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कांग्रेस और हिंदु-आतंकवाद का सच

भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसियों द्वारा इस खुलासे से कि समझौता ब्लास्ट मामले में पुरोहित व अन्यो के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं हैं, कांग्रेस के देशद्रोही चेहरे को एक बार फिर से उजागर कर दिया है।

UPA के समय में ही समझौता ब्लास्ट व मालेगांव ब्लास्ट के तुरंत बाद सौंपी गई NIA रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से हमले कि साजिश के तार पाकिस्तान व बंग्लादेश से जुडे होने कि बात कही गई थी लेकिन कांग्रेस सरकार के मंत्रियों ने उदे दर किनार कर हमले का दोष पुरी तरह से RSS व VHP के कार्यकर्ताओं के सिर लगाया।

इससे पूर्व भी इशरत के मामले में सोनिया सरकार के गृह मंत्री के झूठे शपथ पत्रों से यह सिद्ध हो चुका हैं कि वे आतंकियों को बचाने के लिए हिंदू नेताओ और संतो पर झूठे मामले दर्ज करते थे। कांग्रेस के मोदी के खिलाफ ‘झुठे एंकाऊंटर’ कि धज्जीया तब से उडनी शुरू हो गई थी जब से अमेरिका में कैद आतंकी डेविड हेडली ने इशरत को आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा कि आत्मघाती दल का हिस्सा बताया था।

भारत के खिलाफ रची गई एसी घीनोनी व राष्ट्रद्रोही हरकत के पीछे कांग्रेस के तीन लक्ष्य साफ तौर से उभरकर आते हैं…

पहला – RSS व VHP जैसी राष्ट्रवादी संगठनों कि साख को धुमील करना जिससे वे आम जनता के लिये अपेक्षीत बने रहे।

दुुसरा – इस तरह से वे पूरे भारत में सांप्रदायिक कट्टरता को बढावा देने कि कोशिश में लगे थे जिससे अल्पसंख्यक वोट बैंक डर कर उनके पक्ष में खडा रहे।

तीसरा – विश्व स्तर पर हिंदू-आतंकवाद को मुद्दा बनाकर पुरे विश्व में भारत को बदनाम करना जिससे भारत कि पहचान भी आतंक समर्थित देशों मे होने लगे जिसमें सिधा फायदा पाकिस्तान का था जो कश्मीर मुद्दे पर त्रिपक्षीय वार्ता कि मंशा को पुरा कर सकता था।

इस संबंध के कुछ ध्यान देने वाले तथ्य….

समझौता ब्लास्ट में जहाँ कर्नल पुरोहित व चार अन्य पिछले 9 साल से जेल में बंद हैं वहीं मालेगांव ब्लास्ट में साध्वी प्रज्ञा सिंह सहित अन्य सात-सालों से जेल में बंद हैं। यहाँ तक कि जेल में ही साध्वी प्रज्ञा कैंसर से भी ग्रसित हो चुकी हैं लेकिन अदालतों से जमानत भी नामंजूर ही कि गई। यह जान कर और भी हैरत होगा कि अब तक सबूत के अभाव में इनके खिलाफ एक भी चार्जशीट तक दाखिल ना हो सकी। इसी तरह इशरत जहां केस में बंजारा जैसे अधिकारी जिनको पुरस्कृत किया जाना चाहिए था उन्हे भी चार साल जेल में बंद कर रखा गया।

इन सबकी गलती मात्र इतनी ही थी कि ये राष्ट्रवादी संगठनों से जुडे थे, देश के लिये कार्यरत थे व हिंदु समुदाय से थे।

पहले सिमी जैसे देशद्रोही संगठनो को समर्थन और उसके बाद बिना सबूतों के हिन्दू आतंकवाद शब्द को गढ़ना, यह बताता है  कि सोनिया गाँधी  सत्ता प्राप्त करने के लिए किसी भी सीमा तक जाकर देश को नुकसान पंहुचा सकती है। सोनिया ने न केवल आतंकियों के हौंसले बढ़ाये हैं अपितु अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का मजाक बनवाया है। इन्होने झूठे मामलों में हिन्दुओ को फंसाकर अल कायदा के सहायक बनकर असली आतंकियों को छोड़ने का अपराध भी किया है।

कांग्रेस के इस षडयंत्र में फँस कर मैकाले कि शिक्षा से शिक्षित एक वर्ग व इनके साथ बिकाऊ मिडिया RSS व VHP कि तुलना आतंकी संगठनों से करने को तुली रहती हैं। आज यह वर्ग व विदेशी मिडिया देश व संस्कृति के लिये आवाज उठाने वाले हर शख्स को एक संघी का ठप्पा लगाकर पेश करता आया हैं।

देश की सुरक्षा से जुड़े इन अति संवेदनशील मामलों में कांग्रेस की यह कार्यवाही एक अपराधिक षड़यंत्र है। इन अपराधों के लिये सोनिया -राहुल पर राष्ट्रद्रोह का केस बनता हैं। एसे षडयंत्रों के लिए जनता की जागरूकता ही एक मात्र उत्तर बन सकती हैं।

|| जय हिंद ||

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जागृता का प्रतीक : हर तरफ भगवा 🚩

इस बार हिंदू नववर्ष के दिन फेसबुक, ट्विटर व वाट्सअप जैसे सोशियल मिडिया में नववर्ष को मनाने वालों कि भरमार दिखी। यहाँ तक कि हर शहर व गांव के चौराहों,  पर भगवा साफा व तिलक लगाने हेतु कई भाई-बहन खड़े दिखे। कई जगह भगवा रैलियां निकाली गई और हर रैली में उमडी भगवा भक्तों कि भीड विरोधियों के आँख-नाक-कान सुजाने का सामर्थ्य रखती थी।

पिछले कुछ सालों से लगातार हिंदू त्योहारों के प्रति लोगों कि बढ़ती जागरूकता अब चरम पर पहुंचती नजर आने लगी हैं। इश्वर की कृपा से ऐसे ही जागरूकता आती रही तो यह निश्चित मानों की आने वाला वक्त हिन्दुत्ववादी हिंदुस्तान का होगा। एसा राष्ट्र जिसमें प्रत्येक धर्म व संप्रदाय सुरक्षित-संपन्न रहकर देश कि संस्कृति व सभ्यता का सम्मान करेगा।

यदी आपने अभी तक हिंदु युग कि पुनरावृति में अपना कोई सहयोग नहीं किया हैं तो अवश्य करना प्रारंभ कर दे केवल और केवल एक भारतीय बनकर।

यह हमारा सौभाग्य ही हैं कि जिस हिंदू युग का स्वप्न लेकर पूज्य स्वामी विवेकानंद से लेकर पूज्य विर सावरकर तक लाखों बलिदान हो गये, आज हमें उस युग कि नीव खडी करने का अवसर मिल रहा हैं जिससे हम ना केवल अपना जिवन सफल कर सकते हैं बल्कि अपनी अगली पीढ़ीयों को सुरक्षित व समृध्द राष्ट्र समर्पित कर सकते हैं।

अकेले रहे तो औकात नहीं! संगठन में हि शक्ति हैं।

जागो और जगाऔ
भारत का भविष्य बनाऔ

🚩 वन्देमातरम् 🚩

तय करलो…आप किसके साथ हो

तय करलो…आप किसके साथ हो ###

भारत-विरोधी मिडीया ने जिस तरह JNU के राष्ट्रद्रोही छात्र कन्हैया को नायक के तौर पर उभारा हैं यह आज हर भारतीय के लिये बेहद चिंतन व अध्यन का विषय बन चुका हैं….

जहाँ इस प्रकरण में भारतीय राजनीती के कई दिग्गजो का राष्ट्रविरोधी चरीत्र उजागर किया हैं वहीं भारत के कोने-कोने में भारत कि बर्बादी के लिये फैलाये जा रहे विष भरे तंत्र को भी उभार कर रख दिया हैं…

तरह-तरह के कई प्रकरणो ने आज राजनीतीक व समाजीक परिवेश को दो फाड में बाँट दिया हैं जिसमें….

दुसरी तरफ राष्ट्रवादी ताकते हैं…

दुसरी तरफ देश को बचाने वाले गीने-चुने पत्रकार व सोशियल मिडीया

दुसरी तरफ देश को समर्पीत, धर्म-रक्षक व कर्मठ संघठन, संत व राज सेवक

दुसरी तरफ देश का चौकन्ना खुफीया-तंत्र व सिमा पर डटे व बलीदान देते जवान

दुसरी तरफ शहीद होते जवानों का निर्भय, साहसीक परिवार

इस देश का अब कोई भी नागरीक स्वयं को निष्पक्ष नहीं रख सकता…कोई भी नागरीक भ्रमीत रहकर खुद को अलग नहीं रख सकता… हमे अपने भ्रम को दुर करना ही होगा…यदी हमने राष्ट्रवादीयो का साथ नहीं दिया तो स्वभावीक रूप से हमारी खामोशी राष्ट्रविरोधी ताकतों का समर्थन करती नजर आयेगी…क्युँ की यदी देश बर्बाद हुवा तो उसकी एक जिम्मेदार हमारी खामोशी भी होगी…

अगर आज हमने इसके पिछे देश के टुकडे-टुकडे करने वाले षडयंत्र को समझने तथा दुसरों को समझाने मे भुल या फिर देर कर दी तो हमे अपनी अगली पीढी को धरोहर में फिर एक बेडीयों में बंधा, खंड-खंड में बीखरा भारत सौपना होगा जिससे संभवतः उनका जिवन अनगीनत संघर्षों से भर जाये|

यह हकिकत हैं कि इन संघठीत रूप से उभरे गद्दारों के पिछे एक बहोत बडी शक्ती सुनीयोजीत तरीके से कार्यरत हैं और ये खुलेआम हमारे सामने कुछ भी कह सकते हैं, कर सकते हैं क्यों की इनके लिये कोई कानुनी हद नहीं…और हम परिवारीक जिम्मेदारीयों के बोझ तले इनके आगे कुछ नहीं कर सकते क्युँ की हम ना तो संघठीत हैं और ना ही कानुन हमें इसकी इजाजत देता हैं…

लेकिन कम-से-कम हम इनके विरूद्ध आवाज उठा कर दुसरो को जागृत व संघठीत कर सकते हैं…जो इनके विरूद्ध डटे हैं उनका समर्थन कर उनकें हाथ मजबुत कर सकते हैं….

एसा हमे करना ही होगा…..
तब जा कर ही हमारा लोकतंत्र सफल हो सकेगा|

|| जय हिंद || वंदेमातरम् ||

JNU कांड – “तीसरी गुलामी” की आहट !!!

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आज अचानक से देश में ही – देश के ही टुकडो पर पल रहे हजारों सपौलो का एक साथ राष्ट्रविरोध में जमावडा देख किसी भी आम भारतीय का दिल दहलना स्वाभावीक हैं|

एक आम भारतीय, जीसकी दिनचर्या सुबह से शाम तक की जींदगी परिवार के लिये मात्र दो वक्त पेट भरने की जुगाड में ही गुजर जाता रहा हैं, अब इस मंजर से कुछ हद तक घबराया तो जरूर होगा| लेकिन यदी आज भी उसने अपनी नींद नहीं तोडी तो जिस परिवार के पालन-पोषण में वह अपनी जींदगी खपा रहा हैं…कहीं उसकी नींद उसके ही परिवार के लिये अभीश्राप न बन जाये|

हाँ….अभीश्राप!

राष्ट्रविरोधी घुटो नें अब आगाज कर दिया हैं, खुल कर आवाज लगा दी हैं — भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी…
भारत पर आतंक मचाने वाले अफजल गुरू को अपना आदर्श बताया हैं…
पाकिस्तान जिंदाबाज के नारे लगा चुके हैं…
भारत के कश्मीर सहीत मणीपुर, केरला, असाम, बंगाल जैसे राज्यो के आजादी की मांग उठा दी हैं…

इसका सिधा अर्थ यही हैं कि इनकी मंशा भारत के टुकडे-टुकडे कर भारत के दुश्मनो को मजबुत करना हैं| अगर युँ ही ये अपनी नस्ले फैलाते रहे तो इसे भारत की “तीसरी गुलामी” की आहट कहना गलती नहीं होगी|

भारत ने मुगल काल की दरींदगी सही हैं…
भारत ने ब्रीटीश सम्राज्य का कमीना-पन देखा…

लेकिन इस सबके बावजुद यह एक कडवी सच्चाई हैं कि हम भारतीयों ने अपने इतिहास से कुछ नहीं सीखा, हमने देश पर अपना खुन बहादेने वालों के बलिदान को भुला दिया हैं और सबसे गंभीर विषय यह हैं कि हम अपने ही घरों में – अपने ही साथ पल रहे गद्दारों को समज नहीं पा रहे!!!

” वंदेमातृभुमी ” – मातृभुमी पुज्यनीय हैं| हमारे शास्त्र से लेकर इतिहास तक की हमारी पहली शिक्षा यही हैं| राष्ट्र सर्वोपरी हैं व मातृभुमी कि रक्षा से बढ कर कोई धर्म नहीं|

लेकिन हम आज के भारतीयों ने इस पहली शिक्षा को पुरी तरह से नजर अंदाज कर दीया| आज का राष्ट्रविरोधी नजारा हमारी अपनी ही गलतीयों का परिणाम हैं|

आचार्य चाणक्य ने कहा था — जब जब हम आक्रमण हुवा और हम पराजीत हुवे हैं तो उस पराजय में शस्त्र से पहले हम शास्त्रों से हारे हैं, हम अपने ही शास्त्रो को समझने में विफल रहे|

महापंडीत चाणक्य के यह उद्गार आज की स्थीती पर भी पुर्ण रूप से यथार्थ को प्रकट करते हैं| आज हमने निजी स्वार्थ हेतु कमाना-खाना तो सिख लिया लेकिन देश व समाज को सुरक्षीत कैसे रखना, उनकी रक्षा कैसे करना यह हम सिख नहीं पाये|

आज कि यह देश विरोधी हवा मात्र चंद दिनो में विषेली हुई एसा तो संभव नहीं| यह तो षडयंत्रकारीयों कि वर्षो कि मेहनत का नतीजा हैं जिसे सत्ता सुख भौगी मंत्रीयो ने नजर अंदाज किया था और हमारी लापरवाही यहाँ रही कि हमने उन्हे चुनकर राजगद्दी पर बैठाया था| इन्हे चुनने का जरीया भी वही राजनीती हैं जिस विषय से आज का आम भारतीय अपने आप को दुर रखना चाहता हैं| राजनीती से हमारी दुरी ने ही देश के गद्दारों को देश लुटने व तोडने का मौका दिया|

हम भारतीय भले ही राजनीती के विषय से खुद को अलग रखने की कोशिश करले किंतु वह राजनीती हैं जो ना केवल देश कि सुरक्षा बल्की हमारी जिंदगी का भविष्य तय करती हैं| यदी हम अपने सपनो का समृद्ध, सुरक्षीत व संस्कारी राष्ट्र चाहते हैं तो वह बगैर राजनीतीक इच्छा से कदापी संभव नहीं|

प्रत्येक भारतीय को स्वत: से यह प्रण करना ही होगा की वे देश से जुडे राजनीती जैसे गंभीर विषय को अपने नीजी जिवन का हिस्सा मान कर देशभक्त नेताऔ कि पहचान करे व उनका समर्थन करे|

|| जय हिंद || वंदेमातरम् ||

जिवीत इंसान और मृत जीवन

*गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरित मानस के लंकाकांड में एक प्रसंग आता है, जब लंका दरबार में रावण और अंगद के बीच संवाद होता है। इस संवाद में अंगद ने रावण को बताया है कि कौन-कौन से 14 दुर्गण या बातें आने पर व्यक्ति जीते जी मृतक समान हो जाते हैं।

आज भी यदि किसी व्यक्ति में इन 14 दुर्गुणों में से एक दुर्गुण भी आ जाता है तो वह मृतक समान हो जाता है। यहां जानिए कौन-कौन सी बुरी आदतें, काम और बातें व्यक्ति को जीते जी मृत समान बना देती हैं।

1. कामवश
जो व्यक्ति अत्यंत भोगी हो, कामवासना में लिप्त रहता हो, जो संसार के भोगों में उलझा हुआ हो, वह मृत समान है। जिसके मन की इच्छाएं कभी खत्म नहीं होती और जो प्राणी सिर्फ अपनी इच्छाओं के अधीन होकर ही जीता है, वह मृत समान है।

2. वाम मार्गी
जो व्यक्ति पूरी दुनिया से उल्टा चले। जो संसार की हर बात के पीछे नकारात्मकता खोजता हो। नियमों, परंपराओं और लोक व्यवहार के खिलाफ चलता हो, वह वाम मार्गी कहलाता है। ऐसे काम करने वाले लोग मृत समान माने गए हैं।

3. कंजूस अति कंजूस व्यक्ति भी मरा हुआ होता है। जो व्यक्ति धर्म के कार्य करने में, आर्थिक रूप से किसी कल्याण कार्य में हिस्सा लेने में हिचकता हो। दान करने से बचता हो। ऐसा आदमी भी मृत समान ही है।

4. अति दरिद्र गरीबी सबसे बड़ा श्राप है। जो व्यक्ति धन, आत्म-विश्वास, सम्मान और साहस से हीन हो, वो भी मृत ही है। अत्यंत दरिद्र भी मरा हुआ हैं। दरिद्र व्यक्ति को दुत्कारना नहीं चाहिए, क्योकि वह पहले ही मरा हुआ होता है।

5. *विमूढ़*अत्यंत मूढ़ यानी मूर्ख व्यक्ति भी मरा हुआ होता है। जिसके पास विवेक, बुद्धि नहीं हो। जो खुद निर्णय ना ले सके। हर काम को समझने या निर्णय को लेने में किसी अन्य पर आश्रित हो, ऐसा व्यक्ति भी जीवित होते हुए मृत के समान ही है।

6. *अजिसी*जिस व्यक्ति को संसार में बदनामी मिली हुई है, वह भी मरा हुआ है। जो घर, परिवार, कुटुंब, समाज, नगर या राष्ट्र, किसी भी ईकाई में सम्मान नहीं पाता है, वह व्यक्ति मृत समान ही होता है।

7. सदा रोगवश जो व्यक्ति निरंतर रोगी रहता है, वह भी मरा हुआ है। स्वस्थ शरीर के अभाव में मन विचलित रहता है। नकारात्मकता हावी हो जाती है। व्यक्ति मुक्ति की कामना में लग जाता है। जीवित होते हुए भी रोगी व्यक्ति स्वस्थ्य जीवन के आनंद से वंचित रह जाता है।

8. अति बूढ़ा अत्यंत वृद्ध व्यक्ति भी मृत समान होता है, क्योंकि वह अन्य लोगों पर आश्रित हो जाता है। शरीर और बुद्धि, दोनों असक्षम हो जाते हैं। ऐसे में कई बार स्वयं वह और उसके परिजन ही उसकी मृत्यु की कामना करने लगते हैं, ताकि उसे इन कष्टों से मुक्ति मिल सके।

9. संतत क्रोधी 24 घंटे क्रोध में रहने वाला भी मृत समान ही है। हर छोटी-बड़ी बात पर क्रोध करना ऐसे लोगों का काम होता है। क्रोध के कारण मन और बुद्धि, दोनों ही उसके नियंत्रण से बाहर होते हैं। जिस व्यक्ति का अपने मन और बुद्धि पर नियंत्रण न हो, वह जीवित होकर भी जीवित नहीं माना जाता है।

10. अघ खानी जो व्यक्ति पाप कर्मों से अर्जित धन से अपना और परिवार का पालन-पोषण करता है, वह व्यक्ति भी मृत समान ही है। उसके साथ रहने वाले लोग भी उसी के समान हो जाते हैं। हमेशा मेहनत और ईमानदारी से कमाई करके ही धन प्राप्त करना चाहिए। पाप की कमाई पाप में ही जाती है।

11. तनु पोषक ऐसा व्यक्ति जो पूरी तरह से आत्म संतुष्टि और खुद के स्वार्थों के लिए ही जीता है, संसार के किसी अन्य प्राणी के लिए उसके मन में कोई संवेदना ना हो तो ऐसा व्यक्ति भी मृत समान है। जो लोग खाने-पीने में, वाहनों में स्थान के लिए, हर बात में सिर्फ यही सोचते हैं कि सारी चीजें पहले हमें ही मिल जाएं, बाकि किसी अन्य को मिले ना मिले, वे मृत समान होते हैं। ऐसे लोग समाज और राष्ट्र के लिए अनुपयोगी होते हैं।

12. निंदक अकारण निंदा करने वाला व्यक्ति भी मरा हुआ होता है। जिसे दूसरों में सिर्फ कमियां ही नजर आती हैं। जो व्यक्ति किसी के अच्छे काम की भी आलोचना करने से नहीं चूकता। ऐसा व्यक्ति जो किसी के पास भी बैठे तो सिर्फ किसी ना किसी की बुराई ही करे, वह इंसान मृत समान होता है।

13. विष्णु विमुख जो व्यक्ति परमात्मा का विरोधी है, वह भी मृत समान है। जो व्यक्ति ये सोच लेता है कि कोई परमतत्व है ही नहीं। हम जो करते हैं, वही होता है। संसार हम ही चला रहे हैं। जो परमशक्ति में आस्था नहीं रखता है, ऐसा व्यक्ति भी मृत माना जाता है।

14. संत और वेद विरोधी जो संत, ग्रंथ, पुराण और वेदों का विरोधी है, वह भी मृत समान होता है।
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मृत शरीर को जला देने से भी कोई पीडा नहीं होती और जिवीत शरीर एक छोटे से काँटे कि चुभन भी नहीं सहन कर पाता हैं|

आज के परिवेश में कई लोगों का जिवन पुर्णतया मृत समान बन गया हैं जब बडे-से-बडा अपघात धर्म, संस्कृती, मान व सम्मान पर हो जाने पर भी वे  अपनी दिन चर्या से बाहर नहीं नीकल पाते, यहाँ तक की इन्हे ज्ञात भी नहीं होता, एसा जिवन मृत समान हैं क्युँ की वे स्वयं की व राष्ट्र कि रक्षा करने में सक्षम हो ही नहीं सकते|

जो सचेत, जागरूक, सतर्क हैं वही राष्ट्र का रक्षक हैं|

|| वंदेमातरम् ||

मुद्दा राधे-माँ, नीशाना संत समाज!

“राधे-माँ” एक बकवास हैं जीसे पैसों ने भक्ती का चोंगा पहनाया व अन्य पुँजीपतीयों ने या तो अपनी मुर्खता से या स्वयं के स्वार्थ के लिये सिर बैठाया|

लेकिन हमारी हिंदु विरोधी मिडीया को एसे ही मुद्दो कि तलाश रहती हैं जिसे दिन रात उठा कर वे हिंदु साधु-संतो की छवी धुमील कर सके जिससे हिंदुऔ का विश्वास धर्म गुरूऔ से पुर्णतया उठ जाये| घौर करे, हर थोडे अंतराल के बाद मिडीया किसी-ना-किसी “हिंदु” संत को मुद्दा बनाता ही हैं|

पहली बात तो यह कि राधेमाँ कोई बडा मुद्दा नहीं हैं, ना तो उसके अनुयायीईयो कि संख्या इतनी अधीक हैं और ना ही आम लोग उसके पास जाते थे (मात्र पुंजीपती) लेकिन फिर भी राष्ट्रीय दर्जो के न्युज चेनल व पत्रकारों ने अपना औंछेपन दिखाते हुवे इस मुद्दे पर राष्ट्रीय बहस छेडने कि कोशिश की वह भी तब जब देश के सामने अन्य कितने हीं गंभीर मुद्दे खडे हैं!!! मतलब यह की बीकाऊ पत्रकार एक और जहाँ इस मुद्दे के जरीये हिंदु धर्म को बदनाम कर रहे है वहीं लोगों का ध्यान मुख्य मुद्दो से भटकाने में लगे हैं|

यहाँ तीन पहलुऔ से इस विषय पर विचार करना बेहद जरूरी हैं….

पहला: हमारी मिडीया में किसी भी हिंदु साधु या संत का नाम कब-कब आता हैं?

थोडा भी यदी कोई इस पर विचार करेगा तो उसे मात्र यही जवाब मिलेगा कि यह वही मौका होता हैं जब या तो किसी संत ने कोई कुर्म किया होगा या फिर उस पर जबरन कुकर्म का आरोप किसी ने मढा होगा या फिर किसी संत के किसी कथन को तोड मरोड कर मिडीया को उसे मिडीया को विवादित बनाना होगा|

दुसरा: क्या हिंदु धर्म के सभी साधु-संत मात्र ठगी हैं? क्या कोई संत कभी भी समाज कल्याण व धार्मीक मुद्दो पर जनहित के उपदेश देता ही नहीं? क्या देश में कोई संत समाज व देश के लिये भलाई कार्य नहीं कर रहा?

इसका भी जवाब यदी हम थोडा भी खंगालेंगे तो जवाब स्पष्ट हैं, नहीं| हमारी संस्कृतीक को आज तक संजोय रखने में हमारे संतो ने ही अहम भुमीका नीभाई हैं व उनके हि प्रयासों से आज तक धर्म सुरक्षीत हैं| सृष्टी कल्याण के लिये लाखों संत आज भी अपना संपुर्ण जीवन तपस्वी के समान गुजार रहे है|

लेकिन क्या हमारी हिंदु विरोधी मिडीया ने एसे किसी भी संत को हिंदु समाज से परिचीत करवाया? साधु-संतो के विवादीत बयान को मुद्दा बनाने वाली विषेली मिडीया ने क्या किसी भी संत के अमृत वचनों को सुनाया? संतो के कुकर्मो का हिसाब रखने वाली देशद्रोही मिडीया ने क्या संतो द्वारा देश हित में कि गई तपस्या का लेखा जोखा कभी पेश किया?

— सैकडों संतो ने गंगा को बचाने के लिये अन्न-जल त्याग कर प्राण न्योछावर कर दिये मिडीया ने मुद्दा नहीं बनाया!!!

— लाखों संतो ने गाय रक्षा हेतु विक्राल आंदोलन खडे किये लेकिन मिडीया ने किसी आंदोलन को कवर नहीं किया!!!

— देश पर आने वाली हर आपदा (बांढ, सुखा, भुकंप) में संतो के करोडो हाथ लोगों कि सेवा मे जुट जाते हैं लेकिन फिर भी कोई पत्रकार कि पत्रकारीता इसे अपना हिस्सा नहीं बनाती!!!

अगर हिंदु धार्मीक गुरूऔ के कुकर्मों को उछाल कर समाज को सतर्क करना मिडीया कि जिम्मेदारी हैं तो उनके द्वारा कि गई तपस्वी कार्यों को हमारी बीकाऊ मिडीया उठाने में क्यों चुक जाता हैं????

तीसरा: क्या अन्य धर्मो के गुरू पुर्ण श्रद्धावान व इमानदारी कि मुरत हैं? क्या ठगी गुरू मात्र हिंदुधर्म मे ही हैं?

जाहीर हैं इसका भी जवाब हैं “नहीं”| एसे कई पादरी व मोलवी आज भी हिरासत में जिन्होने बेहद गंभीर अपराधो को अंजाम दिया लेकिन आज तक कभी हमने देखा कि किसी मोलवी या पादरी के कुकर्मो पर मिडीया ने दिन रात हो-हल्ला मचाया हो!!!! अगर हमारी मिडीया को हिंदु साधु संतो के कुकर्म नजर आते हैं तो अन्य धर्मो के धार्मीक गुरूऔ के कुकर्मों पर इनकी जुबान सील क्यों जाती हैं???? जब की उनके अनुपात में अन्य धार्मीक गरूऔ का हमारे समाज में योगदान भी कम हैं और अपराधीक गुरूऔ की संख्या भी बेहद ज्यादा हैं|

हिंदु समाज के लोगों को मिडीया द्वारा घौले जा रहे एसे धीमे जहर को पहचानना बेहद जरूरी हैं जिससे वे भारत में संत परमपरा को नष्ट करना चाहते हैं….यदी वे इसमे सफल हुवे तो भारतीय संस्कृती का कई कर्णधार नहीं बचेगा|

|| वंदेमातरम् ||

भारत खतरे में हैं #####

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# इतिहास में पहली बार आधी रात को खुला सुप्रीम कोर्ट #

आतंकवादी याकुब को बचाने के लिये आधी रात को खोला गया सुप्रीम कोर्ट!!!

– रात 11 बजे: प्रधान न्यायाधीश के घर प्रशांत भूषण, आनंद ग्रोवर समेत कई वकील पहुंचे।
– रात 12 बजे: सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार पहुंचे सीजेआई के बंगले पर।
– रात 1 बजे: खबर आई कि तीन जज सीजेआई के बंगले पर ही सुनेंगे अर्जी।
– रात 2 बजे: जस्टिस दीपक मिश्रा के घर सुनवाई की चर्चा।
– रात 2:10 बजे: तय हुआ सुप्रीम कोर्ट में ही 2:30 बजे होगी सुनवाई।
– रात 3:20 बजे: कोर्ट नंबर 4 पहुंचे दीपक मिश्रा, अमिताव रॉय व प्रफुल्ल पंत। सुनवाई शुरू।
– सुबह 4:57 बजे: आया अंतिम फैसला।

इस रातभर चली कवायद के पश्चात भी इन गद्दार वकिलो ने अंत में बयान यह दिया कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला गलत था!!!

जिस तरह देश में आतंकवादीयों के समर्थन में उतरने के लिये हर क्षेत्र से नामी हस्तीयों का जमावडा सामने आ रहा हैं….

जीस तरह एक आतंकवादी याकुब कि शवयात्रा में गद्दारो का हुजुम लगा…

जीस तरह न्याय के नाम सुप्रीम कोर्ट को आधी रात को चलने को भी मजबुर कर दीया गया…

यह सोचना होगा की अब हम अपने देश में कितने सुरक्षीत रह गये है!!! जहाँ हर कदम पर आतंकवादीयों को पनाह देने वाले और उनको बचाने के लिये हर लोकतांत्रीक ढांचे को ताक पर रखने वालों की भरमार हो गई और इनकी एकजुटता के आगे सारे सीस्टम खिलोने बन जाते हो…वहाँ हमे अपनी हैसीयत खोजनी होगी|

इस प्रश्न का जवाब नीकालना ही होगा की देश पर पहला हक देश की जनता का हैं या देश के साथ गद्दारी करने वालो का?

यह नहीं पता कि याकुब को बचानेवाली ब्रीगेड उसे बचाने के प्रती कितनी प्रतीबद्ध थी लेकीन वह यह जताने मे जरूर प्रतीबद्ध थी की याकुब को बेवजह फाँसी दी जा रही हैं….शायद इनका पुरा मकसद समुदाय विशेष के मन को आक्रोशित करना था| याकुब को बचाने मे ये भले ही असफल रहे लेकिन ये समुदाय विशेष में आक्रोश भडका ने में पुरी तरह सफल नजर आ रहे| और यदी एसा हुवा हैं तो यह एक खतरनाक संकेत हैं|

सतर्क रहे, सावधान रहे! आज जितने भी गद्दार सामने आये हैं इनके चेहरे तो हमे याद रखने ही होंगे…यह भी सोचना ही होगा की कल यदी ISIS जैसा कोई संघठन यदी देश पर हमला बोल दे तो ये देश में पल रहे गद्दार किसका साथ देंगे….

सोचना तो होगा,
हमारे कल को सुरक्षीत रखने के लिये|

कई लोग सोशियल मिडीया में यह फैला रहे हैं की याकुब का गुनाह मात्र इतना था की उसने पुलीस को समय पर नहीं दी व असली गुनेहगार उसका भाई था…..उनके लिये एक नजर, उसके गुनाह जिनके आधार पर उसे फाँसी मीली….

-12 मार्च 1993 को हुए मुंबई ब्लास्ट का दोषी था याकूब मेमन।
-याकूब पर आरोप है की 1993 ब्लास्ट से पहले दुबई में मुंबई साजिश की मीटिंग हुई जिसमें दाऊद इब्राहिम, टाईगर मेमन के साथ याकूब भी शामिल था।
-याकूब अपनी फर्म के जरिये टाइगर मेमन के गैर-कानूनी फाइनेंस को संभालता था।
-याकूब ने पाकिस्तान जाकर हथियार चलाने की ट्रेनिंग लेने वाले लोगों के लिए टिकटों की भी व्यवस्था की थी।
-धमाके में इस्तेमाल होने वाले 12 बम याकूब के घर पर ही बने थे।
-याकूब के घर से ही ये बम मुंबई के अलग-अलग जगहों पर भेजे गए थे।
-मुंबई धमाकों के बाद परिवार के साथ देश से फरार हुआ था याकूब मेमन।
याकूब ने विस्फोट के लिए पैसे जुटाए थे।
-याकूब हथियार चलाने वालों के लिए टिकट की व्यवस्था करता था।
-याकूब ने एक दोषी को 85 ग्रेनेड लाकर दिए थे।

जो लोग बोलते हैं आतंकवाद का धर्म नहीं होता या सभी मुस्लीम बुरे नहीं होते वो इस याकुब की शवयात्रा में शामील लोगों की हमदर्दी को देखले…कम से कम इन सभी की सोच तो एक हैं की २७० लोगों का कातील इनका मसीहा था!!!

कम से कम अब तो जागे …
अपने धर्म को पहचानो…
सोते हुवो को जगाऔ,
नहीं तो हमारी पुश्तो को इनकी
दंरींदगी का सामना करना ही होगा

जागो हिंदु जागो