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मरती हुई कांग्रेस में जान फूंकी हैं केजरीवाल ने !!!

मरती हुई कांग्रेस में जान फूंकी हैं केजरीवाल ने

मरती हुई कांग्रेस में जान फूंकी हैं केजरीवाल ने

अब तक ये तो सभी जान चुके हैं कि #AAP कोई नैतिकता पालने वाला राजनेतिक दल नहीं बल्कि विदेशी ताकतो कि रखेल कांग्रेस का ही दूसरा चेहरा हैं। 2104 के लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस को इस दूसरे चेहरे का कितना फायदा हो पायेगा ये कहना अभी मुश्किल भले ही हैं लेकिन इसने आज भी कांग्रेस बदतर हो रही हालत को सम्भाला हैं।

#कांग्रेस पर केजरीवाल के एहसान का अनुमान सिर्फ इस बात के आंकलन से ही आप लगा सकते हैं कि यदि इस चुनाव में #आप का जन्म ना हुवा होता तो अकेले कांग्रेसी सोशियल मीडियां पर दिन-रात कितनी ही गालिया खा रहे होते , लेकिन केजरीवाल ने अपनी उपस्थिति से कांग्रेस कि सारी गालियों को अपने सर आँखों पर ले लिया।

आज हर वो शख्स जो कांग्रेस को दिन-रात, भर-भर  के कौसा करता था , अब सबसे पहले #केजरीवाल और #आप के लोगों पर अपना गुस्सा निकलता हैं। अपनी नीचता और सड़क पर कि गई औंछी नौटंकी से लोगों के मन में कांग्रेस के खिलाफ भरे हुवे उबाल केजरीवाल ने अपनी और मुड़ा लिया हैं।

#आप आने के पहले कांग्रेस एक मात्र लोगों का निशाना बनी हुई थी और सबसे निचले दर्जे का दल बनी हुई थी। लेकिन अब आप किसी से भी पूंछेंगे तो वो कांग्रेस को तो #आप से भला ही बतायेगा।

यह नुस्का बिलकुल वैसा ही हैं कि एक कोरे कागज पर खिंची गई लकीर को बैगैर छेड़े अगर छोटा साबित करना हो तो उसके बगल में उससे भी बड़ी लकीर खीच दी जाए। अब पूछिए किससे भी कौनसी लकीर छोटी हैं… जवाब मिलेगा पहली वाली!!! ठीक वैसे ही एक हद से गिरी हुई कांग्रेस को अच्छा बनाने के लिए उससे भी अधिक गिरी हुई और औंछि हरकते करने वाला दल पैदा कर दो , तो सबकी नजर में पहले वाली कांग्रेस कि स्थिति अच्छी हो जाती हैं और-तो-और बैगेर कोई भला काम किये…. हैं ना कमाल !!!

नरेंद्र मोदी को केजरीवाल रोक पाएंगे इसके तो कोई असार नजर नहीं आते , लेकिन कोंग्रेसियों के लिए केजरीवाल ने बड़ा ही उद्धार का काम किया हैं , यकीं मानो !!!

सारांश : इस देश से “कांग्रेस” का अंत बेहद जरुरी हैं।

जागो और जगाओ , देश बचाओ !!!
अभी तो करोडो को जगाना हैं !!!

आपका 20 :: ‪‎मोदी‬ का 272+

20 to 272+

20 to 272+

# आपका 20 :: ‪#‎मोदी‬ का 272+ #

२०१४ के महासंग्राम के सिपाही बने और अभी से अपने दोस्तों-रिश्तेदारों के मात्र २० मोबाईल नंबर एसे जमा करलो जो नीश्चीत रूप से मोदी को वोट देंगे.

चुनाव के दिन सुबह से इन नंबरो को थोडी-थोडी देर में काल करते रहो जबतक की इन्होने वोट ना डाल दीया हो.

इस छोटे सी मेहनत का असर दम-दार नतीजा शतप्रतीशत होगा, साथ ही आपको भी खुद पर गर्व होगा.

आज देश आपका योगदान मांग रहा, कृपया ये छोटी सी जीम्मेदारी अवश्य ही उठाये.

इस दफा चुनाव जनता को लडना हैं : क्या आप तयार हैं???

नोट: अगर आप मोदी की इस लडाई से सीधे जुडकर अपना योगदान देना चाहते हैं तो कृपया email में अपना मोबाईल नंबर + pincode दे सकते हैं.

जय हिंद, जय भारत!

सावधान: मिडीया से देश को बडा धोखा

यह इस देश कि बहुत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है!

जब 20 जनवरी को सिर्फ दो सौ लोगों के साथ अरविन्द केजरीवाल का #AAPDrama चल रहा था जिसके अंत में दिल्लीवासियों को कोई परिणाम तक न मिल सका और जिसके फल स्वरुप देश के लिए एक नकारात्मक माहोल बना…

उसी समय में ही महाराष्ट्, रायपुर डिस्ट्रिक्ट के अलीबाग में लाखो लोगों ने मिलकर वहा निर्माणाधिन एशिया के सबसे बडे कत्लखाने के विरोध में वास्तविक आंदोलन छेड़ा …

सोचिये, एक लाख से अधिक रैली में एकत्र हुए।

और ये भी क्या कम था की लोगों की उमडी जनशक्ती के बलबुते पर वहाँ के जीला कलेक्टर को इस कत्लखाने पर निर्माण रोकने का आदेश जारी करना पडा!

लेकिन किसी भी राष्ट्रीय मीडिया (#paidmedia #fakemedia #corruptmedia) ने इस हजार गुना अधीक महत्वपुर्ण घटना को प्रसारीत करने का कष्ठ नहीं उठाया !!!

सारांश फिर वही:

सरकारी दुर्शासन से ज्यादा देश के सभी राष्ट्र विरोधी मीडिया ने देश को गर्क में ढकेला हैं।

# दलाल मिडीया पर विश्वास करना बंद करे #

जय हिंद! जय भारत!!!!

—– In English —-

This is very unfortunate situations of the country!

While #AAPDrama going on in Delhi on this 20th with just Two Hundred people that too ended up with zero (-ve) results ….

At the same time the real battle was on held at Alibaug, Raigar District to protest against the planned Asia’s largest slaughter house.

Just think, over a lakhs of people gathered in rally and what less! they also succeeded in getting cancellation notice from Jhila collector.

But non of the national media (#paidmedia #fakemedia #corruptmedia)  were interested in covering this thousand time valuable event but to a third class “Nautanki” on Delhi street!!!

Again the same moral:
All anti-National-Media of the country has affected more adversely to the nationa then the bad governance.

# Stop Believing Paid-Media #

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क्या हैं अमेरिका समर्थित “आप” पार्टी कि हकीकत ?

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली ‘राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी)’ की एक प्रमुख सदस्य अरुणा राय के साथ मिलकर अरविंद केजरीवाल ने सरकारी नौकरी में रहते हुए एनजीओ की कार्यप्रणाली समझी और फिर ‘परिवर्तन’ नामक एक एनजीओ से जुड़ गये। इस दोरान वे सरकारी पद से लम्बी छुट्टी पर रहते हुवे भी वे सरकार और एनजीओ कि तरफ से तवख्वाह लेते रहे।

वर्ष 2006 में ‘परिवर्तन’ में काम करने के दौरान ही उन्हें अमेरिकी ‘फोर्ड फाउंडेशन’ व ‘रॉकफेलर ब्रदर्स फंड’ ने ‘उभरते नेतृत्व’ के लिए ‘रेमॉन मेग्सेसाय’ पुरस्कार दिया, जबकि उस वक्त तक अरविंद ने ऐसा कोई काम नहीं किया था।

इसके बाद अरविंद अपने पुराने सहयोगी मनीष सिसोदिया के एनजीओ ‘कबीर’ से जुड़ गए, जिसका गठन इन दोनों ने मिलकर वर्ष 2005 में किया था।

‘फोर्ड फाउंडेशन’ के एक अधिकारी स्टीवन सॉलनिक के मुताबिक ‘‘कबीर को फोर्ड फाउंडेशन की ओर से वर्ष 2005 में 1 लाख 72 हजार डॉलर एवं वर्ष 2008 में 1 लाख 97 हजार अमेरिकी डॉलर का फंड दिया गया।’’ यही नहीं, ‘कबीर’ को ‘डच दूतावास’ से भी मोटी रकम फंड के रूप में मिली।

अंग्रेजी अखबार ‘पॉयनियर’ में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक डच यानी नीदरलैंड दूतावास अपनी ही एक एनजीओ ‘हिवोस’ के जरिए नरेंद्र मोदी की गुजरात सरकार को अस्थिर करने में लगे विभिन्‍न भारतीय एनजीओ को अप्रैल 2008 से 2012 के बीच लगभग 13 लाख यूरो, मतलब करीब सवा नौ करोड़ रुपए की फंडिंग कर चुकी है।  इसमें एक अरविंद केजरीवाल का एनजीओ भी शामिल है।

एशियाई देशों की मीडिया को फंडिंग करने के लिए अमेरिका व यूरोपीय देशों ने ‘पनोस’ नामक संस्था का गठन कर रखा है। माना जा रहा है कि अरविंद केजरीवाल के मीडिया उभार के पीछे इसी ‘पनोस’ के जरिए ‘फोर्ड फाउंडेशन’ की फंडिंग काम कर रही है।

आरोप है कि विदेशी पुरस्कार और फंडिंग हासिल करने के बाद अमेरिकी हित में अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया ने इस देश को अस्थिर करने के लिए ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ का नारा देते हुए वर्ष 2011 में ‘जनलोकपाल आंदोलन’ की रूप रेखा खिंची।

इसके लिए सबसे पहले बाबा रामदेव का उपयोग किया गया, लेकिन रामदेव इन सभी की मंशाओं को थोड़ा-थोड़ा समझते हुवे इनको मना कर दिया। जिसके बाद महाराष्ट्र के सीधे-साधे, लेकिन भ्रष्‍टाचार के विरुद्ध कई मुहीम में सफलता हासिल करने वाले अन्ना हजारे को अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली से उत्तर भारत में ‘लॉंच’ कर दिया।

अन्ना हजारे को अरिवंद केजरीवाल की मंशा समझने में काफी वक्त लगा, लेकिन तब तक जनलोकपाल आंदोलन के बहाने अरविंद ‘कांग्रेस पार्टी व विदेशी फंडेड मीडिया’ के जरिए देश में प्रमुख चेहरा बन चुके थे।

एक  सुचना के मुताबिक अमेरिका की एक अन्य संस्था ‘आवाज’ की ओर से भी अरविंद केजरीवाल को जनलोकपाल आंदोलन के लिए फंड उपलब्ध कराया गया था और इसी ‘आवाज’ ने दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए भी अरविंद केजरीवाल की ‘आम आदमी पार्टी’ को फंड उपलब्ध कराया। अमेरिका के हित में हर देश की पॉलिसी को प्रभावित करने के लिए अमेरिकी संस्था जिस ‘फंडिंग का खेल’ खेल खेलती आई हैं, भारत में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और ‘आम आदमी पार्टी’ उसी की देन हैं।

‘फोर्ड फाउंडेशन’ ने अरविंद व मनीष सिसोदिया के एनजीओ को 3 लाख 69 हजार डॉलर तो शीला दीक्षित के पुत्र संदीप दीक्षित के एनजीओ को 6 लाख 50 हजार डॉलर का फंड उपलब्ध कराया है।

सुप्रीम कोर्ट के वकील एम.एल.शर्मा ने अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया के एनजीओ व उनकी ‘आम आदमी पार्टी’ में चुनावी चंदे के रूप में आए विदेशी फंडिंग की पूरी जांच के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल कर रखी है। अदालत ने इसकी जांच का निर्देश दे रखा है, लेकिन केंद्रीय गृहमंत्रालय इसकी जांच कराने के प्रति उदासीनता बरत रही है। बाबा रामदेव के खिलाफ एक ही दिन में 80 से अधिक मुकदमे दर्ज करने वाली कांग्रेस सरकार की उदासीनता दर्शाती है कि अरविंद केजरीवाल को वह अपने राजनैतिक फायदे के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

दरअसल विदेश में अमेरिका, सउदी अरब व पाकिस्तान और भारत में कांग्रेस व क्षेत्रीय पाटियों की पूरी कोशिश नरेंद्र मोदी के बढ़ते प्रभाव को रोकने की है। मोदी न अमेरिका के हित में हैं, न सउदी अरब व पाकिस्तान के हित में और न ही कांग्रेस पार्टी व धर्मनिरेपक्षता का ढोंग करने वाली क्षेत्रीय पार्टियों के हित में।  मोदी के आते ही अमेरिका की एशिया केंद्रित पूरी विदेश, आर्थिक व रक्षा नीति तो प्रभावित होगी ही, देश के अंदर लूट मचाने में दशकों से जुटी हुई पार्टियों व नेताओं के लिए भी जेल यात्रा का माहौल बन जाएगा। इसलिए उसी भ्रष्‍टाचार को रोकने के नाम पर जनता का भावनात्मक दोहन करते हुए ईमानदारी की स्वनिर्मित धरातल पर ‘आम आदमी पार्टी’ का निर्माण कराया गया है।

‘आम आदमी पार्टी’ व  उसके नेता अरविंद केजरीवाल की पूरी मंशा को इस पार्टी के संस्थापक सदस्य व प्रशांत भूषण के पिता शांति भूषण ने ‘मेल टुडे’ अखबार में लिखे अपने एक लेख में जाहिर भी कर दिया था, लेकिन बाद में माना जाता हैं कि प्रशांत-अरविंद के दबाव के कारण उन्होंने अपने ही लेख से पल्ला झाड़ लिया और ‘मेल टुडे’ अखबार के खिलाफ मुकदमा कर दिया। ( संक्षिप्त लेख, आभार : http://jayhind.co.in/reality-of-arvind-kejriwal/ )

“आप” नेताओ के कुछ और तथ्य :
★ शांति भुसन का आतंकवादी शौकत हुसैन गुरु जिसने 2001 में संसद पर आतंकी हमले किये थे उसको बचाने का भरसक प्रयत्न किया।
★ प्रशांत भूषन ने हिन्दुओं को आतंकी खुले आम आतंकी कहा जबकि अफजल गुरु की फांसी पर दुःख जताया और जनमत के आधार पर ये कश्मीर को भारत से अलग करने के भी पक्षधर हैं।
★ केजरीवाल पर कई घोटाले का के तथ्य छुपाने का आरोप भी लगा हैं जिनमे कोयला घोटालों में नविन जिंदल पर चुप्पी हैं।
★ अरविन्द केजरीवाल के इनकम टैक्स विभाग में कार्यरत रहते हुवे उनका और उनकी पत्नी का सालों तक कोई ट्रान्सफर नहीं हुवा क्यूँकि इसके लिए इनकम टैक्स विभाग को सोनिया गाँधी ने चिट्ठी लिख रखी थी।
★ योगेन्द्र यादव पहले राहुल गांधी के लिए भाषण लिखा करते थे और इनका IAC आंदोलन में भी कभी कोई योगदान नहीं रहा हैं।
★ चुनाव के पहले शीला दिक्सित को भस्टाचार कि प्रतिमूर्ति बताने वाले अब केजरीवाल अब उनपर कार्यवाही से पहले उनके खिलाफ विपक्षी दल से सबुत मांग रहे हैं।
★ कजरीवाल ने एक बयान में ये भी कहा था की बटला एनकाऊंटर फर्जी था लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी वास्तविकता को माना।
★ मुजफ्फर नगर दंगो में भी इन लोगों ने निराधार मोदी और RSS को जिम्मेदार ठहराने कि कोशिशे की।

जागो और जगाऔ, देश बचाऔ !!!

जय हिंद!

कैसे घौटोगे गला करोंडो हिंदुस्तानीयों का !!!

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Fight for Freedom

अब काँग्रेस चौकडी के खिलाफ फेसबुक/ट्विटर पर लिखने वालों को हिरासत में लेने कि मुहीम चल पडी हैं।  सोशियल मिडीया पर क्रांति फैलाने वाले इन सत्ताधारीयों को पसंद नहीं  आ रहें !!! ये कुकर्म कर सकते हैं लेकिन हम इनके कालेकारनामों का प्रचार भी नहीं कर सकते !!!

अब तो इनके खिलाफ हर किसी को खडा हो कर सोशियल मिडीया पर मोर्चा सँभालना ही होगा। अगर इस नेक काम में हर व्यक्ति अपना सामर्थ्य देने लगे तो किस-किस को हिरासत में लेंगे ये, क्या ये संभव हैं।

मेरा सवाल उनसे हैं जो सोशियल मिडीया पर रहते हुवे भी अबतक इसे सिर्फ मनोरंजन के तौर पर इस्तेमाल करते हैं।

क्या हम वाकई आजाद हैं?

अगर जवाब “हाँ” में हैं… तो जरा सोचिये, ये कैसी आजादी !!!

और अगर जवाब “ना” में हैं… तो हम आवाज क्युँ नहीं उठाते ?

क्या आवाज उठाने में हमें डरना चाहिये ?

हो सकता हैं कि हमारे मन में डर भी उठे…

लेकिन जरा उन हजारों-लाखों क्रांतिकारियो के विषय में भी सोचे जिन्होने वंदेमातरम् कि गुंज उस माहोल में उठाई थी जब इसके जवाब में उनपर लाठीयाँ चला दी जाती थी !

उस कठिन समय में भी उन्होने गद्दारों को खुन भरी आँखे दिखाई जिसमें उनकी आँखे निकाल ली जाती!

और उन परिस्थिति में भी तिरंगे को हाथ से नहीं छुटने दिया जब उन्हे तोप के आगे खडा कर उडा दिया जाता था !!!

एसे लाखों क्रांतिकारीयों ने खुद को बलिदान किया ताकी इनकी पुश्ते, यानी की हम, सुख-चैन कि जिंदगी जी सके।

क्या आपकों नहीं लगता कि इन बलिदानीयों कि वजह से ही हमें आज उन परिस्थितियों से नहीं जुझना पड रहा जिन परिस्थितियों को मात्र सुनकर आज हमारे रोंगटे खडे हो जाते हैं।

जब ऐसे माहोल में भी हमारे पुरखों नें हौंसला नहीं छोडा तो आजादी के इस अंतीम दौर में हम क्यों पिछे हटे !!!
क्या हम अपना जिवन सिर्फ भोग-और-विलास के लिये गुजार दे !!!
जिस तरह से बलिदानीयों ने हमारे विषय में सोचा क्या हमारा फर्ज नहीं कि हम भी हमारी आने वाली पीढी के बारे में भी सोचे और इस भ्रष्टतंत्र और देश-द्रोही तंत्र को उखाड़ फेकें !!!

गुलामी का महासागर तो हमें हमारे विर स्वतंत्रता के सेनानीयों ने पार करवा दिया अब तो मात्र विचारों का युद्ध लडना हैं। और इस युद्ध का ब्रम्हास्त्र सिर्फ एक ही हैं और वो हैं सोशियल मिडीया।

हमें अपनी आवाज उठाने से कोई नहीं रोक सकता क्युँ की—  स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार हैं।

∴ सोशियल मिडीया में कार्यरत सभी क्रांतिकारीयों को कोटी-कोटी नमन∵

जय हिंद, जय भारत !!!

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आखिर राजनीती पर क्रिकेट भारी कैसे !!!

Cricket VS Politics

Cricket VS Politics

क्रिकेट को लेकर हमारे देश कि मिडिया ने लोगों के दिलो दिमाग को गुलाम बनाया हैं और ये सालों से चल रहा सील-सिला आज देश के कई युवा पीढ़ी से लेकर बुजुर्गो तक के लिए नशा बन चूका हैं। अपने इर्द-गिर्द ऐसे कई महानुभव लोग आपको दिख जायेंगे जिन्होंने इस नशे में अपनी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा गुजर दिया और हैरत कि बात ये हैं कि इस नशे का उन्हें एहसास तक नहीं होता।
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I Hate Politics!!! ……think again!

अच्छे नेता, उज्वल भविष्य

अच्छे नेता, उज्वल भविष्य

आज किसी भी पढ़े लिखे से अगर पूछे की आपका पसिंदिदा कलाकार, अभिनेत्री या खिलाडी  कोन हैं तो ख़ुशी-ख़ुशी बताएगा लेकिन अगर पूछा जाये की आप का पसंदीदा नेता कोन हैं तो बड़े रुवाब में शायद जवाब निकल जाएगा – I Hate Politics !!!

फिल्मो के कलाकार या खिलाडी कितने भी अपने क्षेत्रों में निपूर्ण क्यूँ न हो क्या वे देश को समृद्ध बना सकते हैं ? क्या बढती महंगाई पर लगाम लगा सकते हैं ? क्या आपके बच्चो का भविष्य बना सकते हैं ? जवाब हैं नहीं।

लेकिन यही प्रश्न राजनीती के विषयं में अगर करेंगे तो जवाब हैं – हाँ!!! Continue reading