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गीता कि वापसी, पाक कि “नापाक” सियासत

पाकिस्तान से जुडी खबरों में जहाँ मात्र भारत विरोधी गंध ही मिलती हैं वहीं “गीता” के पुनः भारत लौटने वली खबर थोडा हट के हैं…और संदेह से भरपुर!

संदेह!!!

जहाँ पाकिस्तान ने १९% हिंदु आबादी को तरह-तरह की दरींदगी से काट कर १.५% पर ला दिया हो वहाँ से एक हिंदु लडकी का सही सलमत वापस आना क्या संदेहास्पद नहीं?

जाहीर हैं यह पाकिस्तान कि किसी ना किसी रणनीती का हिस्सा ही हैं| लेकिन वह रणनीती क्या हैं?

इस खबर का विश्लेषण तो जरूरी हैं…
> जहाँ पाकिस्तान अंतराष्ट्रीय स्तर के हर मुद्दो पर भारत से मुकाबले में धुल चाटता नजर आ रहा वहाँ “गीता” के मुद्दे को भुना कर दोनो देशो कि अवाम का ध्यान कुछ हद तक बाँटना चाहता हैं|
> अंतराष्ट्रीय मंच पर अपनी गिरती साख को बचाने के लिये भी पाकिस्तान ने “गीता” का इस्तेमाल किया|
> पाकिस्तान ने एक बोलने-सुनने में असमर्थ लडकी को चुन कर भेजा जो चाह कर भी अपनी आप-बीती व वहाँ के अन्य हिंदुऔ कि दशा किसी के सामने आसानी से बयाँ भी ना कर सके|
> “गीती” के साथ आये पाक अधीकारीयों ने तो भारत कि धरती पर उतरते ही तुरंत अपना रंग दिखा दिया यह कहकर कि अब भारत को भी भारतीय जेलो में बंद पाकिस्तानीयो को पाक भेजने कि पहल करनी चाहिये, जो की एक तरह कि सौदेबाजी के लिये भारत पर दबाव बनाने जैसा था|

इस विश्लेषण कि पुष्टी का सबसे बडा सबुत हमारे देश कि पाक-परस्त मिडिया जिनमे NDTV, ABP News, TimesNow व आजतक जैसों का इस मुद्दे को अतिभावुक तरीके से पेश करना था| ये पुरी तरह से पाकिस्तान कि “नापाक” इरादों को अंजाम देने में लगेहुवे थे और कई घंटो तक का कवरेज दिया|

अगर इन्हे हिंदुस्तानी लडकीयों कि इतनी ही चिंता होती तो पिछले १० सालों से पाकिस्तान में हिंदु स्त्रीयों पर हो रही बर्बता पर कभी केवल कुछ ही घंटे भी दिये होते तो शायद सेकडों स्त्रीयों कि लाज बच जाती|

वाकई में किसी ने ठिक ही कहा हैं – असली खबर वहीं हैं जिसे कोई दबाना चाहे बाकि सब तो सिर्फ विज्ञापन हैं|

पाक में मिटाई जा रही लाखो हिंदुऔ कि आबादी जो कि अहम मुद्दा हैं और जिसे अब तक मिडीया जगत दबाता आ रहा लेकिन एक “गीता” कि वापसी जैसी खबर से पाकिस्तान के झुठे दया भाव को उभारकर जेहादी मानसिकता वाले देश का प्रचार कर रहा|

ध्यान रहे, हमारी मिडीया में पाकिस्तान से जुडी किसी भी भावुक घटनाऔ पर मिडीया कि रिपोर्टींग शत-प्रतीशत प्रायोजीत ही होती हैं, धोखे से बचे|

“गीता” के वापसी कि खबर में संतोष जनक मात्र इतना ही हैं कि पाक में जहाँ दुसरी हिंदु स्त्रीयाों को नर्क कि जिंदगी जीने को मजबुर कर दिया गया वहीं भले ही “नापाक” इरादे से ही सही, कम-से-कम एक “गीता” वापस तो लोट सकी!

जागो और जगाऔ, देश बचाऔ

|| वंदेमातरम् ||

अपनी चुप्पी तोडो
और बिंदास बोलो…..कमेंट करे

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मरती हुई कांग्रेस में जान फूंकी हैं केजरीवाल ने !!!

मरती हुई कांग्रेस में जान फूंकी हैं केजरीवाल ने

मरती हुई कांग्रेस में जान फूंकी हैं केजरीवाल ने

अब तक ये तो सभी जान चुके हैं कि #AAP कोई नैतिकता पालने वाला राजनेतिक दल नहीं बल्कि विदेशी ताकतो कि रखेल कांग्रेस का ही दूसरा चेहरा हैं। 2104 के लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस को इस दूसरे चेहरे का कितना फायदा हो पायेगा ये कहना अभी मुश्किल भले ही हैं लेकिन इसने आज भी कांग्रेस बदतर हो रही हालत को सम्भाला हैं।

#कांग्रेस पर केजरीवाल के एहसान का अनुमान सिर्फ इस बात के आंकलन से ही आप लगा सकते हैं कि यदि इस चुनाव में #आप का जन्म ना हुवा होता तो अकेले कांग्रेसी सोशियल मीडियां पर दिन-रात कितनी ही गालिया खा रहे होते , लेकिन केजरीवाल ने अपनी उपस्थिति से कांग्रेस कि सारी गालियों को अपने सर आँखों पर ले लिया।

आज हर वो शख्स जो कांग्रेस को दिन-रात, भर-भर  के कौसा करता था , अब सबसे पहले #केजरीवाल और #आप के लोगों पर अपना गुस्सा निकलता हैं। अपनी नीचता और सड़क पर कि गई औंछी नौटंकी से लोगों के मन में कांग्रेस के खिलाफ भरे हुवे उबाल केजरीवाल ने अपनी और मुड़ा लिया हैं।

#आप आने के पहले कांग्रेस एक मात्र लोगों का निशाना बनी हुई थी और सबसे निचले दर्जे का दल बनी हुई थी। लेकिन अब आप किसी से भी पूंछेंगे तो वो कांग्रेस को तो #आप से भला ही बतायेगा।

यह नुस्का बिलकुल वैसा ही हैं कि एक कोरे कागज पर खिंची गई लकीर को बैगैर छेड़े अगर छोटा साबित करना हो तो उसके बगल में उससे भी बड़ी लकीर खीच दी जाए। अब पूछिए किससे भी कौनसी लकीर छोटी हैं… जवाब मिलेगा पहली वाली!!! ठीक वैसे ही एक हद से गिरी हुई कांग्रेस को अच्छा बनाने के लिए उससे भी अधिक गिरी हुई और औंछि हरकते करने वाला दल पैदा कर दो , तो सबकी नजर में पहले वाली कांग्रेस कि स्थिति अच्छी हो जाती हैं और-तो-और बैगेर कोई भला काम किये…. हैं ना कमाल !!!

नरेंद्र मोदी को केजरीवाल रोक पाएंगे इसके तो कोई असार नजर नहीं आते , लेकिन कोंग्रेसियों के लिए केजरीवाल ने बड़ा ही उद्धार का काम किया हैं , यकीं मानो !!!

सारांश : इस देश से “कांग्रेस” का अंत बेहद जरुरी हैं।

जागो और जगाओ , देश बचाओ !!!
अभी तो करोडो को जगाना हैं !!!

सावधान: मिडीया से देश को बडा धोखा

यह इस देश कि बहुत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है!

जब 20 जनवरी को सिर्फ दो सौ लोगों के साथ अरविन्द केजरीवाल का #AAPDrama चल रहा था जिसके अंत में दिल्लीवासियों को कोई परिणाम तक न मिल सका और जिसके फल स्वरुप देश के लिए एक नकारात्मक माहोल बना…

उसी समय में ही महाराष्ट्, रायपुर डिस्ट्रिक्ट के अलीबाग में लाखो लोगों ने मिलकर वहा निर्माणाधिन एशिया के सबसे बडे कत्लखाने के विरोध में वास्तविक आंदोलन छेड़ा …

सोचिये, एक लाख से अधिक रैली में एकत्र हुए।

और ये भी क्या कम था की लोगों की उमडी जनशक्ती के बलबुते पर वहाँ के जीला कलेक्टर को इस कत्लखाने पर निर्माण रोकने का आदेश जारी करना पडा!

लेकिन किसी भी राष्ट्रीय मीडिया (#paidmedia #fakemedia #corruptmedia) ने इस हजार गुना अधीक महत्वपुर्ण घटना को प्रसारीत करने का कष्ठ नहीं उठाया !!!

सारांश फिर वही:

सरकारी दुर्शासन से ज्यादा देश के सभी राष्ट्र विरोधी मीडिया ने देश को गर्क में ढकेला हैं।

# दलाल मिडीया पर विश्वास करना बंद करे #

जय हिंद! जय भारत!!!!

—– In English —-

This is very unfortunate situations of the country!

While #AAPDrama going on in Delhi on this 20th with just Two Hundred people that too ended up with zero (-ve) results ….

At the same time the real battle was on held at Alibaug, Raigar District to protest against the planned Asia’s largest slaughter house.

Just think, over a lakhs of people gathered in rally and what less! they also succeeded in getting cancellation notice from Jhila collector.

But non of the national media (#paidmedia #fakemedia #corruptmedia)  were interested in covering this thousand time valuable event but to a third class “Nautanki” on Delhi street!!!

Again the same moral:
All anti-National-Media of the country has affected more adversely to the nationa then the bad governance.

# Stop Believing Paid-Media #

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क्या हैं अमेरिका समर्थित “आप” पार्टी कि हकीकत ?

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली ‘राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी)’ की एक प्रमुख सदस्य अरुणा राय के साथ मिलकर अरविंद केजरीवाल ने सरकारी नौकरी में रहते हुए एनजीओ की कार्यप्रणाली समझी और फिर ‘परिवर्तन’ नामक एक एनजीओ से जुड़ गये। इस दोरान वे सरकारी पद से लम्बी छुट्टी पर रहते हुवे भी वे सरकार और एनजीओ कि तरफ से तवख्वाह लेते रहे।

वर्ष 2006 में ‘परिवर्तन’ में काम करने के दौरान ही उन्हें अमेरिकी ‘फोर्ड फाउंडेशन’ व ‘रॉकफेलर ब्रदर्स फंड’ ने ‘उभरते नेतृत्व’ के लिए ‘रेमॉन मेग्सेसाय’ पुरस्कार दिया, जबकि उस वक्त तक अरविंद ने ऐसा कोई काम नहीं किया था।

इसके बाद अरविंद अपने पुराने सहयोगी मनीष सिसोदिया के एनजीओ ‘कबीर’ से जुड़ गए, जिसका गठन इन दोनों ने मिलकर वर्ष 2005 में किया था।

‘फोर्ड फाउंडेशन’ के एक अधिकारी स्टीवन सॉलनिक के मुताबिक ‘‘कबीर को फोर्ड फाउंडेशन की ओर से वर्ष 2005 में 1 लाख 72 हजार डॉलर एवं वर्ष 2008 में 1 लाख 97 हजार अमेरिकी डॉलर का फंड दिया गया।’’ यही नहीं, ‘कबीर’ को ‘डच दूतावास’ से भी मोटी रकम फंड के रूप में मिली।

अंग्रेजी अखबार ‘पॉयनियर’ में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक डच यानी नीदरलैंड दूतावास अपनी ही एक एनजीओ ‘हिवोस’ के जरिए नरेंद्र मोदी की गुजरात सरकार को अस्थिर करने में लगे विभिन्‍न भारतीय एनजीओ को अप्रैल 2008 से 2012 के बीच लगभग 13 लाख यूरो, मतलब करीब सवा नौ करोड़ रुपए की फंडिंग कर चुकी है।  इसमें एक अरविंद केजरीवाल का एनजीओ भी शामिल है।

एशियाई देशों की मीडिया को फंडिंग करने के लिए अमेरिका व यूरोपीय देशों ने ‘पनोस’ नामक संस्था का गठन कर रखा है। माना जा रहा है कि अरविंद केजरीवाल के मीडिया उभार के पीछे इसी ‘पनोस’ के जरिए ‘फोर्ड फाउंडेशन’ की फंडिंग काम कर रही है।

आरोप है कि विदेशी पुरस्कार और फंडिंग हासिल करने के बाद अमेरिकी हित में अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया ने इस देश को अस्थिर करने के लिए ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ का नारा देते हुए वर्ष 2011 में ‘जनलोकपाल आंदोलन’ की रूप रेखा खिंची।

इसके लिए सबसे पहले बाबा रामदेव का उपयोग किया गया, लेकिन रामदेव इन सभी की मंशाओं को थोड़ा-थोड़ा समझते हुवे इनको मना कर दिया। जिसके बाद महाराष्ट्र के सीधे-साधे, लेकिन भ्रष्‍टाचार के विरुद्ध कई मुहीम में सफलता हासिल करने वाले अन्ना हजारे को अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली से उत्तर भारत में ‘लॉंच’ कर दिया।

अन्ना हजारे को अरिवंद केजरीवाल की मंशा समझने में काफी वक्त लगा, लेकिन तब तक जनलोकपाल आंदोलन के बहाने अरविंद ‘कांग्रेस पार्टी व विदेशी फंडेड मीडिया’ के जरिए देश में प्रमुख चेहरा बन चुके थे।

एक  सुचना के मुताबिक अमेरिका की एक अन्य संस्था ‘आवाज’ की ओर से भी अरविंद केजरीवाल को जनलोकपाल आंदोलन के लिए फंड उपलब्ध कराया गया था और इसी ‘आवाज’ ने दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए भी अरविंद केजरीवाल की ‘आम आदमी पार्टी’ को फंड उपलब्ध कराया। अमेरिका के हित में हर देश की पॉलिसी को प्रभावित करने के लिए अमेरिकी संस्था जिस ‘फंडिंग का खेल’ खेल खेलती आई हैं, भारत में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और ‘आम आदमी पार्टी’ उसी की देन हैं।

‘फोर्ड फाउंडेशन’ ने अरविंद व मनीष सिसोदिया के एनजीओ को 3 लाख 69 हजार डॉलर तो शीला दीक्षित के पुत्र संदीप दीक्षित के एनजीओ को 6 लाख 50 हजार डॉलर का फंड उपलब्ध कराया है।

सुप्रीम कोर्ट के वकील एम.एल.शर्मा ने अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया के एनजीओ व उनकी ‘आम आदमी पार्टी’ में चुनावी चंदे के रूप में आए विदेशी फंडिंग की पूरी जांच के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल कर रखी है। अदालत ने इसकी जांच का निर्देश दे रखा है, लेकिन केंद्रीय गृहमंत्रालय इसकी जांच कराने के प्रति उदासीनता बरत रही है। बाबा रामदेव के खिलाफ एक ही दिन में 80 से अधिक मुकदमे दर्ज करने वाली कांग्रेस सरकार की उदासीनता दर्शाती है कि अरविंद केजरीवाल को वह अपने राजनैतिक फायदे के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

दरअसल विदेश में अमेरिका, सउदी अरब व पाकिस्तान और भारत में कांग्रेस व क्षेत्रीय पाटियों की पूरी कोशिश नरेंद्र मोदी के बढ़ते प्रभाव को रोकने की है। मोदी न अमेरिका के हित में हैं, न सउदी अरब व पाकिस्तान के हित में और न ही कांग्रेस पार्टी व धर्मनिरेपक्षता का ढोंग करने वाली क्षेत्रीय पार्टियों के हित में।  मोदी के आते ही अमेरिका की एशिया केंद्रित पूरी विदेश, आर्थिक व रक्षा नीति तो प्रभावित होगी ही, देश के अंदर लूट मचाने में दशकों से जुटी हुई पार्टियों व नेताओं के लिए भी जेल यात्रा का माहौल बन जाएगा। इसलिए उसी भ्रष्‍टाचार को रोकने के नाम पर जनता का भावनात्मक दोहन करते हुए ईमानदारी की स्वनिर्मित धरातल पर ‘आम आदमी पार्टी’ का निर्माण कराया गया है।

‘आम आदमी पार्टी’ व  उसके नेता अरविंद केजरीवाल की पूरी मंशा को इस पार्टी के संस्थापक सदस्य व प्रशांत भूषण के पिता शांति भूषण ने ‘मेल टुडे’ अखबार में लिखे अपने एक लेख में जाहिर भी कर दिया था, लेकिन बाद में माना जाता हैं कि प्रशांत-अरविंद के दबाव के कारण उन्होंने अपने ही लेख से पल्ला झाड़ लिया और ‘मेल टुडे’ अखबार के खिलाफ मुकदमा कर दिया। ( संक्षिप्त लेख, आभार : http://jayhind.co.in/reality-of-arvind-kejriwal/ )

“आप” नेताओ के कुछ और तथ्य :
★ शांति भुसन का आतंकवादी शौकत हुसैन गुरु जिसने 2001 में संसद पर आतंकी हमले किये थे उसको बचाने का भरसक प्रयत्न किया।
★ प्रशांत भूषन ने हिन्दुओं को आतंकी खुले आम आतंकी कहा जबकि अफजल गुरु की फांसी पर दुःख जताया और जनमत के आधार पर ये कश्मीर को भारत से अलग करने के भी पक्षधर हैं।
★ केजरीवाल पर कई घोटाले का के तथ्य छुपाने का आरोप भी लगा हैं जिनमे कोयला घोटालों में नविन जिंदल पर चुप्पी हैं।
★ अरविन्द केजरीवाल के इनकम टैक्स विभाग में कार्यरत रहते हुवे उनका और उनकी पत्नी का सालों तक कोई ट्रान्सफर नहीं हुवा क्यूँकि इसके लिए इनकम टैक्स विभाग को सोनिया गाँधी ने चिट्ठी लिख रखी थी।
★ योगेन्द्र यादव पहले राहुल गांधी के लिए भाषण लिखा करते थे और इनका IAC आंदोलन में भी कभी कोई योगदान नहीं रहा हैं।
★ चुनाव के पहले शीला दिक्सित को भस्टाचार कि प्रतिमूर्ति बताने वाले अब केजरीवाल अब उनपर कार्यवाही से पहले उनके खिलाफ विपक्षी दल से सबुत मांग रहे हैं।
★ कजरीवाल ने एक बयान में ये भी कहा था की बटला एनकाऊंटर फर्जी था लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी वास्तविकता को माना।
★ मुजफ्फर नगर दंगो में भी इन लोगों ने निराधार मोदी और RSS को जिम्मेदार ठहराने कि कोशिशे की।

जागो और जगाऔ, देश बचाऔ !!!

जय हिंद!

दिल्ली में खुद काँग्रेस ने करवाया अपना सुपडा साफ !!!

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चार राज्यों के चुनाव में कांग्रेस को करारी हार भले ही मिली हो लेकिन दिल्ली को लेकर भारत कि राजनीति में काँग्रेस रुपी विदेशी ताकतों ने बहोत बडा गेम खेला हैं। ये गेम काँग्रेस ने अपनी पेदाईश “आप” पार्टी को साथ लेकर खेला हैं।

बंदुक और निशाना काँग्रेस (विदेशी ताकतों) का था, कंधा कजरिवाल का वापरा गया और लक्ष्य चुनाव 2014 ।

दिल्ली में “आप” पार्टी कि कोई औकात नहीं थी कि वे इतनी सिटे जित कर ले जाये जब तक कि काँग्रेस अपनी लडाई से पिछे ना हट पडे।

दिल्ली में काँग्रेस हारी नहीं बल्कि काँग्रेस ने खुद हार को गले लगाया और कजरीवाल ने जित खुद के दम पर हाँसील नहीं कि बल्कि काँग्रेस ने हर तरह से “आप” को पैर पसारने का मौका देकर जित दिलाई।

अब सवाल खडा होता हैं कि आखिर इसके पिछे कि पुरी साजिश हैं क्या….

ये एक बहोत बडा षडयंत्र जो कि लंबी रणनिती के तहत खेला गया हैं। इस षडयंत्र को चुनाव के पहले सिर्फ दिल्ली ही नहीं बल्कि देशभर में किये गये तमाम सर्वेक्षणों के नतिजों के बाद तयार किया गया हैं।

हर तरह के चुनावी सर्वेक्षण में हर राज्यों में काँग्रेस की करारी हार सामने आ ही रही हैं। लेकिन काँग्रेस किसी भी तरह से अपनी इस “हार” को बीजेपी के गले की “विजय” माला बनने नहीं देना चाहती। और जनता का मुड भी काँग्रेस अच्छी तरह से भाँप चुकी हैं कि किसी भी परिस्थिति में जनता अब काँग्रेस को वोट नहीं देने वाली।और नरेंद्र मोदी के हाथ में देश कि कमान काँग्रेस बर्दाश्त कर ही नहीं सकती। लेकिन नरेंद्र मोदी का तोड अब काँग्रेस के जरीये निकलना असंभवसा हैं। इस लिये काँग्रेस ने अब अपनी रणनीती को बदलते हुवे पैतरा ही बदल लिया।

दिल्ली में “आप” का कद बढवाकर काँग्रेस ने कई निशाने साधे हैं…
1) “आप” को जितवा कर काँग्रेस ने कजरीवाल को हिरों बनाने कि कोशिश कि हैं
2) सारे काँग्रेसी दलाल मिडीया जिनको मजबुरी में नरेंद्र मोदी का ही नाम लेना पडता था वो अब कजरीवाल को मोदी कि तुलना में खडा करेंगे
3) विदेशी ताकतों ने पहले ही कजरीवाल पर भारी भरकम पैसा लगा रखा हैं अब विदेशी पैसों पर ही पलने वाला भांड मिडीया पुरी ताकत लगाकर कजरीवाल को नरेंद्र मोदी के टक्कर में खडा करने कि कोशिश करेगा
4) इसका मतलब लोकसभा चुनाव में जो वोट काँग्रेस से कट कर बीजेपी को जा रहे थे अब उन्हे कजरीवाल के खाते में उतारा जायेगा
5) विदेशी ताकतों ने अपनी रखेल काँग्रेस को अब नई खाल “आप” पार्टी के रुप में उतार दिया हैं

होशियार!  होशियार! होशियार! यह नरेंद्र मोदी कि बढती ताकत पर कठोर अंकुश लगाने का राष्ट्र विरोधी विदेशी ताकतों का बहोत बडा गेम प्लान नजर आ रहा हैं।हमें हर किसी को होशियार करने कि सख्त आवश्यकता हैं।

जागो और जगाऔ, देश बचाऔ !!!

जय हिंद, जय भारत!!!

कैसे घौटोगे गला करोंडो हिंदुस्तानीयों का !!!

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Fight for Freedom

अब काँग्रेस चौकडी के खिलाफ फेसबुक/ट्विटर पर लिखने वालों को हिरासत में लेने कि मुहीम चल पडी हैं।  सोशियल मिडीया पर क्रांति फैलाने वाले इन सत्ताधारीयों को पसंद नहीं  आ रहें !!! ये कुकर्म कर सकते हैं लेकिन हम इनके कालेकारनामों का प्रचार भी नहीं कर सकते !!!

अब तो इनके खिलाफ हर किसी को खडा हो कर सोशियल मिडीया पर मोर्चा सँभालना ही होगा। अगर इस नेक काम में हर व्यक्ति अपना सामर्थ्य देने लगे तो किस-किस को हिरासत में लेंगे ये, क्या ये संभव हैं।

मेरा सवाल उनसे हैं जो सोशियल मिडीया पर रहते हुवे भी अबतक इसे सिर्फ मनोरंजन के तौर पर इस्तेमाल करते हैं।

क्या हम वाकई आजाद हैं?

अगर जवाब “हाँ” में हैं… तो जरा सोचिये, ये कैसी आजादी !!!

और अगर जवाब “ना” में हैं… तो हम आवाज क्युँ नहीं उठाते ?

क्या आवाज उठाने में हमें डरना चाहिये ?

हो सकता हैं कि हमारे मन में डर भी उठे…

लेकिन जरा उन हजारों-लाखों क्रांतिकारियो के विषय में भी सोचे जिन्होने वंदेमातरम् कि गुंज उस माहोल में उठाई थी जब इसके जवाब में उनपर लाठीयाँ चला दी जाती थी !

उस कठिन समय में भी उन्होने गद्दारों को खुन भरी आँखे दिखाई जिसमें उनकी आँखे निकाल ली जाती!

और उन परिस्थिति में भी तिरंगे को हाथ से नहीं छुटने दिया जब उन्हे तोप के आगे खडा कर उडा दिया जाता था !!!

एसे लाखों क्रांतिकारीयों ने खुद को बलिदान किया ताकी इनकी पुश्ते, यानी की हम, सुख-चैन कि जिंदगी जी सके।

क्या आपकों नहीं लगता कि इन बलिदानीयों कि वजह से ही हमें आज उन परिस्थितियों से नहीं जुझना पड रहा जिन परिस्थितियों को मात्र सुनकर आज हमारे रोंगटे खडे हो जाते हैं।

जब ऐसे माहोल में भी हमारे पुरखों नें हौंसला नहीं छोडा तो आजादी के इस अंतीम दौर में हम क्यों पिछे हटे !!!
क्या हम अपना जिवन सिर्फ भोग-और-विलास के लिये गुजार दे !!!
जिस तरह से बलिदानीयों ने हमारे विषय में सोचा क्या हमारा फर्ज नहीं कि हम भी हमारी आने वाली पीढी के बारे में भी सोचे और इस भ्रष्टतंत्र और देश-द्रोही तंत्र को उखाड़ फेकें !!!

गुलामी का महासागर तो हमें हमारे विर स्वतंत्रता के सेनानीयों ने पार करवा दिया अब तो मात्र विचारों का युद्ध लडना हैं। और इस युद्ध का ब्रम्हास्त्र सिर्फ एक ही हैं और वो हैं सोशियल मिडीया।

हमें अपनी आवाज उठाने से कोई नहीं रोक सकता क्युँ की—  स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार हैं।

∴ सोशियल मिडीया में कार्यरत सभी क्रांतिकारीयों को कोटी-कोटी नमन∵

जय हिंद, जय भारत !!!

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लोकतांत्रीक देश में सोशिय मिडीया एक वरदान

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सालों से लुटते हुवे भी देशपर अगर काँग्रेस ने राज किया तो इसका दोष कुछ समझदार जनता को देते हैं। और ये भ्रष्ट नेता भी बडे शान से कहते हैं कि हमे तो जनता ने ही चुना हैं।

हाँ कुछ हदतक सही भी हैँ  लेकीन पुरा सच नहीं। वास्तव में इसका दोष पुरी तरह से देश के संचार तंत्र(मिडीया) को ही जाना चाहीये।

पत्रकारों ने अपनी पत्रकारिता को काँग्रेसी तंत्र की रखेल बनाकर रखा। देश कि वास्तविकता से जनता को पुरी तरह से अंजान रखा और गद्दारों को देशभक्त का चोंगा पहनाकर पेश किया गया।

लेकिन आज जब से सोशियल मिडीया का प्रसार हुवा हैं भांड मिडीया का भेडीयाई चेहरा उजागर हो चुका हैं।

अब देश की जनता वास्तविकता जानने के लिये, और बनावटी माहोल को पहचानने के लिये इन दलाली पत्रकारों के अधीन नहीं रही। अब जनता ने सोशियल मिडीया के जरीये दौगले मिडीया जगत को उनका आईना दिखा दिया हैं। आज करोडों रूपये वाली खबरी दुकान की बुनीयादी जडे हिलनी शुरू हो चुकी हैं। सोशियल मिडीया कि आहट मात्र से मक्कार पत्रकारों की नींद उड चुकी हैं। ये सब संभव उस सोशियल मिडीया के बलबुते हुवा हैं जिसमें पत्रकारीता कि भुमीका में कोई बडबौला पत्रकार नहीं बल्कि आम जनता खडी हैं।

पहले बीकाऊ मिडीया जनता को वो दिखाता था जो काँग्रेसी तंत्र दिखाना चाहता था। लेकिन अब जनता सिर्फ वही देखती हैं जो वो देखना चाहती हैं।

भांड मिडीया ने गाँधी परीवार को हमेशा शाही परीवार के स्वरूप में पेश किया  लेकीन इस शाही शक्सियत के पिछे का घिनोना चेहरा कभी जनता के सामने नहीं आने दिया। लेकिन आज सोशियल मिडीया नें इस शाही परिवार का नकाब उतार दिया हैं।

सच तो ये हैं कि विश्व के इस सबसे बडे लोकतंत्र में आज तक जनता कि आवाज को या तो मिडीयाई तंत्र ने अपने शब्दों में ढालनें का खेल खेला या फिर काँग्रेसी तंत्र नें सरकारी शक्ति का उपयोग कर दबा दिया।

लेकिन सोशियल मिडीया इन गद्दारी तंत्र के खिलाफ वो ब्रम्हास्त्र बन कप उभरा हैं जिसके इनके हर पैतरों को नेस्तो-नाबुत कर दिया हैं। आज सोशियल मिडीया कि वजह से अपनी सल्तनत को हिलती देखकर इनके रोंगटे खडे हो चुके हैं। लोकतंत्र कि सत्ता का सुख भौग रहे इन भ्रष्टाचारीयों को अब सोशियल मिडीया के जरीये उठ रही आम जनता की आवाज सहन नहीं हो रही। इसलिये रह-रह कर सोशियल मिडीया के विरोध में बयान-बाजी में लगे हुवे हैँ। लेकिन अब इस आँधी को रोकपाना इनके बस का रोग नहीं।

यंकिन मानो, यह तो सोशियल मिडीया क्रांति कि सुरूवात मात्र हैं। जैसे-जैसे सोशियल मिडीया विस्तारीत होगा आम जनता कि आवाज प्रबलता मिलेगी। और ये हमारे लोकतांत्रीक देश के लिये शुभ-संकेत हैं।

कुछ और बाते जो सोशियल मिडीया को दुसरे मिडिया से हटकर विशेष बनाती हैं…
> सोशियल मिडीया कि खबरों पर किसी भी तरह से किसी का एका-अधिकार नहीं
> सोशियल मिडीया ने हर आम आदमी को अपनी बात रखने का एक मंच प्रदान किया हैं
> सोशियल मिडीया पर वे ही खबरें वर्चस्व पाती हैं जिसे लोगों का समर्थन मिलता हैं
> सोशियल मिडीया पर भी बिकाऊ खबरें होती जरूर हैं लेकिन जनता के समर्थन के अभाव में वे खुद ही अपना दम तोडदेती हैं और मुख्यरूप से उस पर “स्पोंसर्ड” का टेग लिखा मिलता हैं
> यहाँ तक की लोगों के समर्थन भी खरीदे जा सकते हैं लेकिन ये हर खबर के लिये मुमकिन नहीं और एक हद के बाद वो भी विफल हो सकता हैं

बिकाऊ मिडीया के विरोध में और उनकी राष्ट्र-विरोधी षडयंत्र के खिलाफ सभी देशभक्तो से आग्रह हैं कि सोशियल मिडीया को हथीयार बना कर माँ-भारती का कर्ज उतारे।

जागो और जगाऔ, देश बचाऔ !!!
अभी तो करोडों को जगाना हैं !!!

जय हिंद, जय भारत !!!