैनिकों को मरवाया और श्रीलंकन तमिलों को भी भारत का दुश्मन बनाया?

वह कौन प्रधानमंत्री था जिसके शासनकाल में नेपाल जैसा विश्वसनीय पड़ोसी चीन के हाथ में चला गया और भारत का दुश्मन बन गया?

वह कौन प्रधानमंत्री था जिसने भारत के संसाधनों पर मुस्लिमों का पहला हक बताया था?

वो कौन लोग थे जिन्होंने मोदी को वीजा ना देने के लिए अमेरिका को लिखे पत्र पत्र पर हस्ताक्षर किए थे?

वे कौन लोग थे जिन्होंने इशरतजहां जैसी आत्मघाती आतंकवादी को मासूम व बेटी व तीस्ता सीतलवाड जैसी दलाल को समाजसेवी बताया था?

वो कौन लोग थे जिन्होंने 2002 के दंगों में अपनी रोटियाँ सेकी और आज महलों में बैठकर सहिष्णुता का पाठ पढ़ा रहे?

वो कौन लोग हैं जिन्होंने हलफनामा पेश कर सुप्रीम कोर्ट में यह माना था कि भगवान राम का कोई अस्तीत्व नहीं वे केवल मिथ्या हैं?

वो कौन लोग थे जिन्होंने हिंदु-आतंकवाद को स्थापित करने के लिए तरह-तरह के षडयंत्रों में सैकड़ों निर्दोषों कि बली चढ़वा दि व दर्जनों निर्दोषों को सालों-साल जेल में सडने को मजबूर कर दिया?

वो कौन लोग हैं जिन्होंने JNU के देशद्रोही गद्दारों को नायक बनाने के लिए दिन-रात कमर कस ली थी?

और वे कौन से लोग हैं जो आज NSG में भारत की असफलता पर जश्न मना रहे हैं…?

जरा सोचिए!
देशहित में ना सही,
स्वयं कि जागरूकता के लिये ही सही…
एक बार………….. सोचिए तो!!!!

#WCFIndiasPride : Will Fight Back !

#WCFIndiasPride : Will Fight Back !

भारत में भारतीय संस्कृती को मिटाने वाली ताकतों ने अब आर्ट-आफ-लीवींग को नीशाना बनाया| दिल्ली में यमुना नदी के किनारे होने वाले आर्ट-आफ-लिवींग के अतंराष्ट्रीय सांस्कृतीक सम्मेलन जो कि यमुना नदी के किनारे ११ से १३ मार्च ११ से १३ मार्च को निर्धारीत हैं उसके पाछे तरह-तरह के विहाद फैलाया|

ये वही ताकते हैं जिन्होने कई तरीकों से हमारे पुज्य साधु-संतो के खिलाफ तरह-तरह के षडयंत्र रचते आ रहे हैं और जिस तरह साधु-संतो के पीछे बिकाऊ मिडीया भी अपनी एडीचोटी का जोर लगाती आया हैं उसी तरह इस बार भी मिडीया व बिकाऊ पत्रकार का एक वर्ग ने अपना बजार लगाने कमर कस था|

पर्यावरण के रक्षक उस समय कहाँ मर जाते हैं जब यमुना तट पर बडी-बडी बिल्डींगे निर्माण होती रहती हैं…मात्र तीन दिवसीय सांस्कृतीक कार्यक्रम में रौडे अटकाने के लिये सारा पर्यावरण प्रेम उमड पडा!!!

कुछ ही दिनो पहले पाकिस्तानी गायक गुलाम अली के कार्यक्रम का जब विरोध उठा था तब सारे विपक्ष व बिकाऊ मिडीया ने एक सुर में उसका साथ दिया था लेकिन भारत में ही भारतीय सांस्कृतीक कार्यक्रम के पक्ष में किसी ने आवाज बुलंद नहीं की!!!

यह एक सांस्कृतीक आतंकवाद का ही हिस्सा हैं जिसमें भारतीय संस्कृती को दबा कर खत्म करने का षडयंत्र चल रहा हैं जिसके तहत ही हमारी संत परमपरा पर रह-रह कर हमले होते रहे हैं|

हमे यह ठान कर चलना हैं कि इन मक्कारों कि चलने नहीं दि जायेगी… देश के हर राष्ट्रप्रेमी दिवार बन कर इनके विरोध में खडा नजर आयेगा

|| वंदेमातरम् ||

तय करलो…आप किसके साथ हो

तय करलो…आप किसके साथ हो ###

भारत-विरोधी मिडीया ने जिस तरह JNU के राष्ट्रद्रोही छात्र कन्हैया को नायक के तौर पर उभारा हैं यह आज हर भारतीय के लिये बेहद चिंतन व अध्यन का विषय बन चुका हैं….

जहाँ इस प्रकरण में भारतीय राजनीती के कई दिग्गजो का राष्ट्रविरोधी चरीत्र उजागर किया हैं वहीं भारत के कोने-कोने में भारत कि बर्बादी के लिये फैलाये जा रहे विष भरे तंत्र को भी उभार कर रख दिया हैं…

तरह-तरह के कई प्रकरणो ने आज राजनीतीक व समाजीक परिवेश को दो फाड में बाँट दिया हैं जिसमें….

दुसरी तरफ राष्ट्रवादी ताकते हैं…

दुसरी तरफ देश को बचाने वाले गीने-चुने पत्रकार व सोशियल मिडीया

दुसरी तरफ देश को समर्पीत, धर्म-रक्षक व कर्मठ संघठन, संत व राज सेवक

दुसरी तरफ देश का चौकन्ना खुफीया-तंत्र व सिमा पर डटे व बलीदान देते जवान

दुसरी तरफ शहीद होते जवानों का निर्भय, साहसीक परिवार

इस देश का अब कोई भी नागरीक स्वयं को निष्पक्ष नहीं रख सकता…कोई भी नागरीक भ्रमीत रहकर खुद को अलग नहीं रख सकता… हमे अपने भ्रम को दुर करना ही होगा…यदी हमने राष्ट्रवादीयो का साथ नहीं दिया तो स्वभावीक रूप से हमारी खामोशी राष्ट्रविरोधी ताकतों का समर्थन करती नजर आयेगी…क्युँ की यदी देश बर्बाद हुवा तो उसकी एक जिम्मेदार हमारी खामोशी भी होगी…

अगर आज हमने इसके पिछे देश के टुकडे-टुकडे करने वाले षडयंत्र को समझने तथा दुसरों को समझाने मे भुल या फिर देर कर दी तो हमे अपनी अगली पीढी को धरोहर में फिर एक बेडीयों में बंधा, खंड-खंड में बीखरा भारत सौपना होगा जिससे संभवतः उनका जिवन अनगीनत संघर्षों से भर जाये|

यह हकिकत हैं कि इन संघठीत रूप से उभरे गद्दारों के पिछे एक बहोत बडी शक्ती सुनीयोजीत तरीके से कार्यरत हैं और ये खुलेआम हमारे सामने कुछ भी कह सकते हैं, कर सकते हैं क्यों की इनके लिये कोई कानुनी हद नहीं…और हम परिवारीक जिम्मेदारीयों के बोझ तले इनके आगे कुछ नहीं कर सकते क्युँ की हम ना तो संघठीत हैं और ना ही कानुन हमें इसकी इजाजत देता हैं…

लेकिन कम-से-कम हम इनके विरूद्ध आवाज उठा कर दुसरो को जागृत व संघठीत कर सकते हैं…जो इनके विरूद्ध डटे हैं उनका समर्थन कर उनकें हाथ मजबुत कर सकते हैं….

एसा हमे करना ही होगा…..
तब जा कर ही हमारा लोकतंत्र सफल हो सकेगा|

|| जय हिंद || वंदेमातरम् ||

तोडने की साजीश

जरा सोचिये…

अखलाक (दादरी) के बहाने …!
हमें साम्प्रदायिक बनाया

रोहित (हेदराबाद) के बहाने ….!
हमें जातिवादी बताया

अब तृप्ती देसाई (शनि शिगणांपुर) के बहाने ..
हमें स्त्रीयों पर पाबंदी लगाने वाला
पुरूष प्रधान समाज साबीत किया जा रहा है…

चारों तरफ से घेरा जा रहा है..
हमें टुकडों में तोडा जा रहा हैं…
उकसाया जा रहा हैं ताकी हम अपनी सहनशीलता
को त्याग हिंसा पर उतर आये…

और यदी किसी ने उकसावे में प्रतीकार कर दिया तो फिर उससे प्रमाणीत किया जायेगा की भारत “असहनशील” हो गया हैं!!!

समजो इन विदेशी हाथो कि कठपुतली, इन सेक्युलर मक्कारो और मिडीयाई गद्दारों द्वारा फैलाई जा रही साजीशो को…

इस देश कि अखंडता तब तक सुरक्षीत नहीं जब तक देश का हिंदु जागृत व एकझुट नहीं!!!

विशेष:
” हिंदु ” कोई धर्म नहीं बल्की भारतीय जीवन शैली का नाम हैं| इस देश की मिट्टी में जन्मा हर शक्स जो भारतीय मिट्टी में पनपे विभीन्न धर्मों का अनुयायी हो अथया मानता हो कि उसके पुर्वज उनसे जुडे हुवे थे या वह जो भारतीय संस्कृती व सभ्यता से जुड कर खुद को भाग्यशाली मानता हो, वह एक “हिंदु” ही हैं|

हिंदु = जेन + सिख + बोद्ध + सनातन
(सभी धर्म जो देश कि ही मिट्टी में पनपे)

|| जागो और जगाऔ, देश बचाऔ ||

……..जन-जन को इसे भेजो…….