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सौगंध मुझे इस मिट्टी की

नरेंद्र मोदी जी की कविता
 
 
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सौगंध मुझे इस मिट्टी की, मैं देश नहीं मिटने दूंगा।
मैं देश नहीं रुकने दूंगा, मैं देश नहीं झुकने दूंगा।।

मेरी धरती मुझसे पूछ रही कब मेरा कर्ज चुकाओगे।
मेरा अंबर पूछ रहा कब अपना फर्ज निभाओगे।।

मेरा वचन है भारत मां को तेरा शीश नहीं झुकने दूंगा।
सौगंध मुझे इस मिट्टी की मैं देश नहीं मिटने दूंगा।।

वे लूट रहे हैं सपनों को मैं चैन से कैसे सो जाऊं।
वे बेच रहे हैं भारत को खामोश मैं कैसे हो जाऊं।।

हां मैंने कसम उठाई है मैं देश नहीं बिकने नहीं दूंगा।
सौगंध मुझे इस मिट्टी की मैं देश नहीं मिटने दूंगा।।

वो जितने अंधेरे लाएंगे मैं उतने उजाले लाऊंगा।
वो जितनी रात बढ़ाएंगे मैं उतने सूरज उगाऊंगा।।

इस छल-फरेब की आंधी में मैं दीप नहीं बुझने दूंगा।
सौगंध मुझे इस मिट्टी की मैं देश नहीं मिटने दूंगा।।

वे चाहते हैं जागे न कोई बस रात का कारोबार चले।
वे नशा बांटते जाएं और देश यूं ही बीमार चले।।

पर जाग रहा है देश मेरा हर भारतवासी जीतेगा।
सौगंध मुझे इस मिट्टी की मैं देश नहीं मिटने दूंगा।।

मांओं बहनों की अस्मत पर गिद्ध नजर लगाए बैठे हैं।
मैं अपने देश की धरती पर अब दर्दी नहीं उगने दूंगा।।

सौगंध मुझे इस मिट्टी की मैं देश नहीं मिटने दूंगा।
अब घड़ी फैसले की आई हमने है कसम अब खाई।।

हमें फिर से दोहराना है और खुद को याद दिलाना है।
न भटकेंगे न अटकेंगे कुछ भी हो हम देश नहीं मिटने देंगे।।

सौगंध मुझे इस मिट्टी की मैं देश नहीं मिटने दूंगा।
मैं देश नहीं रुकने दूंगा, मैं देश नहीं झुकने दूंगा।।

 

— श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी —

अगर मोदी ना बन सके प्रधानमंत्री

मोदी लाओ, देश बचाओ

मोदी लाओ, देश बचाओ

वास्तव में, कुछ लोग यह आंकलन करने में समय बर्बाद कर देते हैं कि आखिर नरेंद्र मोदी प्रधान मंत्री बन भी गया तो क्या हो जाएगा लेकिन सोचने वाली बात तो यह हैं कि अगर नरेंद्र मोदी प्रधान मंत्री ना बन सके तो देश को किन-किन मुसबतों से गुजरना पड़ेगा। ऐसे ही कुछ भयभीत करदेने वाली सच्चाई पर लोगों का ध्यान केंद्रित करना बेहद जरूरी हैं।

अगर नरेंद्र मोदी प्रधान मंत्री ना बन सके तो….
> भारत में अमेरिकी कंपनीयो के राजनीतीक हस्तक्षेप चरम पर हो जायेंगे
> देश की राजनीतिक अस्थिरता के चलते विदेशी ताकते अप्रत्यक्ष रूप से देश पर हावी होगी
> देश की गिरती अर्थव्यवस्था को संभालना नामुमकिन हो जायेगा क्यूंकि सबसे पहले हाथ खीचने वाले विदेशी निवेशक ही होंगे
> देश के कट्टरपंथी जो मोदी को रोकने के लिये एडी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, उनके हौसले बुलंद हो जायेंगे और फिर इनकी कट्टरता के अत्यधिक दुषपरिणाम असमाजिक तत्वो  कि भरमार स्वरूप मिलेगा
> आतंकवादी, जिनके अबतक मोदी कि आहट से हाथ-पाँव फुले हुवे हैं, वे पुर्णतया बेलगाम हो कर और अधिक रूप से सक्रिय हो जायेंगे
> पाकिस्तान और चीन जो रह-रह कर भारत को छेडते आ रहे हैं वे भी बेखोफ हो कर अपनी दबंग-गिरी पर उतर आयेंगे जिससे सिमा पर भारी अशांती की स्थीती बन जायेगी जिससे सीमा सुरक्षा का खतरा बढ़ जाएगा
> पाकिस्तान में बढ़ते तालिबानी वर्चस्व से साफ़ नजर आता हैं कि पकिस्तान पर जल्द ही तालिबानी कब्जा होने वाला हैं ऐसी स्थिति में उनका पहला लक्ष्य कश्मीर मुद्दे को लेकर भारत में आतंकवाद फैलाना और यहाँ तक कि जंग छेड़ देना।
> अगर बैगर सक्षम प्रधान मंत्री के देश को युद्ध के दौर से गुजरना पड़ा तो अवश्य ही ये वो भयावह स्थिति होगी जिसकी कल्पना और अंजाम रोंगटे खड़े कर देता हैं
> देश के अल्पसंख्यक और पिछडा वर्ग जो आजतक मात्र वोट बँक की राजनीती का शिकार होता आया हैं, वो एकबार फिर अपनी हक से वंचीत हो जायेगा क्युँ की इस वर्ग का सबसे अधीक वीकास अगर कहीं हुवा हैं तो वो मात्र मोदी के शासन में हुवा हैं
> देश में संप्रदाईकता के नाम पर हिंदुत्व का घला घौटा जायेगा, सेक्युलरता के नाम पर सारी हिंदुत्व विरोधी ताकते एक झुठ हो कर अपना वर्चस्व साबीत करने में लगजायेगी
> देश कि सेना का मनोबल धराशायी होगा क्युँ की हाल की कई घटनाऔ में भारत सरकार के लचीले रवईय्ये को लेकर वे पहले से ही नाराज हैं और मोदी से उनकी काफी उम्मीदे जगी हैं
> स्वदेशी उद्योग जगत में नीराशा फैलजायेगी जिसकी कमर पहले से काँग्रेस शासन के चलते टुट चुकी हैं
> राजनैतीक अस्थीरता के चलते महंगाई कि मार और अधिक बढेगी जिसका सबसे बुरा असर मध्यम वर्गीय और गरीब जनता पर पडनेवाला हैं
> कृषी जगत को बहोत बडा नुकसान झेलना होगा क्युँ की मोदी एक मात्र एसे नेता हैं जिसने किसानों को उद्योगपती की श्रेणी में लाकर खडा किया और हर नीती में किसानों के विकास को प्राथमीकता प्रदान की
> देश के घटते पशुधन को बचाने वाली मुहीम को भारी झटका लगेगा क्युँ की आजादी के बाद से गौ-हत्या पर संपुर्ण पाबंदी लगाने कि मांग करने वाले गौ-भक्तो कि पुरी उम्मीदे अब मात्र नरेंद्र मोदी से टिकी हैं
> सोशियल मिडीया से जागृत और संघठीत हुवे देशभक्तों का मनोबल भी धराशाही होगा जो की देश के भवीष्य के लिये दु:खद दायी होगा
> देश में लोकतंत्र कि ये सबसे बड़ी हार होगी क्यूंकि आज देश का एक बड़ा वर्ग एक मात्र नरेंद्र मोदी को प्रधान मंत्री के रूप में देखना चाहता हैं

ये वे मुसीबते हैं जिन्हे ना ही कोई भारतवासी झेलना चाहेगा और ना ही ये देश हित में हैं।  देश को बचाने का एक मात्र मौका हैं। कृपया इसे अधिक-से-अधिक लोगों तक पहुंचाए।

जागो और जगाओ, देश बचाओ !!!
अभी तो करोड़ों को जगाना हैं !!!

क्या लखनऊ, क्या वाराणसी (कवीता)

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क्या लखनऊ, क्या वाराणसी
जब साथ खडा हर भारतवासी
हर आँखो में अब अरमान जगा हैं
रही ना दुसरी कोई आस बाकी

सौ-सौ कजरी-राहुल हाथ मिलाले
नमो सुनामी को रोक नहीं पायेंगे
जीत के आयेंगे दम पर अपने
देश के कोने-कोने में नमो छा जायेंगे

बीजेपी के नाम पर खडा कर दो जीसे भी
अब किसी को क्या फरक पड जायेगा
क्युँ की बटन कमल का दबाते वक्त भी
हमें तो चेहरा सिर्फ नमो का नजर आयेगा

— संजय त्रिवेदी

अरविन्द केजरीवाल के ४८ रंग

#LiarKejriwal : The Big CHAMELEON

#LiarKejriwal : The Big CHAMELEON

48 दिन की सरकार के 48 ड्रामें !!!

१) ना हम समर्थन देंगे, ना लेंगे
२) बीजेपी तो जोड तोड मे माहीर हैं फिर क्यँ सरकार नही बना रही
३) मेरे बच्चे की कसम, हम किसी से समर्थन नहीं लेंगे
४) काँग्रेस जैसी पार्टी हमे बीना शर्त समर्थन क्युँ दे रही
५) हमे बीजेपी काँग्रेस की मंशा ठिक नहीं लग रही
६) बीजेपी-कांग्रेस हमारी शर्ते मानले तो हम सरकार बनाने पर सोचेंगे
७) हम जनता से राय लेंगे की हम सरकार बनाये या नहीं
८) हम १०० से ज्यादा सभायें करेंगे और हर सभा की विडीयो रेकोर्डींग कर मशवरा लेंगे की हम सरकार बनाये की नहीं
९) दिल्ली की जनता ने हमे आदेश दिया हैं की सरकार बनायी जाये
१०) हम दुसरी पार्टी के इमानदार लोगों से अपील करते हैं की वे हमारे साथ आये
११) बीजेपी अपनी जीम्मेदारी से भाग रही हैं इसलीये हम सरकार बना रहे

चुनाव से पहले >
१२) शिला दिक्षीत के भ्ष्टाचार के खिलाफ मेरे पास ३०० पेज रिपोर्ट मौजुद हैं
१३) हम सरकारी बंगला-गाडी नहीं लेंगे
चुनाव के बाद >
१४) हर्षवर्धन जी के पास शीला के खिलाफ कोई सबुत हो तो हमे दे हम कार्यवाही करेंगे
१५) राज्यपाल को बडे बंगले के लिये खत भी लिख दिया
१६) मेने मेरे दोस्तो और रेश्तेदारों के सुझाव से बडा बंगला लेने का फैसला बदल दिया
१७) शपथ ग्रहण के लिये हम आम आदमी की तरह मेट्रो में जायेंगे (महीला कोच में आम-आदमी)
१८)शपथ ग्रहण समारोह रामलीला मैदान में करेंगे ( तीन गुना अधीक खर्चा)
१९) हम जनता दरबार के जरीये उनकी समस्या सुनेंगे (भगदड में जान बचाकर भागना पडा)
२०) अब हम जनता दरबार नहीं लगायेंगे

२१) सोमनाथ भारती का साथ ना देने वाले पुसीस अफसर को सस्पेंड कराने के लिये हम धरना करेंगे
२२) पुलीस अफसरों को छुट्टी पर भेजदिया गया हैं इसके लिये हम अनशन खत्म करते हैं और ये दिल्ली वासीयों की जीत हैं
२३) हमे खत लिखकर विदेशी सरकार ने हमारे कार्य की प्रशंसा की हैं (खत झुठा नीकला, तो बोलती बंद)
२४) २६ जनवरी पर वीआईपी कल्चर खत्म होना चाहीये (लेकीन खुद वीआईपी क्लास में सुरक्षा कर्मीयो के साथ पँहुच गये)
२५) अन्ना ने हमे आशिर्वाद दिया हैं, अन्ना हमारे साथ हैं (लेकीन अन्ना ने हकाल दिया)
२६) अन्ना को बीजेपी वालों ने भडकाया हैं
२७) हमने बीजली के दाम कर दिये हैं ( लेकीन बीजली ही गुल हो गई)
२८) हमने पानी के दाम भी कम कर दिये ( लेकीन तय सिमा से एक युनीट भी उपर, तो पुरे बील चुकाऔ)
२९) प्रशांत भुषण की कश्मीर राय नीजी हैं ( तो क्या अगर वे पार्टी के संस्थापक नेता हैं)
३०) १९८४ के दंगों पर SIT बननी चाहीये
३१) गुजरात दंगो मे मोदी का हाथ (तो क्या हुवा SIT ने क्लीन चीट दी)
३२) मोदी ने हमारे विधायकों को खरादने की कोशीश की
३३) मिडीया वालो ने बेनी को लेकर झुठा प्रचार किया हैं
३४) बेनी हमसे नाराज नहीं ( थोडे ही दिन बाद बेनी कजरीवाल के खिलाफ धरने पर)
३५) बेनी को बीजेपी वालों ने भडकाया हैं
३६) प्रेस काँफ्रेंस में बोल बैनी बोल रहे थे लेकीन स्क्रीप्ट बीजेपी की थी
३७) बेनी को मंत्री पद नहीं मीला इसलीये नाराज हो रहे
३८) हम शीला पर कार्यवाही करेंगे ( लेकीन cwg घौटालों की FIR में शीला का नाम तक नहीं)
३९) हमे सरकारी लोकपाल मंजुर नहीं ( जिसे उनके गुरू अन्ना ने मंजुर कर लीया)
४०) लोकपाल पर अन्ना झुक गये हैं, बहकावे मे आ गये हैं
४१) हम दिल्ली के लिये और भी मजबुत लोकपाल बनायेंगे ( लेकीन दिल्ली अधीकार क्षेत्र में ही नहीं, केंद्र के हाथ)
४२) हम लोकपाल दिल्ली राज्यसभा में रखेंगे ( बगैर गवर्नर की मंजुरी के  अंसवेधानीक तरीके से)
४३) दिल्ली का गवर्नर नसीब जंग काँग्रेसी एजेंट हैं
४४) बीजेपी-काँग्रेस की मिली भगत के कारण लोकपाल पास ना हो सका
४५) मेरे लोकपाल का वीरोध हुवा इसलीये में इस्तीफा देता हुँ
४६) मुकेश अंबानी सरकार चला रहे हैं ( इस्तीफे के ठिक पहले जो बील पास करवाया उससे अंबानी ग्रुप को ही फायदा मीला)
४७) मोदी को वोट देना मतलब मुकेश अंबानी को जीताना
४८) हम लोकसभा का चुनाव लडेंगे ( दिल्ली नहीं संभली तो क्या हुवा)

जागो और जगाऔ, देश बचाऔ !
अभी तो करोडों को जगाना हैं !!!!

क्या हैं अमेरिका समर्थित “आप” पार्टी कि हकीकत ?

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली ‘राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी)’ की एक प्रमुख सदस्य अरुणा राय के साथ मिलकर अरविंद केजरीवाल ने सरकारी नौकरी में रहते हुए एनजीओ की कार्यप्रणाली समझी और फिर ‘परिवर्तन’ नामक एक एनजीओ से जुड़ गये। इस दोरान वे सरकारी पद से लम्बी छुट्टी पर रहते हुवे भी वे सरकार और एनजीओ कि तरफ से तवख्वाह लेते रहे।

वर्ष 2006 में ‘परिवर्तन’ में काम करने के दौरान ही उन्हें अमेरिकी ‘फोर्ड फाउंडेशन’ व ‘रॉकफेलर ब्रदर्स फंड’ ने ‘उभरते नेतृत्व’ के लिए ‘रेमॉन मेग्सेसाय’ पुरस्कार दिया, जबकि उस वक्त तक अरविंद ने ऐसा कोई काम नहीं किया था।

इसके बाद अरविंद अपने पुराने सहयोगी मनीष सिसोदिया के एनजीओ ‘कबीर’ से जुड़ गए, जिसका गठन इन दोनों ने मिलकर वर्ष 2005 में किया था।

‘फोर्ड फाउंडेशन’ के एक अधिकारी स्टीवन सॉलनिक के मुताबिक ‘‘कबीर को फोर्ड फाउंडेशन की ओर से वर्ष 2005 में 1 लाख 72 हजार डॉलर एवं वर्ष 2008 में 1 लाख 97 हजार अमेरिकी डॉलर का फंड दिया गया।’’ यही नहीं, ‘कबीर’ को ‘डच दूतावास’ से भी मोटी रकम फंड के रूप में मिली।

अंग्रेजी अखबार ‘पॉयनियर’ में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक डच यानी नीदरलैंड दूतावास अपनी ही एक एनजीओ ‘हिवोस’ के जरिए नरेंद्र मोदी की गुजरात सरकार को अस्थिर करने में लगे विभिन्‍न भारतीय एनजीओ को अप्रैल 2008 से 2012 के बीच लगभग 13 लाख यूरो, मतलब करीब सवा नौ करोड़ रुपए की फंडिंग कर चुकी है।  इसमें एक अरविंद केजरीवाल का एनजीओ भी शामिल है।

एशियाई देशों की मीडिया को फंडिंग करने के लिए अमेरिका व यूरोपीय देशों ने ‘पनोस’ नामक संस्था का गठन कर रखा है। माना जा रहा है कि अरविंद केजरीवाल के मीडिया उभार के पीछे इसी ‘पनोस’ के जरिए ‘फोर्ड फाउंडेशन’ की फंडिंग काम कर रही है।

आरोप है कि विदेशी पुरस्कार और फंडिंग हासिल करने के बाद अमेरिकी हित में अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया ने इस देश को अस्थिर करने के लिए ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ का नारा देते हुए वर्ष 2011 में ‘जनलोकपाल आंदोलन’ की रूप रेखा खिंची।

इसके लिए सबसे पहले बाबा रामदेव का उपयोग किया गया, लेकिन रामदेव इन सभी की मंशाओं को थोड़ा-थोड़ा समझते हुवे इनको मना कर दिया। जिसके बाद महाराष्ट्र के सीधे-साधे, लेकिन भ्रष्‍टाचार के विरुद्ध कई मुहीम में सफलता हासिल करने वाले अन्ना हजारे को अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली से उत्तर भारत में ‘लॉंच’ कर दिया।

अन्ना हजारे को अरिवंद केजरीवाल की मंशा समझने में काफी वक्त लगा, लेकिन तब तक जनलोकपाल आंदोलन के बहाने अरविंद ‘कांग्रेस पार्टी व विदेशी फंडेड मीडिया’ के जरिए देश में प्रमुख चेहरा बन चुके थे।

एक  सुचना के मुताबिक अमेरिका की एक अन्य संस्था ‘आवाज’ की ओर से भी अरविंद केजरीवाल को जनलोकपाल आंदोलन के लिए फंड उपलब्ध कराया गया था और इसी ‘आवाज’ ने दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए भी अरविंद केजरीवाल की ‘आम आदमी पार्टी’ को फंड उपलब्ध कराया। अमेरिका के हित में हर देश की पॉलिसी को प्रभावित करने के लिए अमेरिकी संस्था जिस ‘फंडिंग का खेल’ खेल खेलती आई हैं, भारत में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और ‘आम आदमी पार्टी’ उसी की देन हैं।

‘फोर्ड फाउंडेशन’ ने अरविंद व मनीष सिसोदिया के एनजीओ को 3 लाख 69 हजार डॉलर तो शीला दीक्षित के पुत्र संदीप दीक्षित के एनजीओ को 6 लाख 50 हजार डॉलर का फंड उपलब्ध कराया है।

सुप्रीम कोर्ट के वकील एम.एल.शर्मा ने अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया के एनजीओ व उनकी ‘आम आदमी पार्टी’ में चुनावी चंदे के रूप में आए विदेशी फंडिंग की पूरी जांच के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल कर रखी है। अदालत ने इसकी जांच का निर्देश दे रखा है, लेकिन केंद्रीय गृहमंत्रालय इसकी जांच कराने के प्रति उदासीनता बरत रही है। बाबा रामदेव के खिलाफ एक ही दिन में 80 से अधिक मुकदमे दर्ज करने वाली कांग्रेस सरकार की उदासीनता दर्शाती है कि अरविंद केजरीवाल को वह अपने राजनैतिक फायदे के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

दरअसल विदेश में अमेरिका, सउदी अरब व पाकिस्तान और भारत में कांग्रेस व क्षेत्रीय पाटियों की पूरी कोशिश नरेंद्र मोदी के बढ़ते प्रभाव को रोकने की है। मोदी न अमेरिका के हित में हैं, न सउदी अरब व पाकिस्तान के हित में और न ही कांग्रेस पार्टी व धर्मनिरेपक्षता का ढोंग करने वाली क्षेत्रीय पार्टियों के हित में।  मोदी के आते ही अमेरिका की एशिया केंद्रित पूरी विदेश, आर्थिक व रक्षा नीति तो प्रभावित होगी ही, देश के अंदर लूट मचाने में दशकों से जुटी हुई पार्टियों व नेताओं के लिए भी जेल यात्रा का माहौल बन जाएगा। इसलिए उसी भ्रष्‍टाचार को रोकने के नाम पर जनता का भावनात्मक दोहन करते हुए ईमानदारी की स्वनिर्मित धरातल पर ‘आम आदमी पार्टी’ का निर्माण कराया गया है।

‘आम आदमी पार्टी’ व  उसके नेता अरविंद केजरीवाल की पूरी मंशा को इस पार्टी के संस्थापक सदस्य व प्रशांत भूषण के पिता शांति भूषण ने ‘मेल टुडे’ अखबार में लिखे अपने एक लेख में जाहिर भी कर दिया था, लेकिन बाद में माना जाता हैं कि प्रशांत-अरविंद के दबाव के कारण उन्होंने अपने ही लेख से पल्ला झाड़ लिया और ‘मेल टुडे’ अखबार के खिलाफ मुकदमा कर दिया। ( संक्षिप्त लेख, आभार : http://jayhind.co.in/reality-of-arvind-kejriwal/ )

“आप” नेताओ के कुछ और तथ्य :
★ शांति भुसन का आतंकवादी शौकत हुसैन गुरु जिसने 2001 में संसद पर आतंकी हमले किये थे उसको बचाने का भरसक प्रयत्न किया।
★ प्रशांत भूषन ने हिन्दुओं को आतंकी खुले आम आतंकी कहा जबकि अफजल गुरु की फांसी पर दुःख जताया और जनमत के आधार पर ये कश्मीर को भारत से अलग करने के भी पक्षधर हैं।
★ केजरीवाल पर कई घोटाले का के तथ्य छुपाने का आरोप भी लगा हैं जिनमे कोयला घोटालों में नविन जिंदल पर चुप्पी हैं।
★ अरविन्द केजरीवाल के इनकम टैक्स विभाग में कार्यरत रहते हुवे उनका और उनकी पत्नी का सालों तक कोई ट्रान्सफर नहीं हुवा क्यूँकि इसके लिए इनकम टैक्स विभाग को सोनिया गाँधी ने चिट्ठी लिख रखी थी।
★ योगेन्द्र यादव पहले राहुल गांधी के लिए भाषण लिखा करते थे और इनका IAC आंदोलन में भी कभी कोई योगदान नहीं रहा हैं।
★ चुनाव के पहले शीला दिक्सित को भस्टाचार कि प्रतिमूर्ति बताने वाले अब केजरीवाल अब उनपर कार्यवाही से पहले उनके खिलाफ विपक्षी दल से सबुत मांग रहे हैं।
★ कजरीवाल ने एक बयान में ये भी कहा था की बटला एनकाऊंटर फर्जी था लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी वास्तविकता को माना।
★ मुजफ्फर नगर दंगो में भी इन लोगों ने निराधार मोदी और RSS को जिम्मेदार ठहराने कि कोशिशे की।

जागो और जगाऔ, देश बचाऔ !!!

जय हिंद!

नरेंद्र मोदी कि हत्या कि साजिशो पर पर्दा क्यूँ ?

टारगेट नरेंद्र मोदी

टारगेट नरेंद्र मोदी

पटना ब्लास्ट को मुजफ्फर नगर के दंगो से जोड़ने की साजिश !!!

> इन ब्लास्ट का निशाना जहां आम जनता थी वहीँ मुख्य निशाना नरेंद्र मोदी थे क्यूंकि जहां से मोदी ने भाषण दिया उसी जगह से एक जिन्दा बम पहले ही बरामद किया गया था…हुंकार रैली में नरेंद्र मोदी को मानव बम के जरिए मारने की साजिश थी!
http://m.aajtak.in/story.jsp?sid=745810&secid=13 Continue reading

क्या मोदी समर्थक हैं मोलाना मदनी !!!

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मित्रों,  मैं भी यह मानता था और कई दुसरे लोग भी मोलाना मदनी को मोदी समर्थक के रूप में पेश किये जा रहे हैं…

लेकिन आपकी अदालत मे मदनी कि बोली से साफ-साफ नजर आ रहा हैं कि मदनी साहब मात्र मुस्लिमो के हित की बात करने वाले ही नेता हैं और उनकी सोच में मुस्लिम समुदाय का भला देश के भले से बडी प्राथमिकता हैं। Continue reading