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महाभारत को जियो

किसी ने कहा – यह राजनीति हैं! 

किसी ने कहा – यह सांप्रदायिकता हैं!! 

किसी ने कहा – यह कट्टरवाद हैं!!! 
और… 

किसी ने कह दिया – यह तो बचपना हैं!!!! 😏
लेकिन हमने भी अपना मत स्पष्ट कर दिया… 

आप दृष्टिकोण कोई भी लगा लो, 

हर तरह से यह एकमात्र धर्मयुद्ध हैं!!! 👊🚩
☝🏿 वही धर्मयुद्ध जो अधिकार के लिए लडा गया था

☝🏿 वही धर्मयुद्ध जो मानवता के लिए लडा गया था

☝🏿 वही धर्मयुद्ध जो राष्ट्र के लिये लडा गया था 

…. और आज भी लड़ा जा रहा!🔥
_ना ही उस धर्मयुद्ध कोई निष्पक्ष रह सका…_

_ना ही इस धर्मयुद्ध में कोई निष्पक्ष रह सकता हैं!_ 🔥
जो धर्म के साथ नहीं हैं अथवा अधर्म पर मौन धारण किये हुए हैं…निःसंदेह…

 उन्हें अधर्म के पक्ष में मान कर चलो 🔥

ज्ञात रहे 👇
जब भी महाभारत से बचना चाहोगे

अधर्मी ही तुम पर राज करेंगे!! 

अत: प्रत्येक पल “चक्रधारी” का ध्यान धरो! 

प्रत्येक पल, केवल महाभारत को जीयो!! 
लक्ष्य ही जीवन हैं, जिवन का एक ही लक्ष्य!

धर्म की, विजय हो! पापियों का, सर्वनाश हो! 
🚩 जयतु जयतु हिंदुराष्ट्र 🚩

🚩 🔥🔥🔥🔥🔥🔥  🚩

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आज के मुर्ख हिंदु! 

किसी युग में होता था विद्वान बडा हिंदु …

… आज तो बडा ही मुर्ख नजर आ रहा!!!



हाल के वर्षों में मैने भारतीयों में एक अजीब सी बात देखी है कि हम पाना सब चाहते है लेकिन उसके लिये कुछ देना नही चाहते है। 
यह बात हम जानते है लेकिन फिर भी इससे मुहँ चुराय रहते है। ऐसा नही है कि यह आज की बात है, यह पहले से कुछ भारतीय नस्लों में सम्मिलित था। 
आज मुफ्त या सब्सिडी या आरक्षण जैसी विकृतियों का एकाधिकार या इसकी चाह हमको अपने आप से हीन बना रही है। 
यदि सत्यनिष्ठा से इसको समझा जाए तो सारी गलती हम भारतीयों की भी नही है क्योंकि स्वतन्त्रता मिलने के बाद से ही हम बिना अपना कर्तव्य निभाए…. अधिकार मिलने को अपना अधिकार मान बैठे है।



पिछले 7 दशकों से यह पृवत्ति इतना विकराल रूप ले चुकी है कि भारतीयों का ही एक बड़ा वर्ग, राष्ट्र चेतना के स्पंदन से ही विमुख हो गया है। यह वर्ग स्वाभिमान वाली भाषा तो दुर, स्वाभिमान शब्द से पुरी तरह अज्ञान हो चुका हैं। ध्यान देने वाली बात यह भी हैं कि एसी प्रवृत्ति से ग्रस्त लोगों की संख्या शिक्षित वर्ग में भरमार हैं।



लेकिन यह भारतीयों में हुआ क्यों? 
इन लोगो में राष्ट्र के अस्तित्व के प्रति संवेदनशीलता का आभाव क्यों है?’
मुझे लगता है कि यह ऐसा इसलिये हुआ है क्योंकि हम पीढ़ी दर पीढ़ी, गुलामीयत को इस कदर ओढ़े रहे है कि हमने अपने अस्तित्व को बनाये रखने के स्वार्थ में अपने धर्म, समाज और राष्ट्र के ही अस्तित्व को नेपथ्य में धकेल दिया है। आज हमारे लिये, यह तीनों… धर्म, समाज और राष्ट्र हमारे लिए मात्र सुविधा के तत्व है, जिस को हम अपनी स्वेच्छा से, अपने लिये अलिंगनकृत कर लेते है या उसे तज देते है। इसी ने ही ‘सिर्फ मेरा’ को स्वीकार्य कराया है और यही स्वार्थीता अब हमारी धमनियों में बहते रक्त में आ गयी है।
हम तो रोजाना की ज़िंदगी मे इतना भृष्ट हो गये है कि हम अपनी कमजोरियों को छुपाने हेतु धर्म, समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की उपेक्षा को अपनी जीवन पद्यति बना डाला है। हमको जब बहुत राष्ट्र प्रेम उमड़ता है तो सिर्फ जयचंद और मीर जाफर का नाम लेकर, उनको अपवाद मानते हुये, हकीकत को छुपा जाते है। 
अपने ही मात्रभुमी की लाज को तार-तार करने वालो धुर्त भारतीयों से इतिहास भरा पडा हैं… 
#गोलकुंडा के किले को भी 1687 में इसी तरह विजित किया गया था। सिपहसलारों को खरीद लिया गया था और उन्होंने, पिछला गुप्त दरवाजा, आक्रमणकारियों के लिए खोले दिया था।
#सतारा का परली का किला, 1700 में जो की मराठा सरकार का केंद्रबिंदु था, उस पर औरंगजेब ने पैसा देकर कब्जा किया था।
#औरंगजेब ने 1701 में, मराठा सेना के सेनापति त्रिम्बक को पैसे से ही खरीदा था और उसने  वर्धनगढ़, नांदगीर , वंदन और चन्दन  किले पर बिना लड़े, मुगलो को कब्जा कराया था।
#खेलना में अमबेर के सवाई राजपूत, मुगलो से लड़े थे। वे उनको हरा रहे थे लेकिन उनके सेनापति परुशराम ने, मुगलो से पैसा लेकर, वो किला मुगलो को जितवा दिया था।
#अवध की गवर्नरशिप के वादे पर, 1720 में, गिरधर बहादुर ने इलाहाबद के दरवाजे, मुगलो के लिए खोल दिए थे और उन्होंने, उस पर कब्जा कर लिया था।
#राजा श्रीनगर ने, दारा शिकोह के लड़के, सुलेमान को, पैसा लेकर, औरंगजेब के हवाले कर दिया था।
यह एक कटु सत्य है कि भारतीयों के एक बड़े वर्ग की धमनियों में अपने इन्ही पुरखों का रक्त अभी भी दौड़ रहा है।



ये नेहरू/गांधी परिवार, उनके कांग्रेसी गुलाम, ये आयातीत विचारधारा के पोषक वामपंथी, ये पश्चिम से आये आक्रांताओं से अपना डीएनए मिलवाते लोग, ये फोर्ड फाउंडेशन, मध्यपूर्व व वैटिकन के पैसे से उपजे लोग, ये कट्टर उलेमाओं के साथ हमबिस्तर होते राजनैतिज्ञ और नये आर्थिक परिवेश में न ढलने वाले लोग, यह यही लोग है।
आप कहेंगे कि होंगे एसे “कुछ” लोग! … ना… ना… इस “कुछ” के चक्कर में ना रहना… इनकी जनसंख्या तेजी से बढ़ रही। आप अपने आसपास थोड़ा भी ढूंढो तो तुरंत नजर आ जायेंगे। 
कैसे पहचानोगे??? 



अब देखिये, आजादी के बाद भी ७० सालो से तील-तील अपने हक व स्वाभिमान को तरसे भारत को आज जब एक मजबूत शतप्रतिशत देशी व सुसंस्कृत प्रधानमंत्री मिला हैं तो भी उन पर व्यंग कसने, ताने मारने व विरोध करने वाले प्रत्येक गली, मुहल्ले, गांव शहर तथा वाट्सअप ग्रूप पर भरे पड़े हैं… चिंदी-से-चिंदी मुद्दे को भी आग बना कर अपनी राष्ट्रीयता का आंचल स्वयं नोचते मिल जाते हैं। 
कोई यह तर्क दे सकता हैं कि ये तो हँसी-मजाक हैं! क्षमा करे… मुगल भी हँसी-मजाक में ही पहले रैंकी कर गये थे और हाँ! गौरे भी हँसी-मजाक में ही व्यापार कर गय थे। इतिहास से हमने कोई सिख तो लेनी नहीं! 

राष्ट्र ना जाने कब तक ऐसी हँसी-मजाक में गुलाम बनता रहेगा और ना फिर ना जाने कितने शिवाजी – महाराणाओ को बलिदान होना पड़ेगा। 
इन मंदबुद्धियों सहित एक राष्ट्र के तौर पर हम को यह स्वीकार करना ही पड़ेगा कि हम अपने अपने अनुपात में स्वेच्छा से हुये बेईमान, बेशर्म, गद्दार और गुलाम भारतीय हैं। 



समय रहते अपना छिछोरापन छोड सको तो छोड़ लो भाई अन्यथा इस लेख को भी हँसी-मजाक समझकर भुल सकते हो। 
|| वंदेमातरम् ||



(कुछ संकलित व कुछ स्वरचित) 

Link

​क्यों नहीं बन पाया अब तक अयोध्या में श्री राम मंदिर
सवाल तो बहुत मजबूत हैं लेकिन जवाब भी जान ले…. 
अगर आप देश के किसी भी कोने में 

किसी भी दस मुस्लिम से यह प्रश्न करोगे कि 

अयोध्या में क्या बनाया जाये… 
दस के दसों एक आवाज में कहेंगे… सिर्फ बाबरी मस्जिद
लेकिन यही प्रश्न आप दस हिंदु से पूछ के देख लो… 

पुरे देश में घुमने कि जरूरत भी नहीं, उत्तर प्रदेश के ही दस हिंदु से पूछ लेना… मुश्किल से 1 या 2 हिंदु मिलेगा जो यह कहने की हिम्मत करेगा कि वहाँ सिर्फ श्री राम का मंदिर बनना चाहिए… शेष मुर्ख या तो कहेंगे कि अस्पताल या स्कूल बना दिया जाए या फिर मंदिर-मस्जिद दोनो साथ में बनाने को सही ठहरा देगा!!! 
निष्कर्ष यह.. कि इस देश का हिंदु इतना भटक चुका हैं कि ना ही उसे धर्म का ज्ञान हैं और ना ही अयोध्या के इतिहास का ज्ञान… लेकिन मुस्लिम समुदाय पुरी तरह एक राय से संगठीत हैं… भाई, दर शुक्रवार एसे ही थोडे अपना धंधा-पानी छोड के भागे चलते हैं!!! 
मंदिर ना बनने का बडा दोष उनका भी हैं जो अपनी जाती, अपने समुदाय, भाई-भतीजावाद के चलते मंदिर तो छोडो, अपने राज्य व अपने घर कि महिलाओं कि रक्षा को भी ताक पर रख कर आरक्षण कि भीख में वोट नेताओं के पीछे चल पड़ते हैं…. सोच कर देख लो,  सिर्फ राममंदिर के नाम पर ही नेता चुन लेते तो वाकई प्रदेश सहित पुरे भारत का उद्धार हो जाता! 
जय श्री राम

तोडने की साजीश

जरा सोचिये…

अखलाक (दादरी) के बहाने …!
हमें साम्प्रदायिक बनाया

रोहित (हेदराबाद) के बहाने ….!
हमें जातिवादी बताया

अब तृप्ती देसाई (शनि शिगणांपुर) के बहाने ..
हमें स्त्रीयों पर पाबंदी लगाने वाला
पुरूष प्रधान समाज साबीत किया जा रहा है…

चारों तरफ से घेरा जा रहा है..
हमें टुकडों में तोडा जा रहा हैं…
उकसाया जा रहा हैं ताकी हम अपनी सहनशीलता
को त्याग हिंसा पर उतर आये…

और यदी किसी ने उकसावे में प्रतीकार कर दिया तो फिर उससे प्रमाणीत किया जायेगा की भारत “असहनशील” हो गया हैं!!!

समजो इन विदेशी हाथो कि कठपुतली, इन सेक्युलर मक्कारो और मिडीयाई गद्दारों द्वारा फैलाई जा रही साजीशो को…

इस देश कि अखंडता तब तक सुरक्षीत नहीं जब तक देश का हिंदु जागृत व एकझुट नहीं!!!

विशेष:
” हिंदु ” कोई धर्म नहीं बल्की भारतीय जीवन शैली का नाम हैं| इस देश की मिट्टी में जन्मा हर शक्स जो भारतीय मिट्टी में पनपे विभीन्न धर्मों का अनुयायी हो अथया मानता हो कि उसके पुर्वज उनसे जुडे हुवे थे या वह जो भारतीय संस्कृती व सभ्यता से जुड कर खुद को भाग्यशाली मानता हो, वह एक “हिंदु” ही हैं|

हिंदु = जेन + सिख + बोद्ध + सनातन
(सभी धर्म जो देश कि ही मिट्टी में पनपे)

|| जागो और जगाऔ, देश बचाऔ ||

……..जन-जन को इसे भेजो…….

हिंदु विरोधी मिडीया का ताजा वार | शनि शिगणांपुर विवाद

आज कल बीकाऊ मिडीया शनि शिगणांपुर में स्त्रीयों के प्रवेश को लेकर बडी-बडी बहसो पर उतर आया हैं| यह वही भाडे के टट्टुवे पत्रकार हैं जो हिंदु-विरोधी रायता फैलाने की सुपारी उठा रखे हैं|

इन्हे मुद्दा नहीं भी मिले तो ये मुद्दा पैदा करने में माहीर हैं| तृप्ती देसाई नाम की महीला जिसने शनीशिंगापुर में महिलाऔ के प्रवेश पर हंगामा मचा रखा हैं वह पहले अन्ना और कांग्रेसी मंत्रीयों के साथ कई बार नजर आ चुकी हैं| जाहीर हैं, यह मुद्दा सुनीयोजीत तरीके से बनाया गया हैं| वास्तव में इस मुद्दे का धरातल हैं ही नहीं क्युँ की धार्मीक महीला स्वयं से ही शनीदेवता के दुर से ही दर्शन करेगी किंतु चंडाल चौकडी जिन्हे केवल बहस खडी करनी हैं वे किसी भी हद तक जा सकते हैं| तृप्ती देसाई – इस चंडाल चौकडी का तरोताजा उदाहरण हैं|

पहले भी मंदीरो में लडकीयों के जिन्स ना पहनने वाले जैसे बयानों के विरोध में हमारी मिडीया चेनलों की लम्बी-लम्बी बहसे तो जरूर ही सुनी होगी| इनबहसों में बयान देने वाले को संकुचीत सोच वाला व महीलाऔ के प्रती अव्यवहारी सोच वाला बताने कि हर पत्रकार कि होड सी लग जाती हैं| क्या किसी पत्रकार ने इस पहलु से इस पर बहस करने कि कोशिश कभी की हैं कि मंदिर में शालीनता व सादगी बनाये रखने कि दृष्टी से सही भी हो सकता हैं!!!

अब कुछ ही समय पहले कि इस खबर पर भी गौर किजीये….

मुंबई शहर कि विख्यात दरगाह हजीहली में वहाँ के ठेकेदारों ने स्त्रीयों के प्रवेश पर पुरी तरह से रोक लगा रखी हैं| इस खबर पर हमारे मिडीयाँ जगत को अब तक साँप सुँघा हैं|

इतना सन्नाटा पसरा हैं कि अभी तक मुंबई के लोग भी इस खबर से पुरी तरह वाकिफ ना हो सके हैं| कई मुस्लीम जोडे दरगाह तक साथ जाकर पुरूष वर्ग स्त्री को वहीं अकेले छोड कर अंदर जाना पड रहा हैं| किसी पत्रकार में हिम्मत हि नहीं हो सकी के वे इस मुद्दे पर बहस कर सके|

इनके समुदाय में इन कट्टर पंथीयों द्वारा जबरन थोपी गई बुर्का प्रथा पर पहले ही मिडीया जगत ने मोन धारण कर रखा था और स्त्रीयों के प्रती किये गये इस अव्यवहारीक प्रतीबंध पर भी ये पुरी तरह खामोश हैं|

एसे सेकडो उदाहरण भरे पडे हैं जब विदेशी पैसा पर पलने वाला मिडीया हिंदु धर्म के विरोध में खुलकर भौकता हैं लेकिन जब विदेशी धर्मो की बात आती हैं तो चुप्पी साध लेता हैं…

उदाहरणतया…
— साधु-संतो पर लगे आरोपों पर हफ्तो बहस करना किंतु विदेशी धर्मगुरूऔ के अपराधो पर खामोशी
— संतो के बयानो को ‘विवादीक’ बताना और विदेशी धर्मगुरूऔ के फरमानो व फतवों पर मौन
— हिंदु धर्म की विज्ञान प्रमाणीत मान्यताऔ को भी अंधविश्वास कि श्रेणी में खडा कर देना किंतु विदेशी धर्मो के निराधार व अंधविश्वासी प्रचलन को नजर अंदाज करना

|| जागो हिंदु, जागो ||

हिंदुकुश : काला इतिहास

### हिंदुकुश ####

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आज तीव्र गती के भुकंप के झटके लगे, अफगानीस्तान का “हिंदुकुश” इलाका बना भुकंप का केंद्र : आज (८ जनवरी १६) की खबर
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क्या आपने सुना था कभी यह नाम???

हिंदुकुश : गुगल पर इस इलाके के बारे में छानबीन कजीयेगा, चौक पडेंगे…

अफगान जो आज पुरी तरह मुस्लीम बहुल इलाका बनाया जा चुका हैं उसके बावजुद वहाँ एसे नाम का इलाका सुनने में जरूर अचरज होता हैं, लेकिन इसका इतिहास जानकर दु:ख भी होगा|

जहाँ इस्लामीक कट्टरपंथीयो के जुल्मो ने अन्य धर्मीयों के नामो निशान मिटवा दिये वहीं इस इलाके का नाम आज तक हिंदुऔ से कैसे जुडा रह गया! विचार उठना स्वाभावीक हैं|

अफगान पर मुगल हमले के पुर्व वहाँ भी हिंदु ही रहा करते थे| जब मुगलों ने अपनी दरींदगी का तांडव शुरू किया तब उन्होने इस इलाके को चुना जहाँ वे उन हिंदुऔ को बंदी बनाकर इकट्ठा करते थे जो अपने हिंदु धर्म के सच्चे परायणी होते थे व इस्लाम स्वीकार करने से मना कर देते थे| अफगान का हिंदुकुश इलाका पुरी तरह पहाडीयों व खाडीयों से भरा हुवा हैं| एसे इलाके तक हिंदुऔ को लाने के लिये भी घुडसवार मुगल सेनीक भेड-बकीरीयों कि भाँती इन्हे घेरते हुवे व कोडे बरसाते हुवे लाते थे|

समय-समय पर एसे हिंदुऔ को इकट्ठा कर हिंदुकुश लाया जाता था ताँकी वे इन्हे इस्लाम को नकारने कि सजा दे सके| इसके लिये उन्हे कतार में खडा कर बारी-बारी से आगे लाते| पहले उनकी जनेउ उतार एक और फेकी जाती और फिर पुछा जाता – क्या तुम्हे इस्लाम कबुल हैं? यदी “हाँ” में जवाब मिला तो दुसरी कतार में अन्यथा वहीं सबके सामने उससे गर्दन झुकवा कर जल्लाद द्वारा कटवा दी जाती| इन तरीको से वे मौजुद लौगों में इस तरह का खौफ भरते थे की वे डर कर इस्लाम कबुल करले| कई लोग इस खौफनाक मंजर को देख कर इस्लाम कबुल कर लेते थे| लेकिन इन सब के बावजुद एसे-एसे धर्मात्मा भी होते थे जो अपनी मुंडी कटवाना आसानी से स्वीकार लेते लेकिन धर्म नहीं छोडते थे| इस सामुहीक हत्याकांड से कई बार यहाँ एक और जनेऊ का व दुसरी और कटे सिरो का पहाड तक बन जाया करता था|

हिंदुकुश इलाके के बारे में आप जब नेट पर खोजेंगे तो अन्य जो जानकारीया मिलेगी उनमे एक जानकारी यह भी होगी की हिंदुकुश नाम का मतलब क्या हैं…मुगल कालीन इतीहास के अनुसार इसका मतलब हैं – “हिदुऔ को मारो”|

इस इलाके का नाम अब तक नहीं बदला गया शायद यही कारण होगा कि कट्टरपंथी आज भी इसे हिंदुऔ पर अपनी बादशाही कि नीशानी का गढ मानते होंगे और संभवत: “हिंदुकुश” कि दहशत से ही उस दौरान अफगानीस्तान व बलुचीस्तान जैसे देश पुर्ण रूप से इस्लामीक बनाये जा सके|

हर हिंदु से प्राथना हैं कि जब भी यह नाम आपके समक्ष आये या याद भी आये तो यहाँ बलीदान हुवे अपने हिंदु भाईयों कि आत्मशांती के लिये प्रार्थना अवश्य किजीयेगा साथ ही गर्व किजीयेगा अपने पुरखो पर कि एसी दरींदगी भरे काल के बावजुद अपने धर्म को ना छोडा व आज भी हम एक हिंदु हैं|

वाकई …….  || गर्व से कहो हम हिंदु हैं ||

हिंदुराष्ट्र का षडयंत्र !!!!!

#हिंदुराष्ट्र का षडयंत्र !!!!!!!!

लालु व मायावती जैसे सेक्युलर मुर्ख बीजेपी व संघ पर आरोप लगा रहे कि वे भारत को हिंदुराष्ट्र बनाने का षडयंत्र रच रहे!!! अब बताऔ, यह बीजेपी का दुष्प्रचार हैं या ‘प्रचार’!

एक हिंदु के लिये इन मुर्खो के इस आरोप में संपुर्ण देश का उज्वल भविष्य नजर आना ही चाहीये| बीजेपी-संघ अगर इस राह पर ना भी हो तो हर भारतीय कि यही कोशिश होनी ही चाहीये कि काम-दाम-दंड-भेद, हर संभव तरीके से राजनेतीक इच्छाशक्ती को हिंदुराष्ट्र के पथ पर अग्रसीत कर सके|

एक हिंदु होते हुवे भी जिस हिंदु को भारत के हिंदुराष्ट्र होने में आपत्ती नजर आये और यह जानने के बाद भी जो हिंदु एसे संघठनो को यदी समर्थन करने से पीछे हटे, उसे वास्तव में स्वयं का DNA जाँच करवा लेना चाहीये … जरूर उसका खानदान किसी बाबर या अंग्रेज की नाजायज औलाद के फल स्वरूप ही होगा|

> इस देश का हिंदुराष्ट्र होना ही इस देश को एक शक्तीशाली सुरक्षा कवच प्रदान कर सकता हैं|
> इस देश का हिंदुराष्ट्र होना ही इस देश के सभी धर्मों व माताऔ का सम्मान बनाये रख सकता हैं|
> इस देश का हिंदुराष्ट्र होना ही भारत विरोधी सारी विदेशी शक्तीयों के षडयंत्रो को धराशाही कर सकता हैं|

हिंदुराष्ट्र कि परिकल्पना पर अपना आत्मचिंतन कर इसके पक्ष में स्वयं भी उतरे व औरों को भी उतारे क्यँ की यही एक मात्र विकल्प हैं देश को खंडीत होने से बचाने का|

बहोत बट चुका खंड खंड में राष्ट्र
अब हर भारतीय को जगाना ही होगा
इससे पहले कि मिट जाये हस्ती हमारी
हमें हिंदुराष्ट्र का परचम लहराना ही होगा

|| जयतु जयतु हिंदुराष्ट्र ||

इस विषय पर आपके विचार/बहस/प्रश्न सदेव आमंत्रीत हैं…कमेंट करे|