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विचार मंथन

सोशियल मिडिया में विचारों का घमासान छिडा हुवा हैं। मुख्य रुप से जो विषय जो उभरकर आते वह धर्म व राजनीति से जुड़े हैं। कुछ बुद्धिजिवी ऐसे हैं जिन्हें इन विषय पर अग्यानता प्राप्त हैं क्यूँ कि ये विषय उनके स्वार्थ भरी रुचि से मेल नहीं खाते। एक वास्तविकता यह भी हैं की ऐसे विषय ऐसे बुद्धिजीवियों की आराम दायक जिंदगी में व्यधान उत्तपन्न करते हैं। अतः एसे बुद्धिजिवी सुझाव बाटते मिलते हैं कि ऐसे विषय समाज में कट्टरता फैला रहे व सद्भाव बिगाड़ रहे इसलिए ऐसे विषयों से आम जन दूर रहे। इन बुद्धिजीवियों को ऐसा लगता हैं की इन विषयों से हट कर ये अपनी आराम दायक जिंदगी को बचा लेंगे।

धर्म व राजनीती ऐसे विषय हैं ही नहीं जिनसे आँखे चुरा कर हम अपने निजी जीवन को सवार सके। और यदि कोई ऐसे भ्रम में अपनी जिंदगी सवार कर खुश हो भी रहा हैं तो वह स्वयं को छल रहा हैं क्यूंकि वह स्वयं का जीवन तो गवां देगा किन्तु उसकी गलतियों की सजा उसकी सन्तानो को भुगतनी पड़ सकती हैं। ऐसा इसलिए की जब धर्म की रक्षा ही न हो सकेगी तो अधर्मियों का राज होगा और अधर्मी उसकी सन्तानो को दास बनाएगी, जब राजनीती गलत दिशा में होगी तो राष्ट्र खतरे में पड़ सकता हैं और जब राष्ट्र ही सुरक्षित नहीं तो उसकी संताने कैसे सुरक्षित हो सकेगी।

मेरी नजर में आज जो सोशियल मिडिया पर इन विषयों पर घमासान छिड़ा हुवा हैं वह और कुछ नहीं बल्कि एक मंथन हैं, विचारों का मंथन, ठीक उसी तरह जैसे सागर मंथन हुवा था। उस सागर मंथन में एक तरफ देवता थे व दूसरी और राक्षस थे। जिससे विष भी प्राप्त हुवा और अमृत भी। आज का सोशियल मिडिया पर छिड़ा “विचार मंथन” भी ठीक वैसे ही हैं जिसमे एक तरफ़ मक्कार हैं जो भ्रम, झूठ व नफ़रत फैलाने वाले, दूसरी और रक्षक हैं सत्य को उभारने वाले।जैसे-जैसे इन विचारों के मंथन से मक्कारों के चेहरे उजागर होंगे वैसे ही राष्ट्र व धर्म की रक्षा में तत्पर चेहरे भी उजागर होंगे जिन्हे आम जन समयानुसार पहचानते जाएंगे। यह “विचार मंथन” केवल कल्पना नहीं आज की एक यथार्थ घटना हैं जिसके परिणाम भी समक्ष आने लगे हैं। आम जन मक्कारों को पहचानने लगे हैं व रक्षको का साथ नजर आ रहे हैं। ऐसे परिणामो से मक्कार पूरी तरह बौखलाए नजर आ रहे हैं। सागर मंथन की ही भाँती “विचार मंथन” से भी पहले विष बाहर आ रहा हैं, कट्टरता-कटुता, किन्तु तत्पश्चात अमृत भी निकलेगा जिसमे सारे रक्षक व उनके समर्थक एक और होंगे व मक्कार दूसरी और होंगे जो चाह कर भी अपना चेहरा छुपा न सकेंगे। इस “विचार मंथन” से भविष्य में निकलने वाला अमृत भी हमारे लिये होगा ओर आज निकल रहा विष भी स्वयं हमे ही ग्रहण करना हैं। इस “विचार मंथन” में हमारा योगदान इतना ही हैं की असत्य के विरोध में हमें सत्य रखना हैं, अधर्म के विरोध में धर्म रखना हैं व कट्टरता के विरोध में सहिष्णुता रखनी हैं।कल के अमृत के लिए आज कष्ट उठाना ही होगा लेकिन यह “विचार मंथन” रुकना नहीं चाहिए।

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Cobrapost की दलाली!

#Presstitute #Cobrapost

मिडिया जगत के दलाल कोब्रापोस्ट ने एक स्ट्रिंग का वीडियो जारी किया हैं जिसमे कोब्रपोस्ट का पत्रकार एक क्षेत्रिय अखबार के औफिस मे जाकर यह जाहिर करने की कोशिश करता हैं की वह हिन्दुवादी “ताकत” के जरिये आया हैं व उनके (क्षेत्रिय) अखबार मे अगले तीन माह तक (चुनावी मौसम मे) केवल हिन्दुत्व का प्रचार करे जिससे लोग केवल हिंदुत्व के मुद्दे पर ध्यान दे व बाकी मुद्दे भुल जाये जिससे एक राजनैतिक दल को लाभ हो, इसके लिये उस क्षेत्रिय अखबार को खरिदने की कोशिश करता हैं और जिसमे वो कामयाब भी हो जाता हैं।

इस स्ट्रिंग से दलाल कोब्रापोस्ट यह साबित करना चाहता हैं की चुनावी मौसम मैं अखबार व पत्रकार कैसे बीक जाते हैं (जो खुद बीका हुवा हैं !)

सवाल यह हैं की दलाली पत्रकारिता सिद्ध करने के लिये इन दुष्टो ने हिंदुत्व के मुद्दे को हथियार क्यों बनाया जबकि मुद्दे तो कोई भी हो सकते थे!

मतलब की दलाली पत्रकारिता पर निशाना साधते हुवे लोगो को यह भी समझा सके की हिंदुत्व का मुद्दा भी बिकाऊ हैं व हिंदुत्व से जुड़ दल भी बइमान हैं।

अभि तो जनता को ऐसे भ्रमित करने वाले खेल मात्र शुरू हुवे हैं … चुनाव तक और भी नाटक नजर आयेंगे ताकि हिंदुत्व से एक हुवे लोग को बॉटा जा सके।

सजग रहिये, सतर्क रहिये।

वन्देमातरम

हम_दो_हमारे_दो_तो_सब_के_दो

*सुदर्शन न्यूज* के श्री *सुरेश जी चव्हाण*…
#हम_दो_हमारे_दो_तो_सब_के_दो

…के नारे के साथ जेहादियौं की बढती जनसंख्या के विरोध मे राष्ट्रव्यापी अभियान खडा कर कानून बनाने की माँग ले कर माहारेली निकाल रहे हैं…

यह एक सत्य हैं की इतनी बडी रेलि निकालना, 70 दिनो तक स्वयं व पुरी सुदर्शन न्यूज की टीम को इस रेलि मे लगादेना किसी भी रुप मे उनके लिये हर तरह से एक बडा खर्चिला कदम हैं …

यह भी एक सत्य हैं की आम नौकरी चाकरी वाला होने के नाते मुझ जैसे करोडो राष्ट्रवादी मन से तो उनके समर्थन मे होंगे किंतु 70 दिन तो छोडो, 70 घंटे भी उनके ईस महाअभियान उनके साथ खडे रह सके ऐसी स्तिथी मे ना होंगे

लेकिन , हम जैसे राष्ट्रवादी यदी तन से साथ ना हो सके तो क्या, हम धन से तो सुरेश जी की राष्ट्र हित मे की गयी तपस्या मे अपना योगदान कर ही सकते हैं

मेने तो अपनी स्तीथी अनुसार योगदान उनके खाते मे जमा कर दिया हैं साथ ही अन्य राष्ट्रवादियों से निवेदन कर रहा हुँ की हो सके तो आप भी अपनी कमाइ से जो भी हो सके आर्थिक अनुदान सुदर्शन न्यूज की website पर निर्देशीत खाते मे अवश्य जमा करवा दे

हम अपने आर्थिक सहयोग से राष्ट्रवादी ताकतो के हाथ मजबूत कर सकते हैं ऐसा इसलिये भी जरूरी हो जाता हैं क्युंकी देशद्रोहियों को देश तोडने के लिये विदेशो से भारीभरकम अनुदान प्राप्त हो जाता हैं लेकिन राष्ट्र की रक्षा मे उतरे रक्षको को विदेशो यदि कुछ मिलता हैं तो वो हैं बडि बडि धमकिया व उनको समाप्त करने वाली साजिशे

राष्ट्रवादियो के हाथ हमे ही मजबूत करने होंगे

जय हिंद

अपना आर्थिक योगदान देने के लिये यहाँ जाये 👇👇👇

http://www.sudarshannews.com/donation

आखिर कब तक भगेगा “हिंदू” !!!

आखिर कब तक भगेगा “हिंदू” !!!

देश के तुकडे होने पर पकिस्तान से जो हिंदू के भागने का सिलसिला जो शुरू हुवा…

उसके बाद आज तक…

कश्मीर से भागने वाला भी हिंदू हैं…
केरला से भागने वाला भी हिंदू हैं …
कैराना से भागने वाला भी हिंदू हैं …
आसाम से भागने वाला भी हिंदू हैं …
दिल्ली के विकासपूरी से भागने वाला भी हिंदू हैं …

और अब,

बंगाल के आसनसोल से भागने वाला भी हिंदू ही हैं !!!!!!!

आसनसोल मे रामनवमी पर्व पर निकली सोभा यात्रा पर पीछे से राम भक्तों पर नपुंसक कोम द्वारा फेके गये पत्थर, बम फ़ेकने व गोलियाँ चला देने वाली घटना के बाद वहाँ के हिंदू डर के माहोल बचने के लिए अपने ही इलाक़े को छोड़ कर भाग रहे हैं क्यूँ कि वहाँ कि मुल्ला परस्त मुख्यमंत्री ममता बेनर्जी अभी मोदी के ख़िलाफ़ भारत भ्रमण पर हैं, और ना भी होती तो भी मुस्लिम वोट बॅक के चलते कुछ करने कि उमीद ना थी

जो हिंदू संघठीत हो कर, मुल्लो से लड़ना तो दुर, हिंदुत्व हित में वोट तक नहीं कर सकता सच कहें तो वह कायर बन कर भागने के ही लायक हैं!!!

जात-पात कि मिटा कर आग
अबतो…… जाग हिंदू जाग

वैचारिक आतंकवाद

वैचारिक आतंकवाद
कहते हैं कि सुबह – सुबह जिन विचारों के साथ दिन कि शुरूवात होती हैं स्वयं कि क्षमता भी उससे प्रभावित होती हैं… और आज के आधुनिक युग में सुबह के समाचार पत्र हमारे प्रात:काल विचारों को दिशा देने में पूर्ण रूप से स्वामित्व प्राप्त कर लिया हैं। 
ऐसे में यदि हमारे द्वार पर पहुँचे समाचार पत्र दूषित पत्रकारिता से भरे हो तो… जरा सोचिए! हम अपनी क्षमता को किस तरह व्यर्थ में या तो क्षति पहुंचा रहे अथवा उसका दुरूपयोग करेंगे। 
उदाहरण :
# यदि समाचार पत्र चुन चून कर हिंदु व हिंदुत्व विरोधी समाचार को प्राथमिकता दे व अन्य धर्मों के पाप-कर्मों को प्रकाशित करने से बचे, तो जाहिर हैं कि वे पाठकों में “सेक्युलर” मानसिकता का विष घोल रहे। 
# यदि समाचार पत्र ६० सालों से लुट रही पिछली सरकारों व उनके नेताओं पर सवाल न उठा कर व पिछली सरकारों से कहीं अधिक नवनिर्माण में लगी सरकार को बार बार कटघरे में खड़ा करे, तो जाहिर हैं कि ऐसी पत्रकारिता राष्ट्र विरोधी तत्वों की दासीता अपना कर जनमत को भ्रमित करने में लगी हुई हैं। 
# यदि समाचार पत्र राष्ट्र कि बडी से बडी उपलब्धि को अपने वृत्त पत्र के एक छोटे से कोने में दबाकर भांड आंदोलनों, आतंकवादियों के महिमामंडन व जातीय हिंसा जैसी घटनाओं को प्रमुखता दे तो इनका लक्ष्य नकारात्मकता को फैला कर पाठकों के सकारात्म विचारों का नाश करना होता हैं। 
सवेरे-सवेरे समाचार पत्रों पर नजर मारने वाले सर्व बुद्धिजीवियों से नम्र निवेदन हैं कि आप ऐसी हिन पत्रकारिता के हमलों से परिचित हो कर स्वयं की नष्ट होती क्षमता का रक्षण करे। बहिष्कार करे ऐसे समाचार के पत्र व स्रोतों का जो आपको जागृत करने के नाम पर आपको कहीं अधिक भ्रमित करने में लगे हुए हैं। ये ना केवल आपको नकारात्मकता के दल-दल में ढकेलने कि कोशिश करते हैं बल्कि राष्ट्र विरोधीयों को प्रबल भी करते हैं… और वह भी आपके ही अपने पैसे व अमूल्य समय को खर्च करवा कर।

इनका बहिष्कार अवश्य करे… 

=> नवभारत टाइम्स (पुर्ण टाईम्स ग्रूप) 

=> राजस्थान पत्रिका 

=> NDTV इंडिया 

कोरेगांव ब्राह्मण बनाम दलित मुद्दा पुरी तरह बेईमानी

महाराष्ट्र में पेशवा और अंग्रेजों के युद्ध में महार समाज द्वारा अंग्रेजों का साथ देने को ब्राह्मणवाद बनाम दलित के रूप में चित्रित किया जा रहा हैं। 
युद्ध में न अंग्रेज अकेले लड़ते थे न मराठे अकेले लड़ते थे। दोनों की सेना में समाज के हर वर्ग से लोग शामिल थे।

युद्ध कभी केवल लोगों में नहीं लड़ा जाता। युद्ध तो एक विचारधारा का दूसरी विचारधारा से होता हैं। अत्याचारी अंग्रेजों का युद्ध देशभक्त मराठों से हुआ था।

जैसा सुना जाता है कि इस युद्ध में हिन्दू मराठों की पराजय हुई। यह देश का दुर्भाग्य था। इससे अंग्रेज दक्कन तक के क्षेत्र के एकछत्र शासक हो गए। देश ईसाई अंग्रेजों का पराधीन हुआ। यह हर्ष का नहीं अपितु शोक का विषय था। हर्ष तब सकता था जब जिते हुवे को वहाँ की सत्ता मिलती सो तो अंग्रेजों के हाथ चली गई व परिणाम स्वरूप पूर्ण राष्ट्र गुलाम बना। जातिवाद हिन्दू समाज की आंतरिक समस्या है जिसमें विदेशी ताकतों ने पहले भी अपनी रोटियाँ सेकी और आज भी सेक्युलरवादी ताकते अपनी रोटीयाँ सेकने को तैयार हैं। 

क्या ईसाइयत को बढ़ावा देने वाले अंग्रेज हिन्दू समाज में प्रचलित इस जातिवाद को समाप्त कर सकें?… नहीं, उन्होंने तो इसे बढ़ावा ही दिया। 

क्या अंग्रेजों के राज में दलित महारों को उनके सभी अधिकार प्राप्त हुए?….नहीं, एक नई जमात दलित ईसाई के नाम से देश में पैदा हो गई, जो केवल नाम मात्र की ईसाई है। क्यूँ की अपने आपको सवर्ण कहने वाले ईसाई न उनसे रोटी बेटी  करते हैं,  न ही उन्हें चर्च में बड़े पदों पर कार्यरत करते हैं। अंग्रेज तो फुट डालों और राज करो की नीति का अनुसरण करने वाले थे।

जातिवाद के नाम पर आपस में लड़ाकर उन्होंने देश को बर्बाद ही किया। आज भी यही हो रहा है।  देश के शत्रु छदम नामों से देश को बर्बाद करने में लगे हुए है। यही लोग कोरेगाँव युद्ध को ब्राह्मणवाद बनाम दलित के रूप में चित्रित कर रहे हैं। जबकि यह युद्ध भारतीयों बनाम विदेशी था। वे लोग इस षड़यंत्र को समझ नहीं पा रहे हैं और अन्जाने में देश विरोधी ईसाई  ताकतों का साथ दे रहे हैं।  

 

जय हिंद 

महाभारत को जियो

किसी ने कहा – यह राजनीति हैं! 

किसी ने कहा – यह सांप्रदायिकता हैं!! 

किसी ने कहा – यह कट्टरवाद हैं!!! 
और… 

किसी ने कह दिया – यह तो बचपना हैं!!!! 😏
लेकिन हमने भी अपना मत स्पष्ट कर दिया… 

आप दृष्टिकोण कोई भी लगा लो, 

हर तरह से यह एकमात्र धर्मयुद्ध हैं!!! 👊🚩
☝🏿 वही धर्मयुद्ध जो अधिकार के लिए लडा गया था

☝🏿 वही धर्मयुद्ध जो मानवता के लिए लडा गया था

☝🏿 वही धर्मयुद्ध जो राष्ट्र के लिये लडा गया था 

…. और आज भी लड़ा जा रहा!🔥
_ना ही उस धर्मयुद्ध कोई निष्पक्ष रह सका…_

_ना ही इस धर्मयुद्ध में कोई निष्पक्ष रह सकता हैं!_ 🔥
जो धर्म के साथ नहीं हैं अथवा अधर्म पर मौन धारण किये हुए हैं…निःसंदेह…

 उन्हें अधर्म के पक्ष में मान कर चलो 🔥

ज्ञात रहे 👇
जब भी महाभारत से बचना चाहोगे

अधर्मी ही तुम पर राज करेंगे!! 

अत: प्रत्येक पल “चक्रधारी” का ध्यान धरो! 

प्रत्येक पल, केवल महाभारत को जीयो!! 
लक्ष्य ही जीवन हैं, जिवन का एक ही लक्ष्य!

धर्म की, विजय हो! पापियों का, सर्वनाश हो! 
🚩 जयतु जयतु हिंदुराष्ट्र 🚩

🚩 🔥🔥🔥🔥🔥🔥  🚩