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​जनता का राज… क्या सुना था कभी!

​जनता का राज… क्या सुना था कभी!

🚩 पहले झटके में लोगों ने दो फिल्में क्या फ्लाप कि शाहरुख खान के दिमाग से असहिष्णुता का भूत उतर गया, हर जगह सहिष्णुता नजर आने लगी। और दुसरे झटके में खुद कि फिल्म से पाकिस्तानी अदाकारा को बाहर निकालना पड़ा। यह पुरी तरह से जनता कि भावनाओं के आगे घुटने टेकने जैसा बड़ा फैसला था। 
🚩 अमीर खान को स्नेपडील व भारतीय पर्यटन के विज्ञापनों से लोगों के दबाव में लात क्या पड़ी अब उनकी दुसरे नंबर कि बीवी को देश में डर लगना ही बंद हो गया। 
🚩 ये लोगों उमड़ता गुस्सा हैं… जिसने करण जौहर को भी एहसास कराया कि सिर्फ उसकी दुनिया ही सबकुछ नहीं हैं और सामान्य लोगों के बिना उसकी कोई औकात नहीं। 

🚩 भारत के टुकड़ों पर पले ओमपुरी ने जिस तरह भारतीय सेना का अपमान किया उसके बाद लोगों ने जो उसकी रही-सही इज्जत की ऐसी धज्जियाँ उड़ाई कि सिधे अब वह नाक रगड़ते हुवे बलिदानी सैनिक के परिवार से मिलने पहुंच गया।

🚩 जनता के ही कारण जो समाचार चैनल कल तक खुद को ‘देश का नंबर एक समाचार चैनल‘ बताने का दावा सुबह-शाम ठोका करता था और वे बिकाऊ पत्रकार जिन्होंने स्वयं को देश के पत्रकार-जगत का पिलर मान बैठे थे, आज अपनी विश्वसनीयता ही खो बैठे हैं। वह जनता ही हैं जिसने एसे भ्रष्ट राजनैतिक दल जिसने सर्वाधिक देश पर राज किया, उसे आज अपने अस्तित्व बचाने को संघर्षरत स्थिति में ला कर खड़ा कर दिया। 

🚩 यह इस बात का सिधा प्रमाण हैं कि अपनी ऐशो-अय्याशी में डूबे ऐसे भांड कलाकारों, बुद्धिजीवियों , पत्रकारों और नेताओं ने ना तो जनता कि भावनाओं को कभी कोई महत्व दिया और ना ही आज भी सहजता से महत्व देना स्वीकार कर पा रहे। 

👆बेहद सरल शब्दों में यदि कहे तो जिसकी रग-रग में भारतीयता हैं वह आज “अच्छे-दिन” का सुखद अनुभव कर रहा….

— जो जनता कि भावनाओं के साथ स्वयं को जितना जल्दी ढाल रहा, वही समझदार नजर आ रहा हैं…. 

— जो ठोकर खा कर फिर स्वयं को ढालने कि कोशिश कर रहा, उसकी मूर्खता उभर रही…. 

— और जो ठोकर खाकर भी ऐठ रहा, वह तो अपने धूर्त होने का परिचय दे रहा। 

ऐसा इसलिए क्योंकि मुर्ख लोकतंत्र को समझ नहीं पा रहे तथा धूर्त से अपनी अय्याशी छुट ही नहीं सकती। लेकिन सच्चाई तो यह हैं कि यही भारत का वास्तविक लोकतंत्र हैं। “लोकतंत्र में जनता का राज” … अब तक सिर्फ किताबों में पढ़ते आये थे, आज वही वास्तविक स्वरूप हैं और ध्यान देना… _अभी तो यह शुरूवात हैं!_

कुछ ऐसे लोग भी हैं जो अब भी यही गुमान में हैं कि यह तो मात्र “संघीयों” का षड्यंत्र हैं …. तो उनके लिए सुझाव हैं कि अब वे संपूर्ण राष्ट्र को ही एक “संघी” मानकर चले… 

…. क्योंकि मेरा देश अब वाकई बदल रहा हैं।

|| वंदेमातरम् || 🚩🚩🚩

प्रेश्यावृत्ती में लिप्त पत्रकारों के बुरे दिन

प्रेश्यावृत्ती में लिप्त पत्रकारों के बुरे दिन

आज जब हर तरफ़ बिकाऊ पत्रकारों का महाजाल नजर आता हैं वहीं सुरेश चव्हाण व सूधिर चौधरी जैसे पत्रकारों को पत्रकारिता बेहद अदभुत उदाहरण बनकर उभर रही हैं।

सुदर्शन न्यूज के सुरेश चव्हाण व जी न्यूज के सूधिर चौधरी ने बेधड़क व बेहिचक देशहित कि पत्रकारिता से सारे बिकाऊ पत्रकारों के होश उडा कर रख दीए हैं। देश के हर अति-संवेदन शील मसलों पर भारत विरोधी एजेंडा परोसने वाले दलाल पत्रकार बरखा दत्त, रविश कुमार, राजदीप सरदेसाई, करण थापर, पुन्यप्रसुन्न वाजपेयी, राहुल कवल व दीपक चौरसिया जैसे तमाम पत्रकार जगत के दिग्गज मानेजाने वालों कि मिलावटी पत्रकारिता कि धज्जिया उडाकर रखदि हैं।

बिकाऊ पत्रकारों ने जिस तरह निष्पक्ष व सेक्युलर निती को मुखौटा बना कर भ्रष्टाचारियों, कट्टरपंथियों व गद्दारों को जो सुरक्षा कवच दे रखा था वह तो धरासाहि हुवा ही हैं साथ ही नौबत यहाँ तक पहुंच गई हैं कि अब इन पत्रकारों को स्वयं के लिये सुरक्षा कवच खौजने कि नौबत आ पड़ी हैं। इन गद्दारों को सुज ही नहीं पा रहा कि हर पल उजागर होता अपना काला चेहरा ये किसकी चोली में छुपाये।

एक तरफ जहाँ इन बिकाऊ पत्रकारों व इनसे जुड़े AajTak, NDTV, ABP NEWS, IndiaToday, TimesOfIndia, IndianExpress, TheHindu जैसे नामी चैनल व अखबार अपनी विश्वसनीयता खोते जा रहे वहीं सोशियल मिडिया पर हर रोज जनता द्वारा इनको बुरी तरह लताड़ा जा रहा। इसी तरह सुदर्शन न्यूज, जी न्यूज, DNA, दैनिक भास्कर व प्रातःकाल जैसे तमाम देशभक्ति कि पत्रकारिता करने वाले माध्यम जनता कि आवाज बनकर उभरने लगे हैं।

देश में ही रहकर देशभक्त पत्रकारों कि राह कितनी कठीन हो सकती हैं यह सुदर्शन न्यूज व जी न्यूज चैनल को मिल रही धमकि से पता चल रहा। दिन के लगभग सैकडों काल पकिस्तान, दुबई, सीरीया जैसे देशों से इन चैनलों को मिल रहे जिसमें चैनल व पत्रकारों को उडाने कि धमकिया मिल रही। भारतीय सुरक्षा एजेंसीयों ने भी ऐसे हमलों कि आशंकाऔ कि पुष्टि कि हैं लेकिन फिर भी इनके हौंसले अडिग रूप से बुलंद हैं।

देशभक्त पत्रकारिता से बौखलाए विरोधियों ने सुरेश चव्हाण व सूधिर चौधरी जैसे पत्रकारों को नरेंद्र मोदी का पट्ठा व MOUTH PIECE जैसे कई नाम देने कि कोशिश कि लेकिन सोशियल मिडिया पर मोर्चा संभाली जागृत देशभक्तों के आगे विरोधियों को मूँह कि खानी पड़ रही। जनता ने बहुरूपियों व देशभक्तों को पहचानना सीख लिया हैं।  वे जानते हैं कि जो सत्य बताये वह सत्यवादी कहलाता हैं ना कि किसीका निजी पट्ठा या MOUTH PIECE।

वास्तव में भारतीय राजनैतिक व समाजिक परिवेश में हो रहा यह बदलाव बेहद अदभुत व अभुतपूर्व हैं। हालांकि बदलाव कि यह प्रक्रिया अभी शुरूआती जरूर हैं किंतु मात्र आरंभ ने ही भारत के टुकड़े करने वाले दुश्मन देशों व ताकतों के सपनों को चकना चूर करना शुरू कर दिया है। भारत विरोधी एजेंडा के जरिये अपना भविष्य बनाने वाले भाडे के टट्टूऔ के लिए अब अलार्म बज चुका हैं कि वे प्रेश्यावृत्ती के धंधे से बाज आये अन्यथा उनका भविष्य तो दुर वर्तमान भी संभलना मुश्किल हो जायेगा। यह भारत के मजबूत भविष्य कि शुरूवात हैं… यही वास्तविक #अच्छेदिन भी हैं।

हम आम जन देशभक्त पत्रकारों को समर्थन दे कर व #Presstitute पत्रकारिता को नकार कर देशहित में स्वयं कि भुमिका भी सुनिश्चित कर सकते हैं और हमें ऐसा करना ही होगा।

।। जयहिंद।। वंदेमातरम्।।

#JaiHindKashmir Thank You Zee News

#JaiHindKashmir
#AsliKashmir
#AdharmInKashmir

कश्मीर पर आजाद रिपोर्टींग के तहत जब @ZeeNewsHindi पर @sudhirchaudhary ने अपने @DNA में हकीकत बयां कर देने वाली कश्मीरी देशभक्तों कि दास्तां चलायी….

कश्मीर का भारत विरोधी चेहरा बनाने वाले कट्टरपंथियों और दिखाने वाले आतंकप्रेमी पत्रकारों के पैरों तले जमीन खिसकने लगी…

खसकती कैसे नहीं…. भारत विरोधी एजेंडे के तहत कश्मीर पर करोडो रूपये बर्बाद करने के बाद भी आखिर जी न्यूज ने देशभक्त कश्मीरियों को टीवी पर दिखा कर इनकी दिनरात लगा कर बिछाई गयी आतंक कि चादर पल में उडने जो लग गई…

नतीजतन,  जीन कश्मीर के जिन हिस्सों से रिपोर्टींग कि गई थी वहाँ के लोगों को धमकाने का जिम्मा कट्टरपंथियों ने संभाला….

और जी-न्यूज कि रिपोर्ट को बनावटी साबित करने का जिम्मा मिडीया के आतंकप्रेमी दलाल पत्रकारों ने संभाला…

जहाँ कट्टरपंथियों ने देशभक्त कश्मीरियों को व उनके बच्चो को जान से मारने कि धमकी दे डाली….

वहीं डिजाइनर पत्रकारों ने लेख लिखकर यह जाहिर करने की कोशिश  शूरु कर दी कि जी न्यूज कि इस रिपोर्ट के खिलाफ गांव के लोग जी न्यूज के खिलाफ उतर रहे और कह रहे कि यह खबर झूठी हैं…

मतलब चंद भाडे के टट्टू काले झंडे दिखाए या पत्थरों से सेना पर हमला करे वो सच…. और जो कश्मीरी भारत माता की जय के नारे लगा कर सामने आये वे बनावटी….

इन देशभक्त कश्मीरियों पर मात्र कुछ घंटो पर इस कदर दबाव डाला गया कि उन्हे जी न्यूज चैनल को फोन कर रिपोर्टींग बंद करने को कहना पडा… करते क्यूं नहीं आखिर बाल-बच्चों कि जान पर जो आ पडी….

आज जी न्यूज को भी इन कश्मीरियों कि परवाह करते हुए अपनी रिपोर्टींग में इनके चेहरे छुपाने पड़े… लेकिन सवाल देश का था इसलिये रिपोर्टींग जारी रही….

इस आजाद रिपोर्टींग से जो मुद्दे कि बात उभरकर आई वह यह हैं कि कश्मीरी आवाम पर किस कदर विदेशी पैसों पर पलने वाले कट्टरपंथियों अपना कब्जा कर लिया हैं….

ऐसे दंगो व आतंक से इन कट्टरपंथियों का धंधा तो दिनरात फलफूल रहा हैं लेकिन आम कश्मीरी दो वक्त कि रोटी के लिये भी कर्फ्यू से बंद कमरे तरस रहा हैं।

प्रश्न यहीं हैं कि हम भारतीय क्या कर सकते हैं…..

— हमें देशभक्त कश्मीरियों कि आवाज को ताकत देने के लिये इस सच्चाई को जन-जन तक पहुंचाना  होगा…
— हर वो आतंकप्रेमी पत्रकार जो भारत विरोधी एजेंडे को बढावा देने के लिए छटपटाता दिखता हैं,  उसका बहिष्कार करना होगा
— हमारी इन दोनो पहलों से जहाँ देशभक्त कश्मीरियों को हिम्मत मिलेगी वही कट्टरपंथियों के हौसले टुटेंगे
— भारतीय सेना को पुरी छुट व समर्थन मिलता रहे इसके लिए भी राष्ट्रव्यापी अभीयान निरंतर चलना चाहिए

जयहिंद, जय भारत

।। वंदेमातरम्।।

बिकाऊ पत्रकारिता – प्यास पर करोड़ों का बिल!

” लातूर में जल पहुंचाने के लिये दो कोरोड का बील”
    मोदी विरोधी बिकाऊ पत्रकारिता का उदाहरण

पिछले दशक से ज्यादा सूखे की मार झेल रहे लातूर में पहली बार किसी सरकार ने अपनी संवेदनशीलता को दिखाते हुवे करोडो लिटर पानी ट्रेन के जरिए पंहुचाकर विषम परिस्थितियों में सरकार द्वारा अदा की जाने वाली भुमीका को एक नये सिरे से स्थापित किया।

जहाँ पिछली सरकारों ने एसी स्थिति का राष्ट्र विरोधी लाभ लेते हुए गोहत्या व धर्मपरिवर्तन जैसे अनगिनत साजिशों को रचा वहीं मोदी सरकार के इस अभुतपूर्व उपलब्द्धीयों कि जितनी सराहना की जाये वह कम होगी।

लेकिन मोदी विरोधी विदेशी मशीनरीयों के हाथों कि दलाल मिडिया-जगत को सरकार कि यह पहल हजम नहीं हो पा रही। वे जनता के मन में बढ रहे मोदी नाम के विश्वास से छटपटा रहे और इस विश्वास को धुमील करने कि ही कोशिश में ‘प्यास पर करोडो के बील’ जैसी खबर आज लगभग देश के हर प्रमुख अखबारों में छपी मिल रही।

एक सामान्य व्यवहारिक तौर पर मुद्दा में गंभीरता शुन्य के बराबर हैं। यदि करोड़ों का बिल बना तो भी यह रेल प्रशाशन के वित्तीय विभाग का एक निर्धारित कार्य हैं। क्यूंकि यदि रेल विभाग से गाड़ी चली हैं तो उसके खर्च को दर्ज करना एक स्वाभाविक प्रक्रिया हैं। यदि बिल रेल विभाग द्वारा महाराष्ट्र सरकार को भेजा भी गया तो भी यह एक औपचारिकता हैं। इस बिल का भुगतान या समायोजन केंद्र सरकार या राज्य सरकार का विषय हैं। किसी भी रूप इसे लातूर के लोगो से तो वसूला नहीं जाना हैं लेकिन फिर भी इस तरह की ख़बरों को उठा कर लोगों की संवेदनाओ को भड़काने का प्रयास किया जा रहा। यह तो सौभाग्य हैं की दोनों, राज्य व् केंद्र, सरकारें भाजपा की हैं अन्यथा यह भी आरोप लगते देर न लगती की मोदी ने राज्य की कांग्रेसी सरकार को बिल थमाया दिया!

मोदी सरकार कि यह वास्तव में एक बडी पहल थी क्यूँ की भुतकाल कि सरकारों ने भले ही एसी स्थितियों को निर्दयता से नजर अंदाज किया हो किंतु अब भविष्य की सरकार एसा नहीं कर सकेगी।

यह पहली बार नहीं की जब बिकाऊ मिडिया ने मोदी सरकार के अथक व अभूतपूर्व प्रयासों पर अपनी वेश्यावृत्ति से भी औछीं पत्रकारिता का परिचय दिया हैं।  पूर्व में जब जन. वि. के. सिंह द्वारा सैकड़ों भारतीयों को युद्ध कि जमीन से सुरक्षित वापस लाने जैसा बेहद सराहनीय कार्य को अंजाम दिया था तब भी बजाय कि उनकी तारीफ करे, उनके #Presstitute वाले बयान का बखेडा खडा कर उन्हे घेरने कि कोशिश कि गई थी।

आज जनता कि जागरूकता ही पत्रकार रूपी मक्कार भेडीयों का एक मात्र करारा जवाब हो सकती हैं इसलीए सजग रहे,  सतर्क रहे।

।। वंदेमातरम्।।

#WCFIndiasPride : Will Fight Back !

#WCFIndiasPride : Will Fight Back !

भारत में भारतीय संस्कृती को मिटाने वाली ताकतों ने अब आर्ट-आफ-लीवींग को नीशाना बनाया| दिल्ली में यमुना नदी के किनारे होने वाले आर्ट-आफ-लिवींग के अतंराष्ट्रीय सांस्कृतीक सम्मेलन जो कि यमुना नदी के किनारे ११ से १३ मार्च ११ से १३ मार्च को निर्धारीत हैं उसके पाछे तरह-तरह के विहाद फैलाया|

ये वही ताकते हैं जिन्होने कई तरीकों से हमारे पुज्य साधु-संतो के खिलाफ तरह-तरह के षडयंत्र रचते आ रहे हैं और जिस तरह साधु-संतो के पीछे बिकाऊ मिडीया भी अपनी एडीचोटी का जोर लगाती आया हैं उसी तरह इस बार भी मिडीया व बिकाऊ पत्रकार का एक वर्ग ने अपना बजार लगाने कमर कस था|

पर्यावरण के रक्षक उस समय कहाँ मर जाते हैं जब यमुना तट पर बडी-बडी बिल्डींगे निर्माण होती रहती हैं…मात्र तीन दिवसीय सांस्कृतीक कार्यक्रम में रौडे अटकाने के लिये सारा पर्यावरण प्रेम उमड पडा!!!

कुछ ही दिनो पहले पाकिस्तानी गायक गुलाम अली के कार्यक्रम का जब विरोध उठा था तब सारे विपक्ष व बिकाऊ मिडीया ने एक सुर में उसका साथ दिया था लेकिन भारत में ही भारतीय सांस्कृतीक कार्यक्रम के पक्ष में किसी ने आवाज बुलंद नहीं की!!!

यह एक सांस्कृतीक आतंकवाद का ही हिस्सा हैं जिसमें भारतीय संस्कृती को दबा कर खत्म करने का षडयंत्र चल रहा हैं जिसके तहत ही हमारी संत परमपरा पर रह-रह कर हमले होते रहे हैं|

हमे यह ठान कर चलना हैं कि इन मक्कारों कि चलने नहीं दि जायेगी… देश के हर राष्ट्रप्रेमी दिवार बन कर इनके विरोध में खडा नजर आयेगा

|| वंदेमातरम् ||

स्मार्ट फोन रखते हो तो स्मार्ट भी बनो

### क्या आप भी स्मार्ट फोन रखते हैं ###

मुंबई लोकल के फर्स्ट-क्लास में फिल्मे शेयर करते वक्त एक ने दुसरे से कहा – यार तेरा (फोरेन ब्रांड) स्मार्ट फोन बहोत स्लो (धीमा) हो गया हैं अब बदली करले…

दुसरे ने हल्की सी मुस्कान देते हुवे बताया – अरे स्लो भले ही हैं लेकिन आज भी यजफुल हैं, दो साल हो गये, १६ हजार में खरीदा था…पुरा पैसा वसुल किया … कम से कम मेने ६० से ७० फिल्मे देखी होगी इस पर … एक से एक धाँसु! और वो भी सब-के-सब इस लोकल में ही… एक बार थियेटर जाता तो कम से कम २५० रू लगना ही था और ३/४ घंटे बीगडते वो अलग…लेकिन इस पर तो एक दम फ्रि! साथ ही साथ गेम-म्युजीक कि तो सदाबहार!

उसकी बातो से आम तौर से सही मानी जा सकती हैं लेकिन मेरी सोच को थोडा धक्का लगा| शायद इसलिये कि मेरे लिये स्मार्ट-फोन के मायने कुछ अलग ही थे| इस तर्ज पर मेने भी अपने स्मार्ट फोन कि समीक्षा कर ली|

मेरा स्मार्ट फोन (स्वदेशी ब्रांड) वह तो इतना किमती नहीं, मात्र लगभग ६ हजार…और लिये हुवे भी करीब-करीब दो साल… अब आकलन यह लगाना था कि उपयोग कैसा हुवा| उन महाशय का सिधा हिसाब था कि २५० थियेटर कि टिकट और ६०-से-७० फिल्मे, समय कि बचत, गेम्स-म्युजीक जैसे अतिरिक्त लाभ| लेकिन मेरा हिसाब इतना सरल नहीं हो सकता था क्यों कि ना तो मेने इस पर कभी फिल्मे देखी नहीं और ना ही गेम-या-म्युजीक|

तो आखिर मेने स्मार्ट-फोन का इस्तेमाल किया कैसे?

सवाल सही हैं और मेरी नजर में इसका जवाब भी बेहद किमती हैं| अब सोचीये…जब इस प्रश्न के जवाब को ही मेने किमती बता दिया तो जो इस्तेमाल किया होगा उसकी किमत कितनी होगी?

नहीं…नहीं…मेने इससे कोई व्यापार नहीं किया और ना ही किसी औन लाईन इनकम जैसी स्कीम से जुडा….बल्की मेने तो अपने स्मार्ट फोन से जी-जान लगा रखी हैं खुद को जागृत कर दुसरो को जागृत करने की|

हाँ… जागृत| मेने अपने स्मार्ट-फोन से मात्र सोशियल – मिडीया के लिये उपयोग किया| सोशियल मिडीया जिसमे Facbook, Twitter, Whatsup व Hike जैसे एप्लीकेशन, जिसने मुझे कई जाने अनजाने लोगों से जोडा…जो कि अपने ही समाजीक वर्ग का हिस्सा हैं|

लेकिन इससे फायदा क्या हुवा ?

बेहद क्रांतीकारी!  मैं उनसे जुड सका जौ मेरी ही तरह समाज में रहते हुवे भारतीय सभ्यता, संस्कृती, सुरक्षा व अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दो के लिये ना केवल चिंतीत हैं बल्की अपने-अपने तरिके से मातृभुमी कि सेवा में लगे हुवे हैं|

मेने उनके विचारो को जाना, मेने अपने विचार रखे, कई लोगों ने मुझे कुछ समजाया और कईयों को मेने कुछ सिखाया| इस तरह सोशियल मिडीया से जुडे लोगों के स्वत: के भीतर अनेको तरह के वीचारों का मंथन सा  चल पडा| आज इस मंथन से देश के हालात, समाज व देश के विरूद्ध चल रही साजीशे व अनगीनत प्रतीष्ठीत बहरूपीये जिनको मेने कई बार जाने-अनजाने में अपने सिर आँखो पर बैठा लिया था उनसे जुडी कई गुत्थीयो को सुलझाने में बडा सहयोग मिला|

साथ-ही-साथ उन महान विभुतीयों से भी अवगत हो सका जिन्होने राष्ट्र के लिये अपना सर्वस त्याग दिया व आज भी देश कि दशा बदलने में निरंतर लगे हुवे हैं|

क्या कहा?
अखबार ? न्युज चेनल ?
इनसे भी तो यह सब पता चल सकता था !!!

अच्छा-अच्छा…समझा…..मिडीया कि बात कर रहे हो…ठिक याद दिलाया| पहले मेने भी यही भ्रम पाल रखा था कि मिडीया विश्व पर नजर रखने की हमारी आँखे हैं| मिडीया वाले हमें तरह-तरह कि जानकारी दे कर अवगत कराते हैं| लेकिन जबसे सोशियल मिडीया का दामन पकडा हैं मेने….मुझे इस खबरी-मिडीया के नाम से नफरत सी हो चुकी हैं| क्युँ की जीस मिडीया को हम विश्व पर नजर रखने कि आँखे समझते हैं वह तो दरअसल विश्व कि हकिकत से अनजान रहने के लिये नींद कि मिठी डोस देने वाला वो नमक हराम निकला जिसे हमने अपने ही घरों में अपनी मेहनत की कमाई खर्च कर बेहद आदर से पाल रखा हैं|

सोशिय-मिडीया ने मेरी ही तरह के लोगों के एसे-एसे ‘खतरनाक’ भ्रमो को तोडा जिन्हे यदी हम पालते रहे तो ना केवल हम तीसरी गुलामी कि चौखट पर होंगे बल्की हमारे भारत देश के ही कई छोटे-छोटे तुकडे हो जायेंगे और उसके बाद भी समस्या दुर नहीं होगी और खत्म होने तक एक दुसरे से लडते रह जायेंगे|

हो सकता हैं कई लोग शायद मेरी बातों पर विश्वास ना कर पाये…उनसे यही नीवेदन रहेगा कि भाई पहले तनीक पाकिस्तान व बंगलादेश को ही देख लो…अलग हमसे ही हुवे और आज हमसे ही दुश्मनी पाल रहे….और फिर, आज देश का नजारा भी देख लो…

कश्मीर मांगे आजादी…
बंगाल मागें आजादी….
केरला मांगे आजादी और
मनीपुर भी मांगे आजादी …
भारत कि बर्बादी तक….

कुछ सुनाई दिया!!! ना अब यह ना कहना कि ये मिडीया ने ही बताया…यह तो जब सोशियल मिडीया ने आवाज उठाई तब जाकर उन्हे बताना पडा| दुसरी बात… यह नारे पहली बार नहीं लगे हैं…. ये तो सालों से लग रहे हैं….लेकिन खबरी-मिडीया ने तो इसे सालो-साल दबाये रखा था| सोचीये आज जो विपक्ष में रहते हुवे भी इनका समर्थन करने उतर आये हैं, उनके सत्ता में रहते किस-किस तरह से इन्हे आसरा दिया होगा….लेकिन खबरी मीडीया…चुप्प!!!! कम शब्दो में कहें तो खबरी-मिडीया आस्तीन के साँपो को छुपाने, झुठ फैलाने व लोगों का ध्यान भटकाने का जरीया हैं|

स्मार्ट फोन में समाये सोशियल मिडीया ने भारत कि गौरवशाली संस्कृती, सभ्यता, वास्तवीक इतिहास व वर्तमान कि गंभीर समस्या के प्रती ना केवल मुझे जागृत किया बल्की मेरे जैसे लाखों लोगों कि आँखे खोली|

अब एसे ही लाखों लोगों कि फौज दिनरात जुटी हुई हैं देश के करोडों को जागृत करने में और सबका लक्ष्य यही हैं कि जनता को जागृत कर इस देश के रक्षक स्वरूप उभरना….और इसका जरीया होगा यही स्मार्ट फोन हैं|

यकीन मनों, चंद मुट्ठी भर सेना १२५ करोड कि आबादी वाले देश कि सुरक्षा कि जिम्मेदार अकेले कंधो पर उठाना संभव नहीं हो पायेगा…और यदी हम रक्षक बन कर देश कि सेवा में खडे हो जाये तो गद्दारों का हमारी तरफ आँख भी उठाना असंभव हो जायेगा| और खासकर यह तब ज्यादा जरूरी हो जाता हैं जब सिमा पर खडे दुश्मनों से ज्यादा गद्दार देश के भीतर और वो भी आप और हमारे बीच ही पल रहे हो|

कुछ बुद्धीजीवी इस तरह के विचारों से अपनी-अपनी दिलचस्पी का नाम दे कर कन्नी काट सकते हैं….वे वास्तव में “अती बुद्धीमान” हैं|

माना कि मेरा स्मार्ट फोन धीमा जरूर हो लेकिन आज भी वो शब्दो के एसे परमाणु धमाके किये जा रहा हैं जिनके आगे गद्दारी-कि-बिमारी अब बोनी नजर आने लगी हैं|

हाँ….तो … मेरा आँकलन चल रहा था कि मेरे स्मार्ट फोन के उपयोग से मैने अब तक कितना पैसा वसुल किया….मेरे खयाल से अब यह आँकलन बेईमानी हैं…

उस देश के लिये कि गई अपनी देशभक्ती कि किमत मैं क्या लगाउँगा जिसके लिये करोडों ने अपना जिवन न्यौछावर कर हँसते-हँसते फाँसी पर जुल उठे, चलती तोप के आगे सिना लगा कर खडे हो गये, आग के कुँए में कुद कर जौहर रच दिया|

वे धन्य थे …
मैं तो कुछ नहीं….
सच कहता हुँ….कुछ भी नहीं….

अंत में कुछ बाते:
१) यदी आपने अभी तक अपने स्मार्ट-फोन से सोशियल मिडीया नहीं वापरा या मात्र स्वयं के नीजी दोस्तो तक ही सिमीत रखा हैं…
२) यदी आप अपने सोशियल मिडीया में अब तक एक भी देशभक्तों के ग्रूप से नहीं जुडे हैं…
३) यदी आपने अब तक अपने सोशियल मिडीया से देशहित की खबरों को दुसरों तक नहीं पहोचाया हैं…

तो माफ करना… बेहद दु:ख से कह रहा हुँ…
आपका फोन भले ही “स्मार्ट” हो…
आपको “स्मार्ट” बनने में अभी और वक्त लगना हैं !!!

|| वंदेमातरम् ||

मुद्दा राधे-माँ, नीशाना संत समाज!

“राधे-माँ” एक बकवास हैं जीसे पैसों ने भक्ती का चोंगा पहनाया व अन्य पुँजीपतीयों ने या तो अपनी मुर्खता से या स्वयं के स्वार्थ के लिये सिर बैठाया|

लेकिन हमारी हिंदु विरोधी मिडीया को एसे ही मुद्दो कि तलाश रहती हैं जिसे दिन रात उठा कर वे हिंदु साधु-संतो की छवी धुमील कर सके जिससे हिंदुऔ का विश्वास धर्म गुरूऔ से पुर्णतया उठ जाये| घौर करे, हर थोडे अंतराल के बाद मिडीया किसी-ना-किसी “हिंदु” संत को मुद्दा बनाता ही हैं|

पहली बात तो यह कि राधेमाँ कोई बडा मुद्दा नहीं हैं, ना तो उसके अनुयायीईयो कि संख्या इतनी अधीक हैं और ना ही आम लोग उसके पास जाते थे (मात्र पुंजीपती) लेकिन फिर भी राष्ट्रीय दर्जो के न्युज चेनल व पत्रकारों ने अपना औंछेपन दिखाते हुवे इस मुद्दे पर राष्ट्रीय बहस छेडने कि कोशिश की वह भी तब जब देश के सामने अन्य कितने हीं गंभीर मुद्दे खडे हैं!!! मतलब यह की बीकाऊ पत्रकार एक और जहाँ इस मुद्दे के जरीये हिंदु धर्म को बदनाम कर रहे है वहीं लोगों का ध्यान मुख्य मुद्दो से भटकाने में लगे हैं|

यहाँ तीन पहलुऔ से इस विषय पर विचार करना बेहद जरूरी हैं….

पहला: हमारी मिडीया में किसी भी हिंदु साधु या संत का नाम कब-कब आता हैं?

थोडा भी यदी कोई इस पर विचार करेगा तो उसे मात्र यही जवाब मिलेगा कि यह वही मौका होता हैं जब या तो किसी संत ने कोई कुर्म किया होगा या फिर उस पर जबरन कुकर्म का आरोप किसी ने मढा होगा या फिर किसी संत के किसी कथन को तोड मरोड कर मिडीया को उसे मिडीया को विवादित बनाना होगा|

दुसरा: क्या हिंदु धर्म के सभी साधु-संत मात्र ठगी हैं? क्या कोई संत कभी भी समाज कल्याण व धार्मीक मुद्दो पर जनहित के उपदेश देता ही नहीं? क्या देश में कोई संत समाज व देश के लिये भलाई कार्य नहीं कर रहा?

इसका भी जवाब यदी हम थोडा भी खंगालेंगे तो जवाब स्पष्ट हैं, नहीं| हमारी संस्कृतीक को आज तक संजोय रखने में हमारे संतो ने ही अहम भुमीका नीभाई हैं व उनके हि प्रयासों से आज तक धर्म सुरक्षीत हैं| सृष्टी कल्याण के लिये लाखों संत आज भी अपना संपुर्ण जीवन तपस्वी के समान गुजार रहे है|

लेकिन क्या हमारी हिंदु विरोधी मिडीया ने एसे किसी भी संत को हिंदु समाज से परिचीत करवाया? साधु-संतो के विवादीत बयान को मुद्दा बनाने वाली विषेली मिडीया ने क्या किसी भी संत के अमृत वचनों को सुनाया? संतो के कुकर्मो का हिसाब रखने वाली देशद्रोही मिडीया ने क्या संतो द्वारा देश हित में कि गई तपस्या का लेखा जोखा कभी पेश किया?

— सैकडों संतो ने गंगा को बचाने के लिये अन्न-जल त्याग कर प्राण न्योछावर कर दिये मिडीया ने मुद्दा नहीं बनाया!!!

— लाखों संतो ने गाय रक्षा हेतु विक्राल आंदोलन खडे किये लेकिन मिडीया ने किसी आंदोलन को कवर नहीं किया!!!

— देश पर आने वाली हर आपदा (बांढ, सुखा, भुकंप) में संतो के करोडो हाथ लोगों कि सेवा मे जुट जाते हैं लेकिन फिर भी कोई पत्रकार कि पत्रकारीता इसे अपना हिस्सा नहीं बनाती!!!

अगर हिंदु धार्मीक गुरूऔ के कुकर्मों को उछाल कर समाज को सतर्क करना मिडीया कि जिम्मेदारी हैं तो उनके द्वारा कि गई तपस्वी कार्यों को हमारी बीकाऊ मिडीया उठाने में क्यों चुक जाता हैं????

तीसरा: क्या अन्य धर्मो के गुरू पुर्ण श्रद्धावान व इमानदारी कि मुरत हैं? क्या ठगी गुरू मात्र हिंदुधर्म मे ही हैं?

जाहीर हैं इसका भी जवाब हैं “नहीं”| एसे कई पादरी व मोलवी आज भी हिरासत में जिन्होने बेहद गंभीर अपराधो को अंजाम दिया लेकिन आज तक कभी हमने देखा कि किसी मोलवी या पादरी के कुकर्मो पर मिडीया ने दिन रात हो-हल्ला मचाया हो!!!! अगर हमारी मिडीया को हिंदु साधु संतो के कुकर्म नजर आते हैं तो अन्य धर्मो के धार्मीक गुरूऔ के कुकर्मों पर इनकी जुबान सील क्यों जाती हैं???? जब की उनके अनुपात में अन्य धार्मीक गरूऔ का हमारे समाज में योगदान भी कम हैं और अपराधीक गुरूऔ की संख्या भी बेहद ज्यादा हैं|

हिंदु समाज के लोगों को मिडीया द्वारा घौले जा रहे एसे धीमे जहर को पहचानना बेहद जरूरी हैं जिससे वे भारत में संत परमपरा को नष्ट करना चाहते हैं….यदी वे इसमे सफल हुवे तो भारतीय संस्कृती का कई कर्णधार नहीं बचेगा|

|| वंदेमातरम् ||