Tag Archives: Congress is corrupt

कांग्रेस और हिंदु-आतंकवाद का सच

भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसियों द्वारा इस खुलासे से कि समझौता ब्लास्ट मामले में पुरोहित व अन्यो के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं हैं, कांग्रेस के देशद्रोही चेहरे को एक बार फिर से उजागर कर दिया है।

UPA के समय में ही समझौता ब्लास्ट व मालेगांव ब्लास्ट के तुरंत बाद सौंपी गई NIA रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से हमले कि साजिश के तार पाकिस्तान व बंग्लादेश से जुडे होने कि बात कही गई थी लेकिन कांग्रेस सरकार के मंत्रियों ने उदे दर किनार कर हमले का दोष पुरी तरह से RSS व VHP के कार्यकर्ताओं के सिर लगाया।

इससे पूर्व भी इशरत के मामले में सोनिया सरकार के गृह मंत्री के झूठे शपथ पत्रों से यह सिद्ध हो चुका हैं कि वे आतंकियों को बचाने के लिए हिंदू नेताओ और संतो पर झूठे मामले दर्ज करते थे। कांग्रेस के मोदी के खिलाफ ‘झुठे एंकाऊंटर’ कि धज्जीया तब से उडनी शुरू हो गई थी जब से अमेरिका में कैद आतंकी डेविड हेडली ने इशरत को आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा कि आत्मघाती दल का हिस्सा बताया था।

भारत के खिलाफ रची गई एसी घीनोनी व राष्ट्रद्रोही हरकत के पीछे कांग्रेस के तीन लक्ष्य साफ तौर से उभरकर आते हैं…

पहला – RSS व VHP जैसी राष्ट्रवादी संगठनों कि साख को धुमील करना जिससे वे आम जनता के लिये अपेक्षीत बने रहे।

दुुसरा – इस तरह से वे पूरे भारत में सांप्रदायिक कट्टरता को बढावा देने कि कोशिश में लगे थे जिससे अल्पसंख्यक वोट बैंक डर कर उनके पक्ष में खडा रहे।

तीसरा – विश्व स्तर पर हिंदू-आतंकवाद को मुद्दा बनाकर पुरे विश्व में भारत को बदनाम करना जिससे भारत कि पहचान भी आतंक समर्थित देशों मे होने लगे जिसमें सिधा फायदा पाकिस्तान का था जो कश्मीर मुद्दे पर त्रिपक्षीय वार्ता कि मंशा को पुरा कर सकता था।

इस संबंध के कुछ ध्यान देने वाले तथ्य….

समझौता ब्लास्ट में जहाँ कर्नल पुरोहित व चार अन्य पिछले 9 साल से जेल में बंद हैं वहीं मालेगांव ब्लास्ट में साध्वी प्रज्ञा सिंह सहित अन्य सात-सालों से जेल में बंद हैं। यहाँ तक कि जेल में ही साध्वी प्रज्ञा कैंसर से भी ग्रसित हो चुकी हैं लेकिन अदालतों से जमानत भी नामंजूर ही कि गई। यह जान कर और भी हैरत होगा कि अब तक सबूत के अभाव में इनके खिलाफ एक भी चार्जशीट तक दाखिल ना हो सकी। इसी तरह इशरत जहां केस में बंजारा जैसे अधिकारी जिनको पुरस्कृत किया जाना चाहिए था उन्हे भी चार साल जेल में बंद कर रखा गया।

इन सबकी गलती मात्र इतनी ही थी कि ये राष्ट्रवादी संगठनों से जुडे थे, देश के लिये कार्यरत थे व हिंदु समुदाय से थे।

पहले सिमी जैसे देशद्रोही संगठनो को समर्थन और उसके बाद बिना सबूतों के हिन्दू आतंकवाद शब्द को गढ़ना, यह बताता है  कि सोनिया गाँधी  सत्ता प्राप्त करने के लिए किसी भी सीमा तक जाकर देश को नुकसान पंहुचा सकती है। सोनिया ने न केवल आतंकियों के हौंसले बढ़ाये हैं अपितु अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का मजाक बनवाया है। इन्होने झूठे मामलों में हिन्दुओ को फंसाकर अल कायदा के सहायक बनकर असली आतंकियों को छोड़ने का अपराध भी किया है।

कांग्रेस के इस षडयंत्र में फँस कर मैकाले कि शिक्षा से शिक्षित एक वर्ग व इनके साथ बिकाऊ मिडिया RSS व VHP कि तुलना आतंकी संगठनों से करने को तुली रहती हैं। आज यह वर्ग व विदेशी मिडिया देश व संस्कृति के लिये आवाज उठाने वाले हर शख्स को एक संघी का ठप्पा लगाकर पेश करता आया हैं।

देश की सुरक्षा से जुड़े इन अति संवेदनशील मामलों में कांग्रेस की यह कार्यवाही एक अपराधिक षड़यंत्र है। इन अपराधों के लिये सोनिया -राहुल पर राष्ट्रद्रोह का केस बनता हैं। एसे षडयंत्रों के लिए जनता की जागरूकता ही एक मात्र उत्तर बन सकती हैं।

|| जय हिंद ||

मरती हुई कांग्रेस में जान फूंकी हैं केजरीवाल ने !!!

मरती हुई कांग्रेस में जान फूंकी हैं केजरीवाल ने

मरती हुई कांग्रेस में जान फूंकी हैं केजरीवाल ने

अब तक ये तो सभी जान चुके हैं कि #AAP कोई नैतिकता पालने वाला राजनेतिक दल नहीं बल्कि विदेशी ताकतो कि रखेल कांग्रेस का ही दूसरा चेहरा हैं। 2104 के लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस को इस दूसरे चेहरे का कितना फायदा हो पायेगा ये कहना अभी मुश्किल भले ही हैं लेकिन इसने आज भी कांग्रेस बदतर हो रही हालत को सम्भाला हैं।

#कांग्रेस पर केजरीवाल के एहसान का अनुमान सिर्फ इस बात के आंकलन से ही आप लगा सकते हैं कि यदि इस चुनाव में #आप का जन्म ना हुवा होता तो अकेले कांग्रेसी सोशियल मीडियां पर दिन-रात कितनी ही गालिया खा रहे होते , लेकिन केजरीवाल ने अपनी उपस्थिति से कांग्रेस कि सारी गालियों को अपने सर आँखों पर ले लिया।

आज हर वो शख्स जो कांग्रेस को दिन-रात, भर-भर  के कौसा करता था , अब सबसे पहले #केजरीवाल और #आप के लोगों पर अपना गुस्सा निकलता हैं। अपनी नीचता और सड़क पर कि गई औंछी नौटंकी से लोगों के मन में कांग्रेस के खिलाफ भरे हुवे उबाल केजरीवाल ने अपनी और मुड़ा लिया हैं।

#आप आने के पहले कांग्रेस एक मात्र लोगों का निशाना बनी हुई थी और सबसे निचले दर्जे का दल बनी हुई थी। लेकिन अब आप किसी से भी पूंछेंगे तो वो कांग्रेस को तो #आप से भला ही बतायेगा।

यह नुस्का बिलकुल वैसा ही हैं कि एक कोरे कागज पर खिंची गई लकीर को बैगैर छेड़े अगर छोटा साबित करना हो तो उसके बगल में उससे भी बड़ी लकीर खीच दी जाए। अब पूछिए किससे भी कौनसी लकीर छोटी हैं… जवाब मिलेगा पहली वाली!!! ठीक वैसे ही एक हद से गिरी हुई कांग्रेस को अच्छा बनाने के लिए उससे भी अधिक गिरी हुई और औंछि हरकते करने वाला दल पैदा कर दो , तो सबकी नजर में पहले वाली कांग्रेस कि स्थिति अच्छी हो जाती हैं और-तो-और बैगेर कोई भला काम किये…. हैं ना कमाल !!!

नरेंद्र मोदी को केजरीवाल रोक पाएंगे इसके तो कोई असार नजर नहीं आते , लेकिन कोंग्रेसियों के लिए केजरीवाल ने बड़ा ही उद्धार का काम किया हैं , यकीं मानो !!!

सारांश : इस देश से “कांग्रेस” का अंत बेहद जरुरी हैं।

जागो और जगाओ , देश बचाओ !!!
अभी तो करोडो को जगाना हैं !!!

अगर मोदी ना बन सके प्रधानमंत्री

मोदी लाओ, देश बचाओ

मोदी लाओ, देश बचाओ

वास्तव में, कुछ लोग यह आंकलन करने में समय बर्बाद कर देते हैं कि आखिर नरेंद्र मोदी प्रधान मंत्री बन भी गया तो क्या हो जाएगा लेकिन सोचने वाली बात तो यह हैं कि अगर नरेंद्र मोदी प्रधान मंत्री ना बन सके तो देश को किन-किन मुसबतों से गुजरना पड़ेगा। ऐसे ही कुछ भयभीत करदेने वाली सच्चाई पर लोगों का ध्यान केंद्रित करना बेहद जरूरी हैं।

अगर नरेंद्र मोदी प्रधान मंत्री ना बन सके तो….
> भारत में अमेरिकी कंपनीयो के राजनीतीक हस्तक्षेप चरम पर हो जायेंगे
> देश की राजनीतिक अस्थिरता के चलते विदेशी ताकते अप्रत्यक्ष रूप से देश पर हावी होगी
> देश की गिरती अर्थव्यवस्था को संभालना नामुमकिन हो जायेगा क्यूंकि सबसे पहले हाथ खीचने वाले विदेशी निवेशक ही होंगे
> देश के कट्टरपंथी जो मोदी को रोकने के लिये एडी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, उनके हौसले बुलंद हो जायेंगे और फिर इनकी कट्टरता के अत्यधिक दुषपरिणाम असमाजिक तत्वो  कि भरमार स्वरूप मिलेगा
> आतंकवादी, जिनके अबतक मोदी कि आहट से हाथ-पाँव फुले हुवे हैं, वे पुर्णतया बेलगाम हो कर और अधिक रूप से सक्रिय हो जायेंगे
> पाकिस्तान और चीन जो रह-रह कर भारत को छेडते आ रहे हैं वे भी बेखोफ हो कर अपनी दबंग-गिरी पर उतर आयेंगे जिससे सिमा पर भारी अशांती की स्थीती बन जायेगी जिससे सीमा सुरक्षा का खतरा बढ़ जाएगा
> पाकिस्तान में बढ़ते तालिबानी वर्चस्व से साफ़ नजर आता हैं कि पकिस्तान पर जल्द ही तालिबानी कब्जा होने वाला हैं ऐसी स्थिति में उनका पहला लक्ष्य कश्मीर मुद्दे को लेकर भारत में आतंकवाद फैलाना और यहाँ तक कि जंग छेड़ देना।
> अगर बैगर सक्षम प्रधान मंत्री के देश को युद्ध के दौर से गुजरना पड़ा तो अवश्य ही ये वो भयावह स्थिति होगी जिसकी कल्पना और अंजाम रोंगटे खड़े कर देता हैं
> देश के अल्पसंख्यक और पिछडा वर्ग जो आजतक मात्र वोट बँक की राजनीती का शिकार होता आया हैं, वो एकबार फिर अपनी हक से वंचीत हो जायेगा क्युँ की इस वर्ग का सबसे अधीक वीकास अगर कहीं हुवा हैं तो वो मात्र मोदी के शासन में हुवा हैं
> देश में संप्रदाईकता के नाम पर हिंदुत्व का घला घौटा जायेगा, सेक्युलरता के नाम पर सारी हिंदुत्व विरोधी ताकते एक झुठ हो कर अपना वर्चस्व साबीत करने में लगजायेगी
> देश कि सेना का मनोबल धराशायी होगा क्युँ की हाल की कई घटनाऔ में भारत सरकार के लचीले रवईय्ये को लेकर वे पहले से ही नाराज हैं और मोदी से उनकी काफी उम्मीदे जगी हैं
> स्वदेशी उद्योग जगत में नीराशा फैलजायेगी जिसकी कमर पहले से काँग्रेस शासन के चलते टुट चुकी हैं
> राजनैतीक अस्थीरता के चलते महंगाई कि मार और अधिक बढेगी जिसका सबसे बुरा असर मध्यम वर्गीय और गरीब जनता पर पडनेवाला हैं
> कृषी जगत को बहोत बडा नुकसान झेलना होगा क्युँ की मोदी एक मात्र एसे नेता हैं जिसने किसानों को उद्योगपती की श्रेणी में लाकर खडा किया और हर नीती में किसानों के विकास को प्राथमीकता प्रदान की
> देश के घटते पशुधन को बचाने वाली मुहीम को भारी झटका लगेगा क्युँ की आजादी के बाद से गौ-हत्या पर संपुर्ण पाबंदी लगाने कि मांग करने वाले गौ-भक्तो कि पुरी उम्मीदे अब मात्र नरेंद्र मोदी से टिकी हैं
> सोशियल मिडीया से जागृत और संघठीत हुवे देशभक्तों का मनोबल भी धराशाही होगा जो की देश के भवीष्य के लिये दु:खद दायी होगा
> देश में लोकतंत्र कि ये सबसे बड़ी हार होगी क्यूंकि आज देश का एक बड़ा वर्ग एक मात्र नरेंद्र मोदी को प्रधान मंत्री के रूप में देखना चाहता हैं

ये वे मुसीबते हैं जिन्हे ना ही कोई भारतवासी झेलना चाहेगा और ना ही ये देश हित में हैं।  देश को बचाने का एक मात्र मौका हैं। कृपया इसे अधिक-से-अधिक लोगों तक पहुंचाए।

जागो और जगाओ, देश बचाओ !!!
अभी तो करोड़ों को जगाना हैं !!!

आपका 20 :: ‪‎मोदी‬ का 272+

20 to 272+

20 to 272+

# आपका 20 :: ‪#‎मोदी‬ का 272+ #

२०१४ के महासंग्राम के सिपाही बने और अभी से अपने दोस्तों-रिश्तेदारों के मात्र २० मोबाईल नंबर एसे जमा करलो जो नीश्चीत रूप से मोदी को वोट देंगे.

चुनाव के दिन सुबह से इन नंबरो को थोडी-थोडी देर में काल करते रहो जबतक की इन्होने वोट ना डाल दीया हो.

इस छोटे सी मेहनत का असर दम-दार नतीजा शतप्रतीशत होगा, साथ ही आपको भी खुद पर गर्व होगा.

आज देश आपका योगदान मांग रहा, कृपया ये छोटी सी जीम्मेदारी अवश्य ही उठाये.

इस दफा चुनाव जनता को लडना हैं : क्या आप तयार हैं???

नोट: अगर आप मोदी की इस लडाई से सीधे जुडकर अपना योगदान देना चाहते हैं तो कृपया email में अपना मोबाईल नंबर + pincode दे सकते हैं.

जय हिंद, जय भारत!

अरविन्द केजरीवाल के ४८ रंग

#LiarKejriwal : The Big CHAMELEON

#LiarKejriwal : The Big CHAMELEON

48 दिन की सरकार के 48 ड्रामें !!!

१) ना हम समर्थन देंगे, ना लेंगे
२) बीजेपी तो जोड तोड मे माहीर हैं फिर क्यँ सरकार नही बना रही
३) मेरे बच्चे की कसम, हम किसी से समर्थन नहीं लेंगे
४) काँग्रेस जैसी पार्टी हमे बीना शर्त समर्थन क्युँ दे रही
५) हमे बीजेपी काँग्रेस की मंशा ठिक नहीं लग रही
६) बीजेपी-कांग्रेस हमारी शर्ते मानले तो हम सरकार बनाने पर सोचेंगे
७) हम जनता से राय लेंगे की हम सरकार बनाये या नहीं
८) हम १०० से ज्यादा सभायें करेंगे और हर सभा की विडीयो रेकोर्डींग कर मशवरा लेंगे की हम सरकार बनाये की नहीं
९) दिल्ली की जनता ने हमे आदेश दिया हैं की सरकार बनायी जाये
१०) हम दुसरी पार्टी के इमानदार लोगों से अपील करते हैं की वे हमारे साथ आये
११) बीजेपी अपनी जीम्मेदारी से भाग रही हैं इसलीये हम सरकार बना रहे

चुनाव से पहले >
१२) शिला दिक्षीत के भ्ष्टाचार के खिलाफ मेरे पास ३०० पेज रिपोर्ट मौजुद हैं
१३) हम सरकारी बंगला-गाडी नहीं लेंगे
चुनाव के बाद >
१४) हर्षवर्धन जी के पास शीला के खिलाफ कोई सबुत हो तो हमे दे हम कार्यवाही करेंगे
१५) राज्यपाल को बडे बंगले के लिये खत भी लिख दिया
१६) मेने मेरे दोस्तो और रेश्तेदारों के सुझाव से बडा बंगला लेने का फैसला बदल दिया
१७) शपथ ग्रहण के लिये हम आम आदमी की तरह मेट्रो में जायेंगे (महीला कोच में आम-आदमी)
१८)शपथ ग्रहण समारोह रामलीला मैदान में करेंगे ( तीन गुना अधीक खर्चा)
१९) हम जनता दरबार के जरीये उनकी समस्या सुनेंगे (भगदड में जान बचाकर भागना पडा)
२०) अब हम जनता दरबार नहीं लगायेंगे

२१) सोमनाथ भारती का साथ ना देने वाले पुसीस अफसर को सस्पेंड कराने के लिये हम धरना करेंगे
२२) पुलीस अफसरों को छुट्टी पर भेजदिया गया हैं इसके लिये हम अनशन खत्म करते हैं और ये दिल्ली वासीयों की जीत हैं
२३) हमे खत लिखकर विदेशी सरकार ने हमारे कार्य की प्रशंसा की हैं (खत झुठा नीकला, तो बोलती बंद)
२४) २६ जनवरी पर वीआईपी कल्चर खत्म होना चाहीये (लेकीन खुद वीआईपी क्लास में सुरक्षा कर्मीयो के साथ पँहुच गये)
२५) अन्ना ने हमे आशिर्वाद दिया हैं, अन्ना हमारे साथ हैं (लेकीन अन्ना ने हकाल दिया)
२६) अन्ना को बीजेपी वालों ने भडकाया हैं
२७) हमने बीजली के दाम कर दिये हैं ( लेकीन बीजली ही गुल हो गई)
२८) हमने पानी के दाम भी कम कर दिये ( लेकीन तय सिमा से एक युनीट भी उपर, तो पुरे बील चुकाऔ)
२९) प्रशांत भुषण की कश्मीर राय नीजी हैं ( तो क्या अगर वे पार्टी के संस्थापक नेता हैं)
३०) १९८४ के दंगों पर SIT बननी चाहीये
३१) गुजरात दंगो मे मोदी का हाथ (तो क्या हुवा SIT ने क्लीन चीट दी)
३२) मोदी ने हमारे विधायकों को खरादने की कोशीश की
३३) मिडीया वालो ने बेनी को लेकर झुठा प्रचार किया हैं
३४) बेनी हमसे नाराज नहीं ( थोडे ही दिन बाद बेनी कजरीवाल के खिलाफ धरने पर)
३५) बेनी को बीजेपी वालों ने भडकाया हैं
३६) प्रेस काँफ्रेंस में बोल बैनी बोल रहे थे लेकीन स्क्रीप्ट बीजेपी की थी
३७) बेनी को मंत्री पद नहीं मीला इसलीये नाराज हो रहे
३८) हम शीला पर कार्यवाही करेंगे ( लेकीन cwg घौटालों की FIR में शीला का नाम तक नहीं)
३९) हमे सरकारी लोकपाल मंजुर नहीं ( जिसे उनके गुरू अन्ना ने मंजुर कर लीया)
४०) लोकपाल पर अन्ना झुक गये हैं, बहकावे मे आ गये हैं
४१) हम दिल्ली के लिये और भी मजबुत लोकपाल बनायेंगे ( लेकीन दिल्ली अधीकार क्षेत्र में ही नहीं, केंद्र के हाथ)
४२) हम लोकपाल दिल्ली राज्यसभा में रखेंगे ( बगैर गवर्नर की मंजुरी के  अंसवेधानीक तरीके से)
४३) दिल्ली का गवर्नर नसीब जंग काँग्रेसी एजेंट हैं
४४) बीजेपी-काँग्रेस की मिली भगत के कारण लोकपाल पास ना हो सका
४५) मेरे लोकपाल का वीरोध हुवा इसलीये में इस्तीफा देता हुँ
४६) मुकेश अंबानी सरकार चला रहे हैं ( इस्तीफे के ठिक पहले जो बील पास करवाया उससे अंबानी ग्रुप को ही फायदा मीला)
४७) मोदी को वोट देना मतलब मुकेश अंबानी को जीताना
४८) हम लोकसभा का चुनाव लडेंगे ( दिल्ली नहीं संभली तो क्या हुवा)

जागो और जगाऔ, देश बचाऔ !
अभी तो करोडों को जगाना हैं !!!!

क्या हैं अमेरिका समर्थित “आप” पार्टी कि हकीकत ?

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली ‘राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी)’ की एक प्रमुख सदस्य अरुणा राय के साथ मिलकर अरविंद केजरीवाल ने सरकारी नौकरी में रहते हुए एनजीओ की कार्यप्रणाली समझी और फिर ‘परिवर्तन’ नामक एक एनजीओ से जुड़ गये। इस दोरान वे सरकारी पद से लम्बी छुट्टी पर रहते हुवे भी वे सरकार और एनजीओ कि तरफ से तवख्वाह लेते रहे।

वर्ष 2006 में ‘परिवर्तन’ में काम करने के दौरान ही उन्हें अमेरिकी ‘फोर्ड फाउंडेशन’ व ‘रॉकफेलर ब्रदर्स फंड’ ने ‘उभरते नेतृत्व’ के लिए ‘रेमॉन मेग्सेसाय’ पुरस्कार दिया, जबकि उस वक्त तक अरविंद ने ऐसा कोई काम नहीं किया था।

इसके बाद अरविंद अपने पुराने सहयोगी मनीष सिसोदिया के एनजीओ ‘कबीर’ से जुड़ गए, जिसका गठन इन दोनों ने मिलकर वर्ष 2005 में किया था।

‘फोर्ड फाउंडेशन’ के एक अधिकारी स्टीवन सॉलनिक के मुताबिक ‘‘कबीर को फोर्ड फाउंडेशन की ओर से वर्ष 2005 में 1 लाख 72 हजार डॉलर एवं वर्ष 2008 में 1 लाख 97 हजार अमेरिकी डॉलर का फंड दिया गया।’’ यही नहीं, ‘कबीर’ को ‘डच दूतावास’ से भी मोटी रकम फंड के रूप में मिली।

अंग्रेजी अखबार ‘पॉयनियर’ में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक डच यानी नीदरलैंड दूतावास अपनी ही एक एनजीओ ‘हिवोस’ के जरिए नरेंद्र मोदी की गुजरात सरकार को अस्थिर करने में लगे विभिन्‍न भारतीय एनजीओ को अप्रैल 2008 से 2012 के बीच लगभग 13 लाख यूरो, मतलब करीब सवा नौ करोड़ रुपए की फंडिंग कर चुकी है।  इसमें एक अरविंद केजरीवाल का एनजीओ भी शामिल है।

एशियाई देशों की मीडिया को फंडिंग करने के लिए अमेरिका व यूरोपीय देशों ने ‘पनोस’ नामक संस्था का गठन कर रखा है। माना जा रहा है कि अरविंद केजरीवाल के मीडिया उभार के पीछे इसी ‘पनोस’ के जरिए ‘फोर्ड फाउंडेशन’ की फंडिंग काम कर रही है।

आरोप है कि विदेशी पुरस्कार और फंडिंग हासिल करने के बाद अमेरिकी हित में अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया ने इस देश को अस्थिर करने के लिए ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ का नारा देते हुए वर्ष 2011 में ‘जनलोकपाल आंदोलन’ की रूप रेखा खिंची।

इसके लिए सबसे पहले बाबा रामदेव का उपयोग किया गया, लेकिन रामदेव इन सभी की मंशाओं को थोड़ा-थोड़ा समझते हुवे इनको मना कर दिया। जिसके बाद महाराष्ट्र के सीधे-साधे, लेकिन भ्रष्‍टाचार के विरुद्ध कई मुहीम में सफलता हासिल करने वाले अन्ना हजारे को अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली से उत्तर भारत में ‘लॉंच’ कर दिया।

अन्ना हजारे को अरिवंद केजरीवाल की मंशा समझने में काफी वक्त लगा, लेकिन तब तक जनलोकपाल आंदोलन के बहाने अरविंद ‘कांग्रेस पार्टी व विदेशी फंडेड मीडिया’ के जरिए देश में प्रमुख चेहरा बन चुके थे।

एक  सुचना के मुताबिक अमेरिका की एक अन्य संस्था ‘आवाज’ की ओर से भी अरविंद केजरीवाल को जनलोकपाल आंदोलन के लिए फंड उपलब्ध कराया गया था और इसी ‘आवाज’ ने दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए भी अरविंद केजरीवाल की ‘आम आदमी पार्टी’ को फंड उपलब्ध कराया। अमेरिका के हित में हर देश की पॉलिसी को प्रभावित करने के लिए अमेरिकी संस्था जिस ‘फंडिंग का खेल’ खेल खेलती आई हैं, भारत में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और ‘आम आदमी पार्टी’ उसी की देन हैं।

‘फोर्ड फाउंडेशन’ ने अरविंद व मनीष सिसोदिया के एनजीओ को 3 लाख 69 हजार डॉलर तो शीला दीक्षित के पुत्र संदीप दीक्षित के एनजीओ को 6 लाख 50 हजार डॉलर का फंड उपलब्ध कराया है।

सुप्रीम कोर्ट के वकील एम.एल.शर्मा ने अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया के एनजीओ व उनकी ‘आम आदमी पार्टी’ में चुनावी चंदे के रूप में आए विदेशी फंडिंग की पूरी जांच के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल कर रखी है। अदालत ने इसकी जांच का निर्देश दे रखा है, लेकिन केंद्रीय गृहमंत्रालय इसकी जांच कराने के प्रति उदासीनता बरत रही है। बाबा रामदेव के खिलाफ एक ही दिन में 80 से अधिक मुकदमे दर्ज करने वाली कांग्रेस सरकार की उदासीनता दर्शाती है कि अरविंद केजरीवाल को वह अपने राजनैतिक फायदे के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

दरअसल विदेश में अमेरिका, सउदी अरब व पाकिस्तान और भारत में कांग्रेस व क्षेत्रीय पाटियों की पूरी कोशिश नरेंद्र मोदी के बढ़ते प्रभाव को रोकने की है। मोदी न अमेरिका के हित में हैं, न सउदी अरब व पाकिस्तान के हित में और न ही कांग्रेस पार्टी व धर्मनिरेपक्षता का ढोंग करने वाली क्षेत्रीय पार्टियों के हित में।  मोदी के आते ही अमेरिका की एशिया केंद्रित पूरी विदेश, आर्थिक व रक्षा नीति तो प्रभावित होगी ही, देश के अंदर लूट मचाने में दशकों से जुटी हुई पार्टियों व नेताओं के लिए भी जेल यात्रा का माहौल बन जाएगा। इसलिए उसी भ्रष्‍टाचार को रोकने के नाम पर जनता का भावनात्मक दोहन करते हुए ईमानदारी की स्वनिर्मित धरातल पर ‘आम आदमी पार्टी’ का निर्माण कराया गया है।

‘आम आदमी पार्टी’ व  उसके नेता अरविंद केजरीवाल की पूरी मंशा को इस पार्टी के संस्थापक सदस्य व प्रशांत भूषण के पिता शांति भूषण ने ‘मेल टुडे’ अखबार में लिखे अपने एक लेख में जाहिर भी कर दिया था, लेकिन बाद में माना जाता हैं कि प्रशांत-अरविंद के दबाव के कारण उन्होंने अपने ही लेख से पल्ला झाड़ लिया और ‘मेल टुडे’ अखबार के खिलाफ मुकदमा कर दिया। ( संक्षिप्त लेख, आभार : http://jayhind.co.in/reality-of-arvind-kejriwal/ )

“आप” नेताओ के कुछ और तथ्य :
★ शांति भुसन का आतंकवादी शौकत हुसैन गुरु जिसने 2001 में संसद पर आतंकी हमले किये थे उसको बचाने का भरसक प्रयत्न किया।
★ प्रशांत भूषन ने हिन्दुओं को आतंकी खुले आम आतंकी कहा जबकि अफजल गुरु की फांसी पर दुःख जताया और जनमत के आधार पर ये कश्मीर को भारत से अलग करने के भी पक्षधर हैं।
★ केजरीवाल पर कई घोटाले का के तथ्य छुपाने का आरोप भी लगा हैं जिनमे कोयला घोटालों में नविन जिंदल पर चुप्पी हैं।
★ अरविन्द केजरीवाल के इनकम टैक्स विभाग में कार्यरत रहते हुवे उनका और उनकी पत्नी का सालों तक कोई ट्रान्सफर नहीं हुवा क्यूँकि इसके लिए इनकम टैक्स विभाग को सोनिया गाँधी ने चिट्ठी लिख रखी थी।
★ योगेन्द्र यादव पहले राहुल गांधी के लिए भाषण लिखा करते थे और इनका IAC आंदोलन में भी कभी कोई योगदान नहीं रहा हैं।
★ चुनाव के पहले शीला दिक्सित को भस्टाचार कि प्रतिमूर्ति बताने वाले अब केजरीवाल अब उनपर कार्यवाही से पहले उनके खिलाफ विपक्षी दल से सबुत मांग रहे हैं।
★ कजरीवाल ने एक बयान में ये भी कहा था की बटला एनकाऊंटर फर्जी था लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी वास्तविकता को माना।
★ मुजफ्फर नगर दंगो में भी इन लोगों ने निराधार मोदी और RSS को जिम्मेदार ठहराने कि कोशिशे की।

जागो और जगाऔ, देश बचाऔ !!!

जय हिंद!

काँग्रेस और “आप” कि मिलीभगत रणनीती

> सारे चुनावी सर्वेक्षणों में काँग्रेस का पत्ता साफ हो चुका हैं।
> सर्वेक्षणों से इसबात का भी काँग्रेस को इल्म हो चुका हैं कि अब सोनीया-राहुल सहीत काँग्रेस के किसी भी कद्दावर नेता कि औकात जनता की नजरों मे हद तक गिर चुकी हैं।
> इन सर्वेक्षणों में मोदी कि लोकप्रियता लोगों कि सिर चढकर बोलती साफ नजर आ रही हैं।
> मोदी रैली में जुटती लोगों कि एतीहासीक संख्या ने मोदी विरोधीयों के पैरोतले की जमीने तक खिसका दी हैं।
> लेकिन काँग्रेस को इस बात का भी आभास हैं कि एक बार अगर मोदी ने PM पद जो हासिल करलिया तो फिर काँग्रेस का पुरे देश में वही बुरा हाल होगा जैसा कि आज गुजरात में हो चुका हैं – सुपडा साफ !!!
> “काँग्रेस मुक्त भारत”- मोदी के इस संकल्प ने इनकी िनंदे हराम कर रखी हैं।
> अब हालात साफ हैं कि काँग्रेस कि सत्ता में वापसी मुमकिन नहीं।
> मायावती-मुलायम-शरद पवार जैसे काँग्रेसी दल्लो  को जनता ने पहले ही पहचान लिया हैं, इसलिये तिसरा मोर्चे के आसार भी नहीं।
> और मोदी कि आँधी पर किसी भी किमत पर काँग्रेस को ब्रेक लगाना ही हैं।
> सत्ता कि लडाई हार चुकि काँग्रेस के लिये अब लडाई खुद के अस्तित्व को बचाने कि आन पडी हैं।
> इसलिए मोदी के काट के लिये नया चहरा तयार किया गया “कजरीवाल”
> दिल्ली में “कजरीवाल” फार्मुले को काँग्रेस ने बखुबी भुनाया और खुद के पैर पिछे खिचकर कजरीवाल को पुरा मौका दिया कि वो ज्यादा से ज्यादा सिटे जित सके।
> इसका साफ परिणाम भी काँग्रेस को मिला
—  काँग्रेस कि सत्ता तो वैसे भी जानी थी मगर बीजेपी को लगाम लगाने में सफल हुई
— कजरीवाल का कद भी बढा और मोदी विरोधी मिडीया को मोदी के काट मे “कजरीवाल” नाम का मसाला मिल गया क्युँ कि राहुल तो वैसे ही फेल था
— नाम भले हि कजरीवाल का हो लेकिन लक्ष्य काँग्रेस का पुरा हो रहा।
> अबतक कजरीवाल को समर्थन देकर काँग्रेस ने “हिरों” बनवाया अब समर्थन वापस लेकर और बडा “हिरो” बनवायेगी।
> कुछ दिनों कि मेहमानी सरकारी पद से कजरीवाल भी बडी-बडी नौटंकी करके लौगों को खुब उल्लु बनायेंगे क्युँ कि वे भी जानते हैं कि इनकी सरकार ज्यादा दिन की नहीं हैं।
> दल्ले पत्रकारों ने तो पहले ही “कजरीवाल” नाम का जाप शुरू कर  रखा हैं।
> ये बात तो सच हैं “कजरीवाल” नाम का चेहरा बीजेपी के वोटबँक को काट नहीं पायेगा लेकिन काँग्रेस का जो वोटबँक बिजेपी कि तरफ खिसकता जा रहा था उसे झेलने के लिये कजरीवाल ने अपनी झोली पसार ली हैं।

इनका लक्ष्य मात्र एक— ” नमो कि आँधी पर काबु ” !!!!

लेकिन अभी कहानी का अंतिम चरण बाकी हैं और वो चुनाव के एलान के बाद ही होगा….

जागो और जगाऔ…
मोदी को PM बनाऔ, देश बचाऔ !!!