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​जनता का राज… क्या सुना था कभी!

​जनता का राज… क्या सुना था कभी!

🚩 पहले झटके में लोगों ने दो फिल्में क्या फ्लाप कि शाहरुख खान के दिमाग से असहिष्णुता का भूत उतर गया, हर जगह सहिष्णुता नजर आने लगी। और दुसरे झटके में खुद कि फिल्म से पाकिस्तानी अदाकारा को बाहर निकालना पड़ा। यह पुरी तरह से जनता कि भावनाओं के आगे घुटने टेकने जैसा बड़ा फैसला था। 
🚩 अमीर खान को स्नेपडील व भारतीय पर्यटन के विज्ञापनों से लोगों के दबाव में लात क्या पड़ी अब उनकी दुसरे नंबर कि बीवी को देश में डर लगना ही बंद हो गया। 
🚩 ये लोगों उमड़ता गुस्सा हैं… जिसने करण जौहर को भी एहसास कराया कि सिर्फ उसकी दुनिया ही सबकुछ नहीं हैं और सामान्य लोगों के बिना उसकी कोई औकात नहीं। 

🚩 भारत के टुकड़ों पर पले ओमपुरी ने जिस तरह भारतीय सेना का अपमान किया उसके बाद लोगों ने जो उसकी रही-सही इज्जत की ऐसी धज्जियाँ उड़ाई कि सिधे अब वह नाक रगड़ते हुवे बलिदानी सैनिक के परिवार से मिलने पहुंच गया।

🚩 जनता के ही कारण जो समाचार चैनल कल तक खुद को ‘देश का नंबर एक समाचार चैनल‘ बताने का दावा सुबह-शाम ठोका करता था और वे बिकाऊ पत्रकार जिन्होंने स्वयं को देश के पत्रकार-जगत का पिलर मान बैठे थे, आज अपनी विश्वसनीयता ही खो बैठे हैं। वह जनता ही हैं जिसने एसे भ्रष्ट राजनैतिक दल जिसने सर्वाधिक देश पर राज किया, उसे आज अपने अस्तित्व बचाने को संघर्षरत स्थिति में ला कर खड़ा कर दिया। 

🚩 यह इस बात का सिधा प्रमाण हैं कि अपनी ऐशो-अय्याशी में डूबे ऐसे भांड कलाकारों, बुद्धिजीवियों , पत्रकारों और नेताओं ने ना तो जनता कि भावनाओं को कभी कोई महत्व दिया और ना ही आज भी सहजता से महत्व देना स्वीकार कर पा रहे। 

👆बेहद सरल शब्दों में यदि कहे तो जिसकी रग-रग में भारतीयता हैं वह आज “अच्छे-दिन” का सुखद अनुभव कर रहा….

— जो जनता कि भावनाओं के साथ स्वयं को जितना जल्दी ढाल रहा, वही समझदार नजर आ रहा हैं…. 

— जो ठोकर खा कर फिर स्वयं को ढालने कि कोशिश कर रहा, उसकी मूर्खता उभर रही…. 

— और जो ठोकर खाकर भी ऐठ रहा, वह तो अपने धूर्त होने का परिचय दे रहा। 

ऐसा इसलिए क्योंकि मुर्ख लोकतंत्र को समझ नहीं पा रहे तथा धूर्त से अपनी अय्याशी छुट ही नहीं सकती। लेकिन सच्चाई तो यह हैं कि यही भारत का वास्तविक लोकतंत्र हैं। “लोकतंत्र में जनता का राज” … अब तक सिर्फ किताबों में पढ़ते आये थे, आज वही वास्तविक स्वरूप हैं और ध्यान देना… _अभी तो यह शुरूवात हैं!_

कुछ ऐसे लोग भी हैं जो अब भी यही गुमान में हैं कि यह तो मात्र “संघीयों” का षड्यंत्र हैं …. तो उनके लिए सुझाव हैं कि अब वे संपूर्ण राष्ट्र को ही एक “संघी” मानकर चले… 

…. क्योंकि मेरा देश अब वाकई बदल रहा हैं।

|| वंदेमातरम् || 🚩🚩🚩

प्रेश्यावृत्ती में लिप्त पत्रकारों के बुरे दिन

प्रेश्यावृत्ती में लिप्त पत्रकारों के बुरे दिन

आज जब हर तरफ़ बिकाऊ पत्रकारों का महाजाल नजर आता हैं वहीं सुरेश चव्हाण व सूधिर चौधरी जैसे पत्रकारों को पत्रकारिता बेहद अदभुत उदाहरण बनकर उभर रही हैं।

सुदर्शन न्यूज के सुरेश चव्हाण व जी न्यूज के सूधिर चौधरी ने बेधड़क व बेहिचक देशहित कि पत्रकारिता से सारे बिकाऊ पत्रकारों के होश उडा कर रख दीए हैं। देश के हर अति-संवेदन शील मसलों पर भारत विरोधी एजेंडा परोसने वाले दलाल पत्रकार बरखा दत्त, रविश कुमार, राजदीप सरदेसाई, करण थापर, पुन्यप्रसुन्न वाजपेयी, राहुल कवल व दीपक चौरसिया जैसे तमाम पत्रकार जगत के दिग्गज मानेजाने वालों कि मिलावटी पत्रकारिता कि धज्जिया उडाकर रखदि हैं।

बिकाऊ पत्रकारों ने जिस तरह निष्पक्ष व सेक्युलर निती को मुखौटा बना कर भ्रष्टाचारियों, कट्टरपंथियों व गद्दारों को जो सुरक्षा कवच दे रखा था वह तो धरासाहि हुवा ही हैं साथ ही नौबत यहाँ तक पहुंच गई हैं कि अब इन पत्रकारों को स्वयं के लिये सुरक्षा कवच खौजने कि नौबत आ पड़ी हैं। इन गद्दारों को सुज ही नहीं पा रहा कि हर पल उजागर होता अपना काला चेहरा ये किसकी चोली में छुपाये।

एक तरफ जहाँ इन बिकाऊ पत्रकारों व इनसे जुड़े AajTak, NDTV, ABP NEWS, IndiaToday, TimesOfIndia, IndianExpress, TheHindu जैसे नामी चैनल व अखबार अपनी विश्वसनीयता खोते जा रहे वहीं सोशियल मिडिया पर हर रोज जनता द्वारा इनको बुरी तरह लताड़ा जा रहा। इसी तरह सुदर्शन न्यूज, जी न्यूज, DNA, दैनिक भास्कर व प्रातःकाल जैसे तमाम देशभक्ति कि पत्रकारिता करने वाले माध्यम जनता कि आवाज बनकर उभरने लगे हैं।

देश में ही रहकर देशभक्त पत्रकारों कि राह कितनी कठीन हो सकती हैं यह सुदर्शन न्यूज व जी न्यूज चैनल को मिल रही धमकि से पता चल रहा। दिन के लगभग सैकडों काल पकिस्तान, दुबई, सीरीया जैसे देशों से इन चैनलों को मिल रहे जिसमें चैनल व पत्रकारों को उडाने कि धमकिया मिल रही। भारतीय सुरक्षा एजेंसीयों ने भी ऐसे हमलों कि आशंकाऔ कि पुष्टि कि हैं लेकिन फिर भी इनके हौंसले अडिग रूप से बुलंद हैं।

देशभक्त पत्रकारिता से बौखलाए विरोधियों ने सुरेश चव्हाण व सूधिर चौधरी जैसे पत्रकारों को नरेंद्र मोदी का पट्ठा व MOUTH PIECE जैसे कई नाम देने कि कोशिश कि लेकिन सोशियल मिडिया पर मोर्चा संभाली जागृत देशभक्तों के आगे विरोधियों को मूँह कि खानी पड़ रही। जनता ने बहुरूपियों व देशभक्तों को पहचानना सीख लिया हैं।  वे जानते हैं कि जो सत्य बताये वह सत्यवादी कहलाता हैं ना कि किसीका निजी पट्ठा या MOUTH PIECE।

वास्तव में भारतीय राजनैतिक व समाजिक परिवेश में हो रहा यह बदलाव बेहद अदभुत व अभुतपूर्व हैं। हालांकि बदलाव कि यह प्रक्रिया अभी शुरूआती जरूर हैं किंतु मात्र आरंभ ने ही भारत के टुकड़े करने वाले दुश्मन देशों व ताकतों के सपनों को चकना चूर करना शुरू कर दिया है। भारत विरोधी एजेंडा के जरिये अपना भविष्य बनाने वाले भाडे के टट्टूऔ के लिए अब अलार्म बज चुका हैं कि वे प्रेश्यावृत्ती के धंधे से बाज आये अन्यथा उनका भविष्य तो दुर वर्तमान भी संभलना मुश्किल हो जायेगा। यह भारत के मजबूत भविष्य कि शुरूवात हैं… यही वास्तविक #अच्छेदिन भी हैं।

हम आम जन देशभक्त पत्रकारों को समर्थन दे कर व #Presstitute पत्रकारिता को नकार कर देशहित में स्वयं कि भुमिका भी सुनिश्चित कर सकते हैं और हमें ऐसा करना ही होगा।

।। जयहिंद।। वंदेमातरम्।।

#JaiHindKashmir Thank You Zee News

#JaiHindKashmir
#AsliKashmir
#AdharmInKashmir

कश्मीर पर आजाद रिपोर्टींग के तहत जब @ZeeNewsHindi पर @sudhirchaudhary ने अपने @DNA में हकीकत बयां कर देने वाली कश्मीरी देशभक्तों कि दास्तां चलायी….

कश्मीर का भारत विरोधी चेहरा बनाने वाले कट्टरपंथियों और दिखाने वाले आतंकप्रेमी पत्रकारों के पैरों तले जमीन खिसकने लगी…

खसकती कैसे नहीं…. भारत विरोधी एजेंडे के तहत कश्मीर पर करोडो रूपये बर्बाद करने के बाद भी आखिर जी न्यूज ने देशभक्त कश्मीरियों को टीवी पर दिखा कर इनकी दिनरात लगा कर बिछाई गयी आतंक कि चादर पल में उडने जो लग गई…

नतीजतन,  जीन कश्मीर के जिन हिस्सों से रिपोर्टींग कि गई थी वहाँ के लोगों को धमकाने का जिम्मा कट्टरपंथियों ने संभाला….

और जी-न्यूज कि रिपोर्ट को बनावटी साबित करने का जिम्मा मिडीया के आतंकप्रेमी दलाल पत्रकारों ने संभाला…

जहाँ कट्टरपंथियों ने देशभक्त कश्मीरियों को व उनके बच्चो को जान से मारने कि धमकी दे डाली….

वहीं डिजाइनर पत्रकारों ने लेख लिखकर यह जाहिर करने की कोशिश  शूरु कर दी कि जी न्यूज कि इस रिपोर्ट के खिलाफ गांव के लोग जी न्यूज के खिलाफ उतर रहे और कह रहे कि यह खबर झूठी हैं…

मतलब चंद भाडे के टट्टू काले झंडे दिखाए या पत्थरों से सेना पर हमला करे वो सच…. और जो कश्मीरी भारत माता की जय के नारे लगा कर सामने आये वे बनावटी….

इन देशभक्त कश्मीरियों पर मात्र कुछ घंटो पर इस कदर दबाव डाला गया कि उन्हे जी न्यूज चैनल को फोन कर रिपोर्टींग बंद करने को कहना पडा… करते क्यूं नहीं आखिर बाल-बच्चों कि जान पर जो आ पडी….

आज जी न्यूज को भी इन कश्मीरियों कि परवाह करते हुए अपनी रिपोर्टींग में इनके चेहरे छुपाने पड़े… लेकिन सवाल देश का था इसलिये रिपोर्टींग जारी रही….

इस आजाद रिपोर्टींग से जो मुद्दे कि बात उभरकर आई वह यह हैं कि कश्मीरी आवाम पर किस कदर विदेशी पैसों पर पलने वाले कट्टरपंथियों अपना कब्जा कर लिया हैं….

ऐसे दंगो व आतंक से इन कट्टरपंथियों का धंधा तो दिनरात फलफूल रहा हैं लेकिन आम कश्मीरी दो वक्त कि रोटी के लिये भी कर्फ्यू से बंद कमरे तरस रहा हैं।

प्रश्न यहीं हैं कि हम भारतीय क्या कर सकते हैं…..

— हमें देशभक्त कश्मीरियों कि आवाज को ताकत देने के लिये इस सच्चाई को जन-जन तक पहुंचाना  होगा…
— हर वो आतंकप्रेमी पत्रकार जो भारत विरोधी एजेंडे को बढावा देने के लिए छटपटाता दिखता हैं,  उसका बहिष्कार करना होगा
— हमारी इन दोनो पहलों से जहाँ देशभक्त कश्मीरियों को हिम्मत मिलेगी वही कट्टरपंथियों के हौसले टुटेंगे
— भारतीय सेना को पुरी छुट व समर्थन मिलता रहे इसके लिए भी राष्ट्रव्यापी अभीयान निरंतर चलना चाहिए

जयहिंद, जय भारत

।। वंदेमातरम्।।

मोदी और मिडीया

आजाद भारत में मिडीया ने देश कि राजनीती को कई रूपो में प्रभावीत करता आया हैं| जब से नीजी चेनलों का चलन देश में चल पडा लोगों पर मिडीया कि पकड और भी प्रभावी बनती गई| मिडीया ने अपनी मजबुती का कई रूपों ने नजायज फायदा उठाता आया हैं| मिडीया का दब-दबा इस कदर बढ चुका था कि रातों-रात किसी भी गली-कुचे आवारा को राष्ट्रीय दर्जे का नेता बना देता और यही कारण भी हैं कि आज देश कि राजनीती में कई एसे नामी चहरे दिखते हैं जीनकी जमीनी पकड शुन्य हैं, जिनके पास देश व समाज के प्रती कोई विचार तक नहीं लेकिन उनकी गीनती कद्दावर नेता में हो चुकी हैं| भारतीय राजनीती पर आज आम लोगों का जीतना ही विकृत नजरीया हैं उसका एक मात्र जिम्मेदार यदी किसे ठहराया जा सकता हैं तो वह देश के बिकाऊ मिडीया तंत्र ही हैं|

नरेंद्र मोदी पहले देश के एसे नेता हैं जिन्होने मिडीया तंत्र की इस कदर कि दादागीरी को ना केवल चुनोती दी बल्की पुरी तरह धराशायी किया| मोदी ने अपने विषय पर अनाब-शनाब टिप्पणी करने वाले कई नामी पत्रकारों को आज इस कदर बोना कर दिया हैं कि अब वे छटपटाये नहीं थक रहे किंतु उनकी एक नहीं चल पा रही| मोदी और मिडीया कि जंग दशको पुराना हैं साथ विषय का अध्यन हर देशभक्त को आज के राजनेतीक परिवेश से जागृत व सतर्क करता हैं|

२००२ के गुजरात दंगो से आज तक मिडीया के खिलाफ कई बडे व घिनोने प्रोपेजंडे चलाये व जिनकी कोशीशे रही कि मोदी कि विजय का रथ आगे ना बढ सके|

जहाँ मिडीई दलाल पत्रकारों के पास चेनलों के स्टुडीयों में बैठ कर मात्र जहर उगल कर उन्हे बदनाम करने का बेहद सटीक व सरल माध्यम था वहीं मोदी को पुरी तरह से जमीनी कार्य को अंजाम देकर जनता कि पकड को बनाये रखना था

मिडीया द्वारा ‘मोदी’ नाम पर कितने ही तरह के किचड उछाले गये लेकिन मोदी ने मिडीया को पुरी तरह नजर अंदाज किया व उनसे परहेज किया क्युँ कि उन्होने भाँप लिया था कि मिडीया हर रूप में उनके खिलाफ जहर उगलना चाहता हैं|

मिडीया के पास जनता तक पहोचने का सिधा, मजबुत व विदेशी पुँजी से पोषित पुरी ताकत थी तो मोदी के पास एक मात्र उसकी कर्मठता लेकिन वह काफी नहीं थी क्युँ की जनता तक कार्य व सच्चाई पँहुचानी जरूरी थी

इसके लिये मोदी ने अपने साथीयों सहीत हर गाँव व हर गली तक पहुँचने में कोई कसर ना छोडी जहाँ ना केवल जनता कि समस्याये सुलजाई गई बल्की उनकी जरूरतो कि आपुर्ती कर विकास कि नई गाथा लिखी जो पुरी तरह जमीनी हकिकत थी|

मोदी ने मिडीया का तोड सोशियल मिडीया से निकाला और संभवत: एक मुख्यमंत्री पद के वे पहले नेता थे जिन्होने सोशियल मिडीया का जम कर उपयोग कर जनता तक अपनी बात व सच्चाई पहुँचाई साथा ही इस माध्यम से उन्होने जनतो को भी उनकि बात रखने का सिधा मौका दिया

सोशियल मिडीया के जरीये मोदी की विकास गाथा गुजरात कि सिमा तोड कर ना केवल भारत बल्की विदेशों तक पहुँचने लगी और यहीं से मोदी स्वरूप का अंतराष्ट्रय संस्करण प्रारंभ हुवा

वह सच्चाई जीसे मिडीया ने पुरी तरह दबाना चाहा देखते ही देखते हर जागरूक भारतीयों के सामने खुली किताब बन गई थी जिसने जीतना जाना वो उतना ही नत मस्तक हुवा व औरो तक पहुँचाने कि मुहीम मे जुडता चला गया| जुडता क्यों नहीं आखिर देश को बचाना था|

एसी परिस्थीतीया, जिनमे सारे विरोधी एकजुट, सारे मिडीया मोदी के खिलाफ यहाँ तक की खुद बीजेपी के बडे नेताऔ की भी बेरूखी, से गुजरकर भी मोदी ने चार दफा गुजरात का चुनाव पुरे बहुमत से जीता वास्तव में यह सत्य व असत्य के मध्य वह अघोषित महायुद्ध था जिसमें असत्य निरंतर धराषायी होता चला गया

जाहीर हैं मिडीया तो मोदी को समजना ही नहीं चाहता था लेकिन मोदी ने बिकाऊ मिडीया कि नस पकडली थी, सोशियल मिडीया पर दनका बैठा लिया था अब जो बीकाऊ मिडीया कभी मोदी को अपने अनुसार चलाना चाहता था अब मोदी ने मिडीया को अपनी नीती के अनुसार नचाना शुरू कर दिया

लोकसभा चुनाव मोदी की मिडीयाई समझ का सबसे बेहतर व अभुतपुर्व उदाहरण हैं जहाँ कई तरह के दौर नजर आये –
— जहाँ अन्य विरोधी दलों पर जनता का विश्वास पुरा उठ चुका था वहीं मिडीया ने पहले कि तरह ही लाख कोशिश कि की रातों रात कई बहरूपीयों को राष्ट्रीय दर्जे का नेता बनाकर मोदी के खिलाफ खडा कर दे किंतु तब तक सोशियल मिडीया पर मोदी को समर्थन करने वाले करोडो हाथ उठ चुके थे जिन के आगे मिडीया कि एक ना चली
— मोदी ने एसे-एसे शब्दो व अदाऔ के पाँसे फेके जीसे बीकाऊ मिडीया लपक कर चाहता तो उनके खिलाफ इस्तेमाल करना किंतु वे मोदी प्रचार का ही जरीया बनते चले गये (जैसे कुत्ते का पील्ला, हिंदु राष्ट्रवादी, मोदीफिकेशन, चुनाव के दोरान कमल के साथ सेल्फी)
— प्रचार अभीयान के अंतीम चरणो तक कई नामी पत्रकारों के लाख चाहने पर किसी भी प्रकार के इंटरव्यु से पुर्ण परहेज| ना कोई कमेंट जो भी कहा या तो मंच जनता के बीच अथवा सोशियल मिडीया के जरीये
— प्रचार अभीयान के बिलकुल अंत में सारे नामी पत्रकारों से रूबरू और वो भी पुर्ण तीखे अंदाज में जीसमे पत्रकार चाहकर भी मोदी पर हावी नहीं हो सके उलट मोदी पत्रकार के स्टुडीयों मे ही पत्रकार को मुँह पर लताडा

इस तरह मोदी ने ‘विरोधी और मिडीया के फेके हर पत्थर को अपनी सीढी बनाई’ और लोकसभा में अभुतपुर्व जीत हाँसील कि|

वह पत्रकार जो मिडीया के जरीये प्रत्येक क्षेत्र में स्वयं के षडयंत्रकारी विचारों को देश पर थोपने का एजेडा चला रहे थे मोदी के वार से पुरी तरह निष्क्रीय नजर आने लगे, लोगों ने भी एसे पत्रकारों को सोशियल मिडीया के जरीये जबरदस्त धुलाई करना शुरू कर दिया हैं|

मोदी कि इस एतिहासीक जीत ने यह साबीत कर दिया हैं कि दिनरात बनावटी मुद्दो पर मिडीया का फडफडाना जनता के मन पर अब पुरी तरह बेअसर हो चुका हैं और अब राजनीती विषय से मिडीया कोई भी खिलवाड करने कि क्षमता पुरी तरह गवा चुकी है|

एक क्षेत्रीय नेत्रीत्व से राष्ट्रीय नेत्रीत्व का सफर मोदी के लिये एक तपस्या कि तरह रहा जीसमे मोदी कि कार्यशैली कुछ एसी रही हैं कि उन्होने अपने विरोधीयो के खिलाफ कभी आवेश मे प्रतीक्रीया नहीं की लेकिन महोल एसा ढाला की उनकी जडे खुद-ब-खुद हिलती चली गई

मोदी के विषय में कई तरह के प्रश्नो में एक प्रश्न यह जरूर उठता हैं कि मोदी अब इन भ्रष्ट पत्रकारों पर कार्यवाही क्यों नहीं करते!

कुछ बाते जो घौर करने लायक हैं…
— इन प्रश्नो से यह तर्क देना कि मोदी को मिडीया कि समज नहीं या पत्रकारो के चलन से वे वाकीफ नहीं तो यह मानने योग्य ही नहीं
— मोदी ने अपने विरोधीयों पर पुर्ण नीयंत्रण बनाये रखा हैं लेकिन वे किसी भी रूप में उन पर त्वरीत कार्यवाही करेंगे यह उनकी कार्यशैली में नहीं
— फिर भी कई मिडीया कंपनीयों कि जाँच सीबीआई को सौपी जा चुकी हैं व कई चेनलों पर गृहमंत्रालय ने Security-Clearance कि तलवार अभी से लटक चुका हैं और यह पुर्णतया उनके राष्ट्र विरोधी चाल-चलन के कारण हैं
— आज मोदी सरकार मिडीया आधारीत तो बिल्कुल ही नहीं और अब सोशियल मिडीया के चलते मिडीया पहले कि तरह मोदी या देश के लिये खतरा नहीं बन सकती हैं अर्थात मिडीया नाम कि दहशत खत्म हो चुकी हैं|

उम्मीद यही हैं कि अब इन पर कोई सीधी व त्वरीत कार्यवाही ना हो कर वो रास्ते ही बंद किये जायेंगे जहाँ से राष्ट्रविरोधी पत्रकारीता पोषित होती हैं और NGO पर कसता सिकंजा इसकी एक शुरूवात भी मानी जा सकती हैं| शेष तो भविष्य के गर्भ मे छुपा हैं इंतजार ही करना होगा|

जय हिंद!

मिडीया जगत में बडा बदलाव

सुदर्शन न्युज के साथ अब जीन्युज भी राष्ट्रहीत की राहपर

#ZeeNews पर #DNA में सुधीर चोधरी एक बडी मुहीम चला रहे हैं जीसके अंतर्गत मिडीया इंडस्ट्री में जितने भी भांड पत्रकार व भांड मिडीया चेनल हैं उनको बेनकाब करना शुरू किया हैं|

#DNA के अनुसार एसे कई फर्जी चेनलो के खिलाफ CBI ने enquiry भी शुरू कर दी हैं जीनमे P7, Focus जैसे न्युज चेनल शामील हैं कई चेल पर अब सरकार से सेक्युरीटी क्लीयरेंस ना मिलने कि तलवार लटक रही|

DNA में बताया की किस तरह देश के सारे मिडीया वालों ने केसे “याकुब” जैसे देशद्रोही की खबर को राष्टभक्त “कलाम” की खबर से छोटा बनाकर पेश किया

किस तरह कुछ दिनो से दिनरात “याकुब” कि खबर चलाने वाले “मिडीयाई” चेनल उसे बेगुनाह साबीत करने व उसके प्रती सहानभुती खडी करने का बीडा उठाकर लगे हुवे थे

किस तरह गंभीर भ्रष्टाचारीयों, माफीयाऔ, बिल्डरों व कुछ लुटेरे राजनेताऔ ने मिडीया में निवेश कर पत्रकारीता का धंधा खोल लिया हैं|

आज तक मात्र सोशियल मिडीया ने ही इस बीकाऊ मिडीया की पोल खोलती रही हैं और अन्य सारे बडे मिडीया देश के खिलाफ एक जुट नजर आते थे| लेकिन अब पिछले  कुछ दिनो में zee news और IndiaTv कि पत्रकारीता में बेहद सकारात्मक और बडा बदलाव नजर आया हैं| आज नामचीन मिडीया मे पडी दो फाड साफ नजर आ रही हैं जिसमे देशहित की व देशविरोध कि पत्रकारीता साफ झलक रही| यह देश के लिये शुभ संकेत हैं| हमे दर्शकों को भी देशहित की पत्रकारीता करने वाले चेनलों का पुर जोर समर्थन करते हुवे देशविरोधी मुहीम चलाने वाले भांड चेनलों का बहिष्कार करना चाहीये|

कृपया सभी देशभक्तों से नीवेदन हैं कि देशहित के लिये मिडीया जगत में हो रहे इस बदलाव में अपना भी योगदान करे व भांड चेनलो से पुरी तरह परहेज करे|

इन चेनलो को देखे :
Sudarshan News
Zee News
India TV

इन चेनलों का पुरा बहिष्कार करे
NDTV
ABP News
AajTak
Focus
TimesNow

इन अखबारों का बहिष्कार करे :
Times Group
Indian Express
The Hindu

इन अखबारों को अपनाये :
प्रात:काल
DNA

(कृपया आप भी अपने अनुभव अनुसार देशहित व देशविरोधी चेनलो / अखबारो के नाम कमेंट मे सुझाये)

मिडीया का पंचनामा

### मिडीया का पंचनामा ###

हमारे देश की “देशद्रोही” मिडीया को पहचानीये….

> पडोसी मुल्कों में बम धमकों से मरे कुछ लोगों पर विलाप करने वाला मिडीया उसी मुल्क में बेरहम आत्याचार से विलुप्त कर दिये गये पुरी-की-पुरी हिंदु जनसंख्या को मुद्दा क्युँ नही बना पाता?
> महाराष्ट्र में परप्रातीयों का विरोध करने वाले नेताऔ को जम कर दिखाने वाला मिडीया बंग्लादेशियों के घुसपैठ का विरोध करने वाले देशभक्त जो अपनी जान हथेली पर लेकर डटे रहते हैं उनकों क्युँ प्रचारित नहीं करता ?
> कुछ लोगों की घर वापसी को मुद्दा बनाने वाला मिडीया पुरे-के-पुरे राज्य को धर्म परिवर्तन कि कगार तक पहोचाने वालो पर चुप्पी क्यो साध लेता हैं?
> विदेशी पैसों पर पलने वाले NGO द्वारा संचालित आंदोलनों को विक्रालता से पेश करने वाला मिडीया गौ-हत्या के लिये किये गये वास्तवीक विराट आंदोलनों, बेदर्दी से लदे गायों के पकडे ट्रको को दिखाने से क्युँ परहेज कर लेता हैं? और तो और गौहत्या कानुन के विरोध में मुहीम भी चलाता हैं…क्यों?
> स्वदेशी कंपनीयों के हर एक आरोपों को बढा-चढा कर दिखने वाला मिडीया विदेशी कंपनीयों के दुष्कर्मों तक क्यों नहीं पहुँच पाता?
> भारत के फिल्मी सितारों, यहाँ तक की सनी लियोन जैसी घीनोनी कलाकार के जन्मदिन मनाने वाला मिडीया आखिर हमारे देश पर मरमिटने वाले क्रांतीकारीयों का जन्मदिन कैसे भुलजाता हैं ?
> होली पर पानी बर्बादी और दिवाली पर पटाखो के प्रदुषण की दुहाई देने वाला मिडीया ईद-क्रिसमस पर करोडों बेजुबान जानवरों की हत्या और हत्या से फेलनेवाले प्रदुषण पर कैसे आँखे मुंद लेता हैं?
> अल्पसंख्यकों पर होने वाले एक-एक अत्याचार का हिसाब रखने वाला मिडीया  हिंदुऔ के खिलाफ किये गये बडे-से-बडे दंगों को बेशर्मी से कैसे पचा जाता हैं?
> अयोध्या-काशी जैसे मसले उठाने वालों को धार्मीक-शांती और भाई-चारे का दुश्मन बताने वाला मिडीया विदेशी धर्म के कट्टरपंथीयों के जहरीले और देश के टुकडे करने वाले भाषणों पर क्यों पर्दा डाले खडा हो जाता हैं ?
> साधु-संतो पर लगे आरोपों को लेकर हफ्तो-महिनों गला फाडने वाला मिडीया काजी-और-पादरी के कुकर्मों पर क्युँ मुँह दबाये बैठ जाता हैं ?

हमारे देश में पोषित विदेशी मिडीया के नियत पर उठ रहे इन सवालों का जवाब हर हिंदुस्तानी को ढुँढना ही होगा| गंभीरता से सोचने की जरूरत इसलीये भी हैं क्युँ की एसे हर एक सवालों के पिछे सैकडों साजीशे दबी हुई हैं और इन साजीशों से अंजान रहने वाला ना सिर्फ इस देश की बर्बादी का जिम्मेदार हैं बल्की वह स्वयं अपने ही हाथों अपनी आनेवाली पीढी को एक विनाशकारी भविष्य की तरफ ले जा रहा हैं|

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|| जो अपने राष्ट्र के प्रती जागरूक नहीं, उसका जिवन एक पशु समान ||

क्या आप भी कत्लेआम पर हैरान हैं !!!!

क्या आप भी कत्लेआम पर हैरान हैं!!!

पाकिस्तान में हुवे कत्लेआम पर सिर्फ वहीं सोते हुवे मुरख शक्स हैरान हैं जीसने कभी हिंदुस्तान पर गुजरे मुगल साशन की रक्तरंजीत, दरींदगी, और वेहसीपने से भरे कांड कभी नहीं पढे !!!

उन्हे वाकई नहीं मालुम होगा कि किस-किस तरह के हथकंडे बाहर से आये बादशाहो नें हमारे देश के भोले-भाले लोगों पर अपनाये !!! Continue reading