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क्या हैं अमेरिका समर्थित “आप” पार्टी कि हकीकत ?

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली ‘राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी)’ की एक प्रमुख सदस्य अरुणा राय के साथ मिलकर अरविंद केजरीवाल ने सरकारी नौकरी में रहते हुए एनजीओ की कार्यप्रणाली समझी और फिर ‘परिवर्तन’ नामक एक एनजीओ से जुड़ गये। इस दोरान वे सरकारी पद से लम्बी छुट्टी पर रहते हुवे भी वे सरकार और एनजीओ कि तरफ से तवख्वाह लेते रहे।

वर्ष 2006 में ‘परिवर्तन’ में काम करने के दौरान ही उन्हें अमेरिकी ‘फोर्ड फाउंडेशन’ व ‘रॉकफेलर ब्रदर्स फंड’ ने ‘उभरते नेतृत्व’ के लिए ‘रेमॉन मेग्सेसाय’ पुरस्कार दिया, जबकि उस वक्त तक अरविंद ने ऐसा कोई काम नहीं किया था।

इसके बाद अरविंद अपने पुराने सहयोगी मनीष सिसोदिया के एनजीओ ‘कबीर’ से जुड़ गए, जिसका गठन इन दोनों ने मिलकर वर्ष 2005 में किया था।

‘फोर्ड फाउंडेशन’ के एक अधिकारी स्टीवन सॉलनिक के मुताबिक ‘‘कबीर को फोर्ड फाउंडेशन की ओर से वर्ष 2005 में 1 लाख 72 हजार डॉलर एवं वर्ष 2008 में 1 लाख 97 हजार अमेरिकी डॉलर का फंड दिया गया।’’ यही नहीं, ‘कबीर’ को ‘डच दूतावास’ से भी मोटी रकम फंड के रूप में मिली।

अंग्रेजी अखबार ‘पॉयनियर’ में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक डच यानी नीदरलैंड दूतावास अपनी ही एक एनजीओ ‘हिवोस’ के जरिए नरेंद्र मोदी की गुजरात सरकार को अस्थिर करने में लगे विभिन्‍न भारतीय एनजीओ को अप्रैल 2008 से 2012 के बीच लगभग 13 लाख यूरो, मतलब करीब सवा नौ करोड़ रुपए की फंडिंग कर चुकी है।  इसमें एक अरविंद केजरीवाल का एनजीओ भी शामिल है।

एशियाई देशों की मीडिया को फंडिंग करने के लिए अमेरिका व यूरोपीय देशों ने ‘पनोस’ नामक संस्था का गठन कर रखा है। माना जा रहा है कि अरविंद केजरीवाल के मीडिया उभार के पीछे इसी ‘पनोस’ के जरिए ‘फोर्ड फाउंडेशन’ की फंडिंग काम कर रही है।

आरोप है कि विदेशी पुरस्कार और फंडिंग हासिल करने के बाद अमेरिकी हित में अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया ने इस देश को अस्थिर करने के लिए ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ का नारा देते हुए वर्ष 2011 में ‘जनलोकपाल आंदोलन’ की रूप रेखा खिंची।

इसके लिए सबसे पहले बाबा रामदेव का उपयोग किया गया, लेकिन रामदेव इन सभी की मंशाओं को थोड़ा-थोड़ा समझते हुवे इनको मना कर दिया। जिसके बाद महाराष्ट्र के सीधे-साधे, लेकिन भ्रष्‍टाचार के विरुद्ध कई मुहीम में सफलता हासिल करने वाले अन्ना हजारे को अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली से उत्तर भारत में ‘लॉंच’ कर दिया।

अन्ना हजारे को अरिवंद केजरीवाल की मंशा समझने में काफी वक्त लगा, लेकिन तब तक जनलोकपाल आंदोलन के बहाने अरविंद ‘कांग्रेस पार्टी व विदेशी फंडेड मीडिया’ के जरिए देश में प्रमुख चेहरा बन चुके थे।

एक  सुचना के मुताबिक अमेरिका की एक अन्य संस्था ‘आवाज’ की ओर से भी अरविंद केजरीवाल को जनलोकपाल आंदोलन के लिए फंड उपलब्ध कराया गया था और इसी ‘आवाज’ ने दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए भी अरविंद केजरीवाल की ‘आम आदमी पार्टी’ को फंड उपलब्ध कराया। अमेरिका के हित में हर देश की पॉलिसी को प्रभावित करने के लिए अमेरिकी संस्था जिस ‘फंडिंग का खेल’ खेल खेलती आई हैं, भारत में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और ‘आम आदमी पार्टी’ उसी की देन हैं।

‘फोर्ड फाउंडेशन’ ने अरविंद व मनीष सिसोदिया के एनजीओ को 3 लाख 69 हजार डॉलर तो शीला दीक्षित के पुत्र संदीप दीक्षित के एनजीओ को 6 लाख 50 हजार डॉलर का फंड उपलब्ध कराया है।

सुप्रीम कोर्ट के वकील एम.एल.शर्मा ने अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया के एनजीओ व उनकी ‘आम आदमी पार्टी’ में चुनावी चंदे के रूप में आए विदेशी फंडिंग की पूरी जांच के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल कर रखी है। अदालत ने इसकी जांच का निर्देश दे रखा है, लेकिन केंद्रीय गृहमंत्रालय इसकी जांच कराने के प्रति उदासीनता बरत रही है। बाबा रामदेव के खिलाफ एक ही दिन में 80 से अधिक मुकदमे दर्ज करने वाली कांग्रेस सरकार की उदासीनता दर्शाती है कि अरविंद केजरीवाल को वह अपने राजनैतिक फायदे के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

दरअसल विदेश में अमेरिका, सउदी अरब व पाकिस्तान और भारत में कांग्रेस व क्षेत्रीय पाटियों की पूरी कोशिश नरेंद्र मोदी के बढ़ते प्रभाव को रोकने की है। मोदी न अमेरिका के हित में हैं, न सउदी अरब व पाकिस्तान के हित में और न ही कांग्रेस पार्टी व धर्मनिरेपक्षता का ढोंग करने वाली क्षेत्रीय पार्टियों के हित में।  मोदी के आते ही अमेरिका की एशिया केंद्रित पूरी विदेश, आर्थिक व रक्षा नीति तो प्रभावित होगी ही, देश के अंदर लूट मचाने में दशकों से जुटी हुई पार्टियों व नेताओं के लिए भी जेल यात्रा का माहौल बन जाएगा। इसलिए उसी भ्रष्‍टाचार को रोकने के नाम पर जनता का भावनात्मक दोहन करते हुए ईमानदारी की स्वनिर्मित धरातल पर ‘आम आदमी पार्टी’ का निर्माण कराया गया है।

‘आम आदमी पार्टी’ व  उसके नेता अरविंद केजरीवाल की पूरी मंशा को इस पार्टी के संस्थापक सदस्य व प्रशांत भूषण के पिता शांति भूषण ने ‘मेल टुडे’ अखबार में लिखे अपने एक लेख में जाहिर भी कर दिया था, लेकिन बाद में माना जाता हैं कि प्रशांत-अरविंद के दबाव के कारण उन्होंने अपने ही लेख से पल्ला झाड़ लिया और ‘मेल टुडे’ अखबार के खिलाफ मुकदमा कर दिया। ( संक्षिप्त लेख, आभार : http://jayhind.co.in/reality-of-arvind-kejriwal/ )

“आप” नेताओ के कुछ और तथ्य :
★ शांति भुसन का आतंकवादी शौकत हुसैन गुरु जिसने 2001 में संसद पर आतंकी हमले किये थे उसको बचाने का भरसक प्रयत्न किया।
★ प्रशांत भूषन ने हिन्दुओं को आतंकी खुले आम आतंकी कहा जबकि अफजल गुरु की फांसी पर दुःख जताया और जनमत के आधार पर ये कश्मीर को भारत से अलग करने के भी पक्षधर हैं।
★ केजरीवाल पर कई घोटाले का के तथ्य छुपाने का आरोप भी लगा हैं जिनमे कोयला घोटालों में नविन जिंदल पर चुप्पी हैं।
★ अरविन्द केजरीवाल के इनकम टैक्स विभाग में कार्यरत रहते हुवे उनका और उनकी पत्नी का सालों तक कोई ट्रान्सफर नहीं हुवा क्यूँकि इसके लिए इनकम टैक्स विभाग को सोनिया गाँधी ने चिट्ठी लिख रखी थी।
★ योगेन्द्र यादव पहले राहुल गांधी के लिए भाषण लिखा करते थे और इनका IAC आंदोलन में भी कभी कोई योगदान नहीं रहा हैं।
★ चुनाव के पहले शीला दिक्सित को भस्टाचार कि प्रतिमूर्ति बताने वाले अब केजरीवाल अब उनपर कार्यवाही से पहले उनके खिलाफ विपक्षी दल से सबुत मांग रहे हैं।
★ कजरीवाल ने एक बयान में ये भी कहा था की बटला एनकाऊंटर फर्जी था लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी वास्तविकता को माना।
★ मुजफ्फर नगर दंगो में भी इन लोगों ने निराधार मोदी और RSS को जिम्मेदार ठहराने कि कोशिशे की।

जागो और जगाऔ, देश बचाऔ !!!

जय हिंद!

I Hate Politics!!! ……think again!

अच्छे नेता, उज्वल भविष्य

अच्छे नेता, उज्वल भविष्य

आज किसी भी पढ़े लिखे से अगर पूछे की आपका पसिंदिदा कलाकार, अभिनेत्री या खिलाडी  कोन हैं तो ख़ुशी-ख़ुशी बताएगा लेकिन अगर पूछा जाये की आप का पसंदीदा नेता कोन हैं तो बड़े रुवाब में शायद जवाब निकल जाएगा – I Hate Politics !!!

फिल्मो के कलाकार या खिलाडी कितने भी अपने क्षेत्रों में निपूर्ण क्यूँ न हो क्या वे देश को समृद्ध बना सकते हैं ? क्या बढती महंगाई पर लगाम लगा सकते हैं ? क्या आपके बच्चो का भविष्य बना सकते हैं ? जवाब हैं नहीं।

लेकिन यही प्रश्न राजनीती के विषयं में अगर करेंगे तो जवाब हैं – हाँ!!! Continue reading

घोटालों के बाद कांग्रेस की कोर कमिटी में…

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सिब्बल – बंसल इस्तीफा दे, रेल-प्रमोशन-घोटाले से फजीहत हो रही हैं
बंसल – अच्छा! तुम सालों ने अरबो-खरबों हजम करलिये और डकार तक नहीं ली!!! मेने दो-चार करोड़ की गूस क्या ली सबको अखर रहा हैं!!! पहले मन्नू को बोलो इस्तीफा देने को, कोयला-घोटाले से ज्यादा बड़ी फजीहत हो रही हैं
सिब्बल – मन्नू इस्तीफा दे… Continue reading

अंधेर नगरी चोपट राजा : कांग्रेसी राजतंत्र!!!

अंधेर नगरी चोपट राजा

अंधेर नगरी चोपट राजा

> मुफ्त मे मोबाईल कनेक्शन दे सकते है लेकीन रोटी नहीं!!!
> ट्रेनों में मुफ्त वायफाय मिल सकता हैं लेकीन पीने का पानी नहीं!!!
> बेकारों को रोजगारी भत्ता दिया जा सकता हैं लेकीन किसानों को उनकी फसल का उचित मुल्य नहीं!!!
> गाँव-गाँव तक पेप्सी-कोला का जहर पहुँचाया जा सकता हैं लेकीन पीने का पानी नहीं!!!
> विदेशी कंपनीयों का देश को लुटना और गुलाम बनाना मंजुर हैं लेकीन स्वदेशी उद्योग से आत्मनिर्भर होना नहीं!!!
> विदेशों से उधार लाया जा सकता हैं लेकीन कालाधन नहीं!!!
> खरबो रपये के घोटाले किये जा सकते हैं लेकीन गरीबों की सब्सीडी के लिये खजाने खाली!!!
> राबर्ट वाड्रा व भ्रष्ट मंत्रीयों का किसानों की जमीन लुटना जायज हो जाता हैं…
…लेकीन स्वामी रामदेव का सरकार से मिली जमीन पर आरोग्य भवन जायज नहीं!!!
> बलात्कार से पिडीत महीला को मुवाबजा मिल सकता हैं लेकीन महीलाऔ को सुरक्षा नहीं!!!
> औवासी-नाईक जैसे गद्दारों के दल मंजुर हैं पर RSS जैसे देशभक्त संघठन नहीं!!!
> कसाब आतंकी को बिरयानी खिला सकते हैं लेकिन साध्वीप्रज्ञा का इलाज नहीं!!!
> अफजल समर्थक व अलगाववादी दिल्ली में प्रदर्शन कर पाकीस्तान जिंदाबाद के नारे लगा सकते हैं…
…लेकीन देश भक्त  भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ आवाज नहीं!!!

जागो और जगाओ देश बचाओ!!! अभी तो करोड़ों को जगाना हैं!!!

“पत्रकारिता” का बलात्कार: बेशर्मी से सहन करता मिडिया जगत

naveen jindal zee news coal scandal

naveen jindal zee news coal scandal

“जिंदाल” और “जी ग्रुप” – कोयला-घोटाले का खुलासा-विवाद

* बगैर किसी नोटिस के संपादको को जेल
* बैल लेने में भी जी ग्रुप का हफ्ता बिता देना
* दुसरे चैनलो को तो छोडीये “जी न्युज” के हैड लाइनों से ही इस खबर का गायब हो जाना
* “जी ग्रुप” की काँग्रेस के प्रति नर्मी!!!

इस विवाद मे तौ काँग्रेस सरकार समर्थीत जिंदाल का ही पलडा भारी नजर आ रहा हैं… जहाँ एक तरफ इस भ्रष्ट सरकार की दादागीरी बहोत ही हद तक उभर कर आइ हैं….दुसरी तरफ सारे मिडीया जगत का उन्ही के संम्पादको के प्रति उदासिन रवइया काफी विचार का विषय पैदा कर रहा हैं

अब बताइये, जो संपादक इतने बडे “जी ग्रुप” से होते हुवे भी जेल भेज दिये जाते हैं और सारा मिडीया जगत तमशबिन बना रह जाता हैं….ये अपने आप मे मिडीया जगत पर एतिहासीक घिनोने दाग लगा रहा है जिसे मिडीया जगत बडी बेशर्मी से सहन भी कर रहा हैं।

भाई ये तो वही बात हो गई के कोई अगर अपनी इमानदारी ना बेचे तो कातिलौं को खरीद लो उसका घला घौटने को!!!

यह “काला अध्याय” इस देश के लोकतंत्र पर सैकडों कालिख पौतने वाली निच काँग्रेस की तरफ से उस मिडीया जगत को तौहफा हैं जिसने प्रतक्ष्य या अप्रतक्ष्य रुप से भ्रष्टतंत्र को पाला, पौषा और समृद्ध किया।

इस मुद्दे पर मिडिया जगत से जुड़े हर एक शक्श को स्वतः अपने आप से विश्लेषण की आवश्यकता हैं. जी हाँ, अपने आप से क्यूंकि स्वतः की आत्मा से कोई झूठ नहीं बोलता।

जय हिंद!!! जय भारत!!!

[ कृपया मिडीया जगत से जुडे हर एक अपने विचार अवश्य दे ]

कज्रिवाल, मिडिया और साजिश

कज्रिवाल, मिडिया और साजिश

इस देश की मिडिया ने जीतनी कोशिश कांग्रेस के भ्रष्टाचारों को दबानेकी की हैं उससे कहीं ज्यादा कोशिश बीजेपी को भी कांग्रेस जीतनी बदनाम करनेकी की हैं. अब तक बीजेपी को बदनाम करने का ठेका केवल मिडिया के जिम्मे पर था लेकिन जब से सोसिअल मिडिया ने सर उठाया है भ्रष्ट मिडिया का असर फीका पड़ने लगा. इसलिए अब इस नेक काम को “कज्रिवाल” जैसे दलालों से कराया जा रहा हैं.

आज मिडिया जिस प्रकार सो-दोसो को इकठ्ठा कर आन्दोलन का तमाशा करने वाले कज्रिवाल को भुनाने में लगा हैं उसके सामने तो लाखों समर्थकों की भीड़ जुटा कर आन्दोलन खड़ा करने वाले रामदेव और अन्ना हजारे भी फीके पड़ गए!!!

कज्रिवाल ने तो अभी तक देश की कोई सेवा नहीं की सिवाय आन्दोलन के और वो भी अभी केवल सुरुवात ही हैं. लेकिन रामदेव अन्ना ने तो अपना जीवन लगा दिया. कज्रिवाल को मिल रहे मिडिया कवरेज पर सवाल तो उठेंगे ही क्यूंकि ऐसे कई पहलु है जिन पर हमारा भ्रष्ट मिडिया आंखे मूंदे हुवे हैं ध्यान दे..

# श्री राजीव दीक्षित: सच को उजागर करने के लिए राजीव दीक्षित ने जीवन भर संगर्ष किया लेकिन भ्रष्ट मिडिया ने कोई तवज्जो न दी…और आज “कज्रिवाल” के दो चार बासी खुलासे को मिडिया राई से पहाड़ बना रहा हैं…आखिर क्यूँ?

# सुभ्रमनियम स्वामी: सोनिया गाँधी को प्रधानमंत्री बनाने से रोकने वाले डा. सुभ्रमनियम स्वामी वो नाम हैं जिसने कांग्रेस के भ्रष्ट मंत्रियों पर दर्जनों केस किये हुवे हैं. इनके ऊपर कांग्रेसियों ने कई बार जानलेवा हमले भी किये. 2G में चिदम्बरम की भूमिका को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक उन्हें घसीटा. लेकिन आपने कभी देखा की मिडिया ने इनका गुणगान किया…आखिर क्यूँ?

# नरेन्द्र मोदी: आज तक मिडिया ने नरेन्द्र मोदी के खिलाफ केवल जहर ही उगला जबकि नरेन्द्र मोदी के कार्यों ने न केवल भारत में बल्कि विदेशो में अपना डंका बजाया लेकिन हमारी भ्रष्ट मिडिया कभी कोई सरहाना नहीं की…आखिर क्यूँ?

# एकता परिषद का जन-आन्दोलन: भारत के इतिहास में पहलीबार भारत के किसानो का इतना बड़ा जन-आन्दोलन हवा जिस पर विदेशी पत्रकारों ने आँखे गदा राखी थी. इस आन्दोलन में ग्वालियर से देल्ही तक पैदल मोर्चा निकलने के लिए ५० हजार किसानो का जत्था पैदल चल कर आगरा तक पहुँच गया लेकि हमारी भ्रष्ट मिडिया ने कोई सुध नहीं ली…आखिर क्यूँ?

# असम हिंसा की घटना हमारे सामने हैं वहाँ हो रही लाखो बांग्लादेशियों की गुसपैठ को आज तक मिडिया ने नजर अंदाज कर रखा हैं…आखिर क्यूँ?

# गो हत्या को रोकने वाले कई विशाल आंदोलनों को मिडिया नहीं दिखता…आखिर क्यूँ?

बगेर नफा-नुक्सान के मिडिया वाले किसी को घास नहीं डालते. कज्रिवाल को मिडिया का चेहरा बनाना एक सोची समजी साजिश का हिस्सा हैं. क्यूंकि जहां विदेशियों की एक रखेल “कांग्रेस” बूढी हो चुकी हैं वहीँ विदेशी अपने लिए दूसरी रखेल “कज्रिवाल” के रूप में खड़ी कर रहे हैं.

जागो और जागो…देश बचाओ!!!

कोयला घोटालो में सोनिया का काला चेहरा सामने आया!!!

आखिरकार गूंगे मन्नू ने खोली अपनी जुबान कहा सोनिया गाँधी के सेकेट्री अहमद पटेल के इशारों पर कोयला खदाने आवंटित हुई….

“Dr Singh made it clear to Sonia Gandhi that he had no role or interest in determining who the beneficiaries should be. As he laid the blame for coal allotment squarely at the Congress’ door, the PM explained that his then principal secretary T.KA.Nair
had merely coordinated the allotment decision as desired by Ahmed Patel.” : Mumbai Mirror

Read whole story:

http://www.mumbaimirror.com/article/15/20120915201209151552366855c9cb74d/Wasn%E2%80%99t-me-coaltainted-PM-names-Ahmed-Patel.html