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जाली नोटों के आंकड़े! 

​क्या आप नकली नोट लेकर बँक में जमा कराने कि सोच भी सकते हो!!!

लेकिन हमारा बिकाऊ मिडीया तो ऐसी ही उम्मीद लोगों में फैला कर झूठ का माहौल बनाने में लगा हुवा हैं। एक खबर लगभग हर चैनल पर बार-बार सुनाई अथवा पढ़ने में आ रही कि नौटबंदी पर सरकार के जाली-नोट का दावा झूठा सिद्ध हो रहा जिसकी वजह यह बता रहे कि RBI गवर्नर उर्जित पटेल यह आंकड़ा नहीं बता सके कि कितनी जाली नोट नौटबंदी के दौरान बँक में जमा कि गई! 

अब इस खबर से मिडिया व एयर कंडीशन में बैठकर मक्कारी भरी पत्रकारिता का झंडा गाढने वाले दलालों का दिमाग भी समझे… 

पहली बात, ये लोग उर्जित पटेल से यह जानना चाहते हैं कि कितनी जाली नोट बँक में जमा हुई! क्या ये यह नहीं जानते कि बँको में जाली नोट पहचाने कि मशीन लगी होती हैं अर्थात जो बनावट से ही नकली हैं वह छट कर अलग निकल जाए। अब जो नोट इस तरह से छट कर अलग निकल गई हो वह तो वैसे भी बँक में जमा नहीं होती… फिर इसका आंकडा भला उर्जित पटेल कैसे दे सकते हैं! 

दुसरी बात, जिसके पास भारी मात्रा में एसी नकली नोट होगी वह क्या एसी हिम्मत कर सकता हैं कि उसे ले जा कर बँक में जमा करने की कोशिश भी करे! 

तीसरी बात, जिस तरह कि भारी नकली नोट के स्वाहा होने का दावा सरकार कर रही हैं जिसे पाकिस्तान कि ISI ने छापा व जिसका इस्तेमाल आतंकवाद फैलाने में किया जा रहा था, यह उस तरह कि नकली नोट हैं जो पिछली सरकारों कि मूर्खता या युँ कहे गद्दारी के चलते बिल्कुल असली कि तरह छापा गया था… यानी की बँको कि मशिने भी जिन्हें नहीं छाँट सकती थी। एसी स्थिति में भी सवाल वही… कि जाली नोटों का आंकड़ा निकलेगा कैसे? लेकिन यहाँ यह जरूर तय हैं कि जो नोट पाकिस्तान व आतंकवादी संगठनों के हाथों में धरी रह गई वह तो वहीं स्वाहा हो गई और वो भी बगैर किसी आंकड़े के! जाहिर हैं यह आंकड़ा भी भारी ही होगा। और जो कुछ उनके दलालों द्वारा यदी बँको में जमा भी कर दी गई होगी, तो चिंता की बात इसलिए नहीं क्यूँ की वह बेहद मामूली रकम होगी जो पकड़ी ना जा स। फिर भी यदी रकम बड़ी हुई तो जाली नोटों का आंकड़ा सरकार को मिले ना मिले, जमा करने वालो का आंकड़ा जरूर सरकार के पास पहुंच चुका हैं जिसकी कार्यवाही देखने को मिली ही रही हैं। 

अरे भाई, यहाँ तो बडी “मेहनत” से कमाया काला धन भी लोग बँक में जमा कराने से डर रहे तो जाली-नोट बँक तक पहुंचा कर मिडिया वालों के लिए आंकड़े कहाँ से जमा हो! जरा सोचिए तो!!!!

तो फिर इन पत्रकारों कि जाली नोटों वाली इस खबर का क्या तुक….. भाई, यह और कुछ नहीं…. खिसियाई बिल्ली खंभा नौचे! सुना हैं न!!! 

जयहिंद 

#PMSpeaksToArnab

#PMSpeaksToArnab

भारत के प्रधानमंत्री पद रहते हुए किसी ने निजी समाचार चेनल को साक्षात्कार दिया एसा पहली बार हुआ…  नरेंद्र मोदी के साक्षात्कार पर एक सारांश…

# गरीबी #

जनधन योजना, जिवन बीमा जैसी अनेको योजनाओं से गरीबों को जोड़ा गया जिससे उनका जिवन स्तर बेहतर होगा व देश की मुख्य धारा में गरीब भी जुड कर देश के विकास में भागीदार बन सकेगा।

स्वच्छ भारत व घर-घर शौचालय का सबसे पहला लाभ यदी किसी को मिलना हैं तो वह गरीब हैं जिससे उनका स्वास्थ्य बना रहेगा व बिमारी से कम जुझना पडेगा।

अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक सरकार की योजनाओं के लाभ पहुंचाने को सरकार प्रतिबद्ध हैं।

# रोजगार #

भारतीय रेल, सड़क व इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रसार से ना केवल विकास का उद्देश्य सुलझ रहा बल्कि लाखों लोगों को रोजगार भी मिल रहा।

नियमों में बदलाव कर शापींग माल सहित कई दुकानों को २४ घंटे सेवा देने कि छुट दि जा रही हैं जिससे नये रोजगार के अवसर बनेंगे।

स्टेंड अप इंडीया व स्टार्ट अप इंडीया के जरिए भी युवाओं को मौका मिला हैं जिससे वे स्वयं का भविष्य खुद निर्माण भी कर सकेंगे साथ ही साथ औरों को रोजगार भी देंगे।

प्रत्येक बैंकों कि शाखाओं को निर्देश दिया गया हैं कि वे एक महिला व एक आदिवासी को व्यापार के लिये कर्ज दे यह भी रोजगार बढ़ाने कि दिशा में एक बड़ी पहल हैं।

100% FDI भी रोजगार बढ़ाने में मददगार साबित होगी। विश्व स्तर पर भारत के बदले स्वरूप ने विदेशी निवेशकों के लिये भारत आज प्रथम श्रेणी में हैं।

# महंगाई #

२०१४ के पहले जिस रफ्तार से महंगाई बढ़ती जा रही थी,  हमने उस पर लगाम लगाइ हैं।

दो साल के सुखे के कारण कृषी उत्पाद घटा हैं जिससे दाम नहीं घटे।

पिछले कुछ सालों से किसानों का रूख गन्ने के उत्पादन कि तरफ बढ़ने से दाल के उत्पादन में भारी कमी आई जिससे दाल कि किमत बढी़।

किसानों को दाल उत्पादन पर अच्छी किमत व बोनस जैसे प्रतिबद्धता दे कर हम जोर दे रहे हैं जिससे दाल का उत्पादन बढ़े व उम्मीद हैं कि आने वाले दिनों में किमत घटेगी।

# किसान #

सरकार ने किसानों कि वर्षा पर निर्भरता को हटाने के लिए अभुतपूर्व प्रयास किये हैं जिसका असर आनेवाले दिनों में दिखेगा।

यूरिया कि नीम कोटिंग से कृषि के लिये सब्सडाईज्ड यूरिया अब मात्र किसानों के उपयोग हेतु सुनिश्चित हो चुका। इससे यूरिया से जुड़ी किसानों कि मुश्किलें भी आसान हुई व जमीन को भी नीम के गुणों का लाभ मिल रहा।

आजादी के बाद पहली बार अब किसान अपनी फसलों का बीमा करवा सकेगा जिसमें मात्र खेत जोतने तक के नुकसान से लेकर कटी फसल के खराब होने तक के नुकसान में किसान का हित सुरक्षित रहेगा।

खेती के सोईल कार्ड से किसानों को उनकी जमीन के विषय में जानकारी दी जा रही जिससे उन्हे किस तरह की फसल उनके लिए लाभदायक हैं वे जान सकते हैं।

पहले किसान अपनी अनाजों को मंडी तक ले जाता था और उसे मजबूरी में मंडी के दाम पर बेचना पड़ जाता था लेकिन अब इ-मंडी के जरिये किसान को मात्र मोबाइल के जरिए पता चल सकेगा कि किस मंडी में कितना भाव हैं।

किसानों के प्रति हमारी सरकार पुरी तरह से जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

# आतंकवाद व पडोसी देश #

पडोसियों से मित्रता भारत की कुटनीती का पहला उद्देश्य।  पाकिस्तान में चुनी हुई सरकार से वार्ता जरूरी किंतु सिमा पर सेना को हर तरह कि छुट। पकिस्तान में वार्ता कि लक्ष्मण रेखा निर्धारित करने जैसा कोई मजबूत संघीय स्तर नहीं। वार्ता के मेज पर अधिकारी अपना काम करेंगे व सिमा पर हमारे जवान अपना काम करेंगे।

सेना के अथक प्रयासों से यह संभव हुवा हैं कि आज आतंकवादीयों कि प्रत्येक कोशिशें रस्ते में ही नाकाम हो रही।  सेना पर आतंकी हमले उनकी यही बौखलाहट हैं।
सेना के बलिदान पर हमें गर्व हैं जिनकी ताकत पर हमारी सिमाये पूर्णतया सुरक्षित हैं।

चीन स्वयं एक राष्ट्र हैं जरूरी नहीं कि हमारे विचार पुरी तरह से मेल खाये किंतु हमारे लिये यह महत्वपूर्ण हैं कि हम जब भी उनसे व्यवहार करे राष्ट्रहित सर्वोपरि हो। आज हम चीन से आँख मिलाकर राष्ट्रहित के मुद्दे रखते हैं जिसका असर कई क्षेत्रों में हमें मिल रहा हैं।

# अंतराष्ट्रीय #

30 साल के बाद 125 करोड़ लोगों ने जो पूर्ण बहुमत की सरकार को चुना हैं जिसने पुरी दुनिया के नजरिये को भारत के प्रति बदल कर रख दिया। अंतराष्ट्रीय नेताओं से मिलने का कोई अनुभव न होते हुए भी हमारे कार्यकाल में अंतराष्ट्रीय समूहों से भारत को स्वीकृति मिल रही। कोई सोच नहीं सकता था कि #MTCR में कभी भारत भी शामील हो पायेगा लेकिन आज यह वास्तविकता हैं।

हमारे लिये अरब भी उतना ही अहम हैं जितना कि इरान, हम अमेरिका को भी उसी नजर से देखते हैं जैसे कि रूस को। हम ना केवल बडे देश बल्कि छोटे-छोटे देश से हमारे रिश्तों को भी महत्वपूर्ण मानते हैं।

# मोदी सरकार कि अब तक की सबसे बडी उपलब्द्धी #

पिछली सरकार के दस सालों के कार्यकाल में महंगाई, भ्रष्टाचार व अंतराष्ट्रीय मोर्चे पर भारत कि असफलता ने जिस तरह देश कि जनता को एक निराशा भरे महौल में ढकेल दिया था हमारी सरकार लोगों को एसे निराशा भरे माहौल से उभारने में सफल हुई यह हमारी सबसे बड़ी उपलब्धी हैं। आज लोग सरकार के प्रति ना केवल आस्वस्त हैं बल्कि बढ़-चढ़ कर अपना योगदान भी दे रहे जैसा कि स्वच्छ-भारत के लिये बुजुर्ग शिक्षक का हर माह अपना एक तिहाई पेंशन भेट कर देना, एसी अनोखी घटनाये भारत के उज्जवल भविष्य के शुभ संकेत हैं।

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यह हमारे “घटीया” मिडिया तंत्र का ही सबसे स्टिक उदाहरण हैं कि एक घंटे पच्चीस मिनट के इस साक्षात्कार में बिकाऊ मिडिया को अत्यधीक महत्वपूर्ण मुद्दा मात्र यही मिला कि नरेंद्र मोदी ने सुब्रमण्यम स्वामी को फटकार लगायी जैसा कि लगभग प्रत्येक चैनलों कि ब्रेकिंग न्यूज के साथ ही साथ प्राइम टाईम बहस का मुद्दा भी बना और तो और अगली सुबह समाचार पत्रों के पहले पेज कि टॉप हेडिंग में भी नजर आया।

बस! यही हैं हमारी #प्रेस्यावृत्ती (#Presstitute) का स्तर।

।। जय हिंद ।। वंदेमातरम् ।।

तय करलो…आप किसके साथ हो

तय करलो…आप किसके साथ हो ###

भारत-विरोधी मिडीया ने जिस तरह JNU के राष्ट्रद्रोही छात्र कन्हैया को नायक के तौर पर उभारा हैं यह आज हर भारतीय के लिये बेहद चिंतन व अध्यन का विषय बन चुका हैं….

जहाँ इस प्रकरण में भारतीय राजनीती के कई दिग्गजो का राष्ट्रविरोधी चरीत्र उजागर किया हैं वहीं भारत के कोने-कोने में भारत कि बर्बादी के लिये फैलाये जा रहे विष भरे तंत्र को भी उभार कर रख दिया हैं…

तरह-तरह के कई प्रकरणो ने आज राजनीतीक व समाजीक परिवेश को दो फाड में बाँट दिया हैं जिसमें….

दुसरी तरफ राष्ट्रवादी ताकते हैं…

दुसरी तरफ देश को बचाने वाले गीने-चुने पत्रकार व सोशियल मिडीया

दुसरी तरफ देश को समर्पीत, धर्म-रक्षक व कर्मठ संघठन, संत व राज सेवक

दुसरी तरफ देश का चौकन्ना खुफीया-तंत्र व सिमा पर डटे व बलीदान देते जवान

दुसरी तरफ शहीद होते जवानों का निर्भय, साहसीक परिवार

इस देश का अब कोई भी नागरीक स्वयं को निष्पक्ष नहीं रख सकता…कोई भी नागरीक भ्रमीत रहकर खुद को अलग नहीं रख सकता… हमे अपने भ्रम को दुर करना ही होगा…यदी हमने राष्ट्रवादीयो का साथ नहीं दिया तो स्वभावीक रूप से हमारी खामोशी राष्ट्रविरोधी ताकतों का समर्थन करती नजर आयेगी…क्युँ की यदी देश बर्बाद हुवा तो उसकी एक जिम्मेदार हमारी खामोशी भी होगी…

अगर आज हमने इसके पिछे देश के टुकडे-टुकडे करने वाले षडयंत्र को समझने तथा दुसरों को समझाने मे भुल या फिर देर कर दी तो हमे अपनी अगली पीढी को धरोहर में फिर एक बेडीयों में बंधा, खंड-खंड में बीखरा भारत सौपना होगा जिससे संभवतः उनका जिवन अनगीनत संघर्षों से भर जाये|

यह हकिकत हैं कि इन संघठीत रूप से उभरे गद्दारों के पिछे एक बहोत बडी शक्ती सुनीयोजीत तरीके से कार्यरत हैं और ये खुलेआम हमारे सामने कुछ भी कह सकते हैं, कर सकते हैं क्यों की इनके लिये कोई कानुनी हद नहीं…और हम परिवारीक जिम्मेदारीयों के बोझ तले इनके आगे कुछ नहीं कर सकते क्युँ की हम ना तो संघठीत हैं और ना ही कानुन हमें इसकी इजाजत देता हैं…

लेकिन कम-से-कम हम इनके विरूद्ध आवाज उठा कर दुसरो को जागृत व संघठीत कर सकते हैं…जो इनके विरूद्ध डटे हैं उनका समर्थन कर उनकें हाथ मजबुत कर सकते हैं….

एसा हमे करना ही होगा…..
तब जा कर ही हमारा लोकतंत्र सफल हो सकेगा|

|| जय हिंद || वंदेमातरम् ||

तोडने की साजीश

जरा सोचिये…

अखलाक (दादरी) के बहाने …!
हमें साम्प्रदायिक बनाया

रोहित (हेदराबाद) के बहाने ….!
हमें जातिवादी बताया

अब तृप्ती देसाई (शनि शिगणांपुर) के बहाने ..
हमें स्त्रीयों पर पाबंदी लगाने वाला
पुरूष प्रधान समाज साबीत किया जा रहा है…

चारों तरफ से घेरा जा रहा है..
हमें टुकडों में तोडा जा रहा हैं…
उकसाया जा रहा हैं ताकी हम अपनी सहनशीलता
को त्याग हिंसा पर उतर आये…

और यदी किसी ने उकसावे में प्रतीकार कर दिया तो फिर उससे प्रमाणीत किया जायेगा की भारत “असहनशील” हो गया हैं!!!

समजो इन विदेशी हाथो कि कठपुतली, इन सेक्युलर मक्कारो और मिडीयाई गद्दारों द्वारा फैलाई जा रही साजीशो को…

इस देश कि अखंडता तब तक सुरक्षीत नहीं जब तक देश का हिंदु जागृत व एकझुट नहीं!!!

विशेष:
” हिंदु ” कोई धर्म नहीं बल्की भारतीय जीवन शैली का नाम हैं| इस देश की मिट्टी में जन्मा हर शक्स जो भारतीय मिट्टी में पनपे विभीन्न धर्मों का अनुयायी हो अथया मानता हो कि उसके पुर्वज उनसे जुडे हुवे थे या वह जो भारतीय संस्कृती व सभ्यता से जुड कर खुद को भाग्यशाली मानता हो, वह एक “हिंदु” ही हैं|

हिंदु = जेन + सिख + बोद्ध + सनातन
(सभी धर्म जो देश कि ही मिट्टी में पनपे)

|| जागो और जगाऔ, देश बचाऔ ||

……..जन-जन को इसे भेजो…….

हिंदु विरोधी मिडीया का ताजा वार | शनि शिगणांपुर विवाद

आज कल बीकाऊ मिडीया शनि शिगणांपुर में स्त्रीयों के प्रवेश को लेकर बडी-बडी बहसो पर उतर आया हैं| यह वही भाडे के टट्टुवे पत्रकार हैं जो हिंदु-विरोधी रायता फैलाने की सुपारी उठा रखे हैं|

इन्हे मुद्दा नहीं भी मिले तो ये मुद्दा पैदा करने में माहीर हैं| तृप्ती देसाई नाम की महीला जिसने शनीशिंगापुर में महिलाऔ के प्रवेश पर हंगामा मचा रखा हैं वह पहले अन्ना और कांग्रेसी मंत्रीयों के साथ कई बार नजर आ चुकी हैं| जाहीर हैं, यह मुद्दा सुनीयोजीत तरीके से बनाया गया हैं| वास्तव में इस मुद्दे का धरातल हैं ही नहीं क्युँ की धार्मीक महीला स्वयं से ही शनीदेवता के दुर से ही दर्शन करेगी किंतु चंडाल चौकडी जिन्हे केवल बहस खडी करनी हैं वे किसी भी हद तक जा सकते हैं| तृप्ती देसाई – इस चंडाल चौकडी का तरोताजा उदाहरण हैं|

पहले भी मंदीरो में लडकीयों के जिन्स ना पहनने वाले जैसे बयानों के विरोध में हमारी मिडीया चेनलों की लम्बी-लम्बी बहसे तो जरूर ही सुनी होगी| इनबहसों में बयान देने वाले को संकुचीत सोच वाला व महीलाऔ के प्रती अव्यवहारी सोच वाला बताने कि हर पत्रकार कि होड सी लग जाती हैं| क्या किसी पत्रकार ने इस पहलु से इस पर बहस करने कि कोशिश कभी की हैं कि मंदिर में शालीनता व सादगी बनाये रखने कि दृष्टी से सही भी हो सकता हैं!!!

अब कुछ ही समय पहले कि इस खबर पर भी गौर किजीये….

मुंबई शहर कि विख्यात दरगाह हजीहली में वहाँ के ठेकेदारों ने स्त्रीयों के प्रवेश पर पुरी तरह से रोक लगा रखी हैं| इस खबर पर हमारे मिडीयाँ जगत को अब तक साँप सुँघा हैं|

इतना सन्नाटा पसरा हैं कि अभी तक मुंबई के लोग भी इस खबर से पुरी तरह वाकिफ ना हो सके हैं| कई मुस्लीम जोडे दरगाह तक साथ जाकर पुरूष वर्ग स्त्री को वहीं अकेले छोड कर अंदर जाना पड रहा हैं| किसी पत्रकार में हिम्मत हि नहीं हो सकी के वे इस मुद्दे पर बहस कर सके|

इनके समुदाय में इन कट्टर पंथीयों द्वारा जबरन थोपी गई बुर्का प्रथा पर पहले ही मिडीया जगत ने मोन धारण कर रखा था और स्त्रीयों के प्रती किये गये इस अव्यवहारीक प्रतीबंध पर भी ये पुरी तरह खामोश हैं|

एसे सेकडो उदाहरण भरे पडे हैं जब विदेशी पैसा पर पलने वाला मिडीया हिंदु धर्म के विरोध में खुलकर भौकता हैं लेकिन जब विदेशी धर्मो की बात आती हैं तो चुप्पी साध लेता हैं…

उदाहरणतया…
— साधु-संतो पर लगे आरोपों पर हफ्तो बहस करना किंतु विदेशी धर्मगुरूऔ के अपराधो पर खामोशी
— संतो के बयानो को ‘विवादीक’ बताना और विदेशी धर्मगुरूऔ के फरमानो व फतवों पर मौन
— हिंदु धर्म की विज्ञान प्रमाणीत मान्यताऔ को भी अंधविश्वास कि श्रेणी में खडा कर देना किंतु विदेशी धर्मो के निराधार व अंधविश्वासी प्रचलन को नजर अंदाज करना

|| जागो हिंदु, जागो ||

गीता कि वापसी, पाक कि “नापाक” सियासत

पाकिस्तान से जुडी खबरों में जहाँ मात्र भारत विरोधी गंध ही मिलती हैं वहीं “गीता” के पुनः भारत लौटने वली खबर थोडा हट के हैं…और संदेह से भरपुर!

संदेह!!!

जहाँ पाकिस्तान ने १९% हिंदु आबादी को तरह-तरह की दरींदगी से काट कर १.५% पर ला दिया हो वहाँ से एक हिंदु लडकी का सही सलमत वापस आना क्या संदेहास्पद नहीं?

जाहीर हैं यह पाकिस्तान कि किसी ना किसी रणनीती का हिस्सा ही हैं| लेकिन वह रणनीती क्या हैं?

इस खबर का विश्लेषण तो जरूरी हैं…
> जहाँ पाकिस्तान अंतराष्ट्रीय स्तर के हर मुद्दो पर भारत से मुकाबले में धुल चाटता नजर आ रहा वहाँ “गीता” के मुद्दे को भुना कर दोनो देशो कि अवाम का ध्यान कुछ हद तक बाँटना चाहता हैं|
> अंतराष्ट्रीय मंच पर अपनी गिरती साख को बचाने के लिये भी पाकिस्तान ने “गीता” का इस्तेमाल किया|
> पाकिस्तान ने एक बोलने-सुनने में असमर्थ लडकी को चुन कर भेजा जो चाह कर भी अपनी आप-बीती व वहाँ के अन्य हिंदुऔ कि दशा किसी के सामने आसानी से बयाँ भी ना कर सके|
> “गीती” के साथ आये पाक अधीकारीयों ने तो भारत कि धरती पर उतरते ही तुरंत अपना रंग दिखा दिया यह कहकर कि अब भारत को भी भारतीय जेलो में बंद पाकिस्तानीयो को पाक भेजने कि पहल करनी चाहिये, जो की एक तरह कि सौदेबाजी के लिये भारत पर दबाव बनाने जैसा था|

इस विश्लेषण कि पुष्टी का सबसे बडा सबुत हमारे देश कि पाक-परस्त मिडिया जिनमे NDTV, ABP News, TimesNow व आजतक जैसों का इस मुद्दे को अतिभावुक तरीके से पेश करना था| ये पुरी तरह से पाकिस्तान कि “नापाक” इरादों को अंजाम देने में लगेहुवे थे और कई घंटो तक का कवरेज दिया|

अगर इन्हे हिंदुस्तानी लडकीयों कि इतनी ही चिंता होती तो पिछले १० सालों से पाकिस्तान में हिंदु स्त्रीयों पर हो रही बर्बता पर कभी केवल कुछ ही घंटे भी दिये होते तो शायद सेकडों स्त्रीयों कि लाज बच जाती|

वाकई में किसी ने ठिक ही कहा हैं – असली खबर वहीं हैं जिसे कोई दबाना चाहे बाकि सब तो सिर्फ विज्ञापन हैं|

पाक में मिटाई जा रही लाखो हिंदुऔ कि आबादी जो कि अहम मुद्दा हैं और जिसे अब तक मिडीया जगत दबाता आ रहा लेकिन एक “गीता” कि वापसी जैसी खबर से पाकिस्तान के झुठे दया भाव को उभारकर जेहादी मानसिकता वाले देश का प्रचार कर रहा|

ध्यान रहे, हमारी मिडीया में पाकिस्तान से जुडी किसी भी भावुक घटनाऔ पर मिडीया कि रिपोर्टींग शत-प्रतीशत प्रायोजीत ही होती हैं, धोखे से बचे|

“गीता” के वापसी कि खबर में संतोष जनक मात्र इतना ही हैं कि पाक में जहाँ दुसरी हिंदु स्त्रीयाों को नर्क कि जिंदगी जीने को मजबुर कर दिया गया वहीं भले ही “नापाक” इरादे से ही सही, कम-से-कम एक “गीता” वापस तो लोट सकी!

जागो और जगाऔ, देश बचाऔ

|| वंदेमातरम् ||

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मोदी और मिडीया

आजाद भारत में मिडीया ने देश कि राजनीती को कई रूपो में प्रभावीत करता आया हैं| जब से नीजी चेनलों का चलन देश में चल पडा लोगों पर मिडीया कि पकड और भी प्रभावी बनती गई| मिडीया ने अपनी मजबुती का कई रूपों ने नजायज फायदा उठाता आया हैं| मिडीया का दब-दबा इस कदर बढ चुका था कि रातों-रात किसी भी गली-कुचे आवारा को राष्ट्रीय दर्जे का नेता बना देता और यही कारण भी हैं कि आज देश कि राजनीती में कई एसे नामी चहरे दिखते हैं जीनकी जमीनी पकड शुन्य हैं, जिनके पास देश व समाज के प्रती कोई विचार तक नहीं लेकिन उनकी गीनती कद्दावर नेता में हो चुकी हैं| भारतीय राजनीती पर आज आम लोगों का जीतना ही विकृत नजरीया हैं उसका एक मात्र जिम्मेदार यदी किसे ठहराया जा सकता हैं तो वह देश के बिकाऊ मिडीया तंत्र ही हैं|

नरेंद्र मोदी पहले देश के एसे नेता हैं जिन्होने मिडीया तंत्र की इस कदर कि दादागीरी को ना केवल चुनोती दी बल्की पुरी तरह धराशायी किया| मोदी ने अपने विषय पर अनाब-शनाब टिप्पणी करने वाले कई नामी पत्रकारों को आज इस कदर बोना कर दिया हैं कि अब वे छटपटाये नहीं थक रहे किंतु उनकी एक नहीं चल पा रही| मोदी और मिडीया कि जंग दशको पुराना हैं साथ विषय का अध्यन हर देशभक्त को आज के राजनेतीक परिवेश से जागृत व सतर्क करता हैं|

२००२ के गुजरात दंगो से आज तक मिडीया के खिलाफ कई बडे व घिनोने प्रोपेजंडे चलाये व जिनकी कोशीशे रही कि मोदी कि विजय का रथ आगे ना बढ सके|

जहाँ मिडीई दलाल पत्रकारों के पास चेनलों के स्टुडीयों में बैठ कर मात्र जहर उगल कर उन्हे बदनाम करने का बेहद सटीक व सरल माध्यम था वहीं मोदी को पुरी तरह से जमीनी कार्य को अंजाम देकर जनता कि पकड को बनाये रखना था

मिडीया द्वारा ‘मोदी’ नाम पर कितने ही तरह के किचड उछाले गये लेकिन मोदी ने मिडीया को पुरी तरह नजर अंदाज किया व उनसे परहेज किया क्युँ कि उन्होने भाँप लिया था कि मिडीया हर रूप में उनके खिलाफ जहर उगलना चाहता हैं|

मिडीया के पास जनता तक पहोचने का सिधा, मजबुत व विदेशी पुँजी से पोषित पुरी ताकत थी तो मोदी के पास एक मात्र उसकी कर्मठता लेकिन वह काफी नहीं थी क्युँ की जनता तक कार्य व सच्चाई पँहुचानी जरूरी थी

इसके लिये मोदी ने अपने साथीयों सहीत हर गाँव व हर गली तक पहुँचने में कोई कसर ना छोडी जहाँ ना केवल जनता कि समस्याये सुलजाई गई बल्की उनकी जरूरतो कि आपुर्ती कर विकास कि नई गाथा लिखी जो पुरी तरह जमीनी हकिकत थी|

मोदी ने मिडीया का तोड सोशियल मिडीया से निकाला और संभवत: एक मुख्यमंत्री पद के वे पहले नेता थे जिन्होने सोशियल मिडीया का जम कर उपयोग कर जनता तक अपनी बात व सच्चाई पहुँचाई साथा ही इस माध्यम से उन्होने जनतो को भी उनकि बात रखने का सिधा मौका दिया

सोशियल मिडीया के जरीये मोदी की विकास गाथा गुजरात कि सिमा तोड कर ना केवल भारत बल्की विदेशों तक पहुँचने लगी और यहीं से मोदी स्वरूप का अंतराष्ट्रय संस्करण प्रारंभ हुवा

वह सच्चाई जीसे मिडीया ने पुरी तरह दबाना चाहा देखते ही देखते हर जागरूक भारतीयों के सामने खुली किताब बन गई थी जिसने जीतना जाना वो उतना ही नत मस्तक हुवा व औरो तक पहुँचाने कि मुहीम मे जुडता चला गया| जुडता क्यों नहीं आखिर देश को बचाना था|

एसी परिस्थीतीया, जिनमे सारे विरोधी एकजुट, सारे मिडीया मोदी के खिलाफ यहाँ तक की खुद बीजेपी के बडे नेताऔ की भी बेरूखी, से गुजरकर भी मोदी ने चार दफा गुजरात का चुनाव पुरे बहुमत से जीता वास्तव में यह सत्य व असत्य के मध्य वह अघोषित महायुद्ध था जिसमें असत्य निरंतर धराषायी होता चला गया

जाहीर हैं मिडीया तो मोदी को समजना ही नहीं चाहता था लेकिन मोदी ने बिकाऊ मिडीया कि नस पकडली थी, सोशियल मिडीया पर दनका बैठा लिया था अब जो बीकाऊ मिडीया कभी मोदी को अपने अनुसार चलाना चाहता था अब मोदी ने मिडीया को अपनी नीती के अनुसार नचाना शुरू कर दिया

लोकसभा चुनाव मोदी की मिडीयाई समझ का सबसे बेहतर व अभुतपुर्व उदाहरण हैं जहाँ कई तरह के दौर नजर आये –
— जहाँ अन्य विरोधी दलों पर जनता का विश्वास पुरा उठ चुका था वहीं मिडीया ने पहले कि तरह ही लाख कोशिश कि की रातों रात कई बहरूपीयों को राष्ट्रीय दर्जे का नेता बनाकर मोदी के खिलाफ खडा कर दे किंतु तब तक सोशियल मिडीया पर मोदी को समर्थन करने वाले करोडो हाथ उठ चुके थे जिन के आगे मिडीया कि एक ना चली
— मोदी ने एसे-एसे शब्दो व अदाऔ के पाँसे फेके जीसे बीकाऊ मिडीया लपक कर चाहता तो उनके खिलाफ इस्तेमाल करना किंतु वे मोदी प्रचार का ही जरीया बनते चले गये (जैसे कुत्ते का पील्ला, हिंदु राष्ट्रवादी, मोदीफिकेशन, चुनाव के दोरान कमल के साथ सेल्फी)
— प्रचार अभीयान के अंतीम चरणो तक कई नामी पत्रकारों के लाख चाहने पर किसी भी प्रकार के इंटरव्यु से पुर्ण परहेज| ना कोई कमेंट जो भी कहा या तो मंच जनता के बीच अथवा सोशियल मिडीया के जरीये
— प्रचार अभीयान के बिलकुल अंत में सारे नामी पत्रकारों से रूबरू और वो भी पुर्ण तीखे अंदाज में जीसमे पत्रकार चाहकर भी मोदी पर हावी नहीं हो सके उलट मोदी पत्रकार के स्टुडीयों मे ही पत्रकार को मुँह पर लताडा

इस तरह मोदी ने ‘विरोधी और मिडीया के फेके हर पत्थर को अपनी सीढी बनाई’ और लोकसभा में अभुतपुर्व जीत हाँसील कि|

वह पत्रकार जो मिडीया के जरीये प्रत्येक क्षेत्र में स्वयं के षडयंत्रकारी विचारों को देश पर थोपने का एजेडा चला रहे थे मोदी के वार से पुरी तरह निष्क्रीय नजर आने लगे, लोगों ने भी एसे पत्रकारों को सोशियल मिडीया के जरीये जबरदस्त धुलाई करना शुरू कर दिया हैं|

मोदी कि इस एतिहासीक जीत ने यह साबीत कर दिया हैं कि दिनरात बनावटी मुद्दो पर मिडीया का फडफडाना जनता के मन पर अब पुरी तरह बेअसर हो चुका हैं और अब राजनीती विषय से मिडीया कोई भी खिलवाड करने कि क्षमता पुरी तरह गवा चुकी है|

एक क्षेत्रीय नेत्रीत्व से राष्ट्रीय नेत्रीत्व का सफर मोदी के लिये एक तपस्या कि तरह रहा जीसमे मोदी कि कार्यशैली कुछ एसी रही हैं कि उन्होने अपने विरोधीयो के खिलाफ कभी आवेश मे प्रतीक्रीया नहीं की लेकिन महोल एसा ढाला की उनकी जडे खुद-ब-खुद हिलती चली गई

मोदी के विषय में कई तरह के प्रश्नो में एक प्रश्न यह जरूर उठता हैं कि मोदी अब इन भ्रष्ट पत्रकारों पर कार्यवाही क्यों नहीं करते!

कुछ बाते जो घौर करने लायक हैं…
— इन प्रश्नो से यह तर्क देना कि मोदी को मिडीया कि समज नहीं या पत्रकारो के चलन से वे वाकीफ नहीं तो यह मानने योग्य ही नहीं
— मोदी ने अपने विरोधीयों पर पुर्ण नीयंत्रण बनाये रखा हैं लेकिन वे किसी भी रूप में उन पर त्वरीत कार्यवाही करेंगे यह उनकी कार्यशैली में नहीं
— फिर भी कई मिडीया कंपनीयों कि जाँच सीबीआई को सौपी जा चुकी हैं व कई चेनलों पर गृहमंत्रालय ने Security-Clearance कि तलवार अभी से लटक चुका हैं और यह पुर्णतया उनके राष्ट्र विरोधी चाल-चलन के कारण हैं
— आज मोदी सरकार मिडीया आधारीत तो बिल्कुल ही नहीं और अब सोशियल मिडीया के चलते मिडीया पहले कि तरह मोदी या देश के लिये खतरा नहीं बन सकती हैं अर्थात मिडीया नाम कि दहशत खत्म हो चुकी हैं|

उम्मीद यही हैं कि अब इन पर कोई सीधी व त्वरीत कार्यवाही ना हो कर वो रास्ते ही बंद किये जायेंगे जहाँ से राष्ट्रविरोधी पत्रकारीता पोषित होती हैं और NGO पर कसता सिकंजा इसकी एक शुरूवात भी मानी जा सकती हैं| शेष तो भविष्य के गर्भ मे छुपा हैं इंतजार ही करना होगा|

जय हिंद!