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हम मुर्ख क्यों बन जाते हैं! 

विदेशी कंपनियों ने भारतीयों को कैसे – कैसे मुर्ख बनाया… इसकी  *कोलगेट* सबसे बड़ी मिसाल हैं! 
जब इस कंपनी ने केमिकल से बना अपना पहला उत्पाद *कोलगेट टुथ पावडर* को बजार में लाया था तब चुले कि राख से मंजन करने वालों को एक पहलवान के विज्ञापन से समझाया था… खुरदरे प्रदार्थो से दांत खराब हो जाते हैं इसलिए डेंटिस्ट का सुझाया कोलगेट पावडर! (करोड़ों कमाए) 
फिर कुछ दिनो के बाद लोगों के साधारण टुथ ब्रश को हटवा कर खुद का खुरदरा *कोलगेट जिगजेग* लोगों को थमा दिया ताकि दाँतों के कौने कोने कि सफाई हो सके!! यह भी डेंटिस्ट का सुझाया था!!! (करोड़ों कमाए) 
पहले कई प्रांतों में ग्रामीण लोग नमक से ही मंजन कर लिया करते थे तब इसी कोलगेट कंपनी ने अपने उत्पाद के प्रचार हेतू अपने एक विज्ञापन के जरिये नमक को दांतों के लिए हानिकारक बताया था… और आज वही कंपनी विज्ञान बता-बता कर लोगों से पूछ रही –  क्या आपके टूथपेस्ट में नमक हैं!!!  तब भी नमक को हानिकारक बताने के लिए इनके पास डेंटिस्ट था और आज भी लाभदायक बताने को डेंटिस्ट हैं!!! (करोडों की कमाई जारी है) 
यह तो सभी जानते हैं कि यह विदेशी कंपनी अमेरिका की हैं लेकिन यह कितने लोग जानते होंगे कि जिस धड़ल्ले से यह कंपनी भारत में धंधा जमाये बैठी हैं उस धड़ल्ले से वह अमेरिका में बिक्री नहीं कर पाती… इसका सिधा कारण यह है कि कोलगेट एक विषैला उत्पाद है जिसकी अधिक मात्रा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।  अमेरिका में इन्हें अपने उत्पादों पर नियमानुसार चेतावनी के रूप में लिखना होता हैं कि – कृपया बच्चों की पहुँच से दुर रखे! 
लेकिन यहाँ भारत में अपने विषैले उत्पाद के विज्ञापनों में मुख्य रूप से बच्चों को पसंद आने वाले स्वाद को आकर्षण बनाया जिससे मुख्य रूप से लक्ष्य बच्चे – बच्चे के दिमाग पर अपने उत्पाद को छाप देना था! जरा सोचों!… जिस उत्पाद के लिए अमेरिका में “बच्चों से दुर रखने” जैसी चेतावनी जरूरी हो वही उत्पाद भारत में बच्चों को लुभाने में लगा हैं!!! 
बच्चों पर कितना दुष्परिणाम हो सकता था! विश्वास किजिये… एसा बहुत बडे पैमाने पर हुवा भी लेकिन कमाई भी अरबों-खरबों कि थी… बच्चों पर हुवे सैकड़ों दुष्परिणामों की आवाजों का गला घौट दिया गया। लेकिन जब किस्सो कि संख्या हद से भी बाहर जाने लगी तो मजबूर कंपनी को एक विज्ञापन उतार पड़ा जिसमें बच्चों को समझाते हुए संदेश दिया गया कि –  “कोलगेट का असर हैं ज्यादा, इसलिए टूथपेस्ट लगा हो आधा”!!! हम भारतीय तो वैसे भी विदेशी कंपनियों की चकाचौंध में अंधे रहते हैं तो इन सब सत्य को कहाँ देख पाते! सो करोड़ों की इनकी कमाई चलती रही। 
लेकिन आज जैसे – जैसे कंपनी की हकीकत लोगों तक पहुंच रही कंपनी की बिक्री लगातार गिरावट पर हैं। आजकल कंपनी और एक विज्ञापन चला रही जिसमें कई माँ रूप में बैठी मॉडल के कहलवा रहे कि “कोलगेट पर सालो से भरोसा हैं तो मैं भला मेरे बच्चों को और कोई टूथपेस्ट कैसे दे सकती हूँ… मेरे बच्चों के लिए सिर्फ कोलगेट”!!!! अब तो इस विदेशी कंपनी ने भी केमिकल छोड़ कर देशी नाम का विदेशी मंजन *वेदशक्ति* लांच किया हैं और अब भी एसे कई मुर्ख हैं जो इसे खरीदने को उतारू होंगे!!! 
ध्यान रहे कोलगेट कि बिक्री गिरी जरूर हैं लेकिन अब भी इनका धंधा करोड़ों में हैं। जानते हैं आज भी कंपनी करोड़ों क्युँ कमा रही….? *क्युँ की आज भी गाँव के भोले-भाले से लेकर शहर के पढ़े-लिखों तक नें कभी भी मंजन या टूथपेस्ट कहना नहीं सिखा… सिखा तो मात्र कोलगेट कहना।* 
संभवतः अब इस प्रश्न के उत्तर से भी आप सरोकार हो गये होंगे कि कोलगेट डेंटिस्टो कि पहली पसंद क्यों रही… भाई इसकी बदौलत ही तो आज डेंटिस्टों के यहाँ केमिकल से कमजोर हो पडे दाँतों वाल मरीजों कि भरमार हो रही। 
यह तो मात्र एक विदेशी उत्पाद की कहानी थी एसी ही कहानी विदेशी कोल्ड ड्रिंक जो कि वास्तव में टोयलेट क्लिनर होता हैं, जैसे अनेकों उत्पाद भारतीयों को धीमे विष की तरह परोसे जा रहे और हम अपनी मेहनत की कमाई इन पर लूटवा रहे। 
*जागो और जगाओ,*

*देश नहीं तो कम से कम अपनी सेहत तो बचाओ!*
(कृपया अपने तक ना सिमित रखे… हर भारतीय तक पहुँचाने का कष्ट करें) 

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