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मरती हुई कांग्रेस में जान फूंकी हैं केजरीवाल ने !!!

मरती हुई कांग्रेस में जान फूंकी हैं केजरीवाल ने

मरती हुई कांग्रेस में जान फूंकी हैं केजरीवाल ने

अब तक ये तो सभी जान चुके हैं कि #AAP कोई नैतिकता पालने वाला राजनेतिक दल नहीं बल्कि विदेशी ताकतो कि रखेल कांग्रेस का ही दूसरा चेहरा हैं। 2104 के लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस को इस दूसरे चेहरे का कितना फायदा हो पायेगा ये कहना अभी मुश्किल भले ही हैं लेकिन इसने आज भी कांग्रेस बदतर हो रही हालत को सम्भाला हैं।

#कांग्रेस पर केजरीवाल के एहसान का अनुमान सिर्फ इस बात के आंकलन से ही आप लगा सकते हैं कि यदि इस चुनाव में #आप का जन्म ना हुवा होता तो अकेले कांग्रेसी सोशियल मीडियां पर दिन-रात कितनी ही गालिया खा रहे होते , लेकिन केजरीवाल ने अपनी उपस्थिति से कांग्रेस कि सारी गालियों को अपने सर आँखों पर ले लिया।

आज हर वो शख्स जो कांग्रेस को दिन-रात, भर-भर  के कौसा करता था , अब सबसे पहले #केजरीवाल और #आप के लोगों पर अपना गुस्सा निकलता हैं। अपनी नीचता और सड़क पर कि गई औंछी नौटंकी से लोगों के मन में कांग्रेस के खिलाफ भरे हुवे उबाल केजरीवाल ने अपनी और मुड़ा लिया हैं।

#आप आने के पहले कांग्रेस एक मात्र लोगों का निशाना बनी हुई थी और सबसे निचले दर्जे का दल बनी हुई थी। लेकिन अब आप किसी से भी पूंछेंगे तो वो कांग्रेस को तो #आप से भला ही बतायेगा।

यह नुस्का बिलकुल वैसा ही हैं कि एक कोरे कागज पर खिंची गई लकीर को बैगैर छेड़े अगर छोटा साबित करना हो तो उसके बगल में उससे भी बड़ी लकीर खीच दी जाए। अब पूछिए किससे भी कौनसी लकीर छोटी हैं… जवाब मिलेगा पहली वाली!!! ठीक वैसे ही एक हद से गिरी हुई कांग्रेस को अच्छा बनाने के लिए उससे भी अधिक गिरी हुई और औंछि हरकते करने वाला दल पैदा कर दो , तो सबकी नजर में पहले वाली कांग्रेस कि स्थिति अच्छी हो जाती हैं और-तो-और बैगेर कोई भला काम किये…. हैं ना कमाल !!!

नरेंद्र मोदी को केजरीवाल रोक पाएंगे इसके तो कोई असार नजर नहीं आते , लेकिन कोंग्रेसियों के लिए केजरीवाल ने बड़ा ही उद्धार का काम किया हैं , यकीं मानो !!!

सारांश : इस देश से “कांग्रेस” का अंत बेहद जरुरी हैं।

जागो और जगाओ , देश बचाओ !!!
अभी तो करोडो को जगाना हैं !!!

सावधान: मिडीया से देश को बडा धोखा

यह इस देश कि बहुत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है!

जब 20 जनवरी को सिर्फ दो सौ लोगों के साथ अरविन्द केजरीवाल का #AAPDrama चल रहा था जिसके अंत में दिल्लीवासियों को कोई परिणाम तक न मिल सका और जिसके फल स्वरुप देश के लिए एक नकारात्मक माहोल बना…

उसी समय में ही महाराष्ट्, रायपुर डिस्ट्रिक्ट के अलीबाग में लाखो लोगों ने मिलकर वहा निर्माणाधिन एशिया के सबसे बडे कत्लखाने के विरोध में वास्तविक आंदोलन छेड़ा …

सोचिये, एक लाख से अधिक रैली में एकत्र हुए।

और ये भी क्या कम था की लोगों की उमडी जनशक्ती के बलबुते पर वहाँ के जीला कलेक्टर को इस कत्लखाने पर निर्माण रोकने का आदेश जारी करना पडा!

लेकिन किसी भी राष्ट्रीय मीडिया (#paidmedia #fakemedia #corruptmedia) ने इस हजार गुना अधीक महत्वपुर्ण घटना को प्रसारीत करने का कष्ठ नहीं उठाया !!!

सारांश फिर वही:

सरकारी दुर्शासन से ज्यादा देश के सभी राष्ट्र विरोधी मीडिया ने देश को गर्क में ढकेला हैं।

# दलाल मिडीया पर विश्वास करना बंद करे #

जय हिंद! जय भारत!!!!

—– In English —-

This is very unfortunate situations of the country!

While #AAPDrama going on in Delhi on this 20th with just Two Hundred people that too ended up with zero (-ve) results ….

At the same time the real battle was on held at Alibaug, Raigar District to protest against the planned Asia’s largest slaughter house.

Just think, over a lakhs of people gathered in rally and what less! they also succeeded in getting cancellation notice from Jhila collector.

But non of the national media (#paidmedia #fakemedia #corruptmedia)  were interested in covering this thousand time valuable event but to a third class “Nautanki” on Delhi street!!!

Again the same moral:
All anti-National-Media of the country has affected more adversely to the nationa then the bad governance.

# Stop Believing Paid-Media #

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क्या हैं अमेरिका समर्थित “आप” पार्टी कि हकीकत ?

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली ‘राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी)’ की एक प्रमुख सदस्य अरुणा राय के साथ मिलकर अरविंद केजरीवाल ने सरकारी नौकरी में रहते हुए एनजीओ की कार्यप्रणाली समझी और फिर ‘परिवर्तन’ नामक एक एनजीओ से जुड़ गये। इस दोरान वे सरकारी पद से लम्बी छुट्टी पर रहते हुवे भी वे सरकार और एनजीओ कि तरफ से तवख्वाह लेते रहे।

वर्ष 2006 में ‘परिवर्तन’ में काम करने के दौरान ही उन्हें अमेरिकी ‘फोर्ड फाउंडेशन’ व ‘रॉकफेलर ब्रदर्स फंड’ ने ‘उभरते नेतृत्व’ के लिए ‘रेमॉन मेग्सेसाय’ पुरस्कार दिया, जबकि उस वक्त तक अरविंद ने ऐसा कोई काम नहीं किया था।

इसके बाद अरविंद अपने पुराने सहयोगी मनीष सिसोदिया के एनजीओ ‘कबीर’ से जुड़ गए, जिसका गठन इन दोनों ने मिलकर वर्ष 2005 में किया था।

‘फोर्ड फाउंडेशन’ के एक अधिकारी स्टीवन सॉलनिक के मुताबिक ‘‘कबीर को फोर्ड फाउंडेशन की ओर से वर्ष 2005 में 1 लाख 72 हजार डॉलर एवं वर्ष 2008 में 1 लाख 97 हजार अमेरिकी डॉलर का फंड दिया गया।’’ यही नहीं, ‘कबीर’ को ‘डच दूतावास’ से भी मोटी रकम फंड के रूप में मिली।

अंग्रेजी अखबार ‘पॉयनियर’ में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक डच यानी नीदरलैंड दूतावास अपनी ही एक एनजीओ ‘हिवोस’ के जरिए नरेंद्र मोदी की गुजरात सरकार को अस्थिर करने में लगे विभिन्‍न भारतीय एनजीओ को अप्रैल 2008 से 2012 के बीच लगभग 13 लाख यूरो, मतलब करीब सवा नौ करोड़ रुपए की फंडिंग कर चुकी है।  इसमें एक अरविंद केजरीवाल का एनजीओ भी शामिल है।

एशियाई देशों की मीडिया को फंडिंग करने के लिए अमेरिका व यूरोपीय देशों ने ‘पनोस’ नामक संस्था का गठन कर रखा है। माना जा रहा है कि अरविंद केजरीवाल के मीडिया उभार के पीछे इसी ‘पनोस’ के जरिए ‘फोर्ड फाउंडेशन’ की फंडिंग काम कर रही है।

आरोप है कि विदेशी पुरस्कार और फंडिंग हासिल करने के बाद अमेरिकी हित में अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया ने इस देश को अस्थिर करने के लिए ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ का नारा देते हुए वर्ष 2011 में ‘जनलोकपाल आंदोलन’ की रूप रेखा खिंची।

इसके लिए सबसे पहले बाबा रामदेव का उपयोग किया गया, लेकिन रामदेव इन सभी की मंशाओं को थोड़ा-थोड़ा समझते हुवे इनको मना कर दिया। जिसके बाद महाराष्ट्र के सीधे-साधे, लेकिन भ्रष्‍टाचार के विरुद्ध कई मुहीम में सफलता हासिल करने वाले अन्ना हजारे को अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली से उत्तर भारत में ‘लॉंच’ कर दिया।

अन्ना हजारे को अरिवंद केजरीवाल की मंशा समझने में काफी वक्त लगा, लेकिन तब तक जनलोकपाल आंदोलन के बहाने अरविंद ‘कांग्रेस पार्टी व विदेशी फंडेड मीडिया’ के जरिए देश में प्रमुख चेहरा बन चुके थे।

एक  सुचना के मुताबिक अमेरिका की एक अन्य संस्था ‘आवाज’ की ओर से भी अरविंद केजरीवाल को जनलोकपाल आंदोलन के लिए फंड उपलब्ध कराया गया था और इसी ‘आवाज’ ने दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए भी अरविंद केजरीवाल की ‘आम आदमी पार्टी’ को फंड उपलब्ध कराया। अमेरिका के हित में हर देश की पॉलिसी को प्रभावित करने के लिए अमेरिकी संस्था जिस ‘फंडिंग का खेल’ खेल खेलती आई हैं, भारत में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और ‘आम आदमी पार्टी’ उसी की देन हैं।

‘फोर्ड फाउंडेशन’ ने अरविंद व मनीष सिसोदिया के एनजीओ को 3 लाख 69 हजार डॉलर तो शीला दीक्षित के पुत्र संदीप दीक्षित के एनजीओ को 6 लाख 50 हजार डॉलर का फंड उपलब्ध कराया है।

सुप्रीम कोर्ट के वकील एम.एल.शर्मा ने अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया के एनजीओ व उनकी ‘आम आदमी पार्टी’ में चुनावी चंदे के रूप में आए विदेशी फंडिंग की पूरी जांच के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल कर रखी है। अदालत ने इसकी जांच का निर्देश दे रखा है, लेकिन केंद्रीय गृहमंत्रालय इसकी जांच कराने के प्रति उदासीनता बरत रही है। बाबा रामदेव के खिलाफ एक ही दिन में 80 से अधिक मुकदमे दर्ज करने वाली कांग्रेस सरकार की उदासीनता दर्शाती है कि अरविंद केजरीवाल को वह अपने राजनैतिक फायदे के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

दरअसल विदेश में अमेरिका, सउदी अरब व पाकिस्तान और भारत में कांग्रेस व क्षेत्रीय पाटियों की पूरी कोशिश नरेंद्र मोदी के बढ़ते प्रभाव को रोकने की है। मोदी न अमेरिका के हित में हैं, न सउदी अरब व पाकिस्तान के हित में और न ही कांग्रेस पार्टी व धर्मनिरेपक्षता का ढोंग करने वाली क्षेत्रीय पार्टियों के हित में।  मोदी के आते ही अमेरिका की एशिया केंद्रित पूरी विदेश, आर्थिक व रक्षा नीति तो प्रभावित होगी ही, देश के अंदर लूट मचाने में दशकों से जुटी हुई पार्टियों व नेताओं के लिए भी जेल यात्रा का माहौल बन जाएगा। इसलिए उसी भ्रष्‍टाचार को रोकने के नाम पर जनता का भावनात्मक दोहन करते हुए ईमानदारी की स्वनिर्मित धरातल पर ‘आम आदमी पार्टी’ का निर्माण कराया गया है।

‘आम आदमी पार्टी’ व  उसके नेता अरविंद केजरीवाल की पूरी मंशा को इस पार्टी के संस्थापक सदस्य व प्रशांत भूषण के पिता शांति भूषण ने ‘मेल टुडे’ अखबार में लिखे अपने एक लेख में जाहिर भी कर दिया था, लेकिन बाद में माना जाता हैं कि प्रशांत-अरविंद के दबाव के कारण उन्होंने अपने ही लेख से पल्ला झाड़ लिया और ‘मेल टुडे’ अखबार के खिलाफ मुकदमा कर दिया। ( संक्षिप्त लेख, आभार : http://jayhind.co.in/reality-of-arvind-kejriwal/ )

“आप” नेताओ के कुछ और तथ्य :
★ शांति भुसन का आतंकवादी शौकत हुसैन गुरु जिसने 2001 में संसद पर आतंकी हमले किये थे उसको बचाने का भरसक प्रयत्न किया।
★ प्रशांत भूषन ने हिन्दुओं को आतंकी खुले आम आतंकी कहा जबकि अफजल गुरु की फांसी पर दुःख जताया और जनमत के आधार पर ये कश्मीर को भारत से अलग करने के भी पक्षधर हैं।
★ केजरीवाल पर कई घोटाले का के तथ्य छुपाने का आरोप भी लगा हैं जिनमे कोयला घोटालों में नविन जिंदल पर चुप्पी हैं।
★ अरविन्द केजरीवाल के इनकम टैक्स विभाग में कार्यरत रहते हुवे उनका और उनकी पत्नी का सालों तक कोई ट्रान्सफर नहीं हुवा क्यूँकि इसके लिए इनकम टैक्स विभाग को सोनिया गाँधी ने चिट्ठी लिख रखी थी।
★ योगेन्द्र यादव पहले राहुल गांधी के लिए भाषण लिखा करते थे और इनका IAC आंदोलन में भी कभी कोई योगदान नहीं रहा हैं।
★ चुनाव के पहले शीला दिक्सित को भस्टाचार कि प्रतिमूर्ति बताने वाले अब केजरीवाल अब उनपर कार्यवाही से पहले उनके खिलाफ विपक्षी दल से सबुत मांग रहे हैं।
★ कजरीवाल ने एक बयान में ये भी कहा था की बटला एनकाऊंटर फर्जी था लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी वास्तविकता को माना।
★ मुजफ्फर नगर दंगो में भी इन लोगों ने निराधार मोदी और RSS को जिम्मेदार ठहराने कि कोशिशे की।

जागो और जगाऔ, देश बचाऔ !!!

जय हिंद!

दिल्ली में खुद काँग्रेस ने करवाया अपना सुपडा साफ !!!

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चार राज्यों के चुनाव में कांग्रेस को करारी हार भले ही मिली हो लेकिन दिल्ली को लेकर भारत कि राजनीति में काँग्रेस रुपी विदेशी ताकतों ने बहोत बडा गेम खेला हैं। ये गेम काँग्रेस ने अपनी पेदाईश “आप” पार्टी को साथ लेकर खेला हैं।

बंदुक और निशाना काँग्रेस (विदेशी ताकतों) का था, कंधा कजरिवाल का वापरा गया और लक्ष्य चुनाव 2014 ।

दिल्ली में “आप” पार्टी कि कोई औकात नहीं थी कि वे इतनी सिटे जित कर ले जाये जब तक कि काँग्रेस अपनी लडाई से पिछे ना हट पडे।

दिल्ली में काँग्रेस हारी नहीं बल्कि काँग्रेस ने खुद हार को गले लगाया और कजरीवाल ने जित खुद के दम पर हाँसील नहीं कि बल्कि काँग्रेस ने हर तरह से “आप” को पैर पसारने का मौका देकर जित दिलाई।

अब सवाल खडा होता हैं कि आखिर इसके पिछे कि पुरी साजिश हैं क्या….

ये एक बहोत बडा षडयंत्र जो कि लंबी रणनिती के तहत खेला गया हैं। इस षडयंत्र को चुनाव के पहले सिर्फ दिल्ली ही नहीं बल्कि देशभर में किये गये तमाम सर्वेक्षणों के नतिजों के बाद तयार किया गया हैं।

हर तरह के चुनावी सर्वेक्षण में हर राज्यों में काँग्रेस की करारी हार सामने आ ही रही हैं। लेकिन काँग्रेस किसी भी तरह से अपनी इस “हार” को बीजेपी के गले की “विजय” माला बनने नहीं देना चाहती। और जनता का मुड भी काँग्रेस अच्छी तरह से भाँप चुकी हैं कि किसी भी परिस्थिति में जनता अब काँग्रेस को वोट नहीं देने वाली।और नरेंद्र मोदी के हाथ में देश कि कमान काँग्रेस बर्दाश्त कर ही नहीं सकती। लेकिन नरेंद्र मोदी का तोड अब काँग्रेस के जरीये निकलना असंभवसा हैं। इस लिये काँग्रेस ने अब अपनी रणनीती को बदलते हुवे पैतरा ही बदल लिया।

दिल्ली में “आप” का कद बढवाकर काँग्रेस ने कई निशाने साधे हैं…
1) “आप” को जितवा कर काँग्रेस ने कजरीवाल को हिरों बनाने कि कोशिश कि हैं
2) सारे काँग्रेसी दलाल मिडीया जिनको मजबुरी में नरेंद्र मोदी का ही नाम लेना पडता था वो अब कजरीवाल को मोदी कि तुलना में खडा करेंगे
3) विदेशी ताकतों ने पहले ही कजरीवाल पर भारी भरकम पैसा लगा रखा हैं अब विदेशी पैसों पर ही पलने वाला भांड मिडीया पुरी ताकत लगाकर कजरीवाल को नरेंद्र मोदी के टक्कर में खडा करने कि कोशिश करेगा
4) इसका मतलब लोकसभा चुनाव में जो वोट काँग्रेस से कट कर बीजेपी को जा रहे थे अब उन्हे कजरीवाल के खाते में उतारा जायेगा
5) विदेशी ताकतों ने अपनी रखेल काँग्रेस को अब नई खाल “आप” पार्टी के रुप में उतार दिया हैं

होशियार!  होशियार! होशियार! यह नरेंद्र मोदी कि बढती ताकत पर कठोर अंकुश लगाने का राष्ट्र विरोधी विदेशी ताकतों का बहोत बडा गेम प्लान नजर आ रहा हैं।हमें हर किसी को होशियार करने कि सख्त आवश्यकता हैं।

जागो और जगाऔ, देश बचाऔ !!!

जय हिंद, जय भारत!!!

कजरिवाल की पोल-खोल [Banner]

कजरिवाल के पोल खोल करते ये लिंक!!!

किसी भी कजरिवाल समर्थक का मुह बंद करने के लिए इन लेखों अवश्य उपयोग करे, इनमे से किसी भी लेख का तोड़ आज तक कोई भी कजरिवाल समर्थक नहीं दे सका…

कज्रिवाल पर स्वयं का आंकलन बेहद जरुरी हैं http://bit.ly/RRLoMK

कज्रिवाल, मिडिया और साजिश http://bit.ly/Qy8bgZ

कज्रिवाल: तिन सवाल और उसके जवाब http://bit.ly/10vuiMX

बस युहीं….हो गयी बहस!!! http://bit.ly/S2MYRJ

कज्रिवाल: तिन सवाल और उसके जवाब

Arvind Kejriwal and three question

Arvind Kejriwal and three question

मित्रो, जब भी कज्रिवाल के खिलाफ कुछ लिखा जाता हैं तो उसके समर्थक बहस करने की बजाये गाली-गलोज करते हुवे दीखते हैं!!! और में उनसे सारी बाते छोड़ कर केवल ये तिन प्रश्न रखता हूँ जिसका जवाब कोई समर्थक देता नहीं…

१) कज्रिवाल ने राजनेतिक दल क्यूँ बनाया?
२) क्या एक मुद्दे के आधार पर राजनेतिक दल बनाना सही हैं?
३) कितने सालों में कज्रिवाल अपना सपना पूरा कर लेंगे?

मुश्किल से एक ने दिया भी था लेकिन राजनेतिक दूर दृष्टि से काफी परे था. उन तिन सवालों के जवाब यहाँ स्वतः के दृष्टिकोन से रखता हूँ. उम्मीद करता हूँ की सभी सहमत होंगे और अगर ना हुवे तो कृपया अपने विचार जाहिर करे क्यूंकि लोकतंत्र में सिर्फ जनता के केवल सही या देश भक्त होने से काम नहीं चलता. सफलता तब तक नहीं मिल सकती जब तक की जनता का एक बड़ा हिस्सा सही राह पर एक साथ ना चले और यही लोकतंत्र की बड़ी खामी हैं.

१) कज्रिवाल ने राजनेतिक दल क्यूँ बनाया?
क्यूंकि उसे इस काम के लिए विदेशियों ने भारी भरकम रकम दी (google कीजिये कज्रिवल फोर्ड फाउंडेशन). विदेशियों ने भारत के कई हिस्सों का सर्वे कर ये ज्ञात कर लिया हैं की कांग्रेस की बिसाख हिल चुकी हैं और अगले चुनाव में जबतक की बीजेपी के vote काटे नहीं जाए तब तक कांग्रेस का पुन्ह जितना असंभव हैं. इस नेक काम के लिए कज्रिवाल को खड़ा किया गया . जब अन्ना आन्दोलन अपने चरम पे था तब ही कांग्रेसी और विदेशी पूरी तरह से हिल चुके थे और हिस्सार के चुनाव के बाद भ्रष्ट पगला गए थे. उन्होंने अन्ना टीम के ही किरदारों को खोदना शुरू किया ताकि अन्ना टीम में फुट डाली जा सके. प्रशांत भूषण तो पहले से ही जगजाहिर दलाल था और कज्रिवाल एक नए दलाल के रूप में उभरा और इन्होने एक रणनीति के चलते विदेशियों का खेल अन्ना टीम पर खेला. इन सारी बातों के सबुत अगर आप मुझसे मांगेंगे तो क्षमा करे उसके लिए अपनी अंतरात्मा को टटोलें.

२) क्या एक मुद्दे के आधार पर राजनेतिक दल बनाना सही हैं?
आज कांग्रेस की भ्रष्टता इतनी उजाघर होने के पश्चात भी कांग्रेस को सत्ता से कोई दल हिला नहीं पा रहा हैं और उसकी सबसे बड़ी वजह हैं सारे भ्रष्टों की अटूट एकता. और इस देश में जितने भी देशभक्त विचारधरा रखने वाले नेता हैं, वो सब अपने-अपने विचार ले कर बिखरे हुवे हैं. ना ही ये देशभक्त नेता आपस तालमेल बना पाते हैं और ना ही भ्रष्ट इन्हें एक होने देते हैं. अब ऐसे माहोल में अगर हर-एक मुद्दों के आधार पर राजनेतिक पार्टी बनायी जाए तो बताओ भला किसका फायदा होगा? इन भ्रष्ट ताकतों का ही होने वाला हैं क्यूंकि ये एकजूट हैं. इसलिए एक मुद्दे को उठाकर पार्टी बनाना उस मुद्दे की गंभीरता को ही नष्ट करदेना हैं जैसा की लोकपाल मुद्दे के साथ हुवा. थोड़ा दिमाग पर जोर दे कर सोचो की कज्रिवाल नाम की बिमारी के पहले “लोकपाल” मुद्दे का कितना जोर था…और आज कितना हैं!!!
ये ना तो समझदारी हैं और ना ही ये देश हित में हैं.

३) कितने सालों में कज्रिवाल अपना सपना पूरा कर लेंगे?
अगर कज्रिवाल पूरी शक्ति, सम्पूर्ण इमानदारी और दिन-रात एक करके भी इस कार्य को अंजाम देने में लगा दे तो भी ये कार्य कज्रिवाल 2014 के चुनावों के बाद नहीं कर सकते और ये खुद कज्रिवाल भी जानते हैं. लेकिन उनका मकसद लोकपाल नहीं देश को गुमराह करना हैं. कज्रिवाल की पार्टी को बीजेपी / कांग्रेस के कद तक पहुँचते-पहुँचते भी 15 से बीस साल आराम से निकल जायेंगे. अब बताओ जहां जो लोग 16 महीने के जन-आन्दोलन से ही इतनी जल्दी हार मान गए वहाँ 15 से 20 साल वे कैसे इंतज़ार करने को राजी हो गए!!! और उसके बाद भी शायद ही कज्रिवल को सत्ता मिलेगी…और मिलेगी तो भी “घटबंधन” वाली!!! आज चाहे FDI का मुद्दा हो या रिजर्वेशन का मुद्दा हो, हर मुद्दा संसद में आंकड़ों के दम पर खेला जाता हैं और ऐसे में कज्रिवाल जिस कांग्रेस, बीजेपी या और दुसरे राजनेतिक दल जिनको आज घालीयाँ देते फिर रहे हैं उनकी शरण में जाना ही पड़ेगा. क्यूंकि vote देने वाली जनता जिसे अन्ना जागरूक कर रहे थे, कज्रिवाल ने अन्ना का रास्ता ही बंद कर दिया और राजनीती करने निकल गए!!!

थोडा भी जागरूक/समझदार नागरिक इन विषयों पर सोचे तो अपने विचारों को शुद्ध कर सकता हैं. और विचार शुद्द करना इसलिए जरूरी हैं क्यूंकि हमसभी को एक राह पकड़ कर चलना हैं तभी इस देश की “दशा और दिशा” बदल सकती हैं.

जय हिन्द!!! जय भारत!!!
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Must Read:
कज्रिवाल पर स्वयं का आंकलन बेहद जरुरी हैं http://bit.ly/RRLoMK
कज्रिवाल, मिडिया और साजिश http://bit.ly/Qy8bgZ
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देश के जवानो : देश की मुसीबतों को पहचानो

देश की जनता “भूतकाल” की मुसीबतों से सिख कर
अगर “वर्मान” की मुसीबतों से लड़ने को तैयार हो जाय तो
“भविष्य” की मुसीबतों से देश की रक्षा की जा सकती हैं

बितगई मुसीबत : महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरु

मौजूदा मुसीबत : सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी

आने वाली मुसीबत : मायावती, मुलायम, कज्रिवाल

देश की मुसीबतों को पहचानो

देश की मुसीबतों को पहचानो