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भारत का दलाल मिडिया

भारत के मिडिया बाज हमे कैसे उल्लू बनाते हैं उसका बनारस हिंदू विश्वविद्यालय ( #BHU ) एक ज्वलंत उदाहरण बना हैं…

इन भांड पत्रकारों के दो मुँह होते हैं… पहला जब ये बगैर तथ्यों के किसी भी घटना पर अपनी एक तरफा बकवास दिन रात चलाना शुरू कर देते हैं…

ओर दुसरा, जब सच्चाई सामने आती हैं तो अपनी पहले वाली बकवास पर माफी मांगना तो दूर… ये उस सच्चाई को बताने से मुँह चुरा लेते हैं…

सितंबर २०१७, जब मिडिया के एक वर्ग जिसमें #आजतक, #NDTV जैसे चैनलों ने #BHU के घटनाक्रम पर अपनी बकवास शुरू कि थी…

इनके अनुसार कैंपस कि छात्रा छेड़छाड़ का शिकार हुई थी बस फिर क्या था, देखते ही देखते आंदोलन खड़ा हो गया, हिंसा हो गई व विश्वविद्यालय के कुलपति को खलनायक बना दिया गया…

उस समय सारे के सारे मिडिया वालों के एक सुर निकल रहे थे… #BHU में लड़कियां सुरक्षित नहीं!

लेकिन अब जब इस मुद्दे पर हाईकोर्ट जज दीक्षित कि जांच रिपोर्ट आ चुकी हैं जिसमें स्पष्ट हो गया हैं कि छात्रो के आंदोलन को बाहरी लोगों ने हाईजेक कर लिया था व जिस छात्रा ने छेड़छाड़ की शिकायत की थी वह भी बयान दर्ज देने से मुँह छिपाये भाग रही (झुठ पकड़वाने के डर से….. तो आज सभी दोगले मिडिया बाजों कि जुबान कट चुकी हैं!!!

जिस मुद्दे पर हफ्तों भर झूठी रिपोर्टिंग कर वे #BHU को बदनाम करने में लगे थे आज वे इस मुद्दे पर आई जाँच रिपोर्ट पर स्क्रीन पर एक हेडिंग तक स्क्रोल नहीं कर रहे!!!

क्यों कि #BHU को बदनाम करने वाले आमआदमी पार्टी के संजय सिंह व #AISA के नेता अब उजागर हो चुके हैं व जिनके विरोध में ये खबर बताना इन भांड पत्रकारों के एजेंडों में नहीं होता…

इसी तरह #ASIFA के नाम पर इंसाफ मांगने वाले ये खबरों के दलाल आज #GEETA के नाम पर गुंगे बहरे बन बैठे हैं।

जागो और जगाओ
देश बचाओ

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Cobrapost की दलाली!

#Presstitute #Cobrapost

मिडिया जगत के दलाल कोब्रापोस्ट ने एक स्ट्रिंग का वीडियो जारी किया हैं जिसमे कोब्रपोस्ट का पत्रकार एक क्षेत्रिय अखबार के औफिस मे जाकर यह जाहिर करने की कोशिश करता हैं की वह हिन्दुवादी “ताकत” के जरिये आया हैं व उनके (क्षेत्रिय) अखबार मे अगले तीन माह तक (चुनावी मौसम मे) केवल हिन्दुत्व का प्रचार करे जिससे लोग केवल हिंदुत्व के मुद्दे पर ध्यान दे व बाकी मुद्दे भुल जाये जिससे एक राजनैतिक दल को लाभ हो, इसके लिये उस क्षेत्रिय अखबार को खरिदने की कोशिश करता हैं और जिसमे वो कामयाब भी हो जाता हैं।

इस स्ट्रिंग से दलाल कोब्रापोस्ट यह साबित करना चाहता हैं की चुनावी मौसम मैं अखबार व पत्रकार कैसे बीक जाते हैं (जो खुद बीका हुवा हैं !)

सवाल यह हैं की दलाली पत्रकारिता सिद्ध करने के लिये इन दुष्टो ने हिंदुत्व के मुद्दे को हथियार क्यों बनाया जबकि मुद्दे तो कोई भी हो सकते थे!

मतलब की दलाली पत्रकारिता पर निशाना साधते हुवे लोगो को यह भी समझा सके की हिंदुत्व का मुद्दा भी बिकाऊ हैं व हिंदुत्व से जुड़ दल भी बइमान हैं।

अभि तो जनता को ऐसे भ्रमित करने वाले खेल मात्र शुरू हुवे हैं … चुनाव तक और भी नाटक नजर आयेंगे ताकि हिंदुत्व से एक हुवे लोग को बॉटा जा सके।

सजग रहिये, सतर्क रहिये।

वन्देमातरम

वैचारिक आतंकवाद

वैचारिक आतंकवाद
कहते हैं कि सुबह – सुबह जिन विचारों के साथ दिन कि शुरूवात होती हैं स्वयं कि क्षमता भी उससे प्रभावित होती हैं… और आज के आधुनिक युग में सुबह के समाचार पत्र हमारे प्रात:काल विचारों को दिशा देने में पूर्ण रूप से स्वामित्व प्राप्त कर लिया हैं। 
ऐसे में यदि हमारे द्वार पर पहुँचे समाचार पत्र दूषित पत्रकारिता से भरे हो तो… जरा सोचिए! हम अपनी क्षमता को किस तरह व्यर्थ में या तो क्षति पहुंचा रहे अथवा उसका दुरूपयोग करेंगे। 
उदाहरण :
# यदि समाचार पत्र चुन चून कर हिंदु व हिंदुत्व विरोधी समाचार को प्राथमिकता दे व अन्य धर्मों के पाप-कर्मों को प्रकाशित करने से बचे, तो जाहिर हैं कि वे पाठकों में “सेक्युलर” मानसिकता का विष घोल रहे। 
# यदि समाचार पत्र ६० सालों से लुट रही पिछली सरकारों व उनके नेताओं पर सवाल न उठा कर व पिछली सरकारों से कहीं अधिक नवनिर्माण में लगी सरकार को बार बार कटघरे में खड़ा करे, तो जाहिर हैं कि ऐसी पत्रकारिता राष्ट्र विरोधी तत्वों की दासीता अपना कर जनमत को भ्रमित करने में लगी हुई हैं। 
# यदि समाचार पत्र राष्ट्र कि बडी से बडी उपलब्धि को अपने वृत्त पत्र के एक छोटे से कोने में दबाकर भांड आंदोलनों, आतंकवादियों के महिमामंडन व जातीय हिंसा जैसी घटनाओं को प्रमुखता दे तो इनका लक्ष्य नकारात्मकता को फैला कर पाठकों के सकारात्म विचारों का नाश करना होता हैं। 
सवेरे-सवेरे समाचार पत्रों पर नजर मारने वाले सर्व बुद्धिजीवियों से नम्र निवेदन हैं कि आप ऐसी हिन पत्रकारिता के हमलों से परिचित हो कर स्वयं की नष्ट होती क्षमता का रक्षण करे। बहिष्कार करे ऐसे समाचार के पत्र व स्रोतों का जो आपको जागृत करने के नाम पर आपको कहीं अधिक भ्रमित करने में लगे हुए हैं। ये ना केवल आपको नकारात्मकता के दल-दल में ढकेलने कि कोशिश करते हैं बल्कि राष्ट्र विरोधीयों को प्रबल भी करते हैं… और वह भी आपके ही अपने पैसे व अमूल्य समय को खर्च करवा कर।

इनका बहिष्कार अवश्य करे… 

=> नवभारत टाइम्स (पुर्ण टाईम्स ग्रूप) 

=> राजस्थान पत्रिका 

=> NDTV इंडिया 

​जनता का राज… क्या सुना था कभी!

​जनता का राज… क्या सुना था कभी!

🚩 पहले झटके में लोगों ने दो फिल्में क्या फ्लाप कि शाहरुख खान के दिमाग से असहिष्णुता का भूत उतर गया, हर जगह सहिष्णुता नजर आने लगी। और दुसरे झटके में खुद कि फिल्म से पाकिस्तानी अदाकारा को बाहर निकालना पड़ा। यह पुरी तरह से जनता कि भावनाओं के आगे घुटने टेकने जैसा बड़ा फैसला था। 
🚩 अमीर खान को स्नेपडील व भारतीय पर्यटन के विज्ञापनों से लोगों के दबाव में लात क्या पड़ी अब उनकी दुसरे नंबर कि बीवी को देश में डर लगना ही बंद हो गया। 
🚩 ये लोगों उमड़ता गुस्सा हैं… जिसने करण जौहर को भी एहसास कराया कि सिर्फ उसकी दुनिया ही सबकुछ नहीं हैं और सामान्य लोगों के बिना उसकी कोई औकात नहीं। 

🚩 भारत के टुकड़ों पर पले ओमपुरी ने जिस तरह भारतीय सेना का अपमान किया उसके बाद लोगों ने जो उसकी रही-सही इज्जत की ऐसी धज्जियाँ उड़ाई कि सिधे अब वह नाक रगड़ते हुवे बलिदानी सैनिक के परिवार से मिलने पहुंच गया।

🚩 जनता के ही कारण जो समाचार चैनल कल तक खुद को ‘देश का नंबर एक समाचार चैनल‘ बताने का दावा सुबह-शाम ठोका करता था और वे बिकाऊ पत्रकार जिन्होंने स्वयं को देश के पत्रकार-जगत का पिलर मान बैठे थे, आज अपनी विश्वसनीयता ही खो बैठे हैं। वह जनता ही हैं जिसने एसे भ्रष्ट राजनैतिक दल जिसने सर्वाधिक देश पर राज किया, उसे आज अपने अस्तित्व बचाने को संघर्षरत स्थिति में ला कर खड़ा कर दिया। 

🚩 यह इस बात का सिधा प्रमाण हैं कि अपनी ऐशो-अय्याशी में डूबे ऐसे भांड कलाकारों, बुद्धिजीवियों , पत्रकारों और नेताओं ने ना तो जनता कि भावनाओं को कभी कोई महत्व दिया और ना ही आज भी सहजता से महत्व देना स्वीकार कर पा रहे। 

👆बेहद सरल शब्दों में यदि कहे तो जिसकी रग-रग में भारतीयता हैं वह आज “अच्छे-दिन” का सुखद अनुभव कर रहा….

— जो जनता कि भावनाओं के साथ स्वयं को जितना जल्दी ढाल रहा, वही समझदार नजर आ रहा हैं…. 

— जो ठोकर खा कर फिर स्वयं को ढालने कि कोशिश कर रहा, उसकी मूर्खता उभर रही…. 

— और जो ठोकर खाकर भी ऐठ रहा, वह तो अपने धूर्त होने का परिचय दे रहा। 

ऐसा इसलिए क्योंकि मुर्ख लोकतंत्र को समझ नहीं पा रहे तथा धूर्त से अपनी अय्याशी छुट ही नहीं सकती। लेकिन सच्चाई तो यह हैं कि यही भारत का वास्तविक लोकतंत्र हैं। “लोकतंत्र में जनता का राज” … अब तक सिर्फ किताबों में पढ़ते आये थे, आज वही वास्तविक स्वरूप हैं और ध्यान देना… _अभी तो यह शुरूवात हैं!_

कुछ ऐसे लोग भी हैं जो अब भी यही गुमान में हैं कि यह तो मात्र “संघीयों” का षड्यंत्र हैं …. तो उनके लिए सुझाव हैं कि अब वे संपूर्ण राष्ट्र को ही एक “संघी” मानकर चले… 

…. क्योंकि मेरा देश अब वाकई बदल रहा हैं।

|| वंदेमातरम् || 🚩🚩🚩

प्रेश्यावृत्ती में लिप्त पत्रकारों के बुरे दिन

प्रेश्यावृत्ती में लिप्त पत्रकारों के बुरे दिन

आज जब हर तरफ़ बिकाऊ पत्रकारों का महाजाल नजर आता हैं वहीं सुरेश चव्हाण व सूधिर चौधरी जैसे पत्रकारों को पत्रकारिता बेहद अदभुत उदाहरण बनकर उभर रही हैं।

सुदर्शन न्यूज के सुरेश चव्हाण व जी न्यूज के सूधिर चौधरी ने बेधड़क व बेहिचक देशहित कि पत्रकारिता से सारे बिकाऊ पत्रकारों के होश उडा कर रख दीए हैं। देश के हर अति-संवेदन शील मसलों पर भारत विरोधी एजेंडा परोसने वाले दलाल पत्रकार बरखा दत्त, रविश कुमार, राजदीप सरदेसाई, करण थापर, पुन्यप्रसुन्न वाजपेयी, राहुल कवल व दीपक चौरसिया जैसे तमाम पत्रकार जगत के दिग्गज मानेजाने वालों कि मिलावटी पत्रकारिता कि धज्जिया उडाकर रखदि हैं।

बिकाऊ पत्रकारों ने जिस तरह निष्पक्ष व सेक्युलर निती को मुखौटा बना कर भ्रष्टाचारियों, कट्टरपंथियों व गद्दारों को जो सुरक्षा कवच दे रखा था वह तो धरासाहि हुवा ही हैं साथ ही नौबत यहाँ तक पहुंच गई हैं कि अब इन पत्रकारों को स्वयं के लिये सुरक्षा कवच खौजने कि नौबत आ पड़ी हैं। इन गद्दारों को सुज ही नहीं पा रहा कि हर पल उजागर होता अपना काला चेहरा ये किसकी चोली में छुपाये।

एक तरफ जहाँ इन बिकाऊ पत्रकारों व इनसे जुड़े AajTak, NDTV, ABP NEWS, IndiaToday, TimesOfIndia, IndianExpress, TheHindu जैसे नामी चैनल व अखबार अपनी विश्वसनीयता खोते जा रहे वहीं सोशियल मिडिया पर हर रोज जनता द्वारा इनको बुरी तरह लताड़ा जा रहा। इसी तरह सुदर्शन न्यूज, जी न्यूज, DNA, दैनिक भास्कर व प्रातःकाल जैसे तमाम देशभक्ति कि पत्रकारिता करने वाले माध्यम जनता कि आवाज बनकर उभरने लगे हैं।

देश में ही रहकर देशभक्त पत्रकारों कि राह कितनी कठीन हो सकती हैं यह सुदर्शन न्यूज व जी न्यूज चैनल को मिल रही धमकि से पता चल रहा। दिन के लगभग सैकडों काल पकिस्तान, दुबई, सीरीया जैसे देशों से इन चैनलों को मिल रहे जिसमें चैनल व पत्रकारों को उडाने कि धमकिया मिल रही। भारतीय सुरक्षा एजेंसीयों ने भी ऐसे हमलों कि आशंकाऔ कि पुष्टि कि हैं लेकिन फिर भी इनके हौंसले अडिग रूप से बुलंद हैं।

देशभक्त पत्रकारिता से बौखलाए विरोधियों ने सुरेश चव्हाण व सूधिर चौधरी जैसे पत्रकारों को नरेंद्र मोदी का पट्ठा व MOUTH PIECE जैसे कई नाम देने कि कोशिश कि लेकिन सोशियल मिडिया पर मोर्चा संभाली जागृत देशभक्तों के आगे विरोधियों को मूँह कि खानी पड़ रही। जनता ने बहुरूपियों व देशभक्तों को पहचानना सीख लिया हैं।  वे जानते हैं कि जो सत्य बताये वह सत्यवादी कहलाता हैं ना कि किसीका निजी पट्ठा या MOUTH PIECE।

वास्तव में भारतीय राजनैतिक व समाजिक परिवेश में हो रहा यह बदलाव बेहद अदभुत व अभुतपूर्व हैं। हालांकि बदलाव कि यह प्रक्रिया अभी शुरूआती जरूर हैं किंतु मात्र आरंभ ने ही भारत के टुकड़े करने वाले दुश्मन देशों व ताकतों के सपनों को चकना चूर करना शुरू कर दिया है। भारत विरोधी एजेंडा के जरिये अपना भविष्य बनाने वाले भाडे के टट्टूऔ के लिए अब अलार्म बज चुका हैं कि वे प्रेश्यावृत्ती के धंधे से बाज आये अन्यथा उनका भविष्य तो दुर वर्तमान भी संभलना मुश्किल हो जायेगा। यह भारत के मजबूत भविष्य कि शुरूवात हैं… यही वास्तविक #अच्छेदिन भी हैं।

हम आम जन देशभक्त पत्रकारों को समर्थन दे कर व #Presstitute पत्रकारिता को नकार कर देशहित में स्वयं कि भुमिका भी सुनिश्चित कर सकते हैं और हमें ऐसा करना ही होगा।

।। जयहिंद।। वंदेमातरम्।।

#JaiHindKashmir Thank You Zee News

#JaiHindKashmir
#AsliKashmir
#AdharmInKashmir

कश्मीर पर आजाद रिपोर्टींग के तहत जब @ZeeNewsHindi पर @sudhirchaudhary ने अपने @DNA में हकीकत बयां कर देने वाली कश्मीरी देशभक्तों कि दास्तां चलायी….

कश्मीर का भारत विरोधी चेहरा बनाने वाले कट्टरपंथियों और दिखाने वाले आतंकप्रेमी पत्रकारों के पैरों तले जमीन खिसकने लगी…

खसकती कैसे नहीं…. भारत विरोधी एजेंडे के तहत कश्मीर पर करोडो रूपये बर्बाद करने के बाद भी आखिर जी न्यूज ने देशभक्त कश्मीरियों को टीवी पर दिखा कर इनकी दिनरात लगा कर बिछाई गयी आतंक कि चादर पल में उडने जो लग गई…

नतीजतन,  जीन कश्मीर के जिन हिस्सों से रिपोर्टींग कि गई थी वहाँ के लोगों को धमकाने का जिम्मा कट्टरपंथियों ने संभाला….

और जी-न्यूज कि रिपोर्ट को बनावटी साबित करने का जिम्मा मिडीया के आतंकप्रेमी दलाल पत्रकारों ने संभाला…

जहाँ कट्टरपंथियों ने देशभक्त कश्मीरियों को व उनके बच्चो को जान से मारने कि धमकी दे डाली….

वहीं डिजाइनर पत्रकारों ने लेख लिखकर यह जाहिर करने की कोशिश  शूरु कर दी कि जी न्यूज कि इस रिपोर्ट के खिलाफ गांव के लोग जी न्यूज के खिलाफ उतर रहे और कह रहे कि यह खबर झूठी हैं…

मतलब चंद भाडे के टट्टू काले झंडे दिखाए या पत्थरों से सेना पर हमला करे वो सच…. और जो कश्मीरी भारत माता की जय के नारे लगा कर सामने आये वे बनावटी….

इन देशभक्त कश्मीरियों पर मात्र कुछ घंटो पर इस कदर दबाव डाला गया कि उन्हे जी न्यूज चैनल को फोन कर रिपोर्टींग बंद करने को कहना पडा… करते क्यूं नहीं आखिर बाल-बच्चों कि जान पर जो आ पडी….

आज जी न्यूज को भी इन कश्मीरियों कि परवाह करते हुए अपनी रिपोर्टींग में इनके चेहरे छुपाने पड़े… लेकिन सवाल देश का था इसलिये रिपोर्टींग जारी रही….

इस आजाद रिपोर्टींग से जो मुद्दे कि बात उभरकर आई वह यह हैं कि कश्मीरी आवाम पर किस कदर विदेशी पैसों पर पलने वाले कट्टरपंथियों अपना कब्जा कर लिया हैं….

ऐसे दंगो व आतंक से इन कट्टरपंथियों का धंधा तो दिनरात फलफूल रहा हैं लेकिन आम कश्मीरी दो वक्त कि रोटी के लिये भी कर्फ्यू से बंद कमरे तरस रहा हैं।

प्रश्न यहीं हैं कि हम भारतीय क्या कर सकते हैं…..

— हमें देशभक्त कश्मीरियों कि आवाज को ताकत देने के लिये इस सच्चाई को जन-जन तक पहुंचाना  होगा…
— हर वो आतंकप्रेमी पत्रकार जो भारत विरोधी एजेंडे को बढावा देने के लिए छटपटाता दिखता हैं,  उसका बहिष्कार करना होगा
— हमारी इन दोनो पहलों से जहाँ देशभक्त कश्मीरियों को हिम्मत मिलेगी वही कट्टरपंथियों के हौसले टुटेंगे
— भारतीय सेना को पुरी छुट व समर्थन मिलता रहे इसके लिए भी राष्ट्रव्यापी अभीयान निरंतर चलना चाहिए

जयहिंद, जय भारत

।। वंदेमातरम्।।

बिकाऊ पत्रकारिता – प्यास पर करोड़ों का बिल!

” लातूर में जल पहुंचाने के लिये दो कोरोड का बील”
    मोदी विरोधी बिकाऊ पत्रकारिता का उदाहरण

पिछले दशक से ज्यादा सूखे की मार झेल रहे लातूर में पहली बार किसी सरकार ने अपनी संवेदनशीलता को दिखाते हुवे करोडो लिटर पानी ट्रेन के जरिए पंहुचाकर विषम परिस्थितियों में सरकार द्वारा अदा की जाने वाली भुमीका को एक नये सिरे से स्थापित किया।

जहाँ पिछली सरकारों ने एसी स्थिति का राष्ट्र विरोधी लाभ लेते हुए गोहत्या व धर्मपरिवर्तन जैसे अनगिनत साजिशों को रचा वहीं मोदी सरकार के इस अभुतपूर्व उपलब्द्धीयों कि जितनी सराहना की जाये वह कम होगी।

लेकिन मोदी विरोधी विदेशी मशीनरीयों के हाथों कि दलाल मिडिया-जगत को सरकार कि यह पहल हजम नहीं हो पा रही। वे जनता के मन में बढ रहे मोदी नाम के विश्वास से छटपटा रहे और इस विश्वास को धुमील करने कि ही कोशिश में ‘प्यास पर करोडो के बील’ जैसी खबर आज लगभग देश के हर प्रमुख अखबारों में छपी मिल रही।

एक सामान्य व्यवहारिक तौर पर मुद्दा में गंभीरता शुन्य के बराबर हैं। यदि करोड़ों का बिल बना तो भी यह रेल प्रशाशन के वित्तीय विभाग का एक निर्धारित कार्य हैं। क्यूंकि यदि रेल विभाग से गाड़ी चली हैं तो उसके खर्च को दर्ज करना एक स्वाभाविक प्रक्रिया हैं। यदि बिल रेल विभाग द्वारा महाराष्ट्र सरकार को भेजा भी गया तो भी यह एक औपचारिकता हैं। इस बिल का भुगतान या समायोजन केंद्र सरकार या राज्य सरकार का विषय हैं। किसी भी रूप इसे लातूर के लोगो से तो वसूला नहीं जाना हैं लेकिन फिर भी इस तरह की ख़बरों को उठा कर लोगों की संवेदनाओ को भड़काने का प्रयास किया जा रहा। यह तो सौभाग्य हैं की दोनों, राज्य व् केंद्र, सरकारें भाजपा की हैं अन्यथा यह भी आरोप लगते देर न लगती की मोदी ने राज्य की कांग्रेसी सरकार को बिल थमाया दिया!

मोदी सरकार कि यह वास्तव में एक बडी पहल थी क्यूँ की भुतकाल कि सरकारों ने भले ही एसी स्थितियों को निर्दयता से नजर अंदाज किया हो किंतु अब भविष्य की सरकार एसा नहीं कर सकेगी।

यह पहली बार नहीं की जब बिकाऊ मिडिया ने मोदी सरकार के अथक व अभूतपूर्व प्रयासों पर अपनी वेश्यावृत्ति से भी औछीं पत्रकारिता का परिचय दिया हैं।  पूर्व में जब जन. वि. के. सिंह द्वारा सैकड़ों भारतीयों को युद्ध कि जमीन से सुरक्षित वापस लाने जैसा बेहद सराहनीय कार्य को अंजाम दिया था तब भी बजाय कि उनकी तारीफ करे, उनके #Presstitute वाले बयान का बखेडा खडा कर उन्हे घेरने कि कोशिश कि गई थी।

आज जनता कि जागरूकता ही पत्रकार रूपी मक्कार भेडीयों का एक मात्र करारा जवाब हो सकती हैं इसलीए सजग रहे,  सतर्क रहे।

।। वंदेमातरम्।।