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बिकाऊ पत्रकारिता – प्यास पर करोड़ों का बिल!

” लातूर में जल पहुंचाने के लिये दो कोरोड का बील”
    मोदी विरोधी बिकाऊ पत्रकारिता का उदाहरण

पिछले दशक से ज्यादा सूखे की मार झेल रहे लातूर में पहली बार किसी सरकार ने अपनी संवेदनशीलता को दिखाते हुवे करोडो लिटर पानी ट्रेन के जरिए पंहुचाकर विषम परिस्थितियों में सरकार द्वारा अदा की जाने वाली भुमीका को एक नये सिरे से स्थापित किया।

जहाँ पिछली सरकारों ने एसी स्थिति का राष्ट्र विरोधी लाभ लेते हुए गोहत्या व धर्मपरिवर्तन जैसे अनगिनत साजिशों को रचा वहीं मोदी सरकार के इस अभुतपूर्व उपलब्द्धीयों कि जितनी सराहना की जाये वह कम होगी।

लेकिन मोदी विरोधी विदेशी मशीनरीयों के हाथों कि दलाल मिडिया-जगत को सरकार कि यह पहल हजम नहीं हो पा रही। वे जनता के मन में बढ रहे मोदी नाम के विश्वास से छटपटा रहे और इस विश्वास को धुमील करने कि ही कोशिश में ‘प्यास पर करोडो के बील’ जैसी खबर आज लगभग देश के हर प्रमुख अखबारों में छपी मिल रही।

एक सामान्य व्यवहारिक तौर पर मुद्दा में गंभीरता शुन्य के बराबर हैं। यदि करोड़ों का बिल बना तो भी यह रेल प्रशाशन के वित्तीय विभाग का एक निर्धारित कार्य हैं। क्यूंकि यदि रेल विभाग से गाड़ी चली हैं तो उसके खर्च को दर्ज करना एक स्वाभाविक प्रक्रिया हैं। यदि बिल रेल विभाग द्वारा महाराष्ट्र सरकार को भेजा भी गया तो भी यह एक औपचारिकता हैं। इस बिल का भुगतान या समायोजन केंद्र सरकार या राज्य सरकार का विषय हैं। किसी भी रूप इसे लातूर के लोगो से तो वसूला नहीं जाना हैं लेकिन फिर भी इस तरह की ख़बरों को उठा कर लोगों की संवेदनाओ को भड़काने का प्रयास किया जा रहा। यह तो सौभाग्य हैं की दोनों, राज्य व् केंद्र, सरकारें भाजपा की हैं अन्यथा यह भी आरोप लगते देर न लगती की मोदी ने राज्य की कांग्रेसी सरकार को बिल थमाया दिया!

मोदी सरकार कि यह वास्तव में एक बडी पहल थी क्यूँ की भुतकाल कि सरकारों ने भले ही एसी स्थितियों को निर्दयता से नजर अंदाज किया हो किंतु अब भविष्य की सरकार एसा नहीं कर सकेगी।

यह पहली बार नहीं की जब बिकाऊ मिडिया ने मोदी सरकार के अथक व अभूतपूर्व प्रयासों पर अपनी वेश्यावृत्ति से भी औछीं पत्रकारिता का परिचय दिया हैं।  पूर्व में जब जन. वि. के. सिंह द्वारा सैकड़ों भारतीयों को युद्ध कि जमीन से सुरक्षित वापस लाने जैसा बेहद सराहनीय कार्य को अंजाम दिया था तब भी बजाय कि उनकी तारीफ करे, उनके #Presstitute वाले बयान का बखेडा खडा कर उन्हे घेरने कि कोशिश कि गई थी।

आज जनता कि जागरूकता ही पत्रकार रूपी मक्कार भेडीयों का एक मात्र करारा जवाब हो सकती हैं इसलीए सजग रहे,  सतर्क रहे।

।। वंदेमातरम्।।

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गीता कि वापसी, पाक कि “नापाक” सियासत

पाकिस्तान से जुडी खबरों में जहाँ मात्र भारत विरोधी गंध ही मिलती हैं वहीं “गीता” के पुनः भारत लौटने वली खबर थोडा हट के हैं…और संदेह से भरपुर!

संदेह!!!

जहाँ पाकिस्तान ने १९% हिंदु आबादी को तरह-तरह की दरींदगी से काट कर १.५% पर ला दिया हो वहाँ से एक हिंदु लडकी का सही सलमत वापस आना क्या संदेहास्पद नहीं?

जाहीर हैं यह पाकिस्तान कि किसी ना किसी रणनीती का हिस्सा ही हैं| लेकिन वह रणनीती क्या हैं?

इस खबर का विश्लेषण तो जरूरी हैं…
> जहाँ पाकिस्तान अंतराष्ट्रीय स्तर के हर मुद्दो पर भारत से मुकाबले में धुल चाटता नजर आ रहा वहाँ “गीता” के मुद्दे को भुना कर दोनो देशो कि अवाम का ध्यान कुछ हद तक बाँटना चाहता हैं|
> अंतराष्ट्रीय मंच पर अपनी गिरती साख को बचाने के लिये भी पाकिस्तान ने “गीता” का इस्तेमाल किया|
> पाकिस्तान ने एक बोलने-सुनने में असमर्थ लडकी को चुन कर भेजा जो चाह कर भी अपनी आप-बीती व वहाँ के अन्य हिंदुऔ कि दशा किसी के सामने आसानी से बयाँ भी ना कर सके|
> “गीती” के साथ आये पाक अधीकारीयों ने तो भारत कि धरती पर उतरते ही तुरंत अपना रंग दिखा दिया यह कहकर कि अब भारत को भी भारतीय जेलो में बंद पाकिस्तानीयो को पाक भेजने कि पहल करनी चाहिये, जो की एक तरह कि सौदेबाजी के लिये भारत पर दबाव बनाने जैसा था|

इस विश्लेषण कि पुष्टी का सबसे बडा सबुत हमारे देश कि पाक-परस्त मिडिया जिनमे NDTV, ABP News, TimesNow व आजतक जैसों का इस मुद्दे को अतिभावुक तरीके से पेश करना था| ये पुरी तरह से पाकिस्तान कि “नापाक” इरादों को अंजाम देने में लगेहुवे थे और कई घंटो तक का कवरेज दिया|

अगर इन्हे हिंदुस्तानी लडकीयों कि इतनी ही चिंता होती तो पिछले १० सालों से पाकिस्तान में हिंदु स्त्रीयों पर हो रही बर्बता पर कभी केवल कुछ ही घंटे भी दिये होते तो शायद सेकडों स्त्रीयों कि लाज बच जाती|

वाकई में किसी ने ठिक ही कहा हैं – असली खबर वहीं हैं जिसे कोई दबाना चाहे बाकि सब तो सिर्फ विज्ञापन हैं|

पाक में मिटाई जा रही लाखो हिंदुऔ कि आबादी जो कि अहम मुद्दा हैं और जिसे अब तक मिडीया जगत दबाता आ रहा लेकिन एक “गीता” कि वापसी जैसी खबर से पाकिस्तान के झुठे दया भाव को उभारकर जेहादी मानसिकता वाले देश का प्रचार कर रहा|

ध्यान रहे, हमारी मिडीया में पाकिस्तान से जुडी किसी भी भावुक घटनाऔ पर मिडीया कि रिपोर्टींग शत-प्रतीशत प्रायोजीत ही होती हैं, धोखे से बचे|

“गीता” के वापसी कि खबर में संतोष जनक मात्र इतना ही हैं कि पाक में जहाँ दुसरी हिंदु स्त्रीयाों को नर्क कि जिंदगी जीने को मजबुर कर दिया गया वहीं भले ही “नापाक” इरादे से ही सही, कम-से-कम एक “गीता” वापस तो लोट सकी!

जागो और जगाऔ, देश बचाऔ

|| वंदेमातरम् ||

अपनी चुप्पी तोडो
और बिंदास बोलो…..कमेंट करे

मोदी और मिडीया

आजाद भारत में मिडीया ने देश कि राजनीती को कई रूपो में प्रभावीत करता आया हैं| जब से नीजी चेनलों का चलन देश में चल पडा लोगों पर मिडीया कि पकड और भी प्रभावी बनती गई| मिडीया ने अपनी मजबुती का कई रूपों ने नजायज फायदा उठाता आया हैं| मिडीया का दब-दबा इस कदर बढ चुका था कि रातों-रात किसी भी गली-कुचे आवारा को राष्ट्रीय दर्जे का नेता बना देता और यही कारण भी हैं कि आज देश कि राजनीती में कई एसे नामी चहरे दिखते हैं जीनकी जमीनी पकड शुन्य हैं, जिनके पास देश व समाज के प्रती कोई विचार तक नहीं लेकिन उनकी गीनती कद्दावर नेता में हो चुकी हैं| भारतीय राजनीती पर आज आम लोगों का जीतना ही विकृत नजरीया हैं उसका एक मात्र जिम्मेदार यदी किसे ठहराया जा सकता हैं तो वह देश के बिकाऊ मिडीया तंत्र ही हैं|

नरेंद्र मोदी पहले देश के एसे नेता हैं जिन्होने मिडीया तंत्र की इस कदर कि दादागीरी को ना केवल चुनोती दी बल्की पुरी तरह धराशायी किया| मोदी ने अपने विषय पर अनाब-शनाब टिप्पणी करने वाले कई नामी पत्रकारों को आज इस कदर बोना कर दिया हैं कि अब वे छटपटाये नहीं थक रहे किंतु उनकी एक नहीं चल पा रही| मोदी और मिडीया कि जंग दशको पुराना हैं साथ विषय का अध्यन हर देशभक्त को आज के राजनेतीक परिवेश से जागृत व सतर्क करता हैं|

२००२ के गुजरात दंगो से आज तक मिडीया के खिलाफ कई बडे व घिनोने प्रोपेजंडे चलाये व जिनकी कोशीशे रही कि मोदी कि विजय का रथ आगे ना बढ सके|

जहाँ मिडीई दलाल पत्रकारों के पास चेनलों के स्टुडीयों में बैठ कर मात्र जहर उगल कर उन्हे बदनाम करने का बेहद सटीक व सरल माध्यम था वहीं मोदी को पुरी तरह से जमीनी कार्य को अंजाम देकर जनता कि पकड को बनाये रखना था

मिडीया द्वारा ‘मोदी’ नाम पर कितने ही तरह के किचड उछाले गये लेकिन मोदी ने मिडीया को पुरी तरह नजर अंदाज किया व उनसे परहेज किया क्युँ कि उन्होने भाँप लिया था कि मिडीया हर रूप में उनके खिलाफ जहर उगलना चाहता हैं|

मिडीया के पास जनता तक पहोचने का सिधा, मजबुत व विदेशी पुँजी से पोषित पुरी ताकत थी तो मोदी के पास एक मात्र उसकी कर्मठता लेकिन वह काफी नहीं थी क्युँ की जनता तक कार्य व सच्चाई पँहुचानी जरूरी थी

इसके लिये मोदी ने अपने साथीयों सहीत हर गाँव व हर गली तक पहुँचने में कोई कसर ना छोडी जहाँ ना केवल जनता कि समस्याये सुलजाई गई बल्की उनकी जरूरतो कि आपुर्ती कर विकास कि नई गाथा लिखी जो पुरी तरह जमीनी हकिकत थी|

मोदी ने मिडीया का तोड सोशियल मिडीया से निकाला और संभवत: एक मुख्यमंत्री पद के वे पहले नेता थे जिन्होने सोशियल मिडीया का जम कर उपयोग कर जनता तक अपनी बात व सच्चाई पहुँचाई साथा ही इस माध्यम से उन्होने जनतो को भी उनकि बात रखने का सिधा मौका दिया

सोशियल मिडीया के जरीये मोदी की विकास गाथा गुजरात कि सिमा तोड कर ना केवल भारत बल्की विदेशों तक पहुँचने लगी और यहीं से मोदी स्वरूप का अंतराष्ट्रय संस्करण प्रारंभ हुवा

वह सच्चाई जीसे मिडीया ने पुरी तरह दबाना चाहा देखते ही देखते हर जागरूक भारतीयों के सामने खुली किताब बन गई थी जिसने जीतना जाना वो उतना ही नत मस्तक हुवा व औरो तक पहुँचाने कि मुहीम मे जुडता चला गया| जुडता क्यों नहीं आखिर देश को बचाना था|

एसी परिस्थीतीया, जिनमे सारे विरोधी एकजुट, सारे मिडीया मोदी के खिलाफ यहाँ तक की खुद बीजेपी के बडे नेताऔ की भी बेरूखी, से गुजरकर भी मोदी ने चार दफा गुजरात का चुनाव पुरे बहुमत से जीता वास्तव में यह सत्य व असत्य के मध्य वह अघोषित महायुद्ध था जिसमें असत्य निरंतर धराषायी होता चला गया

जाहीर हैं मिडीया तो मोदी को समजना ही नहीं चाहता था लेकिन मोदी ने बिकाऊ मिडीया कि नस पकडली थी, सोशियल मिडीया पर दनका बैठा लिया था अब जो बीकाऊ मिडीया कभी मोदी को अपने अनुसार चलाना चाहता था अब मोदी ने मिडीया को अपनी नीती के अनुसार नचाना शुरू कर दिया

लोकसभा चुनाव मोदी की मिडीयाई समझ का सबसे बेहतर व अभुतपुर्व उदाहरण हैं जहाँ कई तरह के दौर नजर आये –
— जहाँ अन्य विरोधी दलों पर जनता का विश्वास पुरा उठ चुका था वहीं मिडीया ने पहले कि तरह ही लाख कोशिश कि की रातों रात कई बहरूपीयों को राष्ट्रीय दर्जे का नेता बनाकर मोदी के खिलाफ खडा कर दे किंतु तब तक सोशियल मिडीया पर मोदी को समर्थन करने वाले करोडो हाथ उठ चुके थे जिन के आगे मिडीया कि एक ना चली
— मोदी ने एसे-एसे शब्दो व अदाऔ के पाँसे फेके जीसे बीकाऊ मिडीया लपक कर चाहता तो उनके खिलाफ इस्तेमाल करना किंतु वे मोदी प्रचार का ही जरीया बनते चले गये (जैसे कुत्ते का पील्ला, हिंदु राष्ट्रवादी, मोदीफिकेशन, चुनाव के दोरान कमल के साथ सेल्फी)
— प्रचार अभीयान के अंतीम चरणो तक कई नामी पत्रकारों के लाख चाहने पर किसी भी प्रकार के इंटरव्यु से पुर्ण परहेज| ना कोई कमेंट जो भी कहा या तो मंच जनता के बीच अथवा सोशियल मिडीया के जरीये
— प्रचार अभीयान के बिलकुल अंत में सारे नामी पत्रकारों से रूबरू और वो भी पुर्ण तीखे अंदाज में जीसमे पत्रकार चाहकर भी मोदी पर हावी नहीं हो सके उलट मोदी पत्रकार के स्टुडीयों मे ही पत्रकार को मुँह पर लताडा

इस तरह मोदी ने ‘विरोधी और मिडीया के फेके हर पत्थर को अपनी सीढी बनाई’ और लोकसभा में अभुतपुर्व जीत हाँसील कि|

वह पत्रकार जो मिडीया के जरीये प्रत्येक क्षेत्र में स्वयं के षडयंत्रकारी विचारों को देश पर थोपने का एजेडा चला रहे थे मोदी के वार से पुरी तरह निष्क्रीय नजर आने लगे, लोगों ने भी एसे पत्रकारों को सोशियल मिडीया के जरीये जबरदस्त धुलाई करना शुरू कर दिया हैं|

मोदी कि इस एतिहासीक जीत ने यह साबीत कर दिया हैं कि दिनरात बनावटी मुद्दो पर मिडीया का फडफडाना जनता के मन पर अब पुरी तरह बेअसर हो चुका हैं और अब राजनीती विषय से मिडीया कोई भी खिलवाड करने कि क्षमता पुरी तरह गवा चुकी है|

एक क्षेत्रीय नेत्रीत्व से राष्ट्रीय नेत्रीत्व का सफर मोदी के लिये एक तपस्या कि तरह रहा जीसमे मोदी कि कार्यशैली कुछ एसी रही हैं कि उन्होने अपने विरोधीयो के खिलाफ कभी आवेश मे प्रतीक्रीया नहीं की लेकिन महोल एसा ढाला की उनकी जडे खुद-ब-खुद हिलती चली गई

मोदी के विषय में कई तरह के प्रश्नो में एक प्रश्न यह जरूर उठता हैं कि मोदी अब इन भ्रष्ट पत्रकारों पर कार्यवाही क्यों नहीं करते!

कुछ बाते जो घौर करने लायक हैं…
— इन प्रश्नो से यह तर्क देना कि मोदी को मिडीया कि समज नहीं या पत्रकारो के चलन से वे वाकीफ नहीं तो यह मानने योग्य ही नहीं
— मोदी ने अपने विरोधीयों पर पुर्ण नीयंत्रण बनाये रखा हैं लेकिन वे किसी भी रूप में उन पर त्वरीत कार्यवाही करेंगे यह उनकी कार्यशैली में नहीं
— फिर भी कई मिडीया कंपनीयों कि जाँच सीबीआई को सौपी जा चुकी हैं व कई चेनलों पर गृहमंत्रालय ने Security-Clearance कि तलवार अभी से लटक चुका हैं और यह पुर्णतया उनके राष्ट्र विरोधी चाल-चलन के कारण हैं
— आज मोदी सरकार मिडीया आधारीत तो बिल्कुल ही नहीं और अब सोशियल मिडीया के चलते मिडीया पहले कि तरह मोदी या देश के लिये खतरा नहीं बन सकती हैं अर्थात मिडीया नाम कि दहशत खत्म हो चुकी हैं|

उम्मीद यही हैं कि अब इन पर कोई सीधी व त्वरीत कार्यवाही ना हो कर वो रास्ते ही बंद किये जायेंगे जहाँ से राष्ट्रविरोधी पत्रकारीता पोषित होती हैं और NGO पर कसता सिकंजा इसकी एक शुरूवात भी मानी जा सकती हैं| शेष तो भविष्य के गर्भ मे छुपा हैं इंतजार ही करना होगा|

जय हिंद!

मुद्दा राधे-माँ, नीशाना संत समाज!

“राधे-माँ” एक बकवास हैं जीसे पैसों ने भक्ती का चोंगा पहनाया व अन्य पुँजीपतीयों ने या तो अपनी मुर्खता से या स्वयं के स्वार्थ के लिये सिर बैठाया|

लेकिन हमारी हिंदु विरोधी मिडीया को एसे ही मुद्दो कि तलाश रहती हैं जिसे दिन रात उठा कर वे हिंदु साधु-संतो की छवी धुमील कर सके जिससे हिंदुऔ का विश्वास धर्म गुरूऔ से पुर्णतया उठ जाये| घौर करे, हर थोडे अंतराल के बाद मिडीया किसी-ना-किसी “हिंदु” संत को मुद्दा बनाता ही हैं|

पहली बात तो यह कि राधेमाँ कोई बडा मुद्दा नहीं हैं, ना तो उसके अनुयायीईयो कि संख्या इतनी अधीक हैं और ना ही आम लोग उसके पास जाते थे (मात्र पुंजीपती) लेकिन फिर भी राष्ट्रीय दर्जो के न्युज चेनल व पत्रकारों ने अपना औंछेपन दिखाते हुवे इस मुद्दे पर राष्ट्रीय बहस छेडने कि कोशिश की वह भी तब जब देश के सामने अन्य कितने हीं गंभीर मुद्दे खडे हैं!!! मतलब यह की बीकाऊ पत्रकार एक और जहाँ इस मुद्दे के जरीये हिंदु धर्म को बदनाम कर रहे है वहीं लोगों का ध्यान मुख्य मुद्दो से भटकाने में लगे हैं|

यहाँ तीन पहलुऔ से इस विषय पर विचार करना बेहद जरूरी हैं….

पहला: हमारी मिडीया में किसी भी हिंदु साधु या संत का नाम कब-कब आता हैं?

थोडा भी यदी कोई इस पर विचार करेगा तो उसे मात्र यही जवाब मिलेगा कि यह वही मौका होता हैं जब या तो किसी संत ने कोई कुर्म किया होगा या फिर उस पर जबरन कुकर्म का आरोप किसी ने मढा होगा या फिर किसी संत के किसी कथन को तोड मरोड कर मिडीया को उसे मिडीया को विवादित बनाना होगा|

दुसरा: क्या हिंदु धर्म के सभी साधु-संत मात्र ठगी हैं? क्या कोई संत कभी भी समाज कल्याण व धार्मीक मुद्दो पर जनहित के उपदेश देता ही नहीं? क्या देश में कोई संत समाज व देश के लिये भलाई कार्य नहीं कर रहा?

इसका भी जवाब यदी हम थोडा भी खंगालेंगे तो जवाब स्पष्ट हैं, नहीं| हमारी संस्कृतीक को आज तक संजोय रखने में हमारे संतो ने ही अहम भुमीका नीभाई हैं व उनके हि प्रयासों से आज तक धर्म सुरक्षीत हैं| सृष्टी कल्याण के लिये लाखों संत आज भी अपना संपुर्ण जीवन तपस्वी के समान गुजार रहे है|

लेकिन क्या हमारी हिंदु विरोधी मिडीया ने एसे किसी भी संत को हिंदु समाज से परिचीत करवाया? साधु-संतो के विवादीत बयान को मुद्दा बनाने वाली विषेली मिडीया ने क्या किसी भी संत के अमृत वचनों को सुनाया? संतो के कुकर्मो का हिसाब रखने वाली देशद्रोही मिडीया ने क्या संतो द्वारा देश हित में कि गई तपस्या का लेखा जोखा कभी पेश किया?

— सैकडों संतो ने गंगा को बचाने के लिये अन्न-जल त्याग कर प्राण न्योछावर कर दिये मिडीया ने मुद्दा नहीं बनाया!!!

— लाखों संतो ने गाय रक्षा हेतु विक्राल आंदोलन खडे किये लेकिन मिडीया ने किसी आंदोलन को कवर नहीं किया!!!

— देश पर आने वाली हर आपदा (बांढ, सुखा, भुकंप) में संतो के करोडो हाथ लोगों कि सेवा मे जुट जाते हैं लेकिन फिर भी कोई पत्रकार कि पत्रकारीता इसे अपना हिस्सा नहीं बनाती!!!

अगर हिंदु धार्मीक गुरूऔ के कुकर्मों को उछाल कर समाज को सतर्क करना मिडीया कि जिम्मेदारी हैं तो उनके द्वारा कि गई तपस्वी कार्यों को हमारी बीकाऊ मिडीया उठाने में क्यों चुक जाता हैं????

तीसरा: क्या अन्य धर्मो के गुरू पुर्ण श्रद्धावान व इमानदारी कि मुरत हैं? क्या ठगी गुरू मात्र हिंदुधर्म मे ही हैं?

जाहीर हैं इसका भी जवाब हैं “नहीं”| एसे कई पादरी व मोलवी आज भी हिरासत में जिन्होने बेहद गंभीर अपराधो को अंजाम दिया लेकिन आज तक कभी हमने देखा कि किसी मोलवी या पादरी के कुकर्मो पर मिडीया ने दिन रात हो-हल्ला मचाया हो!!!! अगर हमारी मिडीया को हिंदु साधु संतो के कुकर्म नजर आते हैं तो अन्य धर्मो के धार्मीक गुरूऔ के कुकर्मों पर इनकी जुबान सील क्यों जाती हैं???? जब की उनके अनुपात में अन्य धार्मीक गरूऔ का हमारे समाज में योगदान भी कम हैं और अपराधीक गुरूऔ की संख्या भी बेहद ज्यादा हैं|

हिंदु समाज के लोगों को मिडीया द्वारा घौले जा रहे एसे धीमे जहर को पहचानना बेहद जरूरी हैं जिससे वे भारत में संत परमपरा को नष्ट करना चाहते हैं….यदी वे इसमे सफल हुवे तो भारतीय संस्कृती का कई कर्णधार नहीं बचेगा|

|| वंदेमातरम् ||

मिडीया जगत में बडा बदलाव

सुदर्शन न्युज के साथ अब जीन्युज भी राष्ट्रहीत की राहपर

#ZeeNews पर #DNA में सुधीर चोधरी एक बडी मुहीम चला रहे हैं जीसके अंतर्गत मिडीया इंडस्ट्री में जितने भी भांड पत्रकार व भांड मिडीया चेनल हैं उनको बेनकाब करना शुरू किया हैं|

#DNA के अनुसार एसे कई फर्जी चेनलो के खिलाफ CBI ने enquiry भी शुरू कर दी हैं जीनमे P7, Focus जैसे न्युज चेनल शामील हैं कई चेल पर अब सरकार से सेक्युरीटी क्लीयरेंस ना मिलने कि तलवार लटक रही|

DNA में बताया की किस तरह देश के सारे मिडीया वालों ने केसे “याकुब” जैसे देशद्रोही की खबर को राष्टभक्त “कलाम” की खबर से छोटा बनाकर पेश किया

किस तरह कुछ दिनो से दिनरात “याकुब” कि खबर चलाने वाले “मिडीयाई” चेनल उसे बेगुनाह साबीत करने व उसके प्रती सहानभुती खडी करने का बीडा उठाकर लगे हुवे थे

किस तरह गंभीर भ्रष्टाचारीयों, माफीयाऔ, बिल्डरों व कुछ लुटेरे राजनेताऔ ने मिडीया में निवेश कर पत्रकारीता का धंधा खोल लिया हैं|

आज तक मात्र सोशियल मिडीया ने ही इस बीकाऊ मिडीया की पोल खोलती रही हैं और अन्य सारे बडे मिडीया देश के खिलाफ एक जुट नजर आते थे| लेकिन अब पिछले  कुछ दिनो में zee news और IndiaTv कि पत्रकारीता में बेहद सकारात्मक और बडा बदलाव नजर आया हैं| आज नामचीन मिडीया मे पडी दो फाड साफ नजर आ रही हैं जिसमे देशहित की व देशविरोध कि पत्रकारीता साफ झलक रही| यह देश के लिये शुभ संकेत हैं| हमे दर्शकों को भी देशहित की पत्रकारीता करने वाले चेनलों का पुर जोर समर्थन करते हुवे देशविरोधी मुहीम चलाने वाले भांड चेनलों का बहिष्कार करना चाहीये|

कृपया सभी देशभक्तों से नीवेदन हैं कि देशहित के लिये मिडीया जगत में हो रहे इस बदलाव में अपना भी योगदान करे व भांड चेनलो से पुरी तरह परहेज करे|

इन चेनलो को देखे :
Sudarshan News
Zee News
India TV

इन चेनलों का पुरा बहिष्कार करे
NDTV
ABP News
AajTak
Focus
TimesNow

इन अखबारों का बहिष्कार करे :
Times Group
Indian Express
The Hindu

इन अखबारों को अपनाये :
प्रात:काल
DNA

(कृपया आप भी अपने अनुभव अनुसार देशहित व देशविरोधी चेनलो / अखबारो के नाम कमेंट मे सुझाये)

मिडीया का पंचनामा

### मिडीया का पंचनामा ###

हमारे देश की “देशद्रोही” मिडीया को पहचानीये….

> पडोसी मुल्कों में बम धमकों से मरे कुछ लोगों पर विलाप करने वाला मिडीया उसी मुल्क में बेरहम आत्याचार से विलुप्त कर दिये गये पुरी-की-पुरी हिंदु जनसंख्या को मुद्दा क्युँ नही बना पाता?
> महाराष्ट्र में परप्रातीयों का विरोध करने वाले नेताऔ को जम कर दिखाने वाला मिडीया बंग्लादेशियों के घुसपैठ का विरोध करने वाले देशभक्त जो अपनी जान हथेली पर लेकर डटे रहते हैं उनकों क्युँ प्रचारित नहीं करता ?
> कुछ लोगों की घर वापसी को मुद्दा बनाने वाला मिडीया पुरे-के-पुरे राज्य को धर्म परिवर्तन कि कगार तक पहोचाने वालो पर चुप्पी क्यो साध लेता हैं?
> विदेशी पैसों पर पलने वाले NGO द्वारा संचालित आंदोलनों को विक्रालता से पेश करने वाला मिडीया गौ-हत्या के लिये किये गये वास्तवीक विराट आंदोलनों, बेदर्दी से लदे गायों के पकडे ट्रको को दिखाने से क्युँ परहेज कर लेता हैं? और तो और गौहत्या कानुन के विरोध में मुहीम भी चलाता हैं…क्यों?
> स्वदेशी कंपनीयों के हर एक आरोपों को बढा-चढा कर दिखने वाला मिडीया विदेशी कंपनीयों के दुष्कर्मों तक क्यों नहीं पहुँच पाता?
> भारत के फिल्मी सितारों, यहाँ तक की सनी लियोन जैसी घीनोनी कलाकार के जन्मदिन मनाने वाला मिडीया आखिर हमारे देश पर मरमिटने वाले क्रांतीकारीयों का जन्मदिन कैसे भुलजाता हैं ?
> होली पर पानी बर्बादी और दिवाली पर पटाखो के प्रदुषण की दुहाई देने वाला मिडीया ईद-क्रिसमस पर करोडों बेजुबान जानवरों की हत्या और हत्या से फेलनेवाले प्रदुषण पर कैसे आँखे मुंद लेता हैं?
> अल्पसंख्यकों पर होने वाले एक-एक अत्याचार का हिसाब रखने वाला मिडीया  हिंदुऔ के खिलाफ किये गये बडे-से-बडे दंगों को बेशर्मी से कैसे पचा जाता हैं?
> अयोध्या-काशी जैसे मसले उठाने वालों को धार्मीक-शांती और भाई-चारे का दुश्मन बताने वाला मिडीया विदेशी धर्म के कट्टरपंथीयों के जहरीले और देश के टुकडे करने वाले भाषणों पर क्यों पर्दा डाले खडा हो जाता हैं ?
> साधु-संतो पर लगे आरोपों को लेकर हफ्तो-महिनों गला फाडने वाला मिडीया काजी-और-पादरी के कुकर्मों पर क्युँ मुँह दबाये बैठ जाता हैं ?

हमारे देश में पोषित विदेशी मिडीया के नियत पर उठ रहे इन सवालों का जवाब हर हिंदुस्तानी को ढुँढना ही होगा| गंभीरता से सोचने की जरूरत इसलीये भी हैं क्युँ की एसे हर एक सवालों के पिछे सैकडों साजीशे दबी हुई हैं और इन साजीशों से अंजान रहने वाला ना सिर्फ इस देश की बर्बादी का जिम्मेदार हैं बल्की वह स्वयं अपने ही हाथों अपनी आनेवाली पीढी को एक विनाशकारी भविष्य की तरफ ले जा रहा हैं|

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|| जो अपने राष्ट्र के प्रती जागरूक नहीं, उसका जिवन एक पशु समान ||

क्या आप भी कत्लेआम पर हैरान हैं !!!!

क्या आप भी कत्लेआम पर हैरान हैं!!!

पाकिस्तान में हुवे कत्लेआम पर सिर्फ वहीं सोते हुवे मुरख शक्स हैरान हैं जीसने कभी हिंदुस्तान पर गुजरे मुगल साशन की रक्तरंजीत, दरींदगी, और वेहसीपने से भरे कांड कभी नहीं पढे !!!

उन्हे वाकई नहीं मालुम होगा कि किस-किस तरह के हथकंडे बाहर से आये बादशाहो नें हमारे देश के भोले-भाले लोगों पर अपनाये !!! Continue reading